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दो पात्रों का यह नाटक एक लेखक के रहस्यमय जीवन और लेखन से एक-एक कर कई पर्दे उठाता है। गड़गड़ सूफ़ी एक जासूस है, जो उसके चर्चित-पुरस्कृत उपन्यासों की सच्चाई की तस्दीक अख़बारी कतरनों से करता चलता है और एक दिन आकर लेखक को बताता है कि मुझे मालूम है कि आपने जो भी हत्या-कथाएँ लिखी हैं, वे आपने स्वयं की हैं; और लेखक उसके इस आरोप को स्वीकार कर लेता है और कहता है कि हाँ, वे सब हत्याएँ मैंने ही की हैं। इससे पहले कि जासूस लेखक से कुछ हासिल करने के लिए अपनी शर्तें मनवाता लेखक पिस्तौल के इशारे पर उसे बाल्कनी से गिरकर मरने पर बाध्य कर देता है। तुर्की-ब-तुर्की संवादों के माध्यम से आगे बढ़ता यह छोटा-सा नाटक दर्शक के सामने सच और झूठ का एक तिलस्म रचता है जिसमें हमें यथार्थ का एक नया चेहरा दिखाई देता है।

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दो पात्रों का यह नाटक एक लेखक के रहस्यमय जीवन और लेखन से एक-एक कर कई पर्दे उठाता है। गड़गड़ सूफ़ी एक जासूस है, जो उसके चर्चित-पुरस्कृत उपन्यासों की सच्चाई की तस्दीक अख़बारी कतरनों से करता चलता है और एक दिन आकर लेखक को बताता है कि मुझे मालूम है कि आपने जो भी हत्या-कथाएँ लिखी हैं, वे आपने स्वयं की हैं; और लेखक उसके इस आरोप को स्वीकार कर लेता है और कहता है कि हाँ, वे सब हत्याएँ मैंने ही की हैं। इससे पहले कि जासूस लेखक से कुछ हासिल करने के लिए अपनी शर्तें मनवाता लेखक पिस्तौल के इशारे पर उसे बाल्कनी से गिरकर मरने पर बाध्य कर देता है।

तुर्की-ब-तुर्की संवादों के माध्यम से आगे बढ़ता यह छोटा-सा नाटक दर्शक के सामने सच और झूठ का एक तिलस्म रचता है जिसमें हमें यथार्थ का एक नया चेहरा दिखाई देता है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2020
Weight
80 grams
ISBN-13
9789389577495
Pages
80
Reading time
~3 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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