Pighalti Dhoop Mein Saye
(0)
Author:
Amar KushwahaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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यह उपन्यास उस युवा वर्ग पर आधारित है जिसने ग्रामीण परिवेश के निम्न मध्यवर्गीय परिवार में संक्रमण के दौर में जन्म लिया और तेज़ी से बढ़ रहे भूमंडलीकरण के कारण बड़े सपने देखने लगा।</p> <p>उत्तर भारत के राज्यों में आज भी 'बड़े सपने' का मतलब केवल 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' में चयन होना है, ऐसा कहना बिलकुल भी ग़लत नहीं होगा। और इसी स्वप्न को पूरा करने की चाह में यह युवा वर्ग इस स्वप्न में इतना डूब जाता है कि कभी-कभी तो वह अपनी स्वयं की पहचान तक भूलने को विवश हो जाता है। वह मनुष्य न होकर मशीन जैसा होने लगता है और चयन के बाद संघर्ष के पथ में बिखरे अनेक क्षणों को बस देखता-सा रह जाता है।</p> <p>यह कहानी एक ऐसे ही नायक की है, जो एक स्वप्न की पूर्ति के लिए कितने ही सपनों को तिलांजलि दे देता है, यहाँ तक कि अपने अन्तर्मन से भी कट जाता है।</p> <p>टूटता घर, एकाकीपन, बेरोज़गारी, पारिवारिक महत्त्वाकांक्षा और ‘एक बड़े स्वप्न के बीच के मानसिक द्वन्द्व का चित्रण इस उपन्यास के महत्त्वपूर्ण पक्ष को दर्शाता है।
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यह उपन्यास उस युवा वर्ग पर आधारित है जिसने ग्रामीण परिवेश के निम्न मध्यवर्गीय परिवार में संक्रमण के दौर में जन्म लिया और तेज़ी से बढ़ रहे भूमंडलीकरण के कारण बड़े सपने देखने लगा।</p>
<p>उत्तर भारत के राज्यों में आज भी 'बड़े सपने' का मतलब केवल 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' में चयन होना है, ऐसा कहना बिलकुल भी ग़लत नहीं होगा। और इसी स्वप्न को पूरा करने की चाह में यह युवा वर्ग इस स्वप्न में इतना डूब जाता है कि कभी-कभी तो वह अपनी स्वयं की पहचान तक भूलने को विवश हो जाता है। वह मनुष्य न होकर मशीन जैसा होने लगता है और चयन के बाद संघर्ष के पथ में बिखरे अनेक क्षणों को बस देखता-सा रह जाता है।</p>
<p>यह कहानी एक ऐसे ही नायक की है, जो एक स्वप्न की पूर्ति के लिए कितने ही सपनों को तिलांजलि दे देता है, यहाँ तक कि अपने अन्तर्मन से भी कट जाता है।</p>
<p>टूटता घर, एकाकीपन, बेरोज़गारी, पारिवारिक महत्त्वाकांक्षा और ‘एक बड़े स्वप्न के बीच के मानसिक द्वन्द्व का चित्रण इस उपन्यास के महत्त्वपूर्ण पक्ष को दर्शाता है।
Book Details
-
ISBN9788183619813
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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इस उपन्यास में महात्मा गांधी की मूल्य चेतना के साथ ही साथ उस महत्व की भी खोज की गई है जिससे एक वैश्विक सामरस्य का सृजन सम्भव हो सकता है। पुरुष सत्तात्मक व्यवस्था के प्रति विद्रोह के साथ ही साथ संभव बराबरी का लक्ष्य इस उपन्यास से निरन्तर बना हुआ है। त्याग, प्रेम, समता और करुणा के साथ-साथ इसमें इन मूल्यों के कारण मनुष्य में होने वाली हलचलों का संकेत औपन्यासिक शिल्प के विकास और क्षमता का भी प्रमाण प्रस्तुत करता है।
अर्थमय जगत में आत्म संस्कार की आवश्यकता महात्मा गांधी की ही तरह इस उपन्यास में सृजनात्मक आदर्श की तरह संरचना के साथ बुनी हुई है। सेवा भावना निष्कामना के साथ जुड़कर वाटसन और स्मिथ आदि चरित्रों का निर्माण कर सकी है।
वर्तमान हिन्दी उपन्यास को समझने में ही नहीं बल्कि आधुनिक चेतना तथा सत्याग्रहकालीन दृष्टि के संतुलन और वैषम्य की दृष्टि से भी यह उपन्यास महत्त्वपूर्ण है।
Cheramanuni Preyasi
- Author Name:
Kannadasan +1
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చేరమానుని ప్రేయసి చేరమాన్ కాదలి నవలలోని కథానాయకుడు భాస్కర రవివర్మ రెండో చేరమాన్ పెరుమాళ్ బావమరిది కుమారుడు. ఇతని మొదటి ప్రియురాలు యూదు యువతి యూజియానా ఆమె గర్భవతి అయింది. నంబూద్రీల కుట్ర వలన ఇజ్రాయిల్కు పంపించేస్తారు. రెండో ప్రియురాలు ముస్లిం మహిళ సలీమా. ఈమె సంబంధీకులు రవివర్మని ముస్లీంగా మత మార్పిడి చేశాక, మూడో చేరమాన్ పెరుమాళ్ తన ముస్లీం భార్యతో అరేబియా రేవు పట్టణం చేరి అక్కడ నుంచి మక్కా వెళ్లి మహమ్మదీయ మతస్థునిగా మారి అబ్దుల్ రహమాన్ చామొరియన్గా మతం మార్చుకుని జబార్ అన్న ఊరిలోకి చేరుకుని కొంత కాలం జీవించాడు... కాలక్రమేణా వృద్ధాప్యం పైబడి మహమ్మదీయస్తీ పరిచర్యలో కొంత కాలం జీవించాడు... రవివర్మ జబార్లోనే క్రీ.త. 838లో చనిపోయాడు... ఆయనకా ఊరిలోనే ఆయన శరీరాన్ని ఖననం చేసి సమాధి కట్టారు... దాని మీద చేరదేశ రాజు 'అబ్దుల్ రెహమాన్ చామొరియన్' ఈయన ఏ. ఎచ్ -212లో వచ్చి ఏ. ఎచ్-216లో మరణించారు అని ఆరేబియన్ భాషలో రాసుంది. 'చేరమాన్' అన్న చారిత్రాత్మిక నవల తమిళంలో ప్రసిద్ధ కవి, రచయిత కీ.శే. కణ్ణదాసన్ గారు... అనేక సినిమాలకు (తమిళ) పాటలు, సంభాషణలు రాశారు. వారి 'చేరమాన్ కాదలి'కి 1983లో సాహిత్య అకాదెమి పురస్కారం లభించింది.
Evening
- Author Name:
Neeraj
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It is a story of an Indian boy--his innocent childhood, his fascinating family, his adventurous friendship, his adorable first crush, his struggles, his pain, and his journey to the ??? Let's keep it a suspense, shall we??? It is a touching story based on real life. and it gives its readers a meaningful experience. Nikhil is a small town boy, who is enjoying his childhood with his best friend, Akshay. He has a loving family and shares a special bond with his grandfather. As the kids grow up, they face their ups and downs, failure and success, pain and wisdom. It is a cute and fascinating story about childhood , friendship and love. It's a story about school life, and all the fun and drama associated with it. So, grab a copy and relive those innocent childhood moments! A good story leaves its readers with a beautiful experience, and justifies their effort of reading it. --- NEERAJ
Kankal (Raj)
- Author Name:
Jaishankar Prasad
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Awating description for this book
Rui Lapeti Aag
- Author Name:
Avadhesh Preet
- Book Type:

- Description:
परमाणु हथियारों की जरूरत किसे है, देशों और उनके नक़्शों को? वहाँ रहने वाले लोगों को, या उन लोगों के डरों को अपनी सत्ताकांक्षा की खुराक बनाने वाले राष्ट्राध्यक्षों को? या यह सिर्फ संसार के शक्ति-सन्तुलन की माँग है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती?
‘रुई लपेटी आग’ के केन्द्र में मूलत: यही प्रश्न हैं जिन्हें उपन्यास अपनी विशिष्ट कथा-शैली में धीरे-धीरे जरूरी प्रश्नों के तौर पर स्थापित कर देता है। कथा का एक सिरा संगीत है और दूसरा पोखरण। वही पोखरण जहाँ 1974 और फिर 1998 में भारत ने अपने सफल परमाणु परीक्षण किए थे और जिनके चलते दुनिया के परमाणु शक्ति-सम्पन्न देशों की श्रेणी में सम्मानित जगह बना पाया था। दूसरी तरफ पखावज है जिसकी रचना, एक किंवदन्ती के अनुसार, शिव के तांडव को लयबद्ध करने के लिए ब्रह्मा ने की थी ताकि सृष्टि के विनाश को रोका जा सके।
पखावज उस विनाश को रोक तो नहीं पाता लेकिन उससे पैदा हुए घावों को खुली आँखों से देखते हुए अपनी असहमति ज़रूर व्यक्त करता है। हिरोशिमा और नागासाकी को एक चेतावनी की तरह याद रखते हुए पखावज की साधिका अरुंधति पोखरण से मात्र चार किलोमीटर दूर स्थित खेतोलाई गाँव की भूमि को अपने कार्यक्रम के लिए चुनती है। पोखरण में हुए परमाणु विस्फोट के परिणामस्वरूप राजस्थान के इस गाँव में आज ऐसा कोई घर नहीं है जहाँ एक-दो लोग गम्भीर बीमारियों के शिकार नहीं हैं।
उपन्यास में भारत की उस सहज जीवनशैली को बखूबी रेखांकित किया गया है जिसमें विभिन्न समुदायों की सहजीविता समाज के सहजबोध का हिस्सा है, और जो बीच-बीच में साम्प्रदायिक राजनीति का शिकार होते रहने के बावजूद अभी तक बची हुई है।
लेकिन केंद्रीय प्रश्न परमाणु शक्ति की नैतिक वैधता का ही है, रुई में लिपटी रखी उस आग के औचित्य का जो कभी भी भड़क सकती है और पूरी मानव-जाति के विनाश का कारण बन सकती है।
Jhoola Nat
- Author Name:
Maitreyi Pushpa
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गाँव की साधारण–सी औरत है शीलो—न बहुत सुन्दर और न बहुत सुघड़...लगभग अनपढ़—न उसने मनोविज्ञान पढ़ा है, न समाजशास्त्र जानती है। राजनीति और स्त्री–विमर्श की भाषा का भी उसे पता नहीं है। पति उसकी छाया से भागता है। मगर तिरस्कार, अपमान और उपेक्षा की यह मार न शीलो को कुएँ–बावड़ी की ओर धकेलती है, और न आग लगाकर छुटकारा पाने की ओर। वशीकरण के सारे तीर–तरकश टूट जाने के बाद उसके पास रह जाता है जीने का नि:शब्द संकल्प और श्रम की ताक़त एक अडिग धैर्य और स्त्री होने की जिजीविषा...उसे लगता है कि उसके हाथ की छठी अँगुली ही उसका भाग्य लिख रही है...और उसे ही बदलना होगा।
‘झूला नट’ की शीलो हिन्दी उपन्यास के कुछ न भूले जा सकनेवाले चरित्रों में एक है। बेहद आत्मीय, पारिवारिक सहजता के साथ मैत्रेयी ने इस जटिल कहानी की नायिका शीलो और उसकी ‘स्त्री–शक्ति’ को फ़ोकस किया है–––
पता नहीं ‘झूला नट’ शीलो की कहानी है या बालकिशन की! हाँ, अन्त तक, प्रकृति और पुरुष की यह ‘लीला’ एक अप्रत्याशित उदात्त अर्थ में ज़रूर उद्भासित होने लगती है।
निश्चय ही ‘झूला नट’ हिन्दी का एक विशिष्ट लघु उपन्यास है…।
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