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श्रीकृष्ण की कथा अब तक प्राय: नन्द तथा यशोदा के पक्ष से ही देखी जाती रही है। संस्कृत तथा हिन्दी साहित्य ने यशोदा के पक्ष से इस कथा को इतनी बार दुहराया है कि श्रीकृष्ण की मूल जननी देवकी तथा पिता वसुदेव दोनों साहित्य एवं इतिहास के हाशिए पर पहुँच गये हैं। इस उपन्यास में श्रीकृष्ण कथा को देवकी-वसुदेव के पक्ष से देखा गया है और यहाँ पूरी चेष्टा की गई है कि उन्हें हाशिये से उठाकर भारतीय साहित्य तथा इतिहास के मुखपृष्ठ पर स्थापित किया जाए। देवकी की कथा अगाध दु:ख से भरी करुणा के उन्मेष की कथा है और कारागार के प्राचीरों में घिरी असह्य पीड़ा भोगने वाली देवकी की जिजीविषा ही श्रीकृष्ण जैसे महान भागवत व्यक्तिव के निर्मित करने का मुख्य कारण और भारतीय संस्कृति को तेजोमय व्यक्तित्व—श्रीकृष्ण—प्रदान करने वाली देवकी व्यथा को उभारना ही इस उपन्यास का मन्तव्य है।
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About the Book
श्रीकृष्ण की कथा अब तक प्राय: नन्द तथा यशोदा के पक्ष से ही देखी जाती रही है। संस्कृत तथा हिन्दी साहित्य ने यशोदा के पक्ष से इस कथा को इतनी बार दुहराया है कि श्रीकृष्ण की मूल जननी देवकी तथा पिता वसुदेव दोनों साहित्य एवं इतिहास के हाशिए पर पहुँच गये हैं। इस उपन्यास में श्रीकृष्ण कथा को देवकी-वसुदेव के पक्ष से देखा गया है और यहाँ पूरी चेष्टा की गई है कि उन्हें हाशिये से उठाकर भारतीय साहित्य तथा इतिहास के मुखपृष्ठ पर स्थापित किया जाए। देवकी की कथा अगाध दु:ख से भरी करुणा के उन्मेष की कथा है और कारागार के प्राचीरों में घिरी असह्य पीड़ा भोगने वाली देवकी की जिजीविषा ही श्रीकृष्ण जैसे महान भागवत व्यक्तिव के निर्मित करने का मुख्य कारण और भारतीय संस्कृति को तेजोमय व्यक्तित्व—श्रीकृष्ण—प्रदान करने वाली देवकी व्यथा को उभारना ही इस उपन्यास का मन्तव्य है।
Book Details
-
ISBN9789389742251
-
Pages104
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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आज के भारतीय समाज में वेश्याओं के जीवन का हिन्दी या किसी भी अन्य भारतीय भाषा में, यह पहला विश्लेषणात्मक अध्ययन है। श्री अमृतलाल नागर ने बहुत समीप से और बहुत ही सहानुभूति से इस जीवन को देखा है, जिसे आम तौर पर रंगीन और ऐयाशी से पूर्ण समझा जाता है, लेकिन जो संघर्ष और निराशाओं से वैसे ही भरा है, जैसे कि अन्य सामान्य जीवन। इस अध्ययन में किसी उपन्यास से भी अधिक रोचकता है और सत्य पर आधारित होने के करण इसकी प्रमाणिकता अद्धितीय है। भारतीय समाज के अध्येताओं के लिए एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
Muhar
- Author Name:
Chandan Pandey
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रोली घमंडी है, रोली अकडू है, रोली ज़िद्दी है... ऐसी तमाम तोहमतों के बीच रोली है कि नौकरी पाने, नौकरी की जगह तक पहुँच पाने और वहाँ से घर लौटने की जद्दोजेहद से रोज़ गुज़र रही है। यक़ीन कीजिए कि ये साधारण सी दिखने वाली बातें एक वर्किंग वूमन के लिये रोज़ लड़ी जाने वाली लड़ाइयाँ हैं। जेंडर, आयु और शहरी/ग्रामीण पृष्ठभूमि को केंद्र में रखकर किये जाने वाले कई सूक्ष्म और स्थूल भेदभाव हैं जिनका सामना रोली और उस जैसी तमाम कामकाजी स्त्रियों को रोज़ करना होता है। परिवार, समाज और रोज़गार के मुश्किल कुरुक्षेत्र में जूझती रोली को केंद्र में रखकर लिखी गई ये कहानियाँ हर कामकाजी स्त्री के जीवन, स्वप्न और संघर्ष का सूक्ष्म और मार्मिक दस्तावेज़ बन पड़ी हैं।
Andha Ullu
- Author Name:
Sadegh Hedayat +1
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ईरान के ही नहीं, विश्व के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिने जाने वाले उपन्यास ‘अन्धा उल्लू’ का लेखन इसके लेखक ने बम्बई में अपने भारत प्रवास के दौरान किया था। एक हताश व्यक्ति के भीतरी अँधेरे और उसे चारों तरफ़ से भींचकर रखे रहने वाली दुनिया के प्रति उसका क्षोभ इस उपन्यास के शब्द-शब्द में बिंधा है जिसे सुपरिचित कथाकार नासिरा शर्मा ने बड़े मनोयोग से मूल फ़ारसी से हिन्दी में प्रस्तुत किया है। अपने असंगत अतियथार्थ में यह उपन्यास जहाँ हमें ख़ुद से दूर की कोई चीज़ लगता है, वहीं अपने उन्हीं विवरणों और प्रतिक्रियाओं में अपने बहुत क़रीब भी लगता है। संवेदनहीन ज्यामितिक आकृतियों से घिरे हमारे आधुनिक मनोजगत का वह स्याह विस्तार इसमें अंकित हुआ है, जहाँ पाँव रखने का साहस हम अक्सर नहीं कर पाते। अथाह निराशा, भयावह दुःस्वप्नों, घोर अकेलेपन और मृत्युबोध के हौलनाक चित्रण के चलते ईरान में इस उपन्यास पर प्रतिबन्ध भी लगा जिसका एक कारण यह भी बताया जाता है कि इसे पढ़ने के बाद कुछ पाठकों ने अपना जीवन समाप्त करने के प्रयास भी किए। लेकिन इस उपन्यास में अभिव्यक्त सचाई को नकार पाना कभी सम्भव नहीं हुआ और समय के साथ ‘अन्धा उल्लू’ हरेक सजग संवेदनशील व्यक्ति के लिए एक अपरिहार्य पाठ के तौर पर अधिक से अधिक मान्य होता गया।
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