NIRJHARNI
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"चंद्रमा का प्रकाश उसका अपना नहीं, यह तो सूरज का प्रतिबिंब है। लेखिका का मानना है कि इसी तरह उसके व्यक्तित्व में जो चमक है, वह तो उसके आराध्य या मनमीत के व्यक्तित्व का ही प्रतिबिंब है। कवयित्री पॉश कॉलोनी में रहती है, फिर भी उसने एअरकंडीशंड रूम में बैठकर कविताएँ नहीं लिखी हैं। उसने प्रकृति के विविध वर्णी रूपों के बीच अपने को स्थापित किया है। प्रत्येक संग्रह की कविताओं में पीले पत्ते, मलय पवन, कोंपल, कोयल, भ्रमर, सूर्यकिरण, ओसबिंदु, इंद्रधनुष, तितलीपंख, मेहँदी, मृगछौना, धूप, बादल, लैंपपोस्ट, उजड़ा उपवन आदि को प्रतीकों के रूप में स्वीकार किया है। कविताओं में नए प्रतीक, नए बिंब और नए मुहावरों का प्रयोग किया है। उसकी कविताओं में गहरी अनुभूति की सफल अभिव्यक्ति हुई है। जो कुछ कहा गया है, उसका एकएक शब्द सार्थक और सच्चा है, फिजूल का शब्द एक भी नहीं है। कवयित्री ने कविताएँ लिखी नहीं हैं, कविताओं ने अपने को उससे लिखवा लिया है। काव्यरस से सराबोर ये कविताएँ सभी आयु वर्ग के पाठकों को रुचिकर लगेंगी।"
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"चंद्रमा का प्रकाश उसका अपना नहीं, यह तो सूरज का प्रतिबिंब है। लेखिका का मानना है कि इसी तरह उसके व्यक्तित्व में जो चमक है, वह तो उसके आराध्य या मनमीत के व्यक्तित्व का ही प्रतिबिंब है। कवयित्री पॉश कॉलोनी में रहती है, फिर भी उसने एअरकंडीशंड रूम में बैठकर कविताएँ नहीं लिखी हैं। उसने प्रकृति के विविध वर्णी रूपों के बीच अपने को स्थापित किया है। प्रत्येक संग्रह की कविताओं में पीले पत्ते, मलय पवन, कोंपल, कोयल, भ्रमर, सूर्यकिरण, ओसबिंदु, इंद्रधनुष, तितलीपंख, मेहँदी, मृगछौना, धूप, बादल, लैंपपोस्ट, उजड़ा उपवन आदि को प्रतीकों के रूप में स्वीकार किया है।
कविताओं में नए प्रतीक, नए बिंब और नए मुहावरों का प्रयोग किया है। उसकी कविताओं में गहरी अनुभूति की सफल अभिव्यक्ति हुई है। जो कुछ कहा गया है, उसका एकएक शब्द सार्थक और सच्चा है, फिजूल का शब्द एक भी नहीं है। कवयित्री ने कविताएँ लिखी नहीं हैं, कविताओं ने अपने को उससे लिखवा लिया है।
काव्यरस से सराबोर ये कविताएँ सभी आयु वर्ग के पाठकों को रुचिकर लगेंगी।"
Book Details
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ISBN9789384343262
-
Pages168
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: श्रीकुमारन तम्पी के मूल मलयालम उपन्यास 'कुट्टनाटु' का परम विद्वान डॉ. रंजीत रविशैलम द्वारा किया गया हिन्दी अनुवाद 'उम्मीद' एक मर्मस्पर्शी कृति है। त्याग की भावनाओं को उजागर करता यह उपन्यास केरल के उस परिवेश का सजीव चिंत्राकन करता है, जो आज से लगभग 60 वर्ष पूर्व के गाँव की जीवनशैली को प्रस्तुत करने में सक्षम है। जाति और धर्म को प्राथमिकता देने वाले उस समय के केरलीय परिवेश में एक नायर परिवार कुलीनता के नाम पर अपना सर्वस्व त्यागने का साहस करता है, इस भावपूर्ण और कठिन विषय को सरलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। ईसाई, मुसलमान, हिन्दू के बीच समन्वय स्थापित करने के प्रयास का यथावत् चित्रण, साथ ही, दो भाईयों के भिन्न व्यवहार का बहुत सुन्दर चित्रण किया गया है। जहाँ एक ओर, एक भाई के स्वार्थी व्यवहार को दर्शाने के लिए उचित शाब्दिक स्थितियाँ निर्मित की गई हैं, वहीं दूसरी ओर, दूसरे भाई के त्याग की भावना को उजागर करने के लिए उपयुक्त भावुक वातावरण बनाया गया है।
Jahaj Ka Panchhi
- Author Name:
Ilachandra Joshi
- Book Type:

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Description:
इलाचन्द्र जोशी हिन्दी के अत्यन्त प्रतिष्ठित उपन्यासकार थे। उनके प्राय: सभी उपन्यासों का गठन हमारे मध्यवर्गीय समाज के जिन पात्रों के आधार पर हुआ है, वे मनोवैज्ञानिक सार्थकता के लिए सर्वथा अद्वितीय है। ‘जहाज़ का पक्षी’ एक ऐसे मध्यवर्गीय नवयुवक के परिस्थिति-प्रताड़ित जीवन की कहानी है, जो कलकत्ता के विषमताजनित घेरे में फँसकर इधर-उधर भटकने को विवश हो जाता है, किन्तु उसकी बौद्धिक चेतना उसे रह-रहकर नित-नूतन पथ अपनाने को प्रेरित करती है। ऐसा कौन-सा काम है, जो उसने अपने अन्तस की सन्तुष्टि के लिए न अपनाया हो। जीवन की उदात्तता का पक्षपाती होते हुए भी वह ‘जहाज़ का पंछी’ के समान इत-उत भटककर फिर अपने उसी उद्दिष्ट पथ का राही बन जाता है, जिसे अपनाने की साध वह अपने अन्तर्मन में सँजोए हुए
था।‘जहाज़ का पंछी’ में आज के सुशिक्षित किन्तु महत्त्वाकांक्षी तथा बौद्धिक चेतना से आक्रान्त बहुत से नवयुवक अपनी ही जीवनकथा अंकित पाएँगे। यह एक दर्पण है, जिसमें हम अपने तरुण वर्ग और नागरिक जीवन की झाँकी पा सकते हैं।
Kagaj Ki Nav
- Author Name:
Krishna Chander
- Book Type:

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Description:
उर्दू और हिन्दी में समान रूप से समादृत कथाकार कृश्न चन्दर का उपन्यास ‘काग़ज़ की नाव’ उनकी सशक्त लेखनी का मुखर साक्षी है। एक दस रुपए के नोट की आत्मकथा के माध्यम से उन्होंने इस उपन्यास में समाज के विभिन्न पक्षों के विभिन्न अंगों का चित्र बड़ी सरसता एवं स्पष्टता से खींचा है। आज की जीवन-प्रणाली में नोट इतना प्रधान हो गया है कि उसके आगे सभी अन्य वस्तुएँ धुँधली नज़र आती हैं। किसी की ख़ुशी का वादा एक नोट है, किसी की मुहब्बत का धोखा नोट है, किसी की मजबूर मेहनत का एक पल नोट है, तो किसी की प्रेमिका की मुस्कान भी एक नोट ही है। सच तो यह है कि संसार का हर व्यक्ति अपने जीवन के प्रति क्षण को नोट—यानी काग़ज़ की नाव में खेये चला जा रहा है। शायद यह नोट काग़ज़ का एक पुर्जा नहीं, इस युग की सबसे महत्त्वपूर्ण वस्तु है।
निस्सन्देह, आज के युग-यथार्थ की अगर कोई शक्ल है तो यही काग़ज़ की नाव। कृश्न चन्दर की प्रवाहमयी भाषा-शैली ने इसे जिस तेज़ी से घटनाओं की उत्ताल तरंगों पर तैराया है, उसका रोमांच बहुत गहरे तक पाठकीय भाव-संवेदन का हिस्सा बन जाता है।
Barah Baje Raat Ke
- Author Name:
Dominique Lapierre
- Book Type:

- Description: स्वाधीनता-आन्दोलन की चरम परिणति थी आज़ादी लेकिन उससे जुड़ा सदी का कुरूपतम सच—विभाजन। बारह बजे रात के उसी का वृत्तान्त है। यह बड़ी–बड़ी परिघटनाओं वाला इतिहास नहीं बल्कि छोटी-छोटी घटनाओं, मामूली विवरणों, हज़ारों दस्तावेजों और साक्षात्कारों से सजा सूक्ष्म इतिहास है। हालाँकि लैरी कॉलिन्स और डोमीनिक लापियर दोनों विदेशी लेखक हैं, फिर भी जिस आत्मीयता और निष्पक्षता से उन्होंने विभाजन के गोपन रहस्यों, षड्यंत्रों, साम्प्रदायिक नंगई और ओछेपन को उजागर किया है, उसकी चतुर्दिक सराहना हुई है। दिलचस्प है कि इसमें कहीं भी ब्रिटिश साम्राज्यवाद का पक्ष नहीं लिया गया है। विरले ही कोई ग़ैर-साहित्यिक कृति क्लासिक बनती है लेकिन सच्चाई, पठनीयता और निष्पक्षता की बदौलत यह क्लासिक बन गई है। भारतीय उपमहाद्वीप की कई पीढ़ियाँ इसे पढ़ेंगी।
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