Nakshe Kadam : Naye Purane
(0)
Author:
Shyam Krishna PandeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
350
₹ 280 (20% off)
Available
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यह उपन्यास पूर्व स्वतंत्रता काल से लेकर वर्तमान तक की राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक स्थिति को इलाहाबाद के पटल पर रखकर बहुत बारीकी के साथ एक विराट कैनवास पर उकेरता है। इसकी कथा-गाथा 'मल्टी डायममेंशनल' है। आज के युवा को उसकी शानदार विरासत से जोड़ने की सार्थक पहल की गई है। युवा एक शक्ति-समूह है। नई 'पीढ़ी के हाथ में ही नया भारत है। उस शक्ति को इस उपन्यास के माध्यम से सकारात्मक मोड़ देने में रचनाकार सफल है।</p> <p>लेखक ऐसे परिवार से हैं, जिसके पूर्वजों का स्वतंत्रता-संग्राम में पीढ़ी-दर-पीढ़ी योगदान रहा है। इसलिए इस कृति में स्वतंत्रता आन्दोलन की अब तक अनजानी या विस्मृत महत्त्वपूर्ण घटनाओं का प्रामाणिक एवं सजीव दस्तावेज़ीकरण है।</p> <p>लेखक भारतीय छात्र आन्दोलन की परम्परा से 1960 से 1970 के दशक के दौरान शीर्ष स्तर पर गहराई से जुड़े रहे हैं। इसलिए स्वाधीनता के बाद उपजे युवा आक्रोश और समकालीन राजनीतिक विचारधाराओं की सोच-समझ का इस उपन्यास में अन्तरंग विवरण एवं समालोचन है। भारत के राष्ट्रस्तरीय पर्वों के आयोजन के मूल भाव का विशद वर्णन और उनके ‘सर्व धर्म सद्भाव' के शाश्वत सन्देशों की व्याख्या है। यह उपन्यास राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्रों तथा युवा पीढी से जुड़े व्यक्तियों के अतिरिक्त सामान्य पाठकों के लिए भी पठनीय है। इसमें आद्योपान्त रोचकता है, विभिन्न समयकाल की धड़कन है, स्पन्दन है।
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यह उपन्यास पूर्व स्वतंत्रता काल से लेकर वर्तमान तक की राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक स्थिति को इलाहाबाद के पटल पर रखकर बहुत बारीकी के साथ एक विराट कैनवास पर उकेरता है। इसकी कथा-गाथा 'मल्टी डायममेंशनल' है। आज के युवा को उसकी शानदार विरासत से जोड़ने की सार्थक पहल की गई है। युवा एक शक्ति-समूह है। नई 'पीढ़ी के हाथ में ही नया भारत है। उस शक्ति को इस उपन्यास के माध्यम से सकारात्मक मोड़ देने में रचनाकार सफल है।</p>
<p>लेखक ऐसे परिवार से हैं, जिसके पूर्वजों का स्वतंत्रता-संग्राम में पीढ़ी-दर-पीढ़ी योगदान रहा है। इसलिए इस कृति में स्वतंत्रता आन्दोलन की अब तक अनजानी या विस्मृत महत्त्वपूर्ण घटनाओं का प्रामाणिक एवं सजीव दस्तावेज़ीकरण है।</p>
<p>लेखक भारतीय छात्र आन्दोलन की परम्परा से 1960 से 1970 के दशक के दौरान शीर्ष स्तर पर गहराई से जुड़े रहे हैं। इसलिए स्वाधीनता के बाद उपजे युवा आक्रोश और समकालीन राजनीतिक विचारधाराओं की सोच-समझ का इस उपन्यास में अन्तरंग विवरण एवं समालोचन है। भारत के राष्ट्रस्तरीय पर्वों के आयोजन के मूल भाव का विशद वर्णन और उनके ‘सर्व धर्म सद्भाव' के शाश्वत सन्देशों की व्याख्या है। यह उपन्यास राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्रों तथा युवा पीढी से जुड़े व्यक्तियों के अतिरिक्त सामान्य पाठकों के लिए भी पठनीय है। इसमें आद्योपान्त रोचकता है, विभिन्न समयकाल की धड़कन है, स्पन्दन है।
Book Details
-
ISBN9789389742879
-
Pages280
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: This book contains 38 Nano tales by different authors depicting life, motivation and inspiration. This is the world’s first book to be published on Nano tales. Nano tale is a small story written in little words with a strong message. The figure of speech used by the writers is at its best. Irony, rhetoric, sarcasm, pun, and satire are some essential tools of a Nano tale. The words are limited, but the message is loud and clear.
Pramod
- Author Name:
Chitra Singh
- Book Type:

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Description:
जीवन का हर पल यदि इस भाव से जिया जाए, जैसे वही अन्तिम पल हो, तो जीवन की सार्थकता बढ़ जाती है। ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जब कुछ लोगों ने जीवन को इसी भाव से जिया और समाज पर गहरी छाप छोड़ गए। यह कृति आत्मकथ्यात्मक शैली में लिखा गया एक ऐसा उपन्यास है, जिसे लेखिका ने 30 वर्षों के निजी अनुभवों और भावनाओं के निचोड़ की स्याही से लिपिबद्ध किया है। बेहद प्रवाहमय और भावपूर्ण शब्दांकन के इस ताने-बाने में आपको कई चित्रों में अपने जीवन के ही ऐसे परिचित अक्स नज़र आएँगे जो आपको संघर्षों से उबरने और धीरज के साथ हर समस्या को सुलझाने की प्रेरणा देंगे।
Ji Ji Ji
- Author Name:
Pandey Bechan Sharma 'Ugra'
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Description:
मुरली : मुरली ठाकुर मेरा नाम है और जीजीजी मेरी बड़ी बहन हैं, जिन्हें मेरे जनम के पहले ‘प्रभा’ कहकर पुकारा करते...अकसर मैं जीजीजी को समझाता हूँ कि वे माँ की अनुचित बातों पर विद्रोह क्यों नहीं करतीं...!
मंगला प्रसाद : अपनी प्राण से प्यारी, पुत्र की तरह पाली हुई पुत्री को मैट्रिक तक पढ़ाकर इंतेहान में नहीं बैठाया। एक-एक कर सारी मानवी स्वतंत्रताएँ उसकी अपहरण कर ली गईं।...स्त्री का प्रेम पाने के लिए उसके चुनिन्दे पुरुष को अपनी लड़की तक दे देना। स्त्री भी वह जो कन्या की माँ नहीं।
जीजीजी : एक औरत की हैसियत से मैं सदा हताश और निराश हुई और सिवा पुरुषों की रुचि रखने के दूसरी कोई गति सचमुच मुझे स्त्रियों की नज़र नहीं आई। प्रायः सारे संसार का इतिहास स्त्रियों पर पुरुषों के अत्याचार से भरा है।
नरकू : मगर उक्त सारी बातें मनगढ़ंत थीं, चित्र की युवती का मुँह तो जीजीजी की तरह मैंने बनाया था—नाक उनकी ज़रा सुधार कर। कोई दस हज़ार बार असफल स्केच करने के बाद जीजीजी का चित्र अब मेरी उँगलियों में उतर आया है।
Samar Shesh Hai
- Author Name:
Abdul Bismillah
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Description:
अब्दुल बिस्मिल्लाह बहुचर्चित और बहुमुखी प्रतिभा-सम्पन्न रचनाकार हैं। ‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’ उपन्यास के लिए इन्हें ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है।
‘समर शेष है’ अब्दुल बिस्मिल्लाह का आत्म-कथात्मक उपन्यास है। कथा-नाटक है, सात-आठ साल का मातृविहीन एक बच्चा, जो कि पिता के साथ-साथ स्वयं भी भारी विषमता से ग्रसित है। लेकिन पिता का असामयिक निधन तो उसे जैसे एक विकट जीवन-संग्राम में अकेला छोड़ जाता है। पिता के सहारे उसने जिस सभ्य और सुशिक्षित जीवन के सपने देखे थे, वे उसे एकाएक ढहते हुए दिखाई दिए। फिर भी उसने साहस नहीं छोड़ा और पुरुषार्थ के बल पर अकेले ही अपने दुर्भाग्य से लड़ता रहा। इस दौरान उसे यदि तरह-तरह के अपमान झेलने पड़े तो किशोरावस्था से युवावस्था की ओर बढ़ते हुए एक युवती के प्रेम और उसके ह्रदय की समस्त कोमलता का भी अनुभव हुआ। लेकिन इस प्रक्रिया में न तो वह कभी टूटा या पराजित हुआ और न ही अपने लक्ष्य को भूल पाया। कहने की आवश्यकता नहीं कि विपरीत स्थितियों के बावजूद संकल्प और संघर्ष के गहरे तालमेल से मनुष्य जिस जीवन का निर्माण करता है, यह कृति उसी की सार्थक अभिव्यक्ति है।
Thake Paon
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
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Description:
प्रस्तुत उपन्यास ‘थके पाँव’ सामाजिकता, बौद्धिकता और भावनात्मक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
भगवतीचरण वर्मा हिन्दी जगत के जाने-माने विख्यात उपन्यासकार हैं। आपके सभी उपन्यासों में एक विविधता है। हास्य व्यंग्य, समाज, मनोविज्ञान और दर्शन सभी विषयों पर उपन्यास लिखे हैं। कवि और कथाकार होने के कारण वर्मा जी के उपन्यासों में भावनात्मक और बौद्धिकता का सामंजस्य मिलता है। वर्मा जी के उपन्यासों को पढ़ते समय यह सदा ध्यान रखना चाहिए कि वे मूलत: एक छायावादी और प्रगतिवादी कवि हैं और उनके कथा साहित्य में कविता की भावना की प्रधानता बौद्धिक यथार्थ से कभी अलग नहीं होती। उपन्यासों के अब तक परम्परागत शिथिल और बने-बनाए रूप-विन्यास और कथन-शैली की नई शक्ति और सम्पन्नता ही नहीं, वरन् कथावस्तु का नया विस्तार भी मिला।
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