Shunyer Udyan
(0)
Author:
Shirsendu MukhopadhyayPublisher:
The Antonym CollectionsLanguage:
BengaliCategory:
Literary-fiction₹
399
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পোলিও-আগ্রাসনে শুকিয়ে যাওয়া হাত ও পা নিয়ে নিতান্তই ভালমানুষ গৌরহরি ভাগ্যের ফেরে হয়ে গেল শহর কলকাতার ট্যাক্সি-ড্রাইভার। অথচ অবস্থাপন্ন ব্যবসায়ী-পরিবারের সন্তান হিসেবে কতকিছু হওয়ার কথা ছিল তার। ট্যাক্সি চালাতে-চালাতে আর বিচিত্র সব সওয়ারীদের জীবনের আনাচ-কানাচে উঁকি দিতে দিতে তার জীবনের স্বপ্ন মাঝেমধ্যেই বাস্তবতার ডানায় ভর দিয়ে উড়ে যায় এক বহুবর্ণিল মায়াবাস্তবের দিকে। সেখানে তার সঙ্গী হয় এক অদ্ভুত জাহাজী মানুষ যে তার হারানো প্রেমিকাকে খুঁজে বেড়াচ্ছে- সেই প্রেমিকা তাকে জ্যোৎস্নাস্নাত উদ্যানে আকণ্ঠ জ্যোৎস্না খাইয়েছিল! শুরু হয় এক আশ্চর্য অভিযান, যে অভিযাত্রায় রাতের মহানগরের বুকে নেমে আসে পরিরা দরজা খুলে যায় অন্য-রিয়ালিটির। মায়াবী কলমে লেখা এই ঘোরলাগা আখ্যানে শীর্ষেন্দু মুখোপাধ্যায় মুছে দিয়েছেন চেনা-অচেনা পৃথিবীর ভেদরেখা- দিন আর রাত্রির ফারাক কুয়াশা ও রোদ্দুরের মধ্যবর্তী ধূসরতাকে।
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পোলিও-আগ্রাসনে শুকিয়ে যাওয়া হাত ও পা নিয়ে নিতান্তই ভালমানুষ গৌরহরি ভাগ্যের ফেরে হয়ে গেল শহর কলকাতার ট্যাক্সি-ড্রাইভার।
অথচ অবস্থাপন্ন ব্যবসায়ী-পরিবারের সন্তান হিসেবে কতকিছু হওয়ার কথা ছিল তার। ট্যাক্সি চালাতে-চালাতে আর বিচিত্র সব সওয়ারীদের জীবনের আনাচ-কানাচে উঁকি দিতে দিতে তার জীবনের স্বপ্ন মাঝেমধ্যেই বাস্তবতার ডানায় ভর দিয়ে উড়ে যায় এক বহুবর্ণিল মায়াবাস্তবের দিকে। সেখানে তার সঙ্গী হয় এক অদ্ভুত জাহাজী মানুষ যে তার হারানো প্রেমিকাকে খুঁজে বেড়াচ্ছে- সেই প্রেমিকা তাকে জ্যোৎস্নাস্নাত উদ্যানে আকণ্ঠ জ্যোৎস্না খাইয়েছিল! শুরু হয় এক আশ্চর্য অভিযান, যে অভিযাত্রায় রাতের মহানগরের বুকে নেমে আসে পরিরা দরজা খুলে যায় অন্য-রিয়ালিটির। মায়াবী কলমে লেখা এই ঘোরলাগা আখ্যানে শীর্ষেন্দু মুখোপাধ্যায় মুছে দিয়েছেন চেনা-অচেনা পৃথিবীর ভেদরেখা- দিন আর রাত্রির ফারাক কুয়াশা ও রোদ্দুরের মধ্যবর্তী ধূসরতাকে।
Book Details
-
ISBN9789349207967
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘बारामासी’ बुन्देलखंड के एक छोटे से कस्बे के, एक छोटे से आँगन में पल रहे छोटे-छोटे स्वप्नों की कथा है–वे स्वप्न, जो टूटने के लिए ही देखे जाते हैं और टूटने के बाद तथा बावजूद देखे जाते हैं। स्वप्न देखने की अजीब उत्कंठा तथा उन्हें साकार करने के प्रति धुँधली सोच और फिर-फिर उन्हीं स्वप्नों को देखते जाने का हठ–कथा न केवल इनके आसपास घूमती हुई मानवीय सम्बन्धों, पारम्परिक शादी-ब्याह की रस्मों, सडक़छाप कस्बाई प्यार, भारतीय कस्बों की शिक्षा-पद्धति, बेरोजगारी, माँ-बच्चों के बीच के स्नेहिल पल तथा भारतीय मध्यवर्गीय परिवार के जीवन-व्यापार को उसके सम्पूर्ण कलेवर में उसकी समस्त विडम्बनाओं-विसंगतियों के साथ पकड़ती है, साथ ही बुन्देलखंडी परिवेश के श्वास-श्वास में स्पन्दित होते सहज हास्य-व्यंग्य को भी समेटती चलती है।
Dehari Par Thithaki Dhoop
- Author Name:
Amit Gupta
- Book Type:

- Description:
समलिंगी प्रेम की स्वाभाविकता और उसके इर्द-गिर्द उपस्थित सामाजिक-नैतिक जड़ताओं को उजागर करता यह उपन्यास अपने छोटे-से कलेवर में कुछ बड़े सवालों और पेचीदा जीवन-स्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना करता है। परिवार की मौजूदा संरचना के बीचोबीच जाकर वह सम्बन्धों, भावनाओं और कामनाओं के संजाल में आपसी समझ का ऐसा रास्ता निकालता है जो पीड़ाजनक तो है, लेकिन आधुनिक वयस्क मन को फिर भी स्वीकार्य है।
समाज लेकिन उतना वयस्क अभी नहीं हो सका है, न ही तमाम तकनीकी कौशल के बावजूद उतना आधुनिक, उदार और मानवीय कि किसी नई शुरुआत को स्वीकार कर सके। अस्तित्व के यौन-पक्ष को लेकर आज भी भारतीय समाज उत्कंठा और वितृष्णा के विपरीत बिन्दुओं के बीच डोलता रहता है। जिसे वह प्राकृतिक कहता है, वह सेक्स भी उसे सहज नहीं रहने देता; जिसे वह कहता ही अप्राकृतिक है, उसकी तो बात ही क्या!
श्लोक सिंह को अपने यौन रुझान के चलते नौकरी से निकाल दिया जाता है, और अनुराग जो उसका प्रेमी है, और संयोग से श्लोक की पत्नी का भाई, हर उस लांछना का सामना करता है जो किसी सफल-सुखी व्यक्ति के लिए यूँ भी लोगों की जेबों में हर समय तैयार रहती हैं। गालियाँ, फटकार, हत्या की धमकी आदि।
लेकिन मीरा, श्लोक की पत्नी, जिसे उन दोनों के प्रेम की सबसे ज़्यादा क़ीमत चुकानी पड़ी, इतनी वयस्क है कि मनुष्य-मन की सूक्ष्मतर आत्मोप्लब्धियों को स्वीकार कर सके, अपनी स्वयं की क्षति को लाँघकर जीवन की नई दिशाओं के लिए द्वार खुला रख सके।
सरल और संक्षिप्त कथानक के माध्यम से यह उपन्यास धारा 377 के हटाए जाने के कुछ ही समय पहले शुरू होता है, और कोर्ट के इस वक्तव्य के कुछ बाद तक चलता है, कि ‘इतिहास को LGBTQ समुदाय से, उन्हें दी गई यातना के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए।’
वस्तुत: यह उपन्यास समाज की खोखली मान्यताओं और संकीर्ण घेरेबन्दियों के विरुद्ध ज़्यादा खुली दुनिया के निर्माण की एक मार्मिक पुकार है।
Mohabbat Ki Dukaan
- Author Name:
Yashwant Vyas
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मोहब्बत की दुकान दुकान अगर हुई तो सौदे की रेट लिस्ट भी होगी। रेट लिस्ट है तो प्रॉफिट का हिसाब भी होगा। जो मोहब्बत में भी प्रॉफिट निकाल ले उसे इश्क़ की इल्लत पालने की बजाय परचून का धंधा खोल लेना चाहिए। एक सांस में पढ़ जाने लायक बतकहियों का खाता खोलती जुमलों के दौर की जानलेवा कहानियां यशवंत व्यास नए प्रयोगों के लिए चर्चित व्यंग्यकार पत्रकार. बोसकीयाना, कवि की मनोहर कहानियां, चिंताघर, कामरेड गोडसे, ख्वाब के दो दिन, अपने गिरेबान में, कल की ताज़ा ख़बर, अमिताभ का अ, अब तक छप्पन, इन दिनों प्रेम उर्फ लौट आओ नीलकमल, यारी दुश्मनी, जो सहमत हैं सुनें आदि किताबें. कई मीडिया उपक्रमों में प्रमुख रहे. कई सम्मान. डेढ़ दशक से प्रतिष्ठित अख़बार अमर उजाला के समूह सलाहकार नए माध्यमों पर कुछ अनूठे प्रयोगों में व्यस्त.
Phir Subah Hogi
- Author Name:
Balwant Singh
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प्रस्तुत उपन्यास ‘फिर सुबह होगी’ में पीड़ा का दबा-दबा स्वर गूँजता है जो एक पीढ़ी से शुरू होता है और इसका अन्त दूसरी पीढ़ी में जाकर होता है।
इस उपन्यास में कुछ पात्रों को लेकर कथानक का ताना-बाना तैयार किया गया है, जो मध्यम वर्ग से सम्बन्ध रखते हैं।
सभी पात्र पाठकों के सुपरिचित व्यक्तियों में से लिए गए हैं, परन्तु कहानी की रोचकता व सजीवता में कोई कमी नहीं महसूस होती।
विश्वास है, यह उपन्यास पाठकों को शुरू से अन्त तक बाँधे रखने में सक्षम सिद्ध होगा।
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