Bharatiyata Ki Pahchan
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हम भारत की संपूर्ण सत्ता को समझने के लिए उसे तीन कोणों से देखें तो ठीक-ठीक समझ सकते हैं। वे कोण हैं— (1) ‘मृण्मय’ (अर्थात भौगोलिक-आर्थिक-जैविक दृष्टि से), (2) ‘शाश्वत’ (ऐतिहासिक अविच्छिन्न विकास की दृष्टि से), (3) ‘चिन्मय’ (श्रुति अर्थात ‘अचल’ मूल्यों की दृष्टि से, यानी ‘मूल प्रकृति’ या essence की दृष्टि से)। इन तीन कोणों से भारत का अध्ययन करके संपूर्ण भारतीय ‘सत्ता’ और भारतीय पुरुषार्थ को हम समझ सकते हैं। भारत का मृण्मय रूप हमारे गाँव-नगर, खेत-खलिहान, नदी-पहाड़, हाट-बाजार में उपस्थित है और इस रूप द्वारा भारत ‘काम’ और ‘अर्थ’ की साधना कर रहा है। भारत का ‘शाश्वत रूप’ काल-प्रवाह अर्थात इतिहास में हजार-हजार वर्षों से, सैंधव सभ्यता के पूर्व से, निषाद-द्रविड़-किरात आर्य—इन चार महान् प्रवाहों के क्रमागत आगमन से निरंतर चलायमान है। यह ‘शाश्वत’ इस अर्थ में है कि यह अविच्छिन्न रहा है। अत: भारत का ‘शाश्वत रूप’ इतिहास की विकास-यात्रा में नित्य देहांतर करते हुए, निरंतर चलते हुए ‘धर्म’ नामक तृतीय पुरुषार्थ की अखंड, अविच्छिन्न उपासना कर रहा है। भारत का ‘चिन्मय रूप’ इस शाश्वत रूप से भी सूक्ष्म है। इस रूप का लक्ष्य है ‘मोक्ष धर्म’, अर्थात ‘शुद्ध आनंद’।
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हम भारत की संपूर्ण सत्ता को समझने के लिए उसे तीन कोणों से देखें तो ठीक-ठीक समझ सकते हैं। वे कोण हैं—
(1) ‘मृण्मय’ (अर्थात भौगोलिक-आर्थिक-जैविक दृष्टि से),
(2) ‘शाश्वत’ (ऐतिहासिक अविच्छिन्न विकास की दृष्टि से),
(3) ‘चिन्मय’ (श्रुति अर्थात ‘अचल’ मूल्यों की दृष्टि से, यानी ‘मूल प्रकृति’ या essence की दृष्टि से)।
इन तीन कोणों से भारत का अध्ययन करके संपूर्ण भारतीय ‘सत्ता’ और भारतीय पुरुषार्थ को हम समझ सकते हैं। भारत का मृण्मय रूप हमारे गाँव-नगर, खेत-खलिहान, नदी-पहाड़, हाट-बाजार में उपस्थित है और इस रूप द्वारा भारत ‘काम’ और ‘अर्थ’ की साधना कर रहा है।
भारत का ‘शाश्वत रूप’ काल-प्रवाह अर्थात इतिहास में हजार-हजार वर्षों से, सैंधव सभ्यता के पूर्व से, निषाद-द्रविड़-किरात आर्य—इन चार महान् प्रवाहों के क्रमागत आगमन से निरंतर चलायमान है। यह ‘शाश्वत’ इस अर्थ में है कि यह अविच्छिन्न रहा है। अत: भारत का ‘शाश्वत रूप’ इतिहास की विकास-यात्रा में नित्य देहांतर करते हुए, निरंतर चलते हुए ‘धर्म’ नामक तृतीय पुरुषार्थ की अखंड, अविच्छिन्न उपासना कर रहा है। भारत का ‘चिन्मय रूप’ इस शाश्वत रूप से भी सूक्ष्म है। इस रूप का लक्ष्य है ‘मोक्ष धर्म’, अर्थात ‘शुद्ध आनंद’।
Book Details
-
ISBN9789395386401
-
Pages224
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: ‘बीतीआप बीतीआप’ एक नए ढंग का उपन्यास है। भाषा और शैली के नवोन्मेषी प्रयोग के माध्यम से यह एक रचनाशील व्यक्ति की कहानी बताता है। इलाहाबाद की साहित्यिक पृष्ठभूमि में नायक की सफल कवि बनने की आकांक्षा उसे प्रेम और जीवन की विचित्र परिस्थितियों में ले जाती है, जहाँ वह निराला के सार्वभौमिक भाव का साक्षात्कार करता है। लेकिन इस बीच वह अपने परिवेश, अपने जीवन और उससे जुड़े लोगों की कहानियाँ भी बताता चलता है। विपिन कुमार अग्रवाल की विशेषता है कि दैनिक जीवन की साधारण घटनाओं को भी वे अपने भाषा-चातुर्य तथा कल्पना द्वारा विशेष अर्थ से भर देते हैं। भाषिक प्रयोग, परिस्थिति वर्णन और व्यक्तियों के चित्र खींचने की शैली इस उपन्यास को प्रयोगधर्मिता के एक भिन्न स्तर पर ले जाती है।
Kisse mein Kissa
- Author Name:
Ahmed Umit
- Book Type:

- Description: पिकनिक पर आग के चारों तरफ बैठे हैं, डिनर के बाद परिवार के साथ मज़े दार समय गुजारना चाहते हैं या फिर अध्यापक हैं और बच्चों को कुछ बेहतर सुनाना चाहते हैं, तो यह किताब आप ही के लिए है। कहानियों के भीतर से निकलती हुई ये कहानियाँ, मनुष्य की अच्छायों, कमजोरियों और कोमलता की दास्तान हैं। इसका हर किरदार अपनी गलतियों में भी इतना निर्मल है कि इनमें पाठक अपने दिल की झलक पाता है। दरअसल यह सारे किरदार हमारी अलग-अलग वृत्तियों और उलझनों का विस्तार हैं। प्रश्नों में बड़ी लेकिन आकार में इतनी छोटी कि आप एक बैठकी में आसानी से पढ़ सकते हैं।
Aashcharya Lok Mein Alis
- Author Name:
Lui Cairol
- Book Type:

- Description: संसार की प्रायः सभी भाषाओं में अनूदित ‘एलिस इन वंडरलैंड’ का बाल-साहित्य में एक विशिष्ट स्थान है। लुई कैरोल की यह बहुचर्चित कथाकृति बच्चों और किशोरों के मनोविज्ञान तथा उनकी जिज्ञासु कल्पनाशीलता को जिस तरह उजागर करती है, वह बेहद दिलचस्प और अर्थपूर्ण है। एलिस एक छोटी-सी बच्ची है। खेल-खेल में एक ख़रगोश का पीछा करते हुए वह एक ऐसे आश्चर्यलोक में जा पहुँचती है, जहाँ कुछ भी असम्भव नहीं। वहाँ कौतुक और अपनी आवश्यकता के कारण वह न सिर्फ़ अपना क़द घटा-बढ़ा सकती है, बल्कि अनेकानेक पशु-पक्षियों को बुद्धू या कहें कि ‘उल्लू’ भी बनाती रहती है। दूसरे शब्दों में, एलिस स्वयं पशु-पक्षियों के दु:ख-सुख और उनकी तरह की शैतानियों में शामिल हो जाती है। यही नहीं, ताश के पत्तों—बादशाह-बेगम-ग़ुलाम और दुग्गी-तिग्गी-सत्ते आदि के माध्यम से वह उस न्याय-व्यवस्था की मूर्खताओं पर भी हैरान होती है, जिसमें ‘पहले सज़ा और पीछे फ़ैसला’ सुनाया जाता है। कहने की आवश्यकता नहीं कि बाल-मनोविज्ञान के विभिन्न स्तरों का उद्घाटन करते हुए लेखक वर्तमान देश-काल पर भी टिप्पणी करता है। वस्तुतः इस उपन्यास की इन्हीं विशेषताओं के कारण इसके प्रायः सभी अनुवाद महत्त्वपूर्ण रचनाकारों द्वारा हुए हैं। इस दृष्टि से हिन्दी के लब्धप्रतिष्ठ कवि शमशेर बहादुर सिंह द्वारा किया गया यह अनुवाद भी अपनी रचनात्मक ताज़गी से इस कृति को और अधिक महत्त्वपूर्ण बनाता है।
Vitt Vasana
- Author Name:
Shankar
- Book Type:

-
Description:
संसार में सम्पत्ति का, धन का कोई विकल्प नहीं है, मनुष्य ने सभ्य होने के क्रम में जब मुद्रा का आविष्कार किया होगा, तभी यह तय हो गया होगा कि अब कोई न किसी के बराबर होगा, और न कोई कहीं रुककर यह कह सकेगा कि अब बस, मेरी क्षुधा तृप्त हुई। अब कोई कितना भी जमा करके रख सकता था, और कितने भी और की लालसा में डूबा रह सकता था।
और यहीं उस दो बित्ता ज़मीन को हमारे पैरों के नीचे से निकल जाना था जिसे सुख कहते हैं, और जिस पर पाँव जमाकर आदमी कैसे भी झंझावात का सामना कर सकता था।
यह उपन्यास अस्तित्व के उसी आधार-सुख और धन की असीम लालसा के संघर्ष की कथा है। वनबिहारी और शकुन्तला का वह प्यार जिसने किराए के एक छोटे से कमरे में, छोटी-सी एक नौकरी के सहारे एक बड़ा सुख जिया था, बाद में बिजनेस की ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों पर ऊँची उड़ानें भरने लगा। धनाभाव के कारण अपने शिशु को गँवा चुकी शकुन्तला ने ठान लिया कि अब धन के ढेर लगाने हैं तो वनबिहारी ने भी अपना सारा कौशल अपना अलग बिजनेस बड़ा करने में लगा दिया। रास्ते अलग हो गए, और प्रेम कहीं का नहीं रह गया।
लेकिन अन्त में लक्ष्मी ने शकुन्तला की परीक्षा ली और वनबिहारी ने अपनी सम्पन्नता को कभी प्रेमिका रही शकुन्तला के लिए न्योछावर कर दिया, तो जीवन जैसे कई प्रश्न लेकर खड़ा हो गया। यही मर्म है वित्त की इस वासना का।
Where Has My Gulla Gone
- Author Name:
Padma Sachdev
- Book Type:

- Description: No Description Available for this Book
Chaturang
- Author Name:
Dilip Purushottam Chitre
- Book Type:

-
Description:
‘चतुरंग’ को बीसवीं शताब्दी के सातवें-आठवें दशक का मुम्बई कॉस्मोपॉलिटन परिवेश एक नया आयाम प्रदान करता है। इसके साथ है दिलीप चित्रे की बिम्बधर्मी अभिव्यक्ति की कई शैलियों को अपनाने वाली सर्जनशील भाषा।
‘चतुरंग’ संग्रह के चारों कथानक अपूर्व, आकर्षक और रहस्यमयी लगते हैं। महानगर की भीड़ में लगातार अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद में भटकते पात्र कहानी में एक अद्भुत नाटकीयता पैदा करते हैं जो लेखक के अपने अनुभवों से निकले हुए प्रतीत होते हैं।
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