Paap
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Sowrab HossainPublisher:
The Antonym CollectionsLanguage:
BengaliCategory:
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‘বিশ্বাস’এর কাছে নতজানু হয়ে থাকেন মানুষ। সে ‘বিশ্বাস’ই তার ইবাদত। তার ইহকাল-পরকালের মুক্তি। বিপুলা-বিরাট পৃথিবীর মনুষ্য-জীবনে সে ইবাদতের আঙ্গিকও ভিন্ন ভিন্ন। প্রকৃতি যখন রুষ্ট হয়ে ওঠে, অসহায় মানুষ তখন ঈশ্বরের ইবাদতে রত হন। এ আখ্যান তেমনই এক ‘ইবাদত’কে ঘিরে। খরায় পুড়ে যাচ্ছে মাটি। চাষ-আবাদ বন্ধ। মানুষ আকাশের দিকে তাকিয়ে আছেন, কখন মেঘ উঠবে। ঝরবে বৃষ্টি। কিন্তু কোত্থাও সে বৃষ্টির দেখা নেই! অসহায় মানুষ তখন ‘ইসতিসকার নামাজ’ নামের এক বিশেষ নামাজে দাঁড়ান। সে ইবাদত কোনও ‘ব্যক্তি ইবাদত’ নয়, সে ইবাদত ‘সমগ্রের ইবাদত’। খরাগ্রস্থ সমস্ত জনপদের মানুষ সে বিশেষ নামাজে উপস্থিত হন। একবার নয়, একাধিকবার। তারপরে কি দেখা মেলে সেই ‘রহমতের বৃষ্টির’? সে ইবাদতের ভিতর কোথাও কি কোনও ত্রুটি থেকে যায়? কিংবা কোনও পাপ? ঈশ্বর যে পাপকে পছন্দ করেন না। প্রকৃতিও কি সে পাপের ইশারা শোনে? সে ‘পাপ’কে কেন্দ্র করে আখ্যান অন্য এক মাত্রা নেয়। মানুষ, ঈশ্বর, ধর্ম আর পাপ সেখানে একাকার হয়ে যায়। এ যেন অন্য এক শাশ্বত সত্যকে খোঁজা। সে সত্যের সন্ধান পাওয়া কি এতই সহজ? কেউ কি তাকে আড়াল করে রাখে? প্রকৃতি সে আড়ালকে উন্মোচন করে দেয়। লেখক তাঁর সুনিপুণ শৈলিতে সেসবকে জীবন্ত করে তোলেন। ভাষার বুনন আর গদ্যের নতুন আঙ্গিকে আখ্যানটি এক চিরকালীন ভাষ্য হয়ে ওঠে। স্থানীয় উচ্চারণে, বাক্যগঠনে আর শব্দ ব্যবহারে যে উপভাষা তৈরি হয়, তার অবলম্বনে সার্থকতার সঙ্গে অনবদ্য পারঙ্গমতায় এ আখ্যান লিখেছেন লেখক।
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‘বিশ্বাস’এর কাছে নতজানু হয়ে থাকেন মানুষ। সে ‘বিশ্বাস’ই তার ইবাদত। তার ইহকাল-পরকালের মুক্তি। বিপুলা-বিরাট পৃথিবীর মনুষ্য-জীবনে সে ইবাদতের আঙ্গিকও ভিন্ন ভিন্ন। প্রকৃতি যখন রুষ্ট হয়ে ওঠে, অসহায় মানুষ তখন ঈশ্বরের ইবাদতে রত হন। এ আখ্যান তেমনই এক ‘ইবাদত’কে ঘিরে। খরায় পুড়ে যাচ্ছে মাটি। চাষ-আবাদ বন্ধ। মানুষ আকাশের দিকে তাকিয়ে আছেন, কখন মেঘ উঠবে। ঝরবে বৃষ্টি। কিন্তু কোত্থাও সে বৃষ্টির দেখা নেই! অসহায় মানুষ তখন ‘ইসতিসকার নামাজ’ নামের এক বিশেষ নামাজে দাঁড়ান। সে ইবাদত কোনও ‘ব্যক্তি ইবাদত’ নয়, সে ইবাদত ‘সমগ্রের ইবাদত’। খরাগ্রস্থ সমস্ত জনপদের মানুষ সে বিশেষ নামাজে উপস্থিত হন। একবার নয়, একাধিকবার। তারপরে কি দেখা মেলে সেই ‘রহমতের বৃষ্টির’? সে ইবাদতের ভিতর কোথাও কি কোনও ত্রুটি থেকে যায়? কিংবা কোনও পাপ? ঈশ্বর যে পাপকে পছন্দ করেন না। প্রকৃতিও কি সে পাপের ইশারা শোনে? সে ‘পাপ’কে কেন্দ্র করে আখ্যান অন্য এক মাত্রা নেয়। মানুষ, ঈশ্বর, ধর্ম আর পাপ সেখানে একাকার হয়ে যায়। এ যেন অন্য এক শাশ্বত সত্যকে খোঁজা। সে সত্যের সন্ধান পাওয়া কি এতই সহজ? কেউ কি তাকে আড়াল করে রাখে? প্রকৃতি সে আড়ালকে উন্মোচন করে দেয়। লেখক তাঁর সুনিপুণ শৈলিতে সেসবকে জীবন্ত করে তোলেন। ভাষার বুনন আর গদ্যের নতুন আঙ্গিকে আখ্যানটি এক চিরকালীন ভাষ্য হয়ে ওঠে। স্থানীয় উচ্চারণে, বাক্যগঠনে আর শব্দ ব্যবহারে যে উপভাষা তৈরি হয়, তার অবলম্বনে সার্থকতার সঙ্গে অনবদ্য পারঙ্গমতায় এ আখ্যান লিখেছেন লেখক।
Book Details
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ISBN9788198127228
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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'मेरी तेरी उसकी बात' की पृष्ठभूमि में 1942 का भारत छोड़ो आन्दोलन है, लेकिन सिर्फ़ घटनाओं का वर्णन नहीं। एक दृष्टिसम्पन्न रचनाकार की हैसियत से यशपाल ने उसमें ख़ासतौर पर यह रेखांकित किया है कि क्रान्ति का अभिप्राय सिर्फ़ शासकों का बदल जाना नहीं, समाज और उसके दृष्टिकोण का आमूल परिवर्तन है।
स्त्री के प्रति प्रगतिशील और आधुनिक नज़रिया उनके अन्य उपन्यासों की तरह इस उपन्यास के भी प्रमुख स्वरों में एक है।
Murda-Ghar
- Author Name:
Jagdamba Prasad Dixit
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मुरदा-घर सामाजिक विसंगतियों और विषमताओं का यथार्थपूर्ण चित्रण है। वर्तमान अर्थव्यवस्था के तहत गाँवों के उजड़ने की प्रक्रिया जैसे-जैसे तेज़ होती गई, महानगरों में गन्दी बस्तियों और झोंपड़पट्टियों या झुग्गी-झोंपड़ियों का उतनी ही तेज़ी से विस्तार होता गया। इन बस्तियों में मानव-जीवन का जो रूप विकसित हुआ, वह काफ़ी विकृत और अमानवीय है। वेश्यावृत्ति और अपराध-कर्म का यहाँ विशेष रूप से विकास हुआ।
‘मुरदा-घर’ में झोंपड़पट्टी की वेश्याओं की दयनीय स्थिति का शक्तिशाली चित्रण है। विद्रूप यथार्थ ‘मुरदा-घर’ के केन्द्र में ज़रूर है, लेकिन उपन्यास की मुख्य धारा करुणा और संवेदना की है। विकृत से
विकृत स्थितियों से गुज़रते हुए भी उपन्यास के पात्र नितान्त मानवीय और संवेदनशील हैं। ‘मुरदा-घर’ में वर्तमान राज्य-तंत्र के अमानवीय रूप को भी उकेरा गया है। पुलिस-स्टेशन, हवालात, कचहरी वग़ैरह का जो रूप यहाँ सामने आया है, काफ़ी अमानवीय और नृशंस है।
‘मुरदा-घर’ आज की हमारी पूरी व्यवस्था पर एक प्रश्नचिह्न है। जैसा कि एक आलोचक ने कहा है, ‘मुरदा-घर’ आधुनिक हिन्दी उपन्यासों की दुनिया में एक चुनौती है। इसका सामना करना आसान नहीं है।’
Anaam Prasang
- Author Name:
Meena Sharma
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बहुत भाग्यशाली होते हैं वे लोग, जिन्हें उपयुक्त जीवन साथी मिल जाता है, अन्यथा देखने में तो यही आता है कि दाम्पत्य की गाड़ी को कोई एक ही खींच रहा है, खींचे चला जा रहा है और दूसरा अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के प्रति सर्वथा लापरवाह बना अपने किसी ऐश्वर्यलोक की मीनार पर बाँसुरी बजा रहा है। ऐसी बाँसुरी बजती है तभी ममता जैसी नायिकाओं का जन्म होता है, जो किसी एक व्यक्ति के प्रति ही नहीं, पूरी सृष्टि के प्रति स्त्रियोचित ममता, कर्त्तव्यपरायणता और विवेक से सम्पन्न होती हैं। ऐसी ही नायिकाएँ अपने दाम्पत्य का नरक भुगत रहे नायकों को अपने स्नेहिल स्पर्श का मरहम लगाकर जीने का सम्बल प्रदान करती हैं, वरना वे कब के इस संसार को अलविदा कह चुके होते।
किसी युगल के बीच आई यह दूसरी स्त्री हमेशा से इस संसार में आकर्षण का केन्द्र रही है, विष पीकर इस स्त्री ने प्रायः ही संसार को अमृत और ‘अभय’ प्रदान किया है, मगर समाज इससे अधिकांशतः भयभीत ही हुआ है और ऐसी स्त्री को उसने क्रॉस पर चढ़ा दिया है। ममता और अभय की यह कथा वस्तुतः इसी त्रास और क्रॉस की कथा है, जिसमें आपकी अपनी व्यथा भी समाहित है। विश्वास न हो तो अनाम रह जानेवाले इस कथा-प्रसंग की आग से गुज़र जाइए।
Hookah Hits!
- Author Name:
Dinggi
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“The depth of my feelings for him was unimaginably stressful. When you realise the feeling — name it love — when it gets out of control, then the victim and the perpetrator get united. The want and the need to be loved then becomes a curse. And this curse can only be reversed by the spell of lying the truth.” – Lana Maxwell Lana Maxwell (the protagonist) had to make a decision; along with her mother’s Maxwell Enterprise, she had to inherit her life as well. Lana’s life is paused between her past and present — an ambitionless teenage, adventurous friends, first love, exploring the unknown, and shouldering real-life responsibilities with an accidental twist by Fate. This is a fiction based on real-life events. “If you think you are in for a light-read, you are mistaken. ‘Hookah Hits!’ is a story that will resonate with the emotions of every millennial. A beautiful piece of modern literature filled with undertones of realism and humour—this is a story of exploring one’s own dynamics of unleashing layers and layers of different chapters of life. With intriguing twists and turns in the plot, I would call this a classic book depicting the metamorphosis of human relationships.” – Priyanka Chakrabarti, Founder of thelifestylepotpourri.com & Deputy Editor at Maxim magazine. “Hookah Hits! takes you along with the protagonist on a discovery trip through a family’s saga. One can easily connect to the universality of the story and will be surprised how it unfolds. This novel is intriguing in its emotional depth and understanding.” – Alexander Funk, Producer at Oberon Film (A German Film Production)
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