Patthar Par Doob
Author:
Sunder Chand ThakurPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 316
₹
395
Unavailable
सुपरिचित युवा कवि और पत्रकार सुन्दर चन्द ठाकुर का यह पहला उपन्यास ‘पत्थर पर दूब’ ऊपरी तौर पर पहाड़ की सुन्दरता और निश्छलता से निकलकर मैदानी कठोरताओं और संघर्षों की ओर जानेवाला कथानक लग सकता है, लेकिन अपनी गहराई में उसका ताना-बाना तीन स्तरों पर बुना हुआ है। इन स्तरों पर तीन समय, तीन पृष्ठभूमियाँ और तीन घटनाक्रम परस्पर आवाजाही करते हैं। कथा साहित्य में फ़्लैशबैक का उपयोग एक पुरानी और परिचित प्रविधि है, लेकिन ‘पत्थर पर दूब’ में इस तकनीक का इस्तेमाल इतने नए ढंग से हुआ है कि तीनों समय एक ही वर्तमान में सक्रिय होते हैं। कुमाऊँ के एक गाँव से निकलकर फ़ौज में गए नौजवान विक्रम के जीवन का सफ़र अगर एक तरफ़ उसके आन्तरिक द्वन्द्वों और ऊहापोहों को चिह्नित करता है तो दूसरी तरफ़ उसमें फ़ौजी तंत्र में निहित गिरावट की चीरफाड़ भी विश्वसनीय तरीक़े से मिलती है।</p>
<p>सुन्दर चन्द ठाकुर ने इस कथानक को मुम्बई पर हुए आतंकी हमलों से निपटने के लिए की गई कमांडो कार्रवाई से जोड़कर एक समकालीन शक्ल दे दी है। घर-परिवार से विच्छिन्न होता हुआ और पिता और प्रेमिका को खो चुका यह नौजवान कमांडो जिस जाँबाजी का प्रदर्शन करता है, उसके फल से भी वह वंचित रहता है। इसके बावजूद वह किसी त्रासदी का नायक नहीं है, बल्कि हमारे युग का एक ऐसा प्रतिनिधि है जो एक सफ़र और एक अध्याय के पूरा होने पर किसी ऐसी जगह और ऐसे धुँधलके में खड़ा है जहाँ से उसे आगे जाना है और अगली यात्रा करनी है जिसका गन्तव्य भले ही साफ़ न दिखाई दे रहा हो।</p>
<p>सुन्दर चन्द ठाकुर इससे पहले अपने दो कविता-संग्रहों—‘किसी रंग की छाया’ और ‘एक दुनिया है असंख्य’—से एक महत्त्वपूर्ण कवि के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। उनकी कई कहानियाँ भी चर्चित हुई हैं और अब उनका पहला उपन्यास उनकी रचनात्मक प्रतिभा और सामर्थ्य के एक उत्कृष्ट नमूने के रूप में सामने है।</p>
<p>किसी रचना का पठनीय होना कोई अनिवार्य गुण नहीं होता, लेकिन अगर अच्छे साहित्य में पाठक को बाँधने और अपने साथ ले चलने की क्षमता भी हो तो उसकी उत्कृष्टता बढ़ जाती है। ‘पत्थर पर दूब’ के शिल्प में पहाड़ी नदियों जैसा प्रवाह है जिसमें पाठक बहने लगता है और भाषा में ऐसी पारदर्शिता है कि कथावृत्त में घटित होनेवाले दृश्य दिखने लगते हैं। उपन्यास जीवन की कथा के साथ-साथ मनुष्य के मन और मस्तिष्क की कथा भी कहता है और इस लिहाज़ से ‘पत्थर पर दूब’ एक उल्लेखनीय कृति बन पड़ी है।</p>
<p> —मंगलेश डबराल
ISBN: 9788126723225
Pages: 328
Avg Reading Time: 11 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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अपार ख़ुशी का घराना’ हमें कई वर्षों की यात्रा पर ले जाता है। यह एक ऐसी कहानी है जो वर्षों पुरानी दिल्ली की तंग बस्तियों से खुलती हुई फलते-फूलते नए महानगर और उससे दूर कश्मीर की वादियों और मध्य भारत के जंगलों तक जा पहुँचती है, जहाँ युद्ध ही शान्ति है और शान्ति ही युद्ध है, और जहाँ बीच-बीच में हालात सामान्य होने का एलान होता रहता है।
अंजुम, जो पहले आफ़ताब थी, शहर के एक क़ब्रिस्तान में अपनी तार-तार कालीन बिछाती है और उसे अपना घर कहती है। एक आधी रात को फुटपाथ पर कूड़े के हिंडोले में अचानक एक बच्ची प्रकट होती है। रहस्यमय-सी। तिलोत्तमा उससे प्रेम करनेवाले तीन पुरुषों के जीवन में जितनी उपस्थित है, उतनी ही अनुपस्थित रहती है।
‘अपार ख़ुशी का घराना’ एक साथ दुखती हुई प्रेम-कथा और असंदिग्ध प्रतिरोध की अभिव्यक्ति है। उसे फुसफुसाहटों में, चीख़ों में, आँसुओं के ज़रिये और कभी-कभी हँसी-मज़ाक़ के साथ कहा गया है। उसके नायक वे लोग हैं जिन्हें उस दुनिया ने तोड़ डाला है जिसमें वे रहते हैं और फिर प्रेम और उम्मीद के बल पर बचे हुए रहते हैं। इसी वजह से वे जितने इस्पाती हैं उतने ही भंगुर भी, और वे कभी आत्म-समर्पण नहीं करते। यह सम्मोहक, शानदार किताब नए अन्दाज़ में फिर से बताती है कि एक उपन्यास क्या कर सकता है और क्या हो सकता है। अरुंधति रॉय की कहानी-कला का करिश्मा इसके हर पन्ने में दर्ज है।
Beech Mein Vinay
- Author Name:
Swayam Prakash
- Book Type:

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Description:
अपनी प्रगतिशील रचना-दृष्टि के लिए सुपरिचित कथाकार स्वयं प्रकाश की विशेषता यह है कि उनकी रचना पर विचारधारा आरोपित नहीं होती, बल्कि जीवन-स्थितियों के बीच से उभरती और विकसित होती है, जिसका ज्वलन्त उदाहरण है यह उपन्यास। ‘बीच में विनय’ की कथा-भूमि एक क़स्बा है, एक ऐसा क़स्बा जो शहर की हदों को छूता है। वहाँ एक डिग्री कॉलेज है और है एक मिल। कॉलेज में अंग्रेज़ी के एक प्रोफ़ेसर हैं भुवनेश—विचारधारा से वामपंथी, मार्क्सवादी सिद्धान्तों के ज्ञाता। दूसरी तरफ़ मिल-मज़दूरों की यूनियन के एक नेता हैं—कॉमरेड कहलाते हैं, ख़ास पढ़े-लिखे नहीं। मार्क्सवाद का पाठ उन्होंने जीवन की पाठशाला में पढ़ा है। और इन दो ध्रुवों के बीच एक युवक है विनय—वामपंथी विचारधारा से प्रभावित। प्रोफ़ेसर भुवनेश उसे आकर्षित करते हैं, कॉमरेड उसका सम्मान करते हैं और उसे स्नेह देते हैं। वह दोनों के बीच में है लेकिन वे दोनों यानी कॉमरेड और प्रोफ़ेसर...तीन-छह का रिश्ता है उनमें—दोनों एक-दूसरे में, एक-दूसरे की कार्यशैली को नापसन्द करते हैं। विनय देखता है दोनों को और शायद समझता भी है कि यह साम्यवादी राजनीति की विफलता है। लेकिन उसके समझने से होता क्या है...
क़स्बे की धड़कती हुई ज़िन्दगी और प्राणवान चरित्रों के सहारे स्वयं प्रकाश ने यह दिखाने की कोशिश की है कि वहाँ के वामपंथी किस प्रकार आचरण कर रहे थे। लेकिन क्या उनका यह आचरण उस क़स्बे तक ही सीमित है? क्या उसमें पूरे देश के वामपंथी आन्दोलन की छाया दिखाई नहीं देती है? स्वयं प्रकाश की सफलता इसी बात में है कि उन्होंने थोड़ा कहकर बहुत कुछ को इंगित कर दिया है। संक्षेप में कहें तो यह उपन्यास भारत के साम्यवादी आन्दोलन की कारकर्दगी पर एक विचलित कर देनेवाली टिप्पणी है। एक उत्तेजक बहस। एक जड़ताभंजक और निर्भीक हस्तक्षेप।
Rochak Vaigyanik Rahasya
- Author Name:
Dr. D.D. Ojha +1
- Book Type:

- Description: हमारे जीवन में हम अनेक वैज्ञानिक उत्पादों का उपयोग प्रातःकाल से रात्रि-पर्यंत एवं जीवन-पर्यंत तक करते हैं। इसके अतिरिक्त चाहे मानव शरीर हो, पशु-पक्षियों के व्यवहार एवं विशेषताएँ हों, प्राकृतिक क्रियाएँ हों, समुद्र, अंतरिक्ष, पृथ्वी, रसायन, भौतिकि, नैनो, बायोटेक्नोलॉजी, चिकित्सा विज्ञान के रोचक वैज्ञानिक प्रसंग तथा सामाजिक एवं धार्मिक परंपराएँ भी क्यों न हों, उनके बारे में जानने की जिज्ञासा रहती ही है। प्रायः यह समझा जाता है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होनेवाले अनुसंधान और उनके अनुप्रयोगों को समझना सामान्य जनसाधारण की बुद्धि के परे होता है, परंतु उनके उद्देश्य अंततः मानव की जीवन-शैली में अद्भुत परिवर्तन लाकर उसे प्रगति की राह पर निरंतर आगे बढ़ाने के ही होते हैं। आज के प्ररिप्रेक्ष्य में सभी वर्ग के सुधी पाठकों को दैनिक जीवन, प्राकृतिक घटनाओं, अनेक जीवधारियों से संबंधित घटनाओं, सामाजिक एवं वैदिक परंपराओं में निहित विज्ञान के अनेकानेक विषयों पर जानकारी उनकी बोल-चाल की भाषा में होना बहुत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस पुस्तक ‘रोचक वैज्ञानिक रहस्य’ का प्रणयन सरल-सुबोध भाषा में यथोचित चित्रों सहित किया है। विज्ञान में अभिरुचि रखनेवाले तथा सामान्य व्यक्ति के लिए भी समान रूप से पठनीय रोचक-ज्ञानवर्धक पुस्तक।
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