Madhvi ki Dehgatha
Author:
Shachi MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Available
'माधवी की देहगाथा' उपन्यास स्त्री शोषण की एक ऐसी पौराणिक गाथा है जिसका दृष्टांत अन्यत्र दिखाई नहीं पड़ता है। यह उस युग की गाथा है जब पुरुषों ने मातृसत्ता को समाप्त करके पितृसत्ता की स्थापना की और समस्त स्वी जाति को अपने अधीन कर लिया, जहाँ उसका दान या विनिमय किया जा सकता था।
मुनि कुमार (गालव) गुरु (विश्वामित्र) द्वारा माँगी गयी श्यामकर्णी श्वेत आठ सौ अश्वों की दुर्लभ गुरु दक्षिणा की पूर्ति के लिए एक राजा (ययाति) के समक्ष याचक बन कर खड़ा हुआ और नरेश ने याचना पूर्ति में असमर्थ होने पर बिना कुछ सोचे विचारे उसकी गुरुदक्षिणा प्राप्ति के माध्यम के लिए अपनी दिव्य वरदान में लिपटी पुत्री (माधवी) को प्रदान कर दिया और उस मुनि कुमार गालव ने उसे अपनी गुरुदक्षिणा एकत्र करने के लिए तीन राजाओं और अंत में अपने गुरु को समर्पित कर दिया।
ययाति को महादानी कहलाने का यश मिला, विश्वामित्र को दुर्लभ गुरुदक्षिणा मिली और गालव को दुर्लभ गुरुदक्षिणा देने का गौरव प्राप्त हुआ पर इस मान-सम्मान की गाथा में माधवी को क्या मिला?
ISBN: 9788119996582
Pages: 224
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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‘वर्षा वन की रूपकथा’ कर्नाटक प्रान्त के शिमोगा ज़िले में बसे एक छोटे-से गाँव अगुम्बे की अन्तरंग-अप्रतिम कथा है। सघन वर्षा होने के कारण इसे भारत का दूसरा ‘चेरापूँजी’ कहा जाता है। कन्नड़ थिएटर और सिनेमा के महानायक शंकर नाग ने इस गाँव को अपने सीरियल ‘मालगुडी डेज़’ में अमर कर दिया है। दरअसल, अंग्रेज़ी के उद्भट लेखक आर.के. नारायण लिखित ‘मालगुडी डेज़’ पर सीरियल बनाने का निर्णय लेकर इस काल्पनिक ग्राम को साकार करने का स्वप्न सँजोए शंकर नाग जब घूमते-भटकते अगुम्बे पहुँचे, तो उन्हें छूटते हुए लगा कि यही तो है नारायण का अद्भुत मालगुडी! घने जंगल, पहाड़ और बादलों की अहर्निश मधुर युगलबन्दी के बीच स्थित मलनाड अंचल के इस गाँव के सरल-सहज लोगों से मिलकर शंकर नाग को लगा कि शूटिंग के लिए यहाँ उन्हें अलग से कोई सेट लगाने की भी ज़रूरत नहीं। पूरा गाँव ही इस सीरियल का क़ुदरती सेट है। शूटिंग के दौरान आर.के. नारायण भी जब एक बार अगुम्बे आए, तो विस्मित हुए बिना न रह सके। बहरहाल, ‘मालगुडी डेज़’ सीरियल के बने वर्षों बीत चुके हैं पर अगुम्बे अभी भी मालगुडी को अपनी आत्मा के आलोक में बड़े दुलार से बसाये हुए है। और यह यों ही नहीं है। बाज़ारवाद के इस भीषण पागल समय में यह गाँव मनुष्यता का एक ऐसा दुर्लभ हरित मंडप है, जहाँ के विनोदप्रिय निष्कलुष लोग समस्त कामनाओं और आतप को हवा में फूँककर उड़ाते हुए मौन उल्लास की सुरभि में निरन्तर मधुमान रहते हैं। जीवनानंद के पराग से पटी पड़ी है अगुम्बे की धरती। अगुम्बे की ख्याति दुनिया में ‘किंग कोब्रा’ के एकमात्र मुख्यालय के रूप में भी है। जंगल-पर्वत और झमझम बारिश के बीच निरन्तर आलोड़ित कर्नाटक के इस गाँव की जैसी धारासार तन्मय गाथा एक हिन्दी भाषी लेखक द्वारा लिखी गई है, वह पृष्ठ-दर-पृष्ठ चकित करती हुई साधारण मनुष्य के जीते-जागते स्वप्नजगत में अद्भुत रमण कराती है। तृप्त और दीप्त करती है।
‘सुन्दरता ही संसार को बचाएगी’ यह टिप्पणी हर समय, हर समाज, हर देश और हरेक भाषा के वास्ते महान साहित्यकार दोस्तोयेव्स्की की है। सुन्दरता का आशय मात्र किसी महारूपा स्त्री या महारूपा प्रकृति से ही नहीं है। सुन्दरता का मतलब ठेठ ‘अगुम्बेपन’ से भी है। प्रेम का चिरन्तन आनन्द, उसकी अटूट शक्ति और विह्वल करुणा भी विशुद्ध अगुम्बेपन में ही है।
Romeo, Juliet Aur Andhera
- Author Name:
Jan Otčenášek
- Book Type:

- Description: पॉल, एक चेकोस्लोवाक युवा छात्र और एस्थर, एक यहूदी लड़की—अर्थात रोमियो-जूलियट जैसे पवित्र प्रेम में आकंठ निमग्न दो युवा हृदय...अलग-अलग डालों पर खिलने के बावजूद एक साथ महमहाते और झूमते...कि तभी उनके ऊपर नाज़ियों की शक्ल में अँधेरा उतर आया...यह उपन्यास वस्तुतः नैसर्गिक प्यार के प्रस्फुटन और उसके असामयिक अन्त का मर्मस्पर्शी आख्यान है। साथ ही यह निरपराध मनुष्यता को कहीं भी रौंदते फ़ौजी दमन, अन्धराष्ट्रीयता, और बर्बरता के ख़िलाफ़ ऐसी आवाज़ है, जिसे पूरी गम्भीरता से सुना जाना चाहिए।
Shahar Se Das Kilometer
- Author Name:
Neelesh Raghuwanshi
- Book Type:

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Description:
‘शहर से दस किलोमीटर’ ही वह दुनिया बसती है जो शहरों की न कल्पना का हिस्सा है, न सपनों का। वह अपने दुखों, अपने सुखों, अपनी हरियाली और सूखों के साथ अपने आप में भरी-पूरी है।
वहाँ खेत है, ज़मीन है, कुछ बंजर, कुछ पठार, कुछ उपजाऊ और उनसे जूझते, उनकी वायु में साँसें भरते लोग हैं, उनकी गाएँ भैसें और कुत्ते हैं; और आपस में सबको जोड़नेवाली उनकी रिश्तेदारियाँ हैं, झगड़े हैं, शिकायते हैं, प्यार है!
शहर से सिर्फ़ दस किलोमीटर परे की यह दुनिया हमारी ‘शहरवाली सभ्यता’ से स्वतंत्र हमारे उस देश की दुनिया है जो विकास की अनेक धाराओं में अपने पैर जमाने की कोशिशों में डूबता-उतराता रहता है। इसी जद्दोजहद के कुछ चेहरे और उनकी कहानियाँ शहर के बीचोबीच भी अपने पहियों, अपने पंखों पर तैरती मिल जाती हैं। यह उपन्यास साइकिल के इश्क़ में डूबे एक जोड़ी पैरों की परिक्रमा के साथ खुलता है जो शहर के बीच से शुरू होती है और उसके दस किलोमीटर बाहर तक जाती है। यह शहर है भोपाल। पहाड़ी चढ़ाइयों और उतराइयों को सड़कों की संयत भाषा में व्याख्यायित करता शहर। सड़कों के किनारे अस्थायी टपरों में बसे लोग, तरह-तरह के कामों में लगे वे लोग जो शहरों में रहते हुए भी शहर से बाहर की अपनी पहचान को सँजोए रहते हैं। साइकिल सबका हाल-चाल दर्ज करती हुई घूमती रहती है। एक स्त्री की साइकिल, जिसका अपना एक इतिहास है, जो शहर की आपाधापी से दूर खेतों में, शहर के उन हिस्सों में बरबस निकल जाती है जहाँ शहर तो है लेकिन उसकी कोई ख़ूबी नहीं है। गाँवों की सरहदों का अतिक्रमण करता शहर यहाँ उन लोगों से बहुत बेरहम व्यवहार करता है जो गाँवों की साधनहीनता से भागकर शहर का हिस्सा होने आए हैं।
Boudam
- Author Name:
Fyodor Dostoyevsky
- Rating:
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
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