Yah Path Bandhu Tha
Author:
Shri Naresh MehtaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 399.2
₹
499
Available
भारतीय स्वाधीनता संग्राम-काल के एक साधारण व्यक्ति श्रीधर ठाकुर की असाधारण-कथा का यह बृहत् उपन्यास श्रीनरेश मेहता के विवादास्पद प्रथम उपन्यास ‘डूबते मस्तूल’ से बिलकुल भिन्न भावभूमि, संस्कार तथा शैली को प्रस्तुत करता है।</p>
<p>कथा-नायक श्रीधर बाबू एक व्यक्ति न रहकर प्रतीक बन गए हैं, उन सब अज्ञात छोटे-छोटे लोगों के जो उस काल के राष्ट्रीय संघर्ष, परम्परागत-निष्ठा तथा वैष्णव-मूल्यों के लिए चुपचाप होम हो गए। इतिहास ऐसे साधारण-जनों को नहीं देखता है, लेकिन उपन्यासकार किसी एक साधारण-जन को इतिहास का महत्त्व दे देता है। लेखक की परिपक्व जीवनी-दृष्टि, जीवनानुभव और कलात्मक-शक्ति ने एक साधारण-जन को सारी मानवीय संवेदना देकर अनुपम बना दिया है।</p>
<p>श्रीनरेश मेहता अपनी भाषा, संस्कार तथा शिल्प के लिए कवियों और गद्यकारों में सर्वथा विशिष्ट माने जाते हैं और यह महत्त्वपूर्ण उपन्यास हमारे इस कथन की पुष्टि करता है।
ISBN: 9788180316289
Pages: 323
Avg Reading Time: 11 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Nadi Laharen Aur Toofan
- Author Name:
Shanti Kumari Bajpai
- Book Type:

-
Description:
श्रीमती शान्ति कुमारी बाजपेयी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की वरिष्ठ अध्यापिका हैं। उनका चित्त संवेदनशील है। उनमें गुरु की गम्भीरता और भावुक की सहृदयता दोनों ही हैं। अपने समाज में और परिवार में आए दिन व्यक्तियों का जो संघर्ष हुआ करता है और अप्रत्याशित रूप से मानस-ग्रन्थियाँ बनती रहती हैं, उनसे अनेक प्रकार की पारिवारिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। श्रीमती बाजपेयी ने इन समस्याओं का अध्ययन गम्भीरता के साथ किया है।
‘नदी लहरें और तूफ़ान’ उनका दूसरा उपन्यास है। इसमें एक समृद्ध ब्राह्मण परिवार का बड़ा ही सजीव चित्रण है। दादी इस परिवार की केन्द्रीय शक्ति हैं। उन्हीं के इशारे पर सबको चलना पड़ता है। परन्तु उनमें स्नेह और ममता इतनी अधिक है कि उनके बच्चे स्नेह के बल पर अपने मन की मनवा लेते हैं। दादी का चरित्र बहुत ही जीवन्त होकर उभरा है। वे पुरानी रूढ़ियों और परम्पराओं से आक्रान्त हैं लेकिन ख़ानदान की मर्यादा की रक्षा के लिए सदा जागरूक हैं।
इस उपन्यास के नारी पात्र अधिक सशक्त हैं। लक्ष्मी का चरित्र तो अविस्मरणीय है। अपमान, उपेक्षा के बीच में स्थिर दीप-शिखा की तरह वह जलती रहती है और कठिन अवसरों पर परिवार को कठिन समस्याओं से उबारने का मार्ग भी दिखाती है। लक्ष्मी का पति उत्तम, नायक उतना नहीं है जितना नेय है। वह अपनी प्रथम पत्नी पार्वती से प्रेम करता है, उसे वचन भी देता है कि उसके जीवन में और कोई नारी पत्नी रूप में नहीं आ सकती। लेकिन दादी के दबाव से लक्ष्मी से फिर विवाह करता है। विवाह भी करता है लेकिन उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने में समर्थ भी नहीं होता। बाद में जब लक्ष्मी की ओर उन्मुख भी होता है तो अकारण उत्पन्न मानसिक ग्रन्थियों से बिदक जाता है। इस प्रकार वह शुरू से अन्त तक कमज़ोर चरित्र का पात्र बना रहता है।
लक्ष्मी और दादी इस उपन्यास के बहुत सशक्त पात्र हैं। कठिन-से-कठिन परिस्थितियों में धैर्य और विवेक रखनेवाली लक्ष्मी सचमुच गृह-लक्ष्मी है।
—डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी
Jungle Tantram
- Author Name:
Shrawan Kumar Goswami
- Book Type:

-
Description:
सिंह बनाम राजनेता। मोर बनाम प्रशासक। नाग बनाम पूँजीपति और चूहा बनाम आम आदमी—‘जंगल तंत्रम’ के ये ख़ास घटक हैं। इन्हीं चार जन्तुओं के माध्यम से लेखक ने आज की राजनीति के तहत चलनेवाली लोकतांत्रिक शासन-प्रणाली के जनविरोधी चरित्र को उजागर किया है।
सिंह, मोर और नाग किस तरह अपने-अपने निहित स्वार्थों के लिए पारस्परिक गठजोड़ किए हुए हैं, फ़ैंटेसीनुमा इस उपन्यास से यह बख़ूबी समझ में आ जाता है। चूहा इसे समझता भी है कि इसकी जोड़-तोड़ का असली शिकार तो मैं ही हूँ पर वह इससे उबर नहीं पाता। छोटे-छोटे प्रलोभनों, सुख-सुविधाओं की आस उसे बराबर कमज़ोर बनाए हुए है। संघर्ष के लिए वह खड़ा तो होता है, पर उसी की वर्गीय और परम्परागत दुर्बलताएँ उसकी पीठ का बोझ बनी हुई हैं।
वास्तव में सुपरिचित कथाकार श्रवण कुमार गोस्वामी का यह बहुचर्चित उपन्यास अपनी सार्थक प्रतीकात्मकता और धारदार भाषा-शैली के आद्योपान्त निर्वाह के कारण एक अनूठा प्रभाव छोड़ता है।
Hamka Diyo Pardes
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

-
Description:
घर की बेटी, और फिर उसकी भी बेटी—करेला और नीमचढ़ा की इस स्थिति से गुज़रती अकाल–प्रौढ़ लेकिन संवेदनशील बच्ची की आँखों से देखे संसार के इस चित्रण में हम सभी ख़ुद को कहीं न कहीं पा लेंगे।
ख़ास बतरसिया अन्दाज़ में कहे गए इन क़िस्सों में कहीं कड़वाहट या विद्वेष नहीं है। बेवजह की चाशनी और वर्क़ भी नहीं चढ़ाए गए हैं। चीज़ें जैसी हैं वैसी हाज़िर हैं।
इनकी शैली ऐसी ही है जैसे घर के काम निपटाकर आँगन की धूप में कमर सीधी करती माँ शैतान धूल–भरी बेटी को चपतियाती, धमोके देती, उसकी जूएँ बीनती है। मृणाल पाण्डे की क़लम की संधानी नज़र से कुछ नहीं बच पाता—न कोई प्रसंग, न सम्बन्धों के छद्म। घर के आँगन से क़स्बे के जीवन पर रनिंग कमेंटरी करती बच्ची के साथ–साथ उसके देखने का क्षेत्र भी बढ़ता रहता है और उसके साथ ही सम्बन्धों की परतें भी। अन्त तक मृत्यु की आहट भी सुनाई देती है।
बच्चों की दुनिया में ऐसा नहीं होना चाहिए लेकिन होता है—इसीलिए यह किताब...
Guzara Hua Zamana
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

-
Description:
‘गुज़रा हुआ ज़माना’ कृष्ण बलदेव वैद की रचनाशीलता का एक विशेष आयाम है। 1957 में प्रकाशित उनका पहला उपन्यास ‘उसका बचपन’ आज भी अपने शिल्प और शैली के आधार पर हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिना जाता है। उसमें श्री वैद ने एक अति संवेदनशील बच्चे के दृष्टिकोण से पश्चिमी पंजाब के एक निर्धन परिवार की कलह और पीड़ा का संयत और साफ़ चित्रण करके कथा साहित्य को एक नई गहराई दी थी, एक नया स्वर दिया था।
1981 में प्रकाशित ’गुज़रा हुआ ज़माना’ उसी उपन्यास की अगली कड़ी है। इसमें ‘उसका बचपन’ का केन्द्रीय पात्र बीरू अपने परिवार की सीमाओं से बाहर की दुनिया को भी देखता है, उससे उलझता है। इसमें अनेक घटनाओं, पात्रों और पीड़ाओं से एक प्यारे और पेचीदा कस्बे का सामूहिक चित्र तैयार किया गया है। इस चित्र को देखकर दहशत भी होती है और श्री वैद की निराली नज़र के दर्शन भी। इसमें देश-विभाजन सम्बन्धी साम्प्रदायिक पागलपन को उभारा भी गया है और लताड़ा भी। ‘गुज़रा हुआ ज़माना’ देश-विभाजन को लेकर लिखे गए उपन्यासों में एक अलग और विशिष्ट स्थान पिछले दो दशकों से बनाए हुए है। इसका यह संस्करण, आशा है, उस स्थान को और स्थिरता प्रदान करेगा।
Ratinath Ki Chachi
- Author Name:
Nagarjun
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी उपन्यास में लोकोन्मुखी रचनाशीलता की जिस परम्परा की शुरुआत प्रेमचन्द ने की थी, उसे पुष्ट करनेवालों में नागार्जुन अग्रणी हैं। ‘रतिनाथ की चाची’ उनका पहला हिन्दी उपन्यास है। सर्वप्रथम इसका प्रकाशन 1948 में हुआ था। इसके बाद उनके कुल बारह उपन्यास आए। सब में दलितों-वंचितों-शोषितों की कथा है। ‘रतिनाथ की चाची’ जैसे चरित्रों से आरम्भ हुई यात्रा में बिसेसरी, उगनी, इन्दिरा, चम्पा, गरीबदास, लक्ष्मणदास, बलचनमा, भोला जैसे चरित्र जुड़ते गए। उनके उपन्यास में नारी-चरित्रों को मिली प्रमुखता ‘रतिनाथ की चाची’ की ही कड़ी है। इसीलिए इस कृति का ऐतिहासिक महत्त्व है।
‘रतिनाथ की चाची’ विधवा है। देवर से प्रेम के चलते गर्भवती हुई तो मिथिला के पिछड़े सामन्ती समाज में हलचल मच गई। गर्भपात के बाद तिल-तिल कर वह मरी। यह उपन्यास हिन्दी का गौरव है।
Kissa Kotah
- Author Name:
Rajesh Joshi
- Book Type:

-
Description:
बेहद भागदौड़ की ज़िन्दगी में जीवन का पिछला हिस्सा धूसर होता जाता है, जबकि हम उसे याद रखना चाहते हैं—एक विकलता का चित्र। रंग, स्वाद, हरकतें और नाजुक सम्बन्ध की चाहत—बस, एक कशिश है। भागती ज़िन्दगी में कशिश! स्मृतियों के बारीक रग-रेशों के उभर आने की उम्मीद। तब यह किताब ‘क़िस्सा कोताह’ ऊष्मा के साथ नज़दीक रखे जाने के लिए बनी है। ज़रूरी और सटीक।
यह हमारे क़िस्सों का असमाप्त जीवन है। जैसे जीवन को चुपचाप सुनना है। एक के भीतर तीन-चार आदमियों को देखना है। यह राजेश जोशी के बचपन, कॉलेज या साहित्यिक व्यक्तित्व के बनने का दस्तावेज़ ही नहीं है, बल्कि बीहड़ इतिहास में चले गए लोगों, इमारतों और प्रसंगों को वापस ले आने की सृजनात्मकता है। मध्य प्रदेश के भोपाल और उससे पहले नरसिंहगढ़ रियासत की साँसें हैं। संयुक्त परिवार की दुर्लभ छबियाँ। नाना, फुआ, भाइयों और पिता के लोकाचार, जो कि हम सबके अपने से हैं। अपने ही हैं। दोस्तों की आत्मीयता, सरके दिमाग़ों का अध्ययन, राजनीति के अध्याय बन गए कुछ नाम, हमें अपने शहरों में खोजने का विरल अनुभव देते हैं। यह भटकन है। प्यास। बेगमकाल से इमरजेंसीसीकाल तक का, इतिहास में लुप्त हो गए लोगों के विविध व्यवहारों का अलबम है। फ़िल्म जैसा साउंड ट्रेक है। भुट्टे, आम, सीताफल और मलाई दोने का मीठापन है।
सुविख्यात कवि राजेश जोशी का यह अनूठा गद्य अपनी निज लय के साथ उस उपवन में प्रवेश करता है जिसे हम उपन्यास कहते हैं। यहाँ हम अपनी स्मृतियों, अपने लोगों, सड़कों, भवनों और सम्बन्धों को रोपने के लिए उर्वर भूमि पाते हैं।
—शशांक
Sawdhan ! Neeche Aag Hai
- Author Name:
Sanjeev
- Book Type:

-
Description:
चन्दनपुर के नीचे आग धधक रही है। लोगों में आग है, उनकी नसों के बिलकुल क़रीब...आग ही आग...लाल-सुर्ख़...तपती हुई...। यह आग हो सकता है कि कभी किसी बड़े परिवर्तन का सूत्रपात करे लेकिन अभी तो वह सिर्फ़ लोगों को जला रही है। तिल-तिल करके जल रहे हैं वे, अपनी छोटी-छोटी अपूर्ण इच्छाओं के साथ। ज़िन्दगी बीभत्सता की हद तक सड़ी हुई...नर्क...। दलालों, सूदख़ोरों और गुंडों के बीच पिसते, कोयले की गर्द फाँकते, चन्दनपुर के खदान मज़दूर यह अच्छी तरह जानते हैं कि उनके बजाय उनकी औरतों को ही पहले काम क्यों दिया जाता है।
“सच तो यह है कि जिनके हाथ में क़ानून और पावर है, सब चोर हैं। मेहनत, ईमानदारी की कोई क़दर नहीं। जो लूट रहा है, लूट रहा है, जो बिला रहा है, बिला रहा है...यह समूचा इलाक़ा ही बैठ जाएगा एक दिन जल-जलकर—मेवा के इस कथन में आक्रोश के साथ लाचारी है, खीज है।
संजीव की कहानियों में शुगरकोटेड यथार्थ नहीं होता और न ही मनोरंजन। समाज के जिस वर्ग की ज़िन्दगी के बारे में वे लिखते हैं, उसकी पीड़ाओं की तह तक उतर जाते हैं।
अब तक दर्जनों चर्चित कहानियों के लेखक संजीव के इस उपन्यास में विषय की गहराई, उसकी समझ और पकड़, शैली और शिल्प के अतिरिक्त जो प्रतिबद्धता है, हर पाठक को उसका क़ायल होना पड़ेगा।
Somtirth
- Author Name:
Raghuveer Chaudhary
- Book Type:

-
Description:
महमूद ग़ज़नवी ने सोमनाथ लूटा, उसके बाद भारत के हिन्दुओं में मुस्लिमों के प्रति अरुचि जागी, जो और दृढ़ होती गई। ऐसा होना नहीं चाहिए था। महमूद के दो मुख्य सेनापति हिन्दू थे और महमूद धर्म के अगुआ के रूप में नहीं आया था। उसकी भूख सत्ता और सम्पत्ति की थी। उसके धर्माध्यक्ष भी उससे सावधान रहते थे। अन्त में वह भाग निकला। उस समय भारत में बचे हुए उसके साथी शादी कर यहाँ के समाज में मिल गए—जिनसे बाढेल और शेखावत हुए। यहाँ तत्कालीन राजनीतिक–सामाजिक स्थितियों का वर्णन करते हुए उपन्यासकार ने लोगों के निजी सुख–दु:ख तथा दाँव–पेच को भी संजीदगी से उजागर किया है।
लेखक ने यहाँ दो महत्त्वपूर्ण कार्य किए हैं—(1) सत्ता और सम्पत्ति के लोभी राजपुरुषों द्वारा धार्मिक प्रजाजनों के बीच खड़ी की गई ग़लतफ़हमी दूर करना, और (2) सृष्टि में व्याप्त कल्याणकारी सौन्दर्य को शिवतत्त्व के रूप में निरूपित करना।
ऐतिहासिक तथ्यों के प्रति वफ़ादार रहते हुए लेखक ने कहीं–कहीं छूट भी ली है लेकिन इस तरह कि कथासृष्टि के वातावरण में उपकारक सिद्ध हो।
सरस भाषा एवं रोचक शैली में यह उपन्यास पढ़ते हुए महसूस ही नहीं होता कि हम गुजराती उपन्यास का रूपान्तर पढ़ रहे हैं।
Baton Mein Beete Din
- Author Name:
Namvar Singh
- Book Type:

- Description: ‘बातों में बीते दिन’ पुस्तक नामवर सिंह के साक्षात्कारों का संकलन है। इस किताब में शामिल साक्षात्कारों का विषय क्षेत्र अत्यन्त विस्तृत है। पेरेस्त्रोइका-ग्लासनोस्त और आधुनिकतावाद से लेकर कविता, कहानी, उपन्यास और निजी जीवन तक। साहित्य और देश-दुनिया की नामवर जी की समझ का एक स्पष्ट प्रतिबिम्ब यहाँ मिलता है। उनकी विश्व-दृष्टि का रूपायन इन साक्षात्कारों में हुआ है। पुस्तक तीन खंडों में बँटी हुई है। मध्यम आकार के और विषय केन्द्रित साक्षात्कार पहले खंड में हैं। दूसरे खंड में रचनाकारों और रचनाओं पर केन्द्रित बातचीत है। प्रेमचन्द, सुमित्रानन्दन पंत, त्रिलोचन और अमृतराय तथा सुमित्रानन्दन पंत की कृति ‘गुंजन’ और कृष्णा सोबती के उपन्यास ‘मित्रो मरजानी’—इन साक्षात्कारों के केन्द्र में है। तीसरे खंड में महावीर अग्रवाल द्वारा लिये गए नौ साक्षात्कार हैं जो उनके निजी जीवन से लेकर आलोचना और विविध विषयों से सम्बन्धित हैं। आलोचना लिखित हो या वाचिक—उसके पीछे बुनियादी प्रक्रिया है—पढ़ना, विवेचना, विचारना। तर्क और संवाद। नामवर जी के इन साक्षात्कारों में इसका व्यापक समावेश है। इनसे गुजरते हुए हम महसूस करते हैं कि वह किसी रचना को हमेशा नई और अपनी तरह से पढ़ने की कोशिश करते हैं और इस तरह ‘पढ़ते’ हुए वे लगातार नई तरह से ‘सोचते’ और ‘विचारते’ हुए सामने आते हैं। उनकी वाचिक आलोचना मूल्यांकन की ऊपरी सीढ़ी तक पहुँचती है। निकष बनाती है। प्रतिमानों पर बहस करती है। उसमें ‘लिखित’ की तरह की ‘कौंध’ मौजूद होती है। नहीं होता तो बस पूरापन।
Patrangpur Puran
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

-
Description:
रचनात्मक गद्य की गहराई और पत्रकारिता की सहज सम्प्रेषणीयता से समृद्ध मृणाल पाण्डे की कथाकृतियाँ हिन्दी जगत में अपने अलग तेवर के लिए जानी जाती हैं। उनकी रचनाओं में कथा का प्रवाह और शैली उनका कथ्य स्वयं बुनता है।
‘पटरंगपुर पुराण’ के केन्द्र में पटरंगपुर नाम का एक गाँव है जो बाद में एक क़स्बे में तब्दील हो जाता है। इसी गाँव के विकास-क्रम के साथ चलते हुए यह उपन्यास कुमाऊँ-गढ़वाल के पहाड़ी क्षेत्र के जीवन में पीढ़ी-दर-पीढ़ी आए बदलाव का अंकन करता है। कथा-रस का सफलतापूर्वक निर्वाह करते हुए इसमें काली कुमाऊँ के राजा से लेकर भारत की स्वतंत्रता-प्राप्ति तक के समय को लिया गया है।
परिनिष्ठित हिन्दी के साथ-साथ पहाड़ी शब्दों और कथन-शैलियों का उपयोग इस उपन्यास को विशेष रूप से आकर्षित बनाता है, इसे पढ़ते हुए हम न केवल सम्बन्धित क्षेत्र के लोक-प्रचलित इतिहास से अवगत होते हैं, बल्कि भाषा के माध्यम से वहाँ का जीवन भी अपनी तमाम सांस्कृतिक और सामाजिक भंगिमाओं के साथ हमारे सामने साकार हो उठता है। कहानियों-क़िस्सों की चलती-फिरती खान, विष्णुकुटी की आमा की बोली में उतरी यह कथा सचमुच एक पुराण जैसी ही है।
Panchwan Pahar
- Author Name:
Gurdayal Singh
- Book Type:

-
Description:
सुविख्यात पंजाबी कथाकार गुरदयाल सिंह का यह महत्त्वपूर्ण उपन्यास एक विधवा स्त्री के अनथक जीवन-संघर्ष को यथार्थवादी फलक पर उकेरता है। भारतीय समाज में सामन्ती संस्कारों का सबसे बड़ा शिकार नारी ही रही है। उसकी कोई स्वतंत्र सत्ता नहीं, कोई पहचान नहीं, और अगर वह विधवा या पुनर्विवाहिता है तो न उसके जीवन में मानवीय भावनाओं का कोई स्थान है और न प्राणिक संवेदनाओं का। समाज में वह सिर्फ़ पाषाण-प्रतिमा की तरह जीवित रह सकती है अथवा ‘देवी’ की तरह मात्र पूजनीय बने रहकर। यही कारण है कि जब तक हीरा देवी समाज के इस जड़ परम्परावादी चौखटे में जड़ी रही, तब तक तो वह 'देवी' थी, पर जैसे ही उसने उसे तोड़ा, वैसे ही ‘कुलटा’ और ‘कुलबोरनी’ हो गई। इसके बावजूद, हीरा एक अपराजेय नारी-चरित्र है, और लेखक ने उसे अपनी गहरी प्रगतिशील जीवन-दृष्टि और पैने इतिहास-बोध के सहारे रचा है। हीरा देवी के अतिरिक्त केसरी, मदन मोहन और सुरेन्द्र इस कथाकृति के दूसरे ऐसे जीवन्त चरित्र हैं, जो कि हीरा के संघर्ष में प्रेरक और सहायक की भूमिका निभाते हैं।
पंजाबी से इस उपन्यास का हिन्दी अनुवाद स्वयं लेखक ने किया है, इसलिए मूल कृति का समूचा साहित्यिक और सांस्कृतिक वैभव इसमें सहज सुरक्षित है।
Sampurna Upanyas : Mannu Bhandari
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

-
Description:
मूलतः कहानीकार और भारतीय स्त्री की जटिल मनोभूमि का उत्खनन करनेवाली अनेक कहानियों की रचयिता मन्नू जी ने उपन्यास कम ही लिखे हैं। जिन दो उपन्यासों, ‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’, के लिए उन्हें विशेष तौर पर जाना जाता है, वे हिन्दी उपन्यास के इतिहास में क्लासिक का दर्जा रखते हैं। उनकी उपन्यास-कला ने अपने उसी सहज रास्ते अपना आकार लिया जिससे उनकी रचनात्मकता के अन्य रूप कहानियों में उतरे थे। इसलिए ‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ को भी किसी शिल्पगत चमत्कार के लिए नहीं, अपनी विषयवस्तु के प्रामाणिक प्रस्तुतीकरण और अबाध पठनीयता के लिए जाना जाता है।
‘एक इंच मुस्कान’ भी जो रचनाक्रम के लिहाज़ से मन्नू जी का पहला उपन्यास है और अपनी संरचना में प्रयोगधर्मी भी, इस विशेषता से रहित नहीं है। सर्वविदित है कि यह उपन्यास मन्नू भंडारी और राजेन्द्र यादव की संयुक्त रचना है, जिसकी रचना-प्रक्रिया के विषय में मन्नू जी ने प्रस्तुत पुस्तक की भूमिका में विस्तार से जानकारी दी है। इन तीन उपन्यासों के साथ इस संकलन में मन्नू जी के अन्तिम उपन्यास ‘स्वामी’ को भी रखा गया है। मूलतः शरत की इसी नाम की कहानी पर आधारित यह उपन्यास अपने चरित्रों की संरचना और तेवर में मूल से इतना दूर आ जाता है कि वह लेखिका की अपनी ही स्वतंत्र रचना हो जाता है। मन्नू जी के चारों उपन्यासों की यह प्रस्तुति उनके पाठकों के साथ-साथ हिन्दी साहित्य के अध्येताओं और शोधार्थियों के लिए भी उपादेय होगी।
Elan Gali Zinda Hai
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

-
Description:
कहा गया है कि अगर पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है तो वह काश्मीर ही है और ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ उपन्यास इसी स्वर्ग के हाशिये पर दरिद्रता, अज्ञान और अभावों में पल रहे लोगों की संस्कृति और जीवन-संघर्षों को बहुत अन्तरंग विवरणों के साथ उजागर करता है। जहाँ आज धर्म, जाति और भाषा के नाम पर आदमी-आदमी के बीच दीवारें खड़ी की जा रही हों, वहाँ ऐलान गली के अनवर मियाँ, दयाराम मास्टर, संसारचन्द आदि लोग हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रतीक बनकर उभरते हैं। दूसरी ओर बेरोज़गारी के अन्धकार में पल रही युवा पीढ़ी है, जो रोज़गार की तलाश में बड़े शहरों की ओर दौड़ रही है। अवतारा ऐसी ही युवा पीढ़ी का प्रतिनिधि चरित्र है, जिसे आजीविका के लिए मुम्बई जैसे महानगर में जाना पड़ता है। महानगरीय सुविधाओं और चकाचौंध के बीच वह ख़ुद को अजनबी और अस्तित्वहीन महसूस करता है, उसके ज़ेहन में ऐलान गली प्यार के समुद्र की तरह पछाड़ें मारती है।
ऐलान गली के निवासियों के आपसी सम्बन्धों के विविध आयामों को इस उपन्यास में इतने विस्तार और सूक्ष्मता से चित्रित किया गया है कि एक समूचे समाज का रूप उभरकर सामने आता है। वस्तुतः अपने तमाम पिछड़ेपन के बावजूद ऐलान गली वहाँ के प्रवासियों और निवासियों के दिल-दिमाग़ में उसी तरह ज़िन्दा है, जिस तरह फूलों में सुगन्ध।
Kason Kahon Main Dardiya
- Author Name:
Rita Shukla
- Book Type:

- Description: "संगोष्ठी में भाग लेने के लिए आई विद्वन्मंडली उनके परंपराभंजक रूप को देखकर चमत्कृत थी । ताजा हवा के झोंकों- से स्कूर्त वे विचार उनकी अंतरात्मा की प्रतिध्वनि बनकर फूटे थे ।-दहेज समाज की रगों में प्रवाहित होनेवाला सबसे बड़ा प्रदूषण है... .विवाह के पारंपरिक स्वरूप में विकृतियाँ उत्पन्न करनेवाले. ऐसे अभिशप्त संदर्भों से मुक्ति पानी ही होगी... .दहेज देनेवाला भी समान पातक का भागी होता है.... वापसी की यात्रा तय करते समय उनके विचार विरु बनकर उनका मुँह चिढ़ाने लगे थे.... । कीचड़ में जन्म लेकर उससे निर्लिप्तता कि स्थिति पंकज की हो सकती है-जिंदगी पुरइन का पात नहीं... .जिसकी चिकनाहट जल की एक बूँद की भी अवधारणा नहीं कर सके । सामाजिकता में सराबोर जलकुंभी-सा परंपरा-ग्रथित मन अपनी निस्पृहता सिद्ध करना चाहे भी तो उसे लोकधर्म की परिभाषाओं से मुक्ति पानी होगी- संसार में रहकर संसार से ऊपर उठने की महती आकांक्षा यतिभाव को जन्म देती है-संन्यास लोकाचार से पलायन का दूसरा नाम हो सकता है; लेकिन लोकाचार पूर्वजों के द्वारा पोषित होती चली आ रही परंपराओं का एक ऐसा विवश स्वीकार है, जिसके बगैर जीवन की गति नहीं.... । विस्मय तो उन्हें तब हुआ था जब उनकी दूसरी पुत्री ने स्वयं उनके सामने प्रस्ताव रखा था-बाबूजी, इनके कार्यालय में सबके पास स्कूटर, मोटर साइकल हैं -सिर्फ ये ही... .हमारी सासजी कहती हैं -इतने बड़े प्राध्यापक हैं, क्या अपने दामाद को एक स्कूटर भी नहीं दे सकते... .हमने तो मोटरगाड़ी की आस लगाई थी । - इसी संकलन से बहुचर्चित कथाकार ऋता शुक्ल की कहानियों में समाज का संत्रास आँखोंदेखी घटना के रूप में उभरता है । तभी तो उनकी कहानियाँ संस्मरण, रेखाचित्र और कहानी का मिला-जुला अनूठा आनंद प्रदान करती हैं । उनकी हृदयस्पर्शी कहानियों का संकलन है- कासों कहों मैं दरदिया । "
Do Upanyas
- Author Name:
Krishna Sobti
- Book Type:

-
Description:
‘वह समय’—कृष्णा जी ने इस टुकड़े को यही नाम दिया था, जिसे ‘ज़िन्दगीनामा’ के दूसरे भाग का हिस्सा होना था। सम्बन्धों के सामाजिक तर्कों और नैतिक आग्रहों के ऊपर चलती दिलों की यह कहानी शाह जी और राबयाँ की है। शाह जी अपने आधे को पार कर चुके हैं और राबयाँ जवानी की सीढ़ियाँ चढ़ रही है—तुकें मिलाती है, कवित्त लिखती है, शाह जी उसके लिखे को दुरुस्त करते हैं, उसे पढ़ाते-सिखाते हैं। इसी में उम्र, मज़हब और परिवारों की हदों से ऊपर उठ दोनों कहीं जुड़ जाते हैं...और उस दिन जब कचहरी से लौटते हुए शाह जी बाढ़ में घिर जाते हैं, राबयाँ अपनी छत से उन्हें देखती है और उन्हें बचाने पानी में कूद जाती है...दोनों को ढूँढ़ लिया जाता है, लेकिन शाह जी फिर लौट नहीं पाते, चले ही जाते हैं, और राबयाँ उनके पीछे...यह कहानी इश्क़ की है, इश्क़ की रूहानियत की,...कृष्णा सोबती की क़लम ही इसकी पवित्रता को इतने सुच्चेपन से आँक सकती थी!
इस जिल्द में मौजूद दूसरी कृति का सम्बन्ध इस समय से है—आज की दिल्ली से। रियल एस्टेट के मगरमच्छों के हत्थे चढ़े एक युवक की यह कहानी पैसे के उथले दलदल में छपछपाते उस तबके के बारे में बताती है, जिसके लिए सबसे पहला और सबसे आख़िरी मूल्य पैसा ही है। यह भी कि गाँवो-क़स्बों से रोटी-रोजगार की तलाश में आए लोगों को यह दलदल कैसी सफ़ाई से अपनी गिरफ़्त में ले लेता है!
Ek Yahoodi Ladki Ki Talash
- Author Name:
Patrick Modiano
- Book Type:

-
Description:
डोरा ब्रूडर, उम्र पन्द्रह साल, यहूदी। स्कूल के रजिस्टर में उसके नाम के आगे ‘जाने की तारीख़ और कारण’ का सिर्फ़ यह विवरण मिलता है : ‘14 दिसम्बर, 1941; शिष्या भाग गई है।’ यह उपन्यास उसी की तलाश की कहानी है जिसे लेखक लगभग पाँच दशक बाद पेरिस पर जर्मन क़ब्ज़े के बचे-खुचे दस्तावेज़ों में करता है।
कड़ी से कड़ी जुड़ती जाती है, और अन्त में पता चलता है कि स्कूल से निकलने के बाद वह जर्मनों की पकड़ में आ गई, और उसे आउशवित्ज़ के लिए रवाना कर दिया गया जहाँ एक पूरी क़ौम को ख़त्म करने के लिए नाज़ियों ने तमाम अमानवीय इन्तज़ाम कर रखे थे।
डोरा ब्रूडर इस उपन्यास की मुख्य पात्र है, लेकिन असल नायक वह माहौल है जो पेरिस पर जर्मन क़ब्ज़े के बाद वहाँ पैदा हुआ, और जिसे लेखक ने अत्यन्त कौशल के साथ यहाँ पुन:सृजित किया है। एक ऐसा दौर जब अनेक मनुष्यों के लिए न सूरज के पास रोशनी बची थी, न आकाश के पास हवा, न घर उन्हें छिपा पाते थे, न सड़कें कहीं पहुँचा पाती थीं। उन्हें कभी भी कहीं भी पकड़ा जा सकता था, उनके लिए नियम बन गए थे, जो उन्हें उनके ही जैसे मनुष्यों के बीच कम-मनुष्य बनाते थे। उन्हें निर्धारित समय पर निकलना था, निर्धारित इलाक़ों में रहना था, निर्धारित बसों में चलना था, और हर समय अपनी पहचान को ज़ाहिर रखना था।
दिसम्बर की बर्फ़ीली रात में निकली डोरा के साथ कब क्या हुआ, कब वह कहाँ रही, यह खोजते हुए जैसे-जैसे लेखक आगे बढ़ता है इस माहौल की भयावहता हमारे सामने साकार होती जाती है, हम भीतर से ठंडे और सुन्न पड़ते जाते हैं और सहसा चौंककर अपने आज के वातावरण को देखने लगते हैं...
Majboori
- Author Name:
Jaydeep Khot
- Book Type:

- Description: Hindi Book
Anadi Anant
- Author Name:
Madhu Bhaduri
- Book Type:

-
Description:
'कालचक्र' और 'ज्वार' के बाद मधु भादुड़ी का यह तीसरा उपन्यास है। भारतीय विदेश सेवा में कार्यरत और प्राय: विदेश में ही रहनेवाला कोई साहित्यकार तेजी से बदल रहे भारतीय यथार्थ पर क्या इतनी पैनी नजर रख सकता है कि एक औपन्यासिक रचना के साथ पूरा न्याय कर सके ? मधु भादुड़ी ने अपने रचना कर्म से साबित किया है कि वे ऐसा कर सकती हैं। बगैर किसी दार्शनिक अतिरेक के, रोजमर्रे की ब्यौरेवार जिंदगी से गुजरते हुए वे मानवीय नियति के प्रश्नों से टकराती हैं और इसी क्रम में नियति निर्धारित करनेवाले कारकों पर रोशनी भी डालती हैं।
'अनादि अनंत' कलेवर की दृष्टि से एक छोटा उपन्यास है लेकिन इसमें एक भारतीय स्त्री के उत्पीड़ित से उत्पीड़क बनने और अपने इस परिवर्तन के जरिए अपनी विडंबना ही उजागर करने की एक बड़ी कथा कही गई है। जो साहित्यिक रूढ़ियाँ भारतीय स्त्री की सामाजिक हैसियत को लेकर सुदूर अतीत से बनी चली आ रही हैं और जो नई रूढ़ियाँ इस विषय में हाल के दौर में बनी हैं, दोनों पर ही यह उपन्यास कड़ा आघात पहुँचानेवाला साबित होगा, ऐसा हमारा विश्वास है ।
साथ की तीनों कहानियाँ, 'मुनिया', 'टेस्टर्ज टी' और 'अस्पताल' मधु भादुड़ी की किस्सागोई की बानगी हैं। वैसी ही सघन घटनात्मकता और क्लाइमेक्स की स्थितियाँ इनमें मौजूद हैं, जैसी आपको शास्त्रीय कहानियों से अपेक्षित होती हैं। एक लेखिका के बतौर मधु भादुड़ी की यह तीसरी प्रस्तुति आपको रोमांचित करेगी और हिंदी लेखक के विश्वव्यापी होते दायरे के प्रति आश्वस्त भी।
Bahati Ganga
- Author Name:
Shivprasad Mishra 'Rudra'
- Book Type:

- Description: 'बहती गंगा' अपने ढंग की अनूठी रचना है। यह अकेली रचना इसके लेखक शिवप्रसाद मिश्र ‘रुद्र’ काशिकेय को अक्षय कीर्ति दे गई है। भिन्न-भिन्न शीर्षकों से सत्रह अध्यायों में विभक्त यह कृति आख्यान और किंवदंतियों का एक अद्भुत मिश्रण वाला उपन्यास है। अलग-अलग अध्याय अपने आप में पूर्ण एक कथा होने के साथ-साथ किसी चरित्र के माध्यम से विकसित होकर परवर्ती अध्याय की कथा से जुड़ते दिखाई पड़ते हैं। परम्परागत अर्थों में किसी केन्द्रीय चरित्र या कथानक की जगह सारे चरित्र और सभी आख्यान बनारस की भावभूमि, उसके इतिहास, भूगोल, उसकी संस्कृति और उत्थान-पतन की महागाथा बनते हैं। अध्यायों के शीर्षक ही नहीं, भाषा, मानवीय व्यवहार और वातावरण का चित्रण बेहद सटीक और मार्मिक है। सबसे बड़ी बात यह है कि रचनाकार यथार्थ और आदर्श, दंतकथा और इतिहास मानव-मन की दुर्बलताओं और उदात्तताओं को इस तरह मिलाता है कि उससे जो तस्वीर बनती है वह एक पूरे समाज, की खरी और सच्ची कहानी कह डालती है।
Yah Sharif Log
- Author Name:
Razia Sajjad Zahir
- Book Type:

-
Description:
‘यह शरीफ़ लोग’ की लेखिका रज़िया सज्जाद ज़हीर उर्दू की लब्धप्रतिष्ठ कथाकारों में हैं। उनकी अनेक कहानियाँ और उपन्यास साहित्य-जगत में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। रज़िया सज्जाद ज़हीर अपनी स्पष्ट एवं स्वतंत्र विचारधारा के लिए विख्यात थीं। उन्होंने उर्दू-हिन्दी भाषिक समस्या के समाधान के लिए उर्दू को नागरी लिपि धारण करने की सलाह दी थी, जिसे सिद्धान्त रूप में स्वीकारने के बावजूद रूढ़िवादियों ने विवाद का विषय बना लिया था, किन्तु प्रस्तुत यथार्थ के खंडन के लिए तर्क न दे सके।
‘यह शरीफ़ लोग’ में उन्हें निर्भीक, स्वतंत्र, समाजवादी, मानववादी रज़िया सज्जाद ज़हीर का परिचय मिलता है, जो समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन एवं मान्यताओं का विश्लेषण करके उसे अपनी अनुभूति के आधार पर प्रस्तुत करती हैं। आर्थिक असमानताएँ उत्पन्न विषमताओं का पर्दाफ़ाश करती हैं, और मानव-जीवन की मूल समस्याओं की ओर सहज ही ध्यान आकृष्ट करती हैं।
‘यह शरीफ़ लोग’ का परिवेश मध्यवर्गीय एवं निम्नवर्गीय मुस्लिम परिवारों से सम्बन्धित है जिनकी मान्यताओं में परस्पर द्वन्द्व हैं, परन्तु उनमें एक-दूसरे को अस्वीकारने का साहस नहीं। दोनों पूरक के रूप में एक-दूसरे को योग देते हैं तथा साथ-साथ जीवन-यापन करते हैं, किन्तु जब अत्याचारों का प्याला भर जाता है, तो छलक उठता है और शोषित वर्ग कठोर अन्याय के विरुद्ध संघर्षशील हो उठता है।
‘यह शरीफ़ लोग’ की भाषा सीधे व्यवहार की भाषा है। मुस्लिम परिवारों, विशेषकर महिलाओं की बातचीत अत्यन्त स्वाभाविक रूप में प्रस्तुत हुई है। जीवन्त पात्रों एवं कथानक की रोचकता ने प्रस्तुत उपन्यास को नैसर्गिक बना दिया है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book