Baagadbilla
Author:
Omkar GhagPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Plays0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
Awating description for this book
ISBN: 9788196672652
Pages: 96
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
आज रंगमंच के उपयुक्त सशक्त नाटकों की शायद सबसे अधिक आवश्यकता है। क्योंकि टी.वी. और फ़िल्मों द्वारा फैलाए गए प्रदूषण को सशक्त नाटक ही सही चुनौती दे सकते हैं, परन्तु इस दृष्टि से वर्तमान परिदृश्य बहुत आशाजनक दिखाई नहीं पड़ता। विभिन्न भारतीय भाषाओं में अच्छे नाटकों का लगातार अभाव होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में यह बहुत आवश्यक है कि भारतीय भाषाओं में रंगमंच के योग्य उत्कृष्ट नाटकों का परस्पर आदान-प्रदान हो। इसी उद्देश्य से इस पुस्तक के रूप में एक प्रयत्न भारतीय भाषा परिषद् द्वारा किया गया।
दो खंडों में प्रकाशित ‘श्रेष्ठ भारतीय एकांकी : खंड एक’ में ओड़िया, बांग्ला, कन्नड़, मराठी और हिन्दी के श्रेष्ठ एकांकी संकलित हैं। इसमें रंगमंच के उपयुक्त एकांकी ही प्रायः चुने गए
हैं। विभिन्न विभागों का सम्पादन सम्बन्धित भाषाओं के अधिकारी विद्वानों द्वारा किया गया है। उन्होंने भूमिकाओं में अपनी-अपनी भाषा के नाटक और एकांकी साहित्य के विकास और विशिष्टताओं का गहरा विवेचन किया है। इनसे पाठकों को सम्बन्धित भाषाओं के अवदान की पर्याप्त जानकारी मिल सकेगी। एकांकियों के हिन्दी अनुवाद अत्यन्त प्रामाणिक अनुवादकों द्वारा करवाए गए हैं, ताकि नाटक के कथ्य और नाट्य-भाषा दोनों की रक्षा की जा सके।
‘एकांकी’ विधा एक तरह से वर्तमान युग का अवदान और आन्दोलन है। अपने समय की ज्वलन्त समस्याएँ और चिन्ताएँ इनके मूल में होती हैं। ऐसी कृतियाँ एक बड़े पाठक और दर्शक समाज के सम्मुख प्रस्तुत करना आज हमारे समय की माँग है।
आशा है, यह संकलन इस अर्थ में भी उपादेय होगा।
Chaar Natak
- Author Name:
Shyam Manohar
- Book Type:

- Description: “मराठी की रंगपरम्परा बहुत समृद्ध और सजीव रही है और उसका प्रभाव हिन्दी पर भी पड़ा है। मराठी और हिन्दी के बीच रंगमंच और नाटक के क्षेत्र में लगातार आदान-प्रदान होता रहा है। मराठी के प्राय: सभी बड़े आधुनिक नाटककारों के नाटक हिन्दी में अनूदित हुए और अनेक निर्देशकों द्वारा कई शहरों में खेले जाते रहे हैं। श्याम मनोहर के ‘चार नाटक’ मराठी-हिन्दी के विद्वान् निशिकान्त ठकार द्वारा अनूदित होकर यहाँ पहली बार हिन्दी में प्रकाशित हो रहे हैं। रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत अन्य भारतीय भाषाओं से अच्छी और प्रासंगिक सामग्री हिन्दी में लाने के हमारे प्रयत्न का यह हिस्सा है।”
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