Ek Tarah Ka Pagalpan
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Ek Tarha Ka Pagalpan (A Sort of Madness) This is the sixth novel by Sahitya Akademi Award winner urdunovelist Rahman Abbas, set in the coastal region of Konkan (Maharashtra state), covering an era of 1970 to 1990. The novel tells the tale of an illicit love story that links the turmoil and socio-political situation of the region through a curse uttered in an imaginary village, Kaamruth, in the vicinity of the Mohenjo-Daro, the Indus Valley Civilization. It discusses the lives of people living in a forest near the Arabian Sea and how it was affected by the various emerging ideologies in the last decades of the twentieth century. Rahman Abbas (1972) is an urdunovelist and the winner of India’s highest literary award the Sahitya Akademi Award for the year 2018 on his fourth novel ‘Rohzin’. He has also won four State Academy Awards. He writes in urduand English. He is the author of 10 books including 6 novels. He lives in Mumbai. Rahman is the author of ten books, including six novels, Nakhalistan Ki Talash (The Search of an Oasis, 2004), Ek Mamnua Muhabbat Ki Kahani (A Forbidden Love Story, 2009), Khuda Ke Saaye Mein Ankh Micholi (Hide and Seek in the Shadow of God, 2011) Rohzin (The Melancholy of the Soul, 2016), Zindeeq (The Apostate, 2021) and Ek Tarha Ka Pagalpan, (A Sort of Madness, 2023) Rohzin, has been translated into German, English, and Hindi. The German translation was discussed in Switzerland as part of ‘The Days of Indian Literature’ in February 2018, and in May-June 2018 Rahman toured various cities in Germany to discuss the novel with readers. The novel has also received the prestigious LitProm Grant managed by the Swiss and German governments. The Penguin India Random House published Rohzin in English in May 2022 and the novel was shortlisted for the JCB Prize.
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Ek Tarha Ka Pagalpan (A Sort of Madness) This is the sixth novel by Sahitya Akademi Award winner urdunovelist Rahman Abbas, set in the coastal region of Konkan (Maharashtra state), covering an era of 1970 to 1990. The novel tells the tale of an illicit love story that links the turmoil and socio-political situation of the region through a curse uttered in an imaginary village, Kaamruth, in the vicinity of the Mohenjo-Daro, the Indus Valley Civilization. It discusses the lives of people living in a forest near the Arabian Sea and how it was affected by the various emerging ideologies in the last decades of the twentieth century. Rahman Abbas (1972) is an urdunovelist and the winner of India’s highest literary award the Sahitya Akademi Award for the year 2018 on his fourth novel ‘Rohzin’. He has also won four State Academy Awards. He writes in urduand English. He is the author of 10 books including 6 novels. He lives in Mumbai. Rahman is the author of ten books, including six novels, Nakhalistan Ki Talash (The Search of an Oasis, 2004), Ek Mamnua Muhabbat Ki Kahani (A Forbidden Love Story, 2009), Khuda Ke Saaye Mein Ankh Micholi (Hide and Seek in the Shadow of God, 2011) Rohzin (The Melancholy of the Soul, 2016), Zindeeq (The Apostate, 2021) and Ek Tarha Ka Pagalpan, (A Sort of Madness, 2023) Rohzin, has been translated into German, English, and Hindi. The German translation was discussed in Switzerland as part of ‘The Days of Indian Literature’ in February 2018, and in May-June 2018 Rahman toured various cities in Germany to discuss the novel with readers. The novel has also received the prestigious LitProm Grant managed by the Swiss and German governments. The Penguin India Random House published Rohzin in English in May 2022 and the novel was shortlisted for the JCB Prize.
Book Details
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ISBN9789394494879
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Pages320
-
Avg Reading Time11 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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Awating description for this book
Nano Tales
- Author Name:
Various Authors
- Book Type:

- Description:
This book contains 38 Nano tales by different authors depicting life, motivation and inspiration. This is the world’s first book to be published on Nano tales. Nano tale is a small story written in little words with a strong message. The figure of speech used by the writers is at its best. Irony, rhetoric, sarcasm, pun, and satire are some essential tools of a Nano tale. The words are limited, but the message is loud and clear.
Sapnon Ke Dhai Ghar
- Author Name:
Rashmi Sharma
- Book Type:

- Description:
रश्मि शर्मा का दूसरा कहानी-संग्रह 'सपनों के ढाई घर' इस बात का प्रमाण है कि कथा-लेखन उनके लिए एक गम्भीर एवं जिम्मेदारी भरा सतत कर्म है। जाहिरन, इसका निर्वाह वह अपनी निरन्तर रचनात्मकता और सार्थक हस्तक्षेप से कर रही हैं। इस संग्रह की तमाम कहानियाँ अपने परिवेश के प्रति उनकी सजग संवेदनशीलता और उनमें निहित अदीठ जीवन-सत्यों को खोज निकालने की उनकी दृष्टि एवं कौशल से सम्भव हुई हैं। ये कहानियाँ विषय वैविध्य के कारण जितना पाठकों को समृद्ध करती हैं, उतना ही मनुष्य मन की जटिलताओं में उतरकर उनके अवगुंठनों को खोलते हुए चकित भी करती हैं। ये कहानियाँ स्त्री जीवन की विडम्बनाओं के उन बन्द कपाटों को खोलने की कोशिश करती हैं, जिनके पीछे उनकी नियति छुपी बैठी है। 'सपनों के ढाई घर' जिस तरह प्रतिरोध रचती है, वह न सिर्फ चकित करता है, बल्कि पाठकीय चेतना पर उसका असर भी देर तक बना रहता है। रश्मि प्रेम, संवेदना और संचेतना के संयोग से कथा-परिदृश्य निर्मित करती हैं, जिसके भीतर स्त्री-जीवन की अनेक छवियाँ मिलती हैं। इनमें अपनी स्मृतियों में जीती कोई नानी है, तो अपनी परम्परागत कला के बूते अपनी पहचान पर गर्व करती आदिवासी समाज की रुदनी भी है। अपने अकेलेपन के बीच अपने जीवन में आए पुरुषों को याद करती श्रेया है, अपने पति के लिए चिन्तित कृतिका है, अपनी पूर्व मालकिन से होड़ लेती सोनी है, अपने जीवन में अप्रत्याशित फैसले लेती पूर्णिमा है। जाहिर तौर पर ये अनेक स्त्रियाँ हैं, लेकिन इन सभी से मिलकर स्त्री-जीवन का वृत्त बनता है। रश्मि शर्मा ने इसे बड़ी संलग्नता, कौशल और धैर्य से रचा है। इस रचाव में उनका सूक्ष्म ऑब्जर्वेशन और मनुष्य मनोविज्ञान की गहन समझ शामिल है। इन कहानियों का सौन्दर्य किसी कलाबाजी में नहीं, अपने कहन के सौष्ठव में निहित है। ये अपने कथ्य के अनुकूल अपना शिल्प लेकर आती हैं, लिहाजा, इन्हें पढ़ने का आस्वाद भी भिन्न है और इनका प्रभाव भी अभिन्न। यह संग्रह रश्मि शर्मा के कथा-कौशल की एक और बानगी है। —अवधेश प्रीत
Bharatiyata Ki Pahchan
- Author Name:
Manoj Kumar Rai
- Book Type:

- Description:
हम भारत की संपूर्ण सत्ता को समझने के लिए उसे तीन कोणों से देखें तो ठीक-ठीक समझ सकते हैं। वे कोण हैं— (1) ‘मृण्मय’ (अर्थात भौगोलिक-आर्थिक-जैविक दृष्टि से), (2) ‘शाश्वत’ (ऐतिहासिक अविच्छिन्न विकास की दृष्टि से), (3) ‘चिन्मय’ (श्रुति अर्थात ‘अचल’ मूल्यों की दृष्टि से, यानी ‘मूल प्रकृति’ या essence की दृष्टि से)। इन तीन कोणों से भारत का अध्ययन करके संपूर्ण भारतीय ‘सत्ता’ और भारतीय पुरुषार्थ को हम समझ सकते हैं। भारत का मृण्मय रूप हमारे गाँव-नगर, खेत-खलिहान, नदी-पहाड़, हाट-बाजार में उपस्थित है और इस रूप द्वारा भारत ‘काम’ और ‘अर्थ’ की साधना कर रहा है। भारत का ‘शाश्वत रूप’ काल-प्रवाह अर्थात इतिहास में हजार-हजार वर्षों से, सैंधव सभ्यता के पूर्व से, निषाद-द्रविड़-किरात आर्य—इन चार महान् प्रवाहों के क्रमागत आगमन से निरंतर चलायमान है। यह ‘शाश्वत’ इस अर्थ में है कि यह अविच्छिन्न रहा है। अत: भारत का ‘शाश्वत रूप’ इतिहास की विकास-यात्रा में नित्य देहांतर करते हुए, निरंतर चलते हुए ‘धर्म’ नामक तृतीय पुरुषार्थ की अखंड, अविच्छिन्न उपासना कर रहा है। भारत का ‘चिन्मय रूप’ इस शाश्वत रूप से भी सूक्ष्म है। इस रूप का लक्ष्य है ‘मोक्ष धर्म’, अर्थात ‘शुद्ध आनंद’।
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