Sapnon Ke Dhai Ghar
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Author:
Rashmi SharmaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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रश्मि शर्मा का दूसरा कहानी-संग्रह 'सपनों के ढाई घर' इस बात का प्रमाण है कि कथा-लेखन उनके लिए एक गम्भीर एवं जिम्मेदारी भरा सतत कर्म है। जाहिरन, इसका निर्वाह वह अपनी निरन्तर रचनात्मकता और सार्थक हस्तक्षेप से कर रही हैं। इस संग्रह की तमाम कहानियाँ अपने परिवेश के प्रति उनकी सजग संवेदनशीलता और उनमें निहित अदीठ जीवन-सत्यों को खोज निकालने की उनकी दृष्टि एवं कौशल से सम्भव हुई हैं। ये कहानियाँ विषय वैविध्य के कारण जितना पाठकों को समृद्ध करती हैं, उतना ही मनुष्य मन की जटिलताओं में उतरकर उनके अवगुंठनों को खोलते हुए चकित भी करती हैं। ये कहानियाँ स्त्री जीवन की विडम्बनाओं के उन बन्द कपाटों को खोलने की कोशिश करती हैं, जिनके पीछे उनकी नियति छुपी बैठी है। 'सपनों के ढाई घर' जिस तरह प्रतिरोध रचती है, वह न सिर्फ चकित करता है, बल्कि पाठकीय चेतना पर उसका असर भी देर तक बना रहता है। रश्मि प्रेम, संवेदना और संचेतना के संयोग से कथा-परिदृश्य निर्मित करती हैं, जिसके भीतर स्त्री-जीवन की अनेक छवियाँ मिलती हैं। इनमें अपनी स्मृतियों में जीती कोई नानी है, तो अपनी परम्परागत कला के बूते अपनी पहचान पर गर्व करती आदिवासी समाज की रुदनी भी है। अपने अकेलेपन के बीच अपने जीवन में आए पुरुषों को याद करती श्रेया है, अपने पति के लिए चिन्तित कृतिका है, अपनी पूर्व मालकिन से होड़ लेती सोनी है, अपने जीवन में अप्रत्याशित फैसले लेती पूर्णिमा है। जाहिर तौर पर ये अनेक स्त्रियाँ हैं, लेकिन इन सभी से मिलकर स्त्री-जीवन का वृत्त बनता है। रश्मि शर्मा ने इसे बड़ी संलग्नता, कौशल और धैर्य से रचा है। इस रचाव में उनका सूक्ष्म ऑब्जर्वेशन और मनुष्य मनोविज्ञान की गहन समझ शामिल है। इन कहानियों का सौन्दर्य किसी कलाबाजी में नहीं, अपने कहन के सौष्ठव में निहित है। ये अपने कथ्य के अनुकूल अपना शिल्प लेकर आती हैं, लिहाजा, इन्हें पढ़ने का आस्वाद भी भिन्न है और इनका प्रभाव भी अभिन्न। यह संग्रह रश्मि शर्मा के कथा-कौशल की एक और बानगी है। —अवधेश प्रीत
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रश्मि शर्मा का दूसरा कहानी-संग्रह 'सपनों के ढाई घर' इस बात का प्रमाण है कि कथा-लेखन उनके लिए एक गम्भीर एवं जिम्मेदारी भरा सतत कर्म है। जाहिरन, इसका निर्वाह वह अपनी निरन्तर रचनात्मकता और सार्थक हस्तक्षेप से कर रही हैं। इस संग्रह की तमाम कहानियाँ अपने परिवेश के प्रति उनकी सजग संवेदनशीलता और उनमें निहित अदीठ जीवन-सत्यों को खोज निकालने की उनकी दृष्टि एवं कौशल से सम्भव हुई हैं। ये कहानियाँ विषय वैविध्य के कारण जितना पाठकों को समृद्ध करती हैं, उतना ही मनुष्य मन की जटिलताओं में उतरकर उनके अवगुंठनों को खोलते हुए चकित भी करती हैं।
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रश्मि शर्मा ने इसे बड़ी संलग्नता, कौशल और धैर्य से रचा है। इस रचाव में उनका सूक्ष्म ऑब्जर्वेशन और मनुष्य मनोविज्ञान की गहन समझ शामिल है। इन कहानियों का सौन्दर्य किसी कलाबाजी में नहीं, अपने कहन के सौष्ठव में निहित है। ये अपने कथ्य के अनुकूल अपना शिल्प लेकर आती हैं, लिहाजा, इन्हें पढ़ने का आस्वाद भी भिन्न है और इनका प्रभाव भी अभिन्न। यह संग्रह रश्मि शर्मा के कथा-कौशल की एक और बानगी है।
—अवधेश प्रीत
Book Details
-
ISBN9789349180550
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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ग्रामीण, क़स्बाई और शहरी जीवन के सुख-दुख की ये कहानियाँ अपने भाषिक प्रवाह के लिए ख़ासतौर पर प्रभावित करती हैं। कहीं छोटे और कहीं बड़े अपने कलेवर में जीवन का एक सम्पूर्ण चित्र सम्भव करती हुईं ये कहानियाँ देर तक हमारी स्मृति में बनी रहती हैं। शीर्षक कथा ‘रफू वाली साड़ी’ के अलावा ‘एक टुकड़ा प्रेम’, ‘किस्मत का खेल’, ‘भला कीजिए भला होगा’, ‘मोहिनी’, ‘पिता’ और ‘भला-बुरा’ आदि संग्रह की लगभग सभी कहानियाँ निम्न तथा मध्यवर्गीय भारतीय जीवन के किसी न किसी महत्त्वपूर्ण पहलू को उजागर करती हैं। यह कथाकार का कौशल है कि अपनी कहानी के फ़्रेम में वे मनुष्य-जीवन के कई पहलुओं को एक साथ रेखांकित करते हुए चलते हैं। ‘चुनावी यात्रा’ शीर्षक कहानी इसका अच्छा उदाहरण है जिसमें आम जन-जीवन से जुड़ी कितनी ही समस्याओं को छूते हुए कथाकार बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, काम के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में पलायन की विडम्बना को दिखाते हुए नई पीढ़ी में राजनीतिक सजगता के अभाव की ओर भी इशारा करती है। एक पठनीय कथा-संग्रह|
Yenangvikarh
- Author Name:
Smt. Meera Jaiswal
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मीरा जायसवाल का बचपन और किशोरावस्था उत्तर प्रदेश के कस्बे, शहरों और गंगा की लहरों पर किलोल करते हुए बीता। उनकी रगों में कस्बाई भाषा, संस्कृति, मुहावरे और कजरी बसी हैं। बंसीलाल, अनंतलाल, प्रकाशवती, लता, स्वर्णा और नन्ही फूआ इसी मिट्टी से जुड़े किरदार हैं। नन्ही फूआ की बाल-सुलभ नादानी या बाल-विवाह जैसी कुरीतियों के कारण अच्छे दिनों ने साथ भले ही छोड़ दिया हो, पर कभी न खत्म होनेवाला पश्चात्ताप हमेशा उनका सहचर बना रहा। बंशीलाल, अनंतलाल, प्रकाशवती ऐसे किरदार हैं, जिन्होंने विलायत से उच्च शिक्षा प्राप्त की। सभी प्रतिष्ठित और धनाढ्य वर्ग के इन किरदारों के निजी जीवन का बदरंग चेहरा भी इसी कस्बाई मिट्टी से गढ़ा है। दीर्घायु और खिलाड़ी के जीवन का नीरजा के व्यक्तित्व पर इतना गहरा असर पड़ा कि जीवन भर बात-बात पर कहकहे लगानेवाली, लेकिन किसी भी प्रेमपत्र को देखकर आपे से बाहर हो जानेवाली उनकी अविश्वसनीय एवं नितांत विरोधी प्रवृत्ति लोगों की समझ से परे थी। स्विट्जरलैंड में रहने के बाद मीरा जायसवाल को फ्रेंच, जर्मन, इटैलियन और बेनेजुयेलियन संस्कृति को भी देखने-जानने का अवसर मिला। फ्रोसुआ, इसी स्विट्जरलैंड के रनो शहर के इर्द-गिर्द बसा एक किरदार है। अपने निष्कलुष, निश्छल और बाल-सुलभ चरित्र के बाँकपन के साथ वह भी यहाँ उपस्थित है। ‘येनांगविकारः’ कहानी किन्नरों के जीवन की उन परतों को उधेड़ती है, जिनसे हम कभी रूबरू हुए ही नहीं। इस कहानी के किरदार लता और मोहित उन अपराधों का दंड भुगत रहे हैं, जो उन्होंने किया ही नहीं, जबकि स्वर्णा अपनी झोली में आए उस अप्रत्याशित हर्ष के साथ हैं, जो किसी किन्नर के लिए अकल्पनीय है। अनुक्रम भूमिका—7 आभार—9 1. येनांगविकार: 2. सजनवा बैरी हो गए हमार—41 3. जोड़ियाँ जग थोड़ियाँ —64 4. समरथ को नहिं दोष गुसाईं?—80 5. मेरा सिनेमाई खत—99 6. सफरगाथा गोलगप्पों की —130 7. मिशियो फ्रोंसुआ शोजों —137 8. सराहना तेरो कितनो नाम!—156
Jadui Chashmen
- Author Name:
Dr. Manjari Shukla
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डॉ मंजरी शुक्ला की पठनीय और शिक्षाप्रद बाल-कहानियों का संग्रह है 'जादुई चश्में' 'जादुई चश्में' लेखिका डॉ मंजरी शुक्ला का कहानी संग्रह है। इसमें लेखिका की चौदह कहानियों को संकलित किया गया है। कहानियाँ रोचक है और बच्चों को पढ़ने के लिए दी जा सकती हैं या इन्हें उन्हें पढ़कर सुनाया जा सकता है:
Bahurangi Madhupuri
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
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राहुल सांकृत्यायन ने हिमालय के ऊपरी क्षेत्रों में यात्राएँ करके वहाँ के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन को पाठकों के लिए सुलभ किया। अपने यात्रा-वृत्तान्तों और अन्य पुस्तकों में उसके सप्रमाण और सुदीर्घ विवरण दिए, जिससे हिन्दी और पाठकों के ज्ञानकोष में उल्लेखनीय अभिवृद्धि हुई। लेकिन हिमालय के निचले तराई क्षेत्र के जीवन-जगत को भी उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था। यहाँ हो रहे सामाजिक तथा सांकृतिक बदलावों और परिवर्तनशील वर्तमान की ये छवियाँ अकसर उनकी कहानियों में प्रकट हुई हैं। ‘बहुरंगी मधुपुरी’ में शामिल कहानियों को आप उसी के उदाहरण के रूप में पढ़ सकते हैं। मधुपुरी जिसे उन्होंने विलासपुरी भी कहा है, वह स्थान है जहाँ अंग्रेज गर्मियों के दिनों में रहने और काम करने जाते थे। उन्होंने उन क्षेत्र को अपने ढंग से विकसित करना शुरू किया था, फलतः वहाँ के मूल निवासियों से भी उनका सीधा सम्पर्क हुआ। ये कहानियाँ इसी गतिशील सामाजिकी को सामने लाती हैं। ये सिर्फ कहानियाँ नहीं हैं, इनमें एक तरह का समाजशास्त्रीय विश्लेषण भी है। अंग्रेजों की देखा-देखी देशी राजे-महाराजे भी इस राह चले, तो कहानियों में वे भी आते हैं, और स्थानीय लोग भी जिन पर इन गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव भी पड़ रहा था, और नकारात्मक भी।
Deshbhakton Ki Amar Kahaniyan
- Author Name:
Chitra Garg
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हमारे राष्ट्र के निर्माण में अनेक महान देशभक्तों व क्रांतिवीरों का योगदान रहा है। चाहे राष्ट्र का स्वावलंबन हो, स्वतंत्रता संग्राम हो या स्वाभिमान, सभी में देशभक्तों ने अमूल्य योगदान दिया है, जिससे नए भारत का निर्माण हो सका। अनेक क्रांतिकारियों ने देश की स्वाधीनता हेतु अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी जीवन-स्मृति व योगदान हमारी अमूल्य धरोहर है। उनके जीवन की कहानियाँ हमारे अंदर देशप्रेम की भावना जाग्रत करके हमें राष्ट्र-निर्माण में सहयोग देने के लिए प्रेरित करती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में माँ भारती के कुछ अमर सपूतों के जीवन से संबंधित प्रेरणाप्रद घटनाओं को कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कुछ देशभक्तों के नाम जाने-पहचाने हैं और कुछ पूरी तरह अपरिचित हैं। दरअसल अनेक क्रांतिकारी वीरों को हमारे देश ने विस्मृत कर दिया है। एक ही पुस्तक में बहुत सारे क्रांतिवीरों और देशभक्तों की कहानियाँ पाठकों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत करने का यह विनम्र प्रयास है। वर्तमान और भावी पीढिय़ों को अपने हुतात्माओं, क्रांतिवीरों और देशभक्तों के त्याग, समर्पण तथा राष्ट्रभक्ति से परिचित करानेवाली पठनीय कृति।
Apharan
- Author Name:
Ramdev Shukla
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हम लोग अपनी शैक्षिक योग्यता प्रमाणित कर चुके हैं। जवान हैं, मेहनत कर सकते हैं। कोई कमी नहीं है, किंतु आपकी महान् व्यवस्था हमारे लिए दैनिक मजूर के बराबर वेतन का भरोसा भी तो हमें नहीं दे पाती। हम क्या करें अपनी योग्यता का? हम क्या करें अपनी ऊर्जा का? क्या करें अपने खौलते लहू का? और अपने उबलते हुए गुस्से का क्या करें? हमारे साथ पढ़नेवाले फिसड्डी लड़के पाँच सितारा जिंदगी जी रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि वे किसी मंत्री के बेटे हैं या आई.ए.एस. अफसर के दामाद हैं या बड़े तस्कर के सपूत हैं!’ ‘जिन्होंने हमें पहचाना, हमारे माथे पर लगा बेरोजगार का दाग पोंछ दिया, हमें बीस, तीस, कभी-कभी चालीस हजार रुपए महीने तक वेतन देते हैं, वे कौन हैं, हम नहीं जानते? जानने की उत्सुकता न रखना ही हमारी ‘योग्यता’ है। आपकी न्याय-व्यवस्था देश को बेचकर स्विस बैंक भरनेवालों को गंदा नहीं कहती। भूख से बिलबिलाता बच्चा होटल से रोटी चुराकर खा ले तो उसके लिए जेल की सजा है और देश को हर तरह से लूटनेवालों के लिए है सार्वजनिक अभिनंदन-समारोह।’ —इसी संग्रह से ‘अपहरण’ की कहानियाँ समाज में व्याप्त सामाजिक-आर्थिक असमानता, कुरूपता और विसंगतियों को तो उजागर करती ही हैं, साथ ही राजनीति, चुनाव और मानवीय संबंधों का गहराई से विश्लेषण करती हैं। पठनीयता से भरपूर सुरुचिपूर्ण कहानियाँ।
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