Nano Tales
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This book contains 38 Nano tales by different authors depicting life, motivation and inspiration. This is the world’s first book to be published on Nano tales. Nano tale is a small story written in little words with a strong message. The figure of speech used by the writers is at its best. Irony, rhetoric, sarcasm, pun, and satire are some essential tools of a Nano tale. The words are limited, but the message is loud and clear.
ISBN: 9789385137686
Pages: 43
Avg Reading Time: 1 hrs
Age: 18+
Country of Origin: -
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- Description: अब्दुल बिस्मिल्लाह उन चन्द भारतीय लेखकों में से हैं, जिन्होंने देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब को काफ़ी क़रीब से देखा है और उसे अपनी कहानियों और उपन्यासों का विषय बनाया है। समय की सबसे बड़ी विडम्बना है, मनुष्य का इनसान नहीं हो पाना। हम हिन्दू, मुसलमान तो हैं, लेकिन इनसान बनने की जद्दोजहद हमें बेचैन कर देती है। यह उपन्यास हिन्दू-मुस्लिम रिश्ते की मिठास और खटास के साथ समय की तिक्ताओं और विरोधाभासों का भी सूक्ष्म चित्रण करता है। उपन्यास के नायक का सम्बन्ध ऐसी संस्कृति से है, जहाँ संस्कार और भाषा के बीच धर्म कोई दीवार खड़ा नहीं करता। लेकिन शहर का सभ्य समाज उसे बार-बार यह अहसास दिलाता है कि वह मुसलमान है। और इसलिए उसे हिन्दी और संस्कृत की जगह उर्दू या फ़ारसी की पढ़ाई करनी चाहिए थी। वहीं ऐसे पात्रों से भी उसका सामना होता है, जो अन्दर से कुछ तो बाहर से कुछ और होते हैं। उपन्यास की नायिका यूँ तो व्यवहार में नमाज़-रोज़े वाली है, लेकिन नौकरी के लिए किसी मुस्लिम नेता से हमबिस्तरी करने में उसे कोई हिचक भी नहीं होती। ‘अपवित्र आख्यान’ मौजूदा अर्थ केन्द्रित समाज और उसके सामने खड़े मुस्लिम समाज के अन्तर्वाह्य अवरोधों की कथा के बहाने देश-समाज की मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों का भी गहन चित्रण करता है।
Thistle & Weeds
- Author Name:
Prachi Priyanka
- Book Type:

- Description: Thistle and weeds is an enjoyable collection of eleven stories that explore love, lust and loyalties from surprising perspectives. These stories celebrate the mysterious inner lives of ordinary people who are stuck in moments of crisis and struggle to unravel their lives in a world where certainties are tested and often found wanting. A young girl locates the defiant undercurrent of individual expression shackled by societal norms; a Lonely old widow finds a Ray of hope; a disillusioned wife redefines notions of fidelity; an agonised husband chooses freedom over his wife; a woman encounters love from her past; a rapist feels the need to unburden... Binding these acutely observed and emotionally intelligent stories are complex, confused and yet beautifully fascinating characters. Prachi Priyanka subverts the familiar themes of family, love and cultural identity and provides a rare glimpse into the strange workings of the human heart.
Purohit
- Author Name:
Mayanand Mishra
- Book Type:

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Description:
ऐतिहासिक औपन्यासिक कृतियों की शृंखला में ‘प्रथमं शैलपुत्री च’ तथा ‘मंत्रपुत्र’ के बाद ‘पुरोहित’ मायानंद मिश्र का तीसरा उपन्यास है। इस उपन्यास की कथा पूर्व उत्तरवैदिक काल के संधि संक्रमणकालीन ब्राह्मण युग (ई.पू. 1200 ई. से ई.पू. 1000 ई. तक) के भारत की आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक जीवन-परम्परा की जटिल गुत्थियों को बहुत ही बारीकी से खोलती और विश्लेषित करती है। इस काल की महत्ता लेखक के शब्दों में : ‘‘वस्तुतः स्वयं भारतवर्ष तथा उसकी ‘आत्मा’ का जन्म इसी ब्राह्मण काल में हुआ है। आज जो भी भारत में है, चाहे वह भौतिकता का विकास हो अथवा आध्यात्मिकता का उत्कर्ष, वह इसी काल की देन है।’’
प्रामाणिक ऐतिहासिक साक्ष्यों को आधार बनाकर उस काल में आर्यावर्त्त के विभिन्न जनपदों में क़ायम शासन प्रणाली और उसकी व्यवस्था में आ रहे परिवर्तन का लेखक ने बड़ा ही जीवन्त चित्रण किया है। इस उपन्यास से उस काल के शिक्षा-कर्म, पौरोहित्य-कर्म, कृषि-कर्म, राज-काज और जीवन-दर्शन का स्वाभाविक परिचय मिलता है। काल-पात्र अनुकूल शब्दावली को काव्यात्मक सरस भाषा में ढालकर रोचक प्रवाह क़ायम रखना मायानंद मिश्र की चिर-परिचित विशेषता है जिस कारण उपन्यास में सर्वत्र ग़ज़ब की पठनीयता बनी रहती है।
मेधा और कुशबिन्दु के सहज स्वाभाविक प्रेम और चुहल के साथ उसकी कर्त्तव्यनिष्ठा और व्यावहारिकता ही नहीं; अथर्वण ऋताश्व, आचार्य गालव, आचार्य श्रुतिभव, आचार्य चाक्रायण आदि की जीवन-साधना और उनके दर्शन से सम्बन्धित विभिन्न प्रसंग उस काल की विभिन्न स्थितियों-परिस्थितियों की सूचना और वैचारिक उत्तेजना देते हैं।
Rukogi Nahin Radhika
- Author Name:
Usha Priyamvada
- Book Type:

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Description:
यह लघु उपन्यास प्रवासी भारतीयों की मानसिकता में गहरे उतरकर बड़ी संवेदनशीलता से परत-दर-परत उनके असमंजस को पकड़ने का सार्थक प्रयास है। ऐसे लोग, जो जानते हैं कि कुछ साल विदेश में रहने पर भारत में लौटना सम्भव नहीं होता, पर यह भी जानते हैं कि सुख न वहाँ था न यहाँ है। स्वदेश में अनिश्चितता और सारहीनता का एहसास, वापसी पर परिवार के बीच होनेवाले अनुभव, जैसे मुँह में ‘कड़वा-सा स्वाद’ छोड़ देते हैं। यह अनुभव विदेश में पहले ‘कल्चरल शॉक’ और स्वदेश में लौटने पर ‘रिवर्स कल्चरल शॉक’ से गुज़रती नायिका को कुछ ऐसा महसूस करने पर बाध्य कर देता है : ‘‘मेरा परिवार, मेरा परिवेश, मेरे जीवन की अर्थहीनता, और मैं स्वयं जो होती जा रही हूँ, एक भावनाहीन पुतली-सी।’’
पर यह उपन्यास सिर्फ़ अकेली स्त्री के अनुभवों की नहीं, आधुनिक समाज में बदलते रिश्तों की प्रकृति से तालमेल न बैठा पानेवाले अनेक व्यक्तियों और सम्बन्धों की बारीकी से पड़ताल करता है। एक असामान्य पिता की सामान्य सन्तानों के साथ असहज सम्बन्धों की कथा है यह उपन्यास। ऐसे लोग जिनके पारिवारिक सीमान्तों पर बाहरी पात्रों की सहज दस्तक इन रिश्तों को ऐसे आयाम देती है, जो ठेठ आधुनिक समाज की देन हैं।
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