Pratham Phalgun
Author:
Shri Naresh MehtaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Unavailable
इसका कथानक उस प्रथम प्रेम की मार्मिकता को अभिव्यक्त करता है जिसका सम्मोहन सार्वकालिक तथा सार्वदेशिक होता है। इस उपन्यास में दो पात्र—गोपा और महिम। आज से तीस-चालीस वर्ष पहले का लखनऊ। परिपार्श्व की इस ऐकान्तिकता के साथ-साथ दो पात्रों का अपना निजपन, जहाँ किसी तीसरे का कोई अर्थ या महत्त्व नहीं। रागात्मकता के किन-किन और कैसे-कैसे प्रसंगों, स्थितियों तथा मुद्राओं से होकर गोपा और महिम यात्रा करते हैं, यह इस उपन्यास की बुनावट, भाषा तथा प्रतीकों के माध्यम से देखा जा सकता है। जिस प्रकार गोपा और महिम को किसी अन्य की अपेक्षा नहीं, वैसी ही तन्मयता इसे पढ़ते हुए मिलती हैं।
ISBN: 9788180317187
Pages: 219
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Terodaiktil
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

-
Description:
भारत की आदिवासी जनजाति की चेतना, संस्कृति, उत्पीड़न, संघर्ष और मानवीय गरिमा का एक और ज्वलन्त प्रमाण प्रस्तुत करनेवाली अप्रतिम कथाकार महाश्वेता देवी की नवीनतम कथाकृति है— ‘टेरोडैक्टिल’ जिसमें यथार्थ और फ़ैंटेसी के अद्भुत समन्वय से ऐसे वातावरण का सृजन किया गया है जो न केवल जनजातियों की भौतिक पीड़ाओं को स्वर देता है। अपितु उनकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को भी नए आयाम देता है और उनके प्रति मुख्य धारा के विकसित भारतीय जनमानस के दायित्वों के प्रति उसे सतर्क करता है।
टेरोडैक्टिल एक अर्धमानव, अर्धपक्षी जीव है जो नागेसिया आदिवासी जाति के पूर्वपुरुषों की आत्मा के रूप में अवतरित होता है और शोषण और उत्पीड़न के विरुद्ध उस पूरी जाति के संघर्ष को एक नए मिथ से जोड़ता है।
मध्य प्रदेश के एक काल्पनिक पहाड़ी स्थल—पिरथा—की पृष्ठभूमि में रचित यह उपन्यास पाठक को सर्वग्रासी पूँजीवादी प्रगति और आदिम समाजवादी सांस्कृतिक, सामाजिक परम्परा के बीच दो जीवन-पद्धतियों और दो प्रकार के जीवन-मूल्यों के संघात को दर्शाता है। पूरे कथानक में अद्भुत और सामान्य, चिरन्तन और आधुनिक का ऐसा सन्तुलन पैदा किया गया है कि पाठक साँस रोके आधिभौतिक से भौतिक जगत् तक की यात्रा करता हुआ उस मानवीय त्रासदी का साक्षात्कार करता है, जो उसके वर्तमान ही नहीं उसके भविष्य को भी उघाड़कर उसके सामने रख देता है।
Nar Naari
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

-
Description:
यह उपन्यास कृष्ण बलदेव वैद के सबसे चर्चित और बहस तलब रचनाओं में से एक है। उन्होंने हिन्दी की मुख्यधारा से अकसर दूर ही रहते हुए भाषा को ऐसी कृतियाँ दी हैं जो शिल्प के हमारे साथ सोचने के तरीक़ों को भी विचलित करती रही हैं।
‘नर नारी’ उपन्यास स्त्री की समूची सामाजिक, पारिवारिक और दैहिक इयत्ता को केन्द्र में रखता है, और उनसे जुड़े प्रश्नों पर एक संकुल भावभूमि के परिप्रेक्ष्य में विचार करता है। पितृसत्तात्मक सामाजिक तंत्र में सम्पत्ति के उत्तराधिकार, विवाह-संस्था की वैधता, यौन- शुचिता और इससे जुड़े कई विधि-निषेधों पर अत्यन्त ज़ोर दिया जाता है। पति-पत्नी, बहन-भाई, माँ-बेटे आदि सभी सम्बन्ध अन्तत: इन्हीं सब के सन्दर्भ में परिभाषित होते दिखते हैं।
इनके बीच ही मौजूद है स्त्री-पुरुष का आदिम रिश्ता जो एक दूसरी की उपस्थिति को एक प्राकृतिक और समान भूमि पर परिभाषित करता है। बाँझ माँजी, रसीला, सीमा और मीनू आदि इस उपन्यास के ऐसे स्त्री पात्र हैं जिनका जीवन और दृष्टिकोण इन तमाम प्रश्नों पर अलग-अलग ढंग से प्रकाश डालता है।
संवादों के बीच से ही दृश्यों को साकार करते हुए उपन्यास को पढ़ना जैसे अपने ही मन की भीतरी तहों की यात्रा करने जैसा है। लेखक कहीं पर न पात्रों का बाहरी विवरण देता है, न परिस्थितियों का, फिर भी सब जैसे पाठक की आँखों के सामने साकार होता चलता है। एक पठनीय और विचारणीय उपन्यास।
Manushya Ke Roop
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
“लेखक को कला की महानता इसमें है कि उसने उपन्यास में यथार्थ से ही सन्तोष किया है। अर्थ और काम की प्रेरणाओं की विगर्हणा उसने स्पष्ट कर दी है। अर्थ की समस्या जिस प्रकार वर्ग और श्रेणी के स्वरूप को लेकर खड़ी हुई है, उसमें उपन्यासकार ने अपने पक्ष का कोई कल्पित उपलब्ध स्वरूप एक स्वर्ग, प्रस्तुत नहीं किया...अर्थ सिद्धान्त की किसी अयथार्थ स्थिति की कल्पना उसमें नहीं। समस्त उपन्यास का वातावरण बौद्धिक है। अत: आदि से अन्त तक यह यथार्थवादी है।...मनुष्यों की यथार्थ मनोवृत्ति का चित्रांकन करने की लेखक ने सजग चेष्टा की है।...यह उपन्यास लेखक के इस विश्वास को सिद्ध करता है कि परिस्थितियों से विवश होकर मनुष्य के रूप बदल जाते हैं।
‘मनुष्य के रूप' में मनुष्य की हीनता और महानता के यथार्थ चित्रण का एक विशद प्रयत्न किया गया है।”
—डॉ० सत्येन्द्र
Adarsh Shikshak Kaise Hon
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description: शिक्षक कैसे हो? इस प्रश्न का उत्तर अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग प्रकार से दिया जा सकता है। यहाँ पर हम प्राथमिक शिक्षक एवं माध्यामिक शिक्षक की भूमिका की चर्चा करेंगे। विषय को बहुत विस्तुत रूप में लिया जा सकता है; परंतु पुस्तक को एक संक्षिप्त स्वरूप में ही प्रस्तुत करना अभीष्ट था, अतः बहुत विस्तार नहीं किया गया। इसी कारण अनेक पहलू छूट भी गए।
Vitt Vasana
- Author Name:
Shankar
- Book Type:

-
Description:
संसार में सम्पत्ति का, धन का कोई विकल्प नहीं है, मनुष्य ने सभ्य होने के क्रम में जब मुद्रा का आविष्कार किया होगा, तभी यह तय हो गया होगा कि अब कोई न किसी के बराबर होगा, और न कोई कहीं रुककर यह कह सकेगा कि अब बस, मेरी क्षुधा तृप्त हुई। अब कोई कितना भी जमा करके रख सकता था, और कितने भी और की लालसा में डूबा रह सकता था।
और यहीं उस दो बित्ता ज़मीन को हमारे पैरों के नीचे से निकल जाना था जिसे सुख कहते हैं, और जिस पर पाँव जमाकर आदमी कैसे भी झंझावात का सामना कर सकता था।
यह उपन्यास अस्तित्व के उसी आधार-सुख और धन की असीम लालसा के संघर्ष की कथा है। वनबिहारी और शकुन्तला का वह प्यार जिसने किराए के एक छोटे से कमरे में, छोटी-सी एक नौकरी के सहारे एक बड़ा सुख जिया था, बाद में बिजनेस की ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों पर ऊँची उड़ानें भरने लगा। धनाभाव के कारण अपने शिशु को गँवा चुकी शकुन्तला ने ठान लिया कि अब धन के ढेर लगाने हैं तो वनबिहारी ने भी अपना सारा कौशल अपना अलग बिजनेस बड़ा करने में लगा दिया। रास्ते अलग हो गए, और प्रेम कहीं का नहीं रह गया।
लेकिन अन्त में लक्ष्मी ने शकुन्तला की परीक्षा ली और वनबिहारी ने अपनी सम्पन्नता को कभी प्रेमिका रही शकुन्तला के लिए न्योछावर कर दिया, तो जीवन जैसे कई प्रश्न लेकर खड़ा हो गया। यही मर्म है वित्त की इस वासना का।
The Boar Hunt
- Author Name:
V.M. Devadas +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Kochi. Serene. Tranquil. Bright. Also, a burning cradle of bitter rivalries, revolt and rage. Against the sparkling, blue backwaters of the city, a mysterious Grusha rolls the dice on a deadly game of Russian roulette. Former gang members and sworn rivals masquerading as allies re-emerge, aching and hungry for their pound of flesh. Scores need to be settled. And nothing is certain – least of all, getting out alive. Set in the gritty 1980s post-Emergency India, V.M. Devadas’s celebrated crime saga (originally published in Malayalam as Pannivetta) chips away at the twisted and tragic fates of those pulled into the bloody playground of power and deceit. Unabashedly intense, this riveting tale of Kochi’s dark underbelly is a melange of heartbreak and deception that will reverberate in memory long after the last bullet.
Pati-Patani Aur Woh
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

-
Description:
वरिष्ठ उपन्यासकार कमलेश्वर का यह उपन्यास समकालीन समाज में पुरुष मानसिकता को उघाड़कर रख देता है। देहलोलुप पुरुषों की लिप्सा और कुंठा इस उपन्यास का केन्द्रीय विषय है। पत्नी हो या प्रेमिका, स्त्री हर तरह से पुरुषों द्वारा छली जाती है। इस उपन्यास का कथ्य भले ही रोमांटिक और हलका-फुलका लगे, लेकिन यह साधारणता ही इसकी खास विशेषता है।
समकालीन जीवन की कार्यालयी संस्कृति में स्त्रियों की नियति और पुरुष की लोलुपता को लेखक ने इस उपन्यास में गहरी आन्तरिकता से रेखांकित किया है। पूँजीवादी समाज के प्रतिस्पर्द्धामूलक परिवेश की विडम्बनाओं और अन्तर्विरोधों को उजागर करनेवाला यह उपन्यास शिल्प व भाषा की सहजता के लिए भी याद किया जाएगा।
Prem Gali Ati Sankri
- Author Name:
Shazi Zaman
- Book Type:

-
Description:
नाम के बावजूद, परम्परागत मायने में ये कोई प्रेमकथा नहीं, क्योंकि ये किसी तर्कसंगत (दुनियावी मायने में तर्कसंगत) मुक़ाम तक नहीं पहुँचती, लेकिन ये ज़रूर ज़ाहिर करती है कि कोई भी दृष्टिकोण—आधुनिक या परम्परागत—इंसानी ताल्लुक़ात की बारीकी, पेचीदगी और उसके ‘डाइनेमिक्स’ को पूरे तौर पर समझा पाने में सक्षम नहीं है।
‘प्रेम गली अति साँकरी’ की शुरुआत लन्दन के इंडियन वाई.एम.सी.ए. से होती है एक रूहानी बहस के साथ—एक बहस जो कबीर और कल्पना को एक-दूसरे से क़रीब लेकिन इतिहास में बहुत दूर और समाज में बहुत गहरे तक ले जाती है। कहानी का हर पात्र—कबीर, कल्पना, मौलाना, शायर, प्रोफ़ेसर— अपने आप में एक प्रतीक है। इन पात्रों के लन्दन की एक छत के नीचे जमा हो जाने से सामाजिक और व्यक्तिगत परिवेश की परतें खुलती जाती हैं, और कबीर और कल्पना के बीच धूप-छाँव के ताल्लुक़ात से ‘जेंडर रिलेशंज़’ की हज़ारों बरस की आकृति—और विकृति—दिखती जाती है। वो ‘बातों के सवार’ होकर न जाने कहाँ-कहाँ तक चले जाते हैं।
इंडियन वाई.एम.सी.ए. की नाश्ते की मेज़ से शुरू होनेवाली कहानी का आख़िरी (फ़िलहाल आख़िरी) पड़ाव है लन्दन की हाइगेट सीमेट्री—कार्ल मार्क्स की आख़िरी आरामगाह—जहाँ बहस है मार्क्स, क्लास और जज़्बात की। कल्पना का यह आरोप कि मार्क्स ने जगह ही नहीं छोड़ी इंसानी रूह के लिए, ‘बातों के सवार’ को मजबूर करता है यह सोचने पर कि क्या हालात और जज़्बात होते हैं जो हमेशा लोगों को क़रीब और दूर करते रहे हैं।
“ऐसा सबद कबीर का, काल से लेत छुड़ाय,” तुमने कहा।
“कार्ल से लेत छुड़ाय,” मैंने एक ठहाका लगाकर कहा।
ख़ामोश क़ब्रिस्तान में ठहाका काफ़ी देर तक और दूर-दूर तक गूँजता रहा। ‘बातों के सवार’ आसमान के बदलते हुए रंग को देखते रहे।
Crosshatch of Time
- Author Name:
Aswin T Dev
- Book Type:

- Description: Trust, a simple five letter word but a strong one which plays a major role in everyone life. This story is both a fairy tale and a story that shows the reality that life is not always a fairy tale. This tale is about two people, the coincidences in their life leading to different Phase in life. Their journey reaches an abrupt halt due to the distrust between them leading to an unsuccessful marriage. Trust breaks but the love doesn't. They both meet after ten years for their eldest daughter's marriage, the twin brothers come face to face after ten years and the youngest daughter sees her mother's face in real for the first time. A family reunion. Sweet right?? But not for long. Life starts throwing unexpected twists to their life forcing them to trust each other for survival. Can the "two" Trust each other after everything that had happened?? Love was deep inside them but what was on the surface was the broken trust. Can love build back a broken trust??.
Tatvamasi
- Author Name:
Dhruv Bhatt
- Book Type:

-
Description:
‘तत्त्वमसि’ उपन्यास एक ऐसे नायक की कथा है जो सहसा और सहज ही अपने आपको खोजने की एक प्रक्रिया में ख़ुद को पाता है। लेकिन यह ‘आत्मान्वेषण’ ज़िम्मेदारियों से दूर एकान्त में नहीं, बल्कि संघर्ष करते मनुष्यों के बीच प्रकृति के मध्य घटित होता है। मनुष्य को संसाधन माननेवाला यह नायक मनुष्य से ‘मानव’ के रूप में साक्षात्कार करता है। पश्चिम के प्रभावों एवं संस्कारों में लिपटा यह नायक इसी प्रक्रिया में अपने भीतर वर्षों की सोई संस्कृति की जड़ों को अंकुरित होते हुए देखता, अनुभव करता है। इस ‘आत्मान्वेषण’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नायक इस बात से अनभिज्ञ है कि वह ‘आत्मान्वेषण’ की प्रक्रिया में है। विरोध से आरम्भ हुई उसकी यात्रा स्वीकृति में निःशेष होती है।
नर्मदा की भौगोलिक, सांस्कृतिक और जीवन्त उपस्थिति इस उपन्यास की विशिष्टता है।
यथार्थ, फंतासी और कल्पना एक-दूसरे में ऐसे घुल-मिल गए हैं कि यह उपन्यास पढ़ना अपने आपमें एक विशिष्ट अनुभव की प्रतीति कराता है।
जंगल की आग, जंगल की बारिश, जंगल की चुप्पी, जंगल का शोर, जंगल के दिन, जंगल की रातें, जंगलों में रहते आदिवासी, उनकी संस्कृति और परम्पराएँ—सभी कुछ बड़े कौशल के साथ इस उपन्यास में बुना गया है। इसी अर्थ में यह एक भारतीय उपन्यास है।
Dalamber Ka Sapna
- Author Name:
Denis Diberot
- Book Type:

- Description: दिदेरो की यह कृति दरअसल तीन संवादों—‘दलाम्बेर और दिदेरो का संवाद’, ‘दलाम्बेर का सपना’ और ‘संवाद का उत्तर भाग’—की शृंखला है। बेहद दिलचस्प और मौलिक ढंग से विज्ञान के सवालों पर चर्चा करते हुए भी इसका मूल उद्देश्य जीवविज्ञान की प्रस्थापनाएँ प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि अधिभूतवाद, पारम्परिक नैतिकता, अलौकिक शक्तियों में विश्वास और दकियानूसी के विरुद्ध भौतिकवादी नियत्ववाद का बिगुल फूँकना था जिनका इस्तेमाल प्रभुत्वशाली वर्ग बाक़ी मनुष्यों के जीवन को नियंत्रित करने के लिए करता था। दिदेरो की ख़ास शैली में वैज्ञानिक चिन्तन और गीतात्मकता का मेल करनेवाली यह रचना इसीलिए क़रीब ढाई सौ वर्ष बाद भी दुनिया-भर के पाठकों को आकर्षित करती है।
Naya Ghar
- Author Name:
Intizar Hussain
- Book Type:

- Description: नया घर एक परिवार की दास्तान है जिसका सफ़र अतीत में इस्फ़हान के घर से शुरू होता है और हिजरत करता हुआ क़ज़वीन, हिन्दुस्तान और अंत में पाकिस्तान पहुँचकर भी ज़ारी रहता है। इंतिज़ार हुसैन सीधी-सादी ज़बान में आपबीती सुनाते हैं। इनसानी मुक़द्दर, इनसानी जीवन और ब्रह्मांड से सम्बन्धित मूल प्रश्नों पर सोच-विचार के वक्श्त भी इस सहज स्वभाव को क़ाइम रखते हैं। विभाजन के नतीजे में प्रकट होनेवाली सांस्कृतिक, भावात्मक, मानसिक समस्याएँ; एक सर्वव्यापी और साझा इतिहास और उस इतिहास के बनाए हुए सामाजिक संघटन का बिखराव; देशत्याग, साम्प्रदायिक दंगे, सत्ता की राजनीति का तमाशा, पाकिस्तान में तानाशाही, राजनीतिक दमन और मूलतत्ववाद के परिणामस्वरूप सामाजिक स्तर पर प्रकट होनेवाली घुटन और सामूहिक मूर्खताओं का एहसास; फिर विरोध और अभिव्यक्ति-स्वातंत्रय की वह लहर जो वैयक्तिक सत्ता के विरुद्ध सामूहिक नफ़रतों को अभिव्यक्त करती है - नया घर में इन सारी घटनाओं का रचनात्मक चित्रण मिलता है। पिछले चालीस बरसों (‘नया घर’ 1987 ई. में प्रकाशित हुआ था) में होनेवाली हर वह राजनीतिक घटना जिससे सामूहिक दृष्टि प्रभावित हुई है, इंतिज़ार हुसैन की रचनात्मक प्रक्रिया और प्रतिक्रिया में उसकी गूँज सुनाई देती है। इंतिज़ार हुसैन ने एक बहुत बड़े कैनवस की कहानी को यहाँ ‘मिनिएचर’ रूप में प्रस्तुत किया है। कहानी का हर पात्र और हर घटना चित्रण में इस तरह गुँथा हुआ है कि सारे घटक एक दूसरे की संगति में ही अपने अर्थ तक पहुँचते हैं। अतीत की धुंध को चीरती हुई कहानी वर्तमान का भाग इस तरह बनती है कि दोनों कहानियाँ अपने अलग-अलग स्तरों पर भी जीवित रहती हैं। ‘नया घर’ एक सिलसिला भी है और विभिन्न मूल्यों, रवैयों, परम्पराओं और दो ज़मानों के बीच एक संग्राम भी।
Chaak
- Author Name:
Maitreyi Pushpa
- Book Type:

-
Description:
‘चाक’ सामन्ती समाज के भीतर व्याप्त हिंसा और स्वार्थों की टकराहट की प्रामाणिक कहानी है। इस समाज का ताना-बाना हिंसा और सेक्स से बना है। मैत्रेयी इन दोनों को ही एक कथाकार की निगाह से पात्रों के आचार-विचार और सोच के रूप में प्रभावशाली ढंग से पकड़ती हैं। ‘चाक’ में बिना बड़बोलेपन के उन्होंने गाँव की स्त्री की जिस चेतना का विकास किया है, वह उपन्यास-कला पर उनकी पकड़ को रेखांकित करता है।
— राजेन्द्र यादव
जिस लोकजीवन से हमारी रचनात्मक धारा काफ़ी पहले विमुख हो चुकी थी, उसकी अनेक परतें मैत्रेयी पुष्पा ने खोल दी हैं। मैत्रेयी पुष्पा को उनकी मामूली लेकिन ज़बरदस्त स्त्रियों के कारण याद किया जाएगा।
— ज्ञानरंजन
मैत्रेयी में मानवीय भावों की सघन अन्तरंगता और सम्बन्धों की जटिलता को चित्रित करने की अनोखी क्षमता मौजूद है।
— परमानन्द श्रीवास्तव
स्त्री की कथादृष्टि ही नहीं, उसकी शैली और वाक्य-रचना भी पुरुष से भिन्न होती है। इसका प्रमाण ‘चाक’ की कथा-संरचना और कथा-भाषा में दिखाई देता है। ‘चाक’ की कथा एक स्तर पर गद्य में चलती है और इसके साथ दूसरे स्तर पर लोकगीतों में।
— मैनेजर पाण्डेय।
Ek Ghoont Chandani
- Author Name:
Rakesh Kumar Singh
- Book Type:

-
Description:
यह छोटा-सा उपन्यास प्रेम की एक बड़ी कहानी है—प्रेम की, और प्रेम की खोज की और प्रेम के विस्तार की। कहानी खोए हुए प्रेम को ढूँढ़ने की, और मिल गए प्यार को बचाए रखने की।
प्यार की कोई एक परिभाषा नहीं होती, प्यार की परिभाषा से कभी कोई रिश्ता तय भी नहीं किया जा सकता; इस तथ्य को जानते हुए भी समाज, संसार प्यार को किसी न किसी रिश्ते में बाँध देना चाहता है, जहाँ वह धीरे-धीरे अपने सत्त्व को, अपनी ऊष्मा को खो देता है। यह कथा एक अनन्त और अकुंठ प्यार को सँजोए रखने की भीतरी जद्दोजहद की कहानी है। इसकी अपनी रवानी है, जैसे प्यार की होती है...और है अपने ढंग की पढ़त भी।
—इसी पुस्तक से
Kumbhipak
- Author Name:
Nagarjun
- Book Type:

- Description: नरक की रचना जिन जीवन-स्थितियों से हुई होगी, नागार्जुन का यह उपन्यास उन्हीं के शब्दांकन का परिणाम है। एक ही मकान में रहनेवाले छह किराएदारों की जीवनचर्या पर केन्द्रित यह उपन्यास हमारे ‘विकासमान' नागर-जीवन के जिस सामाजिक यथार्थ की परतें खोलता है, प्रकारान्तर से वह समूचे भारतीय जीवन का यथार्थ है, क्योंकि स्त्री के प्रति पदार्थवादी नज़रिए की कहीं कोई कमी नहीं। आर्थिक अभावों में पिसती अनेकानेक निर्दोष जीवनेच्छाएँ किस प्रकार भोगवाद की भट्टी में झोंक दी जाती हैं, उनकी पीड़ा और मुक्तिकामी छटपटाहट को नागार्जुन ने गहरी आत्मीयता से उकेरा है। साथ ही, नागार्जुन यहाँ उस दृष्टि को प्रस्थापित करते हैं जो स्त्री की सामाजिक भूमिका और मानवीय गरिमा के प्रति सचेत है।
Aakash Pakshi
- Author Name:
Amarkant
- Book Type:

-
Description:
वरिष्ठ कथाकार अमरकान्त का यह उपन्यास एक निर्दोष और संवेदनशील लड़की की कथा है, जिसके इर्द-गिर्द भारतीय सामन्तवाद के अवशेषों की नागफनियाँ फैली हुई हैं। उनका कुंठाजनित अहंकार, हठधर्मिता और सर्वोच्चता का मिथ्या भाव उसकी सहज मानवीय इच्छाओं और आकांक्षाओं को बाधित करता है।
भारतीय समाज से सामन्तवाद के समाप्त होने के बावजूद अपने स्वर्णिम युगों का खुमार एक वर्ग विशेष में लम्बे समय तक बचा रहा, और आज भी जहाँ-तहाँ यह दिखाई पड़ जाता है। गुज़रे ज़मानों की स्मृतियों के सहारे जीते हुए ये लोग नए समय के मूल्यों-मान्यताओं को जहाँ तक सम्भव हो, नकारते हैं, और उनकी शिकार होती हैं वे नई नस्लें जो जिन्दगी और समाज को नए नज़रिए से देखना, जानना और जीना चाहती हैं।
इस उपन्यास की पंक्तियों में बिंधी व्यथा उन लोगों के लिए एक चेतावनी की तरह है जो आज भी उन बीते युगों को जीने की कोशिश करते हैं।
Assam Ki Lokkathayen
- Author Name:
Suman Bajpai
- Book Type:

- Description: विद्वानों का मत है कि ‘असम’ शब्द संस्कृत के ‘असोमा’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है—अनुपम या अद्वितीय। किंतु अधिकतर विद्वानों का मानना है कि यह शब्द मूल रूप से ‘अहोम’ से बना है। असम राज्य में संस्कृति और सभ्यता की एक प्राचीन और समृद्ध परंपरा रही है। इसका प्रभाव यहाँ के लोकसाहित्य में भी देखने को मिलता है, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपा जाता जा रहा है। इसकी लोककथाओं के माध्यम से यहाँ के लोगों के जीवन और संस्कृति के विविध पहलुओं को जानने का अवसर मिलता है। असम में प्रचलित लोककथाओं को ‘साधु कथा’ कहा जाता है। यहाँ की लोककथाएँ अलौकिक घटनाओं से परिपूर्ण होती हैं। असम तंत्र-मंत्र, जादू-टोना एवं आध्यात्मिकता का केंद्र है। अतः लोककथाओं में तंत्र-मंत्र का समावेश भी देखने को मिलता है और रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी घटनाओं को जोड़कर भी कथाएँ बनाई गई हैं। कल्पना और वास्तविकता के समन्वय और उनके रहन-सहन और परिवेश का आईना हैं असम की लोककथाएँ। उनकी बोली, खान-पान और गुजर-बसर करने के तरीकों के बारे में भी इन लोककथाओं के माध्यम से जानने का मौका मिलता है। इस पुस्तक में ऐसी ही कुछ लोककथाएँ संगृहीत हैं, जो असम की गौरवशाली विरासत व संस्कृति का बोध कराती हैं।
Ve Aankhen
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

-
Description:
इस संसार में कोई भी ऐसा नहीं है जो पूरे विश्वास के साथ कह सके, कि वह सुखी है। जो ऐसा कहता है, वह या तो जान-बूझकर झूठ बोलता है या फिर उसे समझ ही नहीं है कि सुख क्या होता है।
इस कथा-पुस्तक की केन्द्रीय विषयवस्तु यही है। अविनाश दा की कविताओं से शब्द की महत्ता का पाठ पढ़कर कथानायक जीवन की कथा कहने बैठता है जिसमें उसके पास-पड़ोस से लेकर दिल्ली-मुम्बई तक फैले पात्रों के दु:ख-कर्म शामिल हैं। इतिहास जिस तरह आगे बढ़ता है, आदमी का जीवन भी छोटे रूप में उसी तरह ऊपर-नीचे होता हुआ बढ़ता रहता है। उसमें तरह-तरह के बदलाव आते हैं, कई बार तो ऐसे कि कुछ अन्तराल के बाद उनसे मिलो तो जैसे पहचानना ही मुश्किल हो जाता है।
अलग-अलग कथा-सूत्रों के माध्यम से बिमल मित्र यहाँ जीवन और साहित्य के रिश्ते पर, मनुष्य की विचित्र नियति पर, समाज के मुखौटों पर अलग-अलग कोणों से दृष्टिपात करते हैं। अविनाश दा, सत्य सुन्दर और मिसेज राय, अशेष दत्त, मुकुल राय जैसे पात्रों की इन कहानियों में जीवन के कई चित्र ऐसे हैं जो इस संसार के प्रति प्रेम भी जगाते हैं, मोह भी और वितृष्णा भी।
Krishnavtar : Vol. 7 : Yudhishthir
- Author Name:
K. M. Munshi
- Book Type:

-
Description:
सुविख्यात गुजराती उपन्यासकार कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी की बहुचर्चित और बहुपठित उपन्यास-माला ‘कृष्णावतार’ के पूर्वप्रकाशित छह खंडों—‘बंसी की धुन’, ‘रुक्मिणी हरण’, ‘पाँच पाण्डव’, ‘महाबली भीम’, ‘सत्यभामा’ तथा ‘महामुनि व्यास’—के बाद ‘युधिष्ठिर’ नामक यह सातवाँ खंड है। साथ ही आठवाँ, किन्तु अधूरा खंड ‘कुरुक्षेत्र’ भी। मुंशी जी इससे इस ग्रन्थमाला का समापन करनेवाले थे।
‘महाभारत’ में युधिष्ठिर ‘धर्मराज’ के रूप में विख्यात इतिहासपुरुष हैं। अधर्म, अशान्ति और रक्तपात से उन्हें घोर विरक्ति है। उनकी राजनीति धर्म-साधना का माध्यम-भर है—धर्म को उसका साधन नहीं बनाया जा सकता। यह जानते हुए भी कि कौरव उनका और उनके भाइयों का सर्वस्व हड़प जाना चाहते हैं, युद्ध उन्हें स्वीकार्य नहीं। यही कारण है कि दुर्योधन और शकुनि के षड्यंत्र को जानते हुए भी वे द्यूतसभा का बुलावा स्वीकार कर लेते हैं और भाइयों आदि के निषेध के बावजूद लगातार हारते चले जाते हैं। उपन्यास में इस समूचे घटनाक्रम के दौरान युधिष्ठिर के अन्तर्द्वन्द्व और बेचैनी का मार्मिक अंकन हुआ है। वनवास और अज्ञातवास के बावजूद अन्ततः उन्हें ‘कुरुक्षेत्र’ जाना पड़ा।
और ‘कुरुक्षेत्र’ अधूरा है—यहाँ और जीवन, दोनों जगह। पता नहीं, कब से यह कुरुक्षेत्र हमारे बाहर-भीतर अपूर्ण है और कब तक रहेगा? पर शायद मानव-विकास का बीज भी इसी अपूर्णता में निहित है।
Tathagat Phir Nahi Aate
- Author Name:
Pradeep Garg
- Book Type:

-
Description:
सिद्धार्थ सोलह वर्ष की आयु में विवाह के पश्चात् तेरह वर्ष तक नाच-गाना देखते-सुनते हुए राजभवन में ही बैठे रहे। एक दिन जब राजमहल से बाहर निकले तो एक वृद्ध पुरुष, एक रोगी और फिर एक शव को देख ऐसी विरक्ति मन में उत्पन्न हुई कि गृहत्याग कर परिव्रजित हो गये। यह कथा सामान्यतः प्रचलित अवश्य है परन्तु वस्तुतः गौतम बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर प्राचीनतम एवं विद्वानों के मतानुसार सर्वाधिक प्रामाणिक ग्रंथों 'त्रिपिटक' के अनुसार इस कथा की सच्चाई में सन्देह करने के पर्याप्त कारण हैं।
तत्कालीन विश्व और भारतवर्ष के समाज तथा उनकी राजनीति को समझने का प्रयास करती हुई यह पुस्तक उन गुरुओं, जिनमें से कई स्वयं को 'बुद्ध घोषित कर चुके थे, के परस्पर तर्क- वितर्क की श्रोता तो बनती ही है; तक्षशिला विश्वविद्यालय में संसार भर से आये ज्ञानपिपासुओं की बौद्धिक चर्चा में सहभागी भी बनती है; और उस अद्भुत वैचारिक आन्दोलन की साझीदार भी जब जम्बूद्वीप के हर नगर, कसबे और गाँव में स्थापित कुतुहलशालाओं में जीवन और अस्तित्व के आधारभूत प्रश्नों पर वाद-विवाद अनवरत ही हो रहा था।साथ ही, कपिलवस्तु, वैशाली, राजगृह, कौशाम्बी, श्रावस्ती इत्यादि नगरों में पड़ाव करते हुए यह यात्रा उस काल के अभूतपूर्व वैभव और जनमानस में विभिन्न कारणों से पनपते विद्रोह की साक्षी बनती है व उस घटनाचक्र की भी जिसने मगध साम्राज्य के जन्म को अवश्यम्भावी कर दिया।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book