Ladkiyaan Hain To
Author:
Rajendra Prasad PandeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 396
₹
495
Available
राजेन्द्र प्रसाद पांडेय की कविताओं की दुनिया काफी बड़ी और वैविध्यपूर्ण है। उनमें मनुष्य से लेकर पशु-पक्षियों और अन्य प्राणियों के प्रति भी संवेदना प्रकट हुई है। उनमें सरकारी योजनाओं की निरर्थकता और जनता की स्वार्थ-भावना का भी चित्रण हुआ है। ‘अधबना पुल, ईंटें और पुलघाट’ उनकी ऐसी ही कविता है, जिसमें व्यवस्था की नीतियों का पर्दाफाश हुआ है। ‘परबाबा की विदाई’ में मनुष्य की जिजीविषा, इच्छाओं और सद् विचारों का अच्छा चित्रण हुआ है। ‘सुख के दुख’, ‘कहाँ हो नन्दिता कँवर’, ‘बीज’, ‘दुख है पहचान का मरना’, ‘संस्कार युद्ध’, ‘लालन-पालन’, ‘नाच रही हो माँ’, ‘बेटी’, ‘रक्षाबन्धन पर दीदी को प्रणाम’, ‘पीपल को प्रणाम’ आदि उनकी बेहतरीन कविताएँ हैं। ये कविताएँ एक तरफ मानवीय मूल्यों और रिश्तों को सींचती हैं तो दूसरी तरफ हमारे समय की शिनाख्त करती हैं। साथ ही हमें जगाती और सचेत भी करती हैं।
ISBN: 9789360863050
Pages: 116
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Pallavi Sharma
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- Description: कविता सिर्फ बिंबों में नहीं रहती और न ही उस अर्थ में जो अंत में बस एक बात बोलता नज़र आता है। असली कविता तो वही है जो शब्दों के सार्थक समूह की यात्रा में अपने शीतल जल, तरल रंग या गर्म कोलतार की तरह बहती है। यह बहना दरअसल, उन शब्दों के बीच उसका सदा के लिए इस तरह रहना है कि पढ़ती हुई आँखों का स्पर्श उसे जगा दे। पल्लवी शर्मा संग्रह की पहली ही कविता में इस अंतर्धारा की उपस्थिति और इसकी अमोघ प्रभविष्णुता को न्योतती चेतावनी की तरह परोसती हैं, और जब आप आगे बढ़ते हैं तो वह संसार पीछे छूट जाता है जहाँ सामयिक यथार्थ और उसके अखबारी बोल बसते हैं। 'कोलतार के पैर' की कविताएँ आपको क्लोज़ अप के अनोखे चित्रकार जार्जिया ओ कीफ के द्वारा चित्रित कंकाल से सरककर निकलती जीवित जीभ जैसी अनुभूति से आपके आधे-अधूरे मन को मिलवाती हैं। इस संग्रह की कविताओं में यथार्थ तो है मगर उसे खर्चीले विवरणों की जगह उस स्पर्श के रूप में चित्रित किया गया है जो संवेदना को लगभग वह सब बता देता है जो विवरण बताते। लेकिन ऐसा भी नहीं कि पल्लवी में दृश्य नहीं। यहाँ दृश्य भी हैं मगर चित्रों की तरह कभी रूपांतरित तो कभी संघनित और कभी अमूर्त। कवि की चेतना का हाल यह कि 'जैसे एक चित्र खींचा हो किसी ने/और मैं उसका हिस्सा हूँ!' इस संग्रह की कविताएँ आपको रंगों और रेखाओं की दुनिया में ले जाती हैं। तरह-तरह की बातें करते तरह-तरह के रंग! चटख से लेकर मोनोक्रोम और कोलतार और कालिख तक। यह अकारण नहीं कि संग्रह में बिंदियों से चित्र बनाने की अनोखी शैली के लिए प्रसिद्ध यायोई कुसामा की मानसिक रुग्णता को उसी की बिंदियों से चित्रित किया गया है। —विनय कुमार
Chaand Mein Bhi Daag Hai
- Author Name:
Dilip Kumar Chauhan 'Baaghi'
- Book Type:

- Description: The title "Chaand Mein Bhi Daag Hai" is written by Dilip Kumar Chauhan "Baaghi" which is a Hindi Poetry Book
The Infinite Forest
- Author Name:
Rashmi Kaushik +1
- Book Type:

- Description: The Infinite Forest welcomes you to break the rules, for it is a rule-breaker itself. Crafted in reverse, the art was born first, and only then did the words emerge-words that sought to honour the images. What you hold is not just a book, but a collaboration spanning generations, bound by blood, memory, and imagination. The Infinite Forest is more than a collection of poems paired with illustrations. It is a world unto itself-one that invites the reader to wander, to pause, and to listen. Here, the rain does not simply fall; it remembers. The moon does not merely shine; it conspires. In the midst of these mythic landscapes stand women who hold both ruin and creation in their breath. A woman walks through a forest that bends for her, bathes in a river that remembers her birth-cry, and carries within her the fire that once scorched the Gods. She is not here to be understood. She is here to be remembered. Through fragments of myth, poetry, and shadowed memory, the book traces the path of a woman who is both wound and blade, both destruction and divinity- an eternal return to power she never truly lost. - Rashmi Kaushik & Dr Surabhee Kaushik Saha
Kamal : Sampurna Rachanayen
- Author Name:
Devraj
- Book Type:

- Description: लमाबम कमल आधुनिक काल के मणिपुरी साहित्य की नींव रखनेवाले रचनाकारों में से एक थे। जिसे हम आज मणिपुरी भाषा की मौलिक और समृद्ध रचनाधर्मिता कहते हैं, उसके विकास का मूल स्रोत कमल की कविताएँ हैं। उपन्यास, कहानी और नाटक के क्षेत्र में भी उनकी देन ऐतिहासिक महत्त्व रखती है। अडाङ्ल और चाओबा के साथ मिलकर कमल ने मणिपुरी भाषा की अब तक की श्रेष्ठतम रचनाकार-त्रयी का निर्माण किया। कमल ने मणिपुरी भाषा और साहित्य की निर्धनता दूर करके उसे विश्व की समृद्ध भाषाओं और उनके साहित्य के मध्य गौरवपूर्ण स्थान दिलाने का स्वप्न देखा था। साथ ही वे मणिपुरी साहित्य को उत्कृष्ट मानव-मूल्यों और इतिहास व समाजगत सजगता से जोड़कर विकसित करना चाहते थे। उनका सम्पूर्ण साहित्य इसी अद्भुत स्वप्न को साकार करने की महती साधना का प्रतिफल है। मणिपुर में रहकर वहाँ के साहित्य तथा समाज का अध्ययन करनेवाले हिन्दी के कवि आलोचक डॉ. देवराज ने एल. कमल सिंह की सम्पूर्ण रचनाओं का अनुवाद और सम्पादन किया है। मणिपुर के साहित्य में आधुनिकता के विकास के साथ-साथ, सुदूरपूर्व के इस राज्य की संस्कृति और समाज को समझने की दृष्टि से यह संकलन अत्यन्त उपयोगी है
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