Natya Manjari
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महाराज, आपने जिस तरह दर्जनों शत्रुओं पर विजय प्राप्त की, वह इस देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। आपने पिछले कुछ महीनों में पूरे दक्षिणी हिन्दुस्तान पर अधिकार कर लिया और मराठा राज्य को हर तरह समृद्ध किया। हैदराबाद में आपका प्रवेश उस नगर के लोग हमेशा याद रखेंगे। आपके स्वागत के लिए नगर को पूरी तरह सजाया गया था और सभी सड़कों और गलियों में कुमकुम की एक पर्त बिछायी गई थी। नगर में स्थान-स्थान पर विजय द्वार बनाए गए थे और सड़क की दोनों तरफ लाखों नगरवासी रंग-बिरंगे परिधानों में खड़े थे। मकानों की छतों पर और बालकनियों में महिलाओं ने आपके और सैनिकों के स्वागत के लिए भीड़ लगा रखी थी। मराठी सेना ने इस अवसर के लिए अपने वस्त्रों की सादगी का त्याग कर दिया था और नए, भड़कीले वस्त्र पहन लिये थे। सेनाधिकारियों और चुने हुए सिपाहियों ने अपने शिरस्त्राण में मोतियों की माला लगा रखी थी, और उनकी बाँहों में सोने के बाजूबंद चमक रहे थे। उनकी वर्दी नई थी जिस पर सोने के तार का काम किया हुआ था और उनके हथियार नए और चमचमाते हुए थे ।
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महाराज, आपने जिस तरह दर्जनों शत्रुओं पर विजय प्राप्त की, वह इस देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। आपने पिछले कुछ महीनों में पूरे दक्षिणी हिन्दुस्तान पर अधिकार कर लिया और मराठा राज्य को हर तरह समृद्ध किया। हैदराबाद में आपका प्रवेश उस नगर के लोग हमेशा याद रखेंगे। आपके स्वागत के लिए नगर को पूरी तरह सजाया गया था और सभी सड़कों और गलियों में कुमकुम की एक पर्त बिछायी गई थी। नगर में स्थान-स्थान पर विजय द्वार बनाए गए थे और सड़क की दोनों तरफ लाखों नगरवासी रंग-बिरंगे परिधानों में खड़े थे। मकानों की छतों पर और बालकनियों में महिलाओं ने आपके और सैनिकों के स्वागत के लिए भीड़ लगा रखी थी। मराठी सेना ने इस अवसर के लिए अपने वस्त्रों की सादगी का त्याग कर दिया था और नए, भड़कीले वस्त्र पहन लिये थे। सेनाधिकारियों और चुने हुए सिपाहियों ने अपने शिरस्त्राण में मोतियों की माला लगा रखी थी, और उनकी बाँहों में सोने के बाजूबंद चमक रहे थे। उनकी वर्दी नई थी जिस पर सोने के तार का काम किया हुआ था और उनके हथियार नए और चमचमाते हुए थे ।
Book Details
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ISBN9788197802270
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Pages441
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Avg Reading Time15 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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"तुम कहते हो, जीवन सुन्दर है...ठीक है, लेकिन उसके सुन्दर लगने से ही क्या होता है। हम तीनों बहनों के लिए अभी तक के जीवन में क्या सुन्दर है? जैसे पौधे को दीमक खा जाती है, उसी तरह हम तीनों जीवन के हाथों में घुटती रही हैं...अरे लो, मैं तो रोने भी लगी—मुझे रोना नहीं चाहिए..." "मुझे लगता है कि मनुष्य के पास एक आस्था होनी चाहिए, या और कुछ नहीं तो उसे कोई विश्वास और आस्था खोज लेनी चाहिए, वर्ना उसकी जिंदगी सूनी और खोखली हो जाएगी।...आदमी को मालूम तो होना चाहिए कि उसकी जिंदगी का अर्थ क्या है..." "प्यारी बहनों, हमारे जीवन का अन्त यहीं नहीं हो जाएगा। हम लोग जीवित रहेंगी, यह संगीत कैसा आनन्ददायक, कैसा सुखद है कि मन होता है, थोड़ी देर और चलता रहे, ताकि हम जान लें कि हम किसलिए ज़िन्दा हैं, हमें पता चल जाए कि हम दु:ख क्यों भोग रही हैं।" "काश, जो कुछ हमने जिया है, वह सिर्फ़ ज़िन्दगी का रफ़-ड्राफ़्ट होता और इसे फ़ेयर करने का एक अवसर हमें और मिलता।" चेख़व की रचनाओं की आत्मीयता, करुणा और ख़ास क़िस्म की निराश उदासी (लगभग आत्मदया जैसी) मुझे बहुत छूती है। मैं उसके प्रभाव से लगभग मोहाच्छन्न था। उसी श्रद्धा से मैंने इन नाटकों को हाथ लगाया था। रूसी भाषा नहीं जनता था, मगर अधिक से अधिक ईमानदारी से उसके नाटकों की मौलिक शक्ति तक पहुँचाना चाहता था। इसलिए तीन अंग्रेज़ी अनुवादों को सामने रखकर एक-एक वाक्य पढ़ता और मूल को पकड़ने कि कोशिश करता। आधार बनाया मॉस्को के अनुवाद को। बाद में सुना, अनुवादों को पाठकों ने पसन्द किया, अनेक रंग-संस्थानों और रेडियो इत्यादि ने इन्हें अपनाया, पाठ्यक्रम में भी उन्हें लिया गया। —राजेन्द्र यादव
Gandhi Ki Mrityu
- Author Name:
Nemeth Laszlo
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“महात्मा गाँधी अपने समय में ही नहीं हमारे समय में भी एक प्रतिरोधक उपस्थिति हैं : उनका बीसवीं शताब्दी के विचार, राजनीति और सामाजिक कर्म पर गहरा प्रभाव पड़ा। इन दिनों उनका बहुत बारीक़ पर अचूक अवमूल्यन करने का एक अभियान ही चला हुआ है। इस सन्दर्भ में उनकी मृत्यु पर लिखा गया यह हंगेरियन नाटक, जो सीधे हिन्दी में अनूदित किए जाने का एक बिरला उदाहरण भी है, प्रस्तुत करते हुए हमें उम्मीद है कि गाँधी-विचार और कर्म को ताज़ा नज़र से देखने के प्रयत्न में सहायक होगा।"
—अशोक वाजपेयी
Evam Indrajit
- Author Name:
Badal Sarkar
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बादल सरकार के नाटक ‘एवम् इन्द्रजित्’ का भारतीय रंगकर्म में एक विशिष्ट स्थान है। मूलतः बांग्ला में लिखे इस नाटक का अनेक भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। विभिन्न भाषाओं के रंगकर्म में इस नाटक ने बार-बार मंचित होकर प्रशंसा और प्रसिद्धि पर्याप्त बटोरी है। इस नाटक की लोकप्रियता का कारण इसके कथा व शिल्प में निहित है। युवा वर्ग की महत्त्वाकांक्षा, परवर्ती कुंठा व निराशा का यथार्थपरक चित्रण इसमें किया गया है। नाटक अपनी निष्पत्ति में रेखांकित करता है कि मृत्यु का वरण समस्या का समाधान नहीं है। यह जानते हुए भी कि हमारे पास कोई सम्बल नहीं, हमें जीना है। नाटक का कथ्य अत्यन्त यथार्थवादी होते हुए भी शिल्प प्रतीकात्मक है। जीवन के दस-पन्द्रह वर्षों की अवधि को समेटे हुए यह नाटक जीने की ज़िद का तर्क है।
बादल सरकार की काव्यात्मक भाषा सम्प्रेषण और अर्थ दोनों को समृद्ध करती है। नए कलेवर में प्रस्तुत यह प्रसिद्ध नाटक पाठकों व रंगकर्मियों को ख़ूब भाएगा, ऐसा विश्वास किया जा सकता है ।
प्रसिद्ध रंगकर्मी डॉ. प्रतिभा अग्रवाल ने ‘एवम् इन्द्रजीत्’ का मनोयोगपूर्वक अनुवाद किया है। उनके अनुसार, ‘...मेरे द्वारा किए गए अनुवादों में यह सर्वश्रेष्ठ है।’
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