(1)
Author:
Shomdev, Shobhakant, NagarjunPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry₹
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राम-कथा में सीता सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पात्र हैं। कथा-विस्तार के केन्द्र में वही प्रमुख हैं। सीता नारी के उद्दाम स्वाभिमान की प्रतीक हैं। सीता का परित्याग जहाँ नारी-शोषण की व्यथा-कथा है, वहीं भूमि से उत्पन्न उस पुत्री का अपनी पवित्रता व शुचिता के प्रमाण हेतु दिव्य आवाहन—जिसके बाद धरती फटती है और वह भू-समाधि ले लेती है—उस शोषण से मुक्ति का चरम है। आज के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं वरिष्ठ कवि नागार्जुन ने प्राचीन कथा-प्रसंगों को आधुनिक सन्दर्भों में बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। इस प्रबन्धकाव्य में प्रकृति के उद्दीपन रूप के यत्र-तत्र बड़े ही विलक्षण चित्र मिलते हैं। भावों की सहजता तथा यथार्थ से निकटता तो आकर्षित करती ही है, साथ ही छन्द, लय और गति इसे मुग्धकारी पठनीयता प्रदान करते हैं। रचनाकार का विस्तृत परिचय, कथा-प्रसंग, चर्चित पात्र-प्रसंग तथा शब्दार्थों के दिए जाने से ‘भूमिजा’ एक अधिक उपयोगी काव्यकृति बन गई है।
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राम-कथा में सीता सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पात्र हैं। कथा-विस्तार के केन्द्र में वही प्रमुख हैं। सीता नारी के उद्दाम स्वाभिमान की प्रतीक हैं। सीता का परित्याग जहाँ नारी-शोषण की व्यथा-कथा है, वहीं भूमि से उत्पन्न उस पुत्री का अपनी पवित्रता व शुचिता के प्रमाण हेतु दिव्य आवाहन—जिसके बाद धरती फटती है और वह भू-समाधि ले लेती है—उस शोषण से मुक्ति का चरम है।
आज के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं वरिष्ठ कवि नागार्जुन ने प्राचीन कथा-प्रसंगों को आधुनिक सन्दर्भों में बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है।
इस प्रबन्धकाव्य में प्रकृति के उद्दीपन रूप के यत्र-तत्र बड़े ही विलक्षण चित्र मिलते हैं। भावों की सहजता तथा यथार्थ से निकटता तो आकर्षित करती ही है, साथ ही छन्द, लय और गति इसे मुग्धकारी पठनीयता प्रदान करते हैं।
रचनाकार का विस्तृत परिचय, कथा-प्रसंग, चर्चित पात्र-प्रसंग तथा शब्दार्थों के दिए जाने से ‘भूमिजा’ एक अधिक उपयोगी काव्यकृति बन गई है।
Book Details
-
ISBN9788171196791
-
Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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अमृता प्रीतम की कविताओं में रमना, हृदय में कसकती व्यथा का घाव लेकर, प्रेम और सौन्दर्य की धूपछाँह-वीथी में विचरने के समान है, जहाँ वियोग तथा अतृप्ति के तीखे नुकीले काँटे भावना के सुकुमार चरणों को क्षत-विक्षत करते रहते हैं । ऐसी गहरी, दर्द में डूबी, प्राणिक संवेदनाओं के गीत कम ही देखने को मिलते हैं। अमृताजी धरती के जीवन के गीत भी गाती हैं । वह युग-संघर्ष के प्रति प्रबुद्ध होने के कारण प्रगतिशील भावधारा से प्रेरित हैं, किन्तु प्रेम के प्रति एकाग्र समर्पण ही उनकी जीवन-साधना तथा आत्म-विकास का एकान्त पथ है। अमृताजी की कविताओं के अनुवाद से हिन्दी काव्य भाव-धनी, स्वप्न-संस्कृत तथा शिल्प-समृद्ध बनेगा। इन कविताओं से यह सहज ही प्रमाणित हो जाता है कि अमृताजी का स्थान पंजाबी ही नहीं, समस्त भारतीय भाषाओं में भी प्रथम श्रेणी के योग्य है । इस संग्रह से हिन्दी के नये कवियों को विशेष प्रेरणा मिलेगी। जिस गहरी भाव-संवेदना, सामाजिक यथार्थ तथा युग मानव की व्यथा का सच्चा चित्रण अमृताजी ने अपनी नारी-हृदय की जादू-तूली से इन कविताओं में किया है, वह उनकी कृति को एक अत्यन्त उच्च तथा व्यापक स्तर पर उठा देती है। —सुमित्रानन्दन पंत
Tokri Mein Digant
- Author Name:
Anamika
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अनामिका के नए संग्रह ‘टोकरी में दिगन्त—थेरी गाथा : 2014’ को पूरा पढ़ जाने के बाद मेरे मन पर जो पहला प्रभाव पड़ा, वो यह कि यह पूरी काव्य-कृति एक लम्बी कविता है, जिसमें अनेक छोटे-छोटे दृश्य, प्रसंग और थेरियों के रूपक में लिपटी हुई हमारे समय की सामान्य स्त्रियाँ आती हैं। संग्रह के नाम में 2014 का जो तिथि-संकेत दिया गया है, मुझे लगता है कि पूरे संग्रह का बलाघात थेरी गाथा के बजाय इस समय-सन्दर्भ पर ही है। संग्रह के शुरू में एक छोटी-सी भूमिका है, जिसे कविताओं के साथ जोड़कर देखना चाहिए। बुद्ध अनेक कविताओं के केन्द्र में हैं, जो बार-बार प्रश्नांकित भी होते हैं और बेशक एक रोशनी के रूप में स्वीकार्य भी। इस नए संकलन में अनेक उद्धरणीय काव्यांश या पंक्तियाँ मिल सकती हैं, जो पाठक के मन में टिकी रह जाती हैं। बिना किसी तार्किक संयोजन के यह पूरा संग्रह एक ऐसे काव्य-फलक की तरह है, जिसके अन्त को खुला छोड़ दिया गया है। स्वयं इसकी रचयिता के अनुसार “वर्तमान और अतीत, इतिहास और किंवदन्तियाँ, कल्पना और यथार्थ यहाँ साथ-साथ घुमरी परैया-सा नाचते दीख सकते हैं।” आज के स्त्री-लेखन की सुपरिचित धारा से अलग यह एक नई कल्पनात्मक सृष्टि है, जो अपनी पंक्तियों को पाठक पर बलात् थोपने के बजाय उससे बोलती-बतियाती है, और ऐसा करते हुए वह चुपके से अपना आशय भी उसकी स्मृति में दर्ज करा देती है। शायद यह एक नई काव्य-विधा है, जिसकी ओर काव्य-प्रेमियों का ध्यान जाएगा। समकालीन कविता के एक पाठक के रूप में मुझे लगा कि यह काव्य-कृति एक नई काव्य-भाषा की प्रस्तावना है, जो व्यंजना के कई बन्द पड़े दरवाज़ों को खोलती है और यह सब कुछ घटित होता है एक स्थानीय केन्द्र के चारों ओर। कविता की जानी-पहचानी दुनिया में यह सबाल्टर्न भावबोध का हस्तक्षेप है, जो अलक्षित नहीं जाएगा। —केदारनाथ सिंह
Sarkti Parchhaiyan
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
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Book
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