Samay-Ashva Belagam
Author:
ChandrakantaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
<span style="font-weight: 400;">कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की पृष्ठभूमि में यह उपन्यास अपनी सांस्कृतिक जड़ों से विच्छिन्न मनों की पीड़ा तथा ग्लोबलाइजेशन से बौराए हमारे मौजूदा वक़्त की कथा है। एक तरफ़ लोग कहीं मजबूरन तो कहीं नए दौर के प्रवाह में अपनी जड़ों से उखड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ़ जीना एक वैश्विक स्पर्धा होता जा रहा है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कश्मीर से जान बचाकर निकला एक पंडित परिवार अपने जैसे अनेक लोगों के साथ राजधानी दिल्ली में आकर नए सिरे से जीवन शुरू करता है। धीरे-धीरे उनके पैर नई ज़मीन पर अपनी जगह भी बनाने लगते हैं लेकिन यह अहसास कि अगर हम अपने ही देश में शरणार्थी हैं तो फिर दुनिया में कहीं भी रहें, क्या फ़र्क़ पड़ता है; भावी पीढ़ी के लिए निर्णायक बन जाता है। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">कश्मीरी संस्कृति और मूल्यों में रसे-पगे माता-पिता का प्रशिक्षण परिवार को बिखरने तो नहीं देता लेकिन अपने घर-ज़मीन से दूर, महानगरों के परायेपन में सम्बन्धों को उस तरह जीना भी सम्भव नहीं जैसे अपनी भूमि पर अपनी संस्कृति, अपने माहौल के बीच हो सकता था। </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">वरिष्ठ कथाकार चन्द्रकान्ता अपने इस नए उपन्यास में कश्मीर से विस्थापित परिवार की कहानी के माध्यम से जैसे वर्तमान का पूरा चित्र ही खींच देती हैं। बुज़ुर्गों का अकेलापन, नई पीढ़ी के भटकाव, सतत एक होड़ में डूबे युवाओं का तनाव, बिखरता दाम्पत्य, पश्चिमी संस्कृति और तकनीक के दबाव, विश्व के अलग-अलग हिस्सों में हो रहा विस्थापन, सार्वजनिक स्पेस में स्त्रियों पर होनेवाले हमले और वह सब जो इस दौर को एक शान्त धारा नहीं, भीषण भँवर का रूप देता है; इन सबको लेकर एक गम्भीर चेतावनी यहाँ मौजूद है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">उपन्यास के मुख्य पात्र सुरेन्द्रनाथ का यह कथन कि 'यह समय बूढ़ों का नहीं है' जैसे इस पूरे परिदृश्य पर एक सम्पूर्ण टिप्पणी है। अर्थात धीरता, गम्भीरता, ठहराव, गहराई और प्रकृति के हमक़दम चलने का यह समय नहीं है। देश से लेकर विदेश तक बेलगाम बहती एक गति है जिसके बने रहने के लिए हर किसी की साँसें उखड़ी जा रही हैं। चन्द्रकान्ता की सधी हुई क़लम एक-एक पंक्ति में वैश्विक विडम्बना की एक-एक परत खोलती है।</span>
ISBN: 9789393768308
Pages: 198
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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दारुलशफ़ा, लखनऊ। यह पता है हमारी वर्तमान राजनीति का, जिसके ‘चरित्र’ का लेखा-जोखा इस किताब में दर्ज है। यानी एक स्थान विशेष, जहाँ कुछ विशेष लोग विशेष स्थितियों में विशेष समस्याओं के समाधान में जुटे हुए हैं। ये समस्याएँ निजी होकर राष्ट्रीय हैं, तो प्रादेशिक होकर अन्तरराष्ट्रीय। भारतीय राजनीति पिछले डेढ़-दो दशक से कुछ ऐसी ही समस्याओं का उत्पादन कर रही है।
वातानुकूलित कक्ष। लम्बे-लम्बे गलियारे। लॉन। और इस सबमें लगातार कानाफूसी करती हुई साज़िश। अपनी-अपनी रियासतों की हिफ़ाज़त के लिए चिन्तित कुर्सियाँ और उनके इर्द-गिर्द लट्टुओं की तरह चक्कर काटते चमचे।...इसी माहौल में सुपरिचित वर्तमान राजनीति के विभिन्न अँधेरे कोनों की विस्मयकारी पड़ताल की गई और वस्तुतः एक रोचक घटनाक्रम के सहारे यह उपन्यास राजनीति की जिन घिनौनी सच्चाइयों को उद्घाटित करता है, वे हमारी आँखें खोल देनेवाली है और हमें इस सारे तंत्र पर नए सिरे से सोचने को बाध्य करती है।
Kankal
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

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‘कंकाल’ भारतीय समाज के विभिन्न संस्थानों के भीतरी यथार्थ का उद्घाटन करता है। समाज की सतह पर दिखाई पड़नेवाले धर्माचार्यों, समाज-सेवकों, सेवा-संगठनों के द्वारा विधवा और बेबस स्त्रियों के शोषण का एक प्रकार से यह सांकेतिक दस्तावेज़ है। आकस्मिकता और कौतूहल के साथ-साथ मानव-मन के भीतरी परतों पर होनेवाली हलचल इस उपन्यास को गहराई प्रदान करती है। हदय-परिवर्तन और सेवा-भावना स्वतंत्रताकालीन मूल्यों से जुड़कर इस उपन्यास में संघर्ष और अनुकूलन को भी सामाजिक कल्याण की दृष्टि का माध्यम बना देते हैं।
उपन्यास अपने समय के नेताओं और स्वयंसेवकों के चरित्रांकन के माध्यम से एक दोहरे चरित्रवाली जिस संस्कृति का संकेत करता और बनते हुए जिन मानव-सम्बन्धों पर घंटी और मंगल के माध्यम से जो रोशनी फेंकता है वह आधुनिक यथार्थ की पृष्ठभूमि बन जाता है। सर्जनात्मकता की इस सांकेतिक क्षमता के कारण यह उपन्यास यथार्थ के भीतर विद्यमान उन शक्तियों को भी अभिव्यक्त कर सका है जो मनुष्य की जय-यात्रा पर विश्वास दिलाती है।
Master Anshumaan
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

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मास्टर अंशुमान विश्वविख्यात फ़िल्म निर्देशक और अनूठे कथाकार सत्यजित राय की बेहद लोकप्रिय कथाकृति है। इसमें ऐसे एक किशोर–अंशुमान की कहानी है जो एक फ़िल्म में अभिनय करने के लिए चुने जाने के बाद शूटिंग के लिए अजमेर जाता है। वहाँ उसकी मुलाकात फ़िल्मी दुनिया के ऐसे लोगों से होती है जो एक कहानी को परदे पर साकार करने में जुटे हैं। वह भी उनमें शामिल हो जाता है। दूसरी तरफ उसका सामना उन परिस्थितियों से होता है जिनमें, फिल्मी भूमिकाओं से परे, लोगों के असली चेहरे उजागर हो जाते हैं। गुमनाम रहते हुए, बन रही फिल्म के नायक के लिए जोखिम भरे कार्य करने वाले भलेमानस स्टंटमैन केष्टो दा और गुंडे की भूमिका निभाने वाले जगू दा जैसे लोगों को करीब से देखने के बाद अंशुमान के सामने एक बड़ी सचाई स्पष्ट होती है कि असल दुनिया किसी फ़िल्म की कहानी से कहीं अधिक पेचीदा है।
शूटिंग के बहाने फ़िल्म निर्माण के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराती यह कहानी पाठक को उस समय रोमांच की नई राह पर ले जाती है, जब एक बेशकीमती मणि की चोरी के चपेटे में सारा शूटिंग दल आ जाता है।
किशोर अंशुमान के मुख से कही गई यह कथा जितनी रोमांचक है उतनी ही प्रेरक भी।
Chanakya
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

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चाणक्य सुविख्यात उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा की अन्तिम कथाकृति है। मगध-सम्राट् महापद्म नन्द और उसके पुत्रों द्वारा प्रजा पर जो अत्याचार किए जा रहे थे, राज्यसभा में आचार्य विष्णुगुप्त ने उनकी कड़ी आलोचना की; फलस्वरूप नन्द के हाथों उन्हें अपमानित होना पड़ा। विष्णुगुप्त का यही अपमान अन्ततः उस महाभियान का आरम्भ सिद्ध हुआ, जिससे एक ओर तो आचार्य विष्णुगुप्त ‘चाणक्य’ के नाम से विख्यात हुए और दूसरी ओर मगध-साम्राज्य को चन्द्रगुप्त-जैसा वास्तविक उत्तराधिकारी प्राप्त हुआ।
भगवती बाबू ने इस उपन्यास में इसी ऐतिहासिक कथा की परतें उघाड़ी हैं। लेकिन इस क्रम में उनकी दृष्टि एक पतनोन्मुख राज्य-व्यवस्था के वैभव-विलास और उसकी उन विकृतियों का भी उद्घाटन करती है जो उसे मूल्य-स्तर पर खोखला बनाती हैं और काल-व्यवधान से परे आज भी उसी तरह प्रासंगिक हैं।
इस उपन्यास की प्रमुख विशेषता यह भी है कि चाणक्य यहाँ पहली बार अपनी समग्रता में चित्रित हुए हैं। उनके कठोर और अभेद्य व्यक्तित्व के भीतर भगवती बाबू ने नवनीत-खंड की भी तलाश की है। अपने महान जीवन-संघर्ष में स्वाभिमानी, संकल्पशील, दूरद्रष्टा और अप्रतिम कूटनीतिज्ञ के साथ-साथ वे एक सुहृद् प्रेमी और सद्गृहस्थ के रूप में भी हमारे सामने आते हैं। निश्चय ही, ‘चित्रलेखा’ और ‘युवराज चूण्डा’ जैसे ऐतिहासिक उपन्यासों के क्रम में लेखक की यह कृति भी स्मरणीय है।
Dubhang
- Author Name:
Laxman Gaiakwad
- Book Type:

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‘दुभंग’ 30 सितम्बर, 1993 को महाराष्ट्र के किल्लारी गाँव, ज़िला लातूर में आए भूकम्प पर आधारित उपन्यास है। इस भूकम्प से यह गाँव लगभग पूरी तरह नष्ट हो गया था। अनेकों लोग मलबे में दफ़न हो गए थे। प्रसिद्ध मराठी लेखक लक्ष्मण गायकवाड़ ने भूकम्प के बाद किल्लारी जाकर बाक़ायदा सहायता और राहत कार्यों में हिस्सा लिया था और उन तमाम सामाजिक तथा मानवीय स्थितियों को अपनी आँखों से देखा था जिनका वर्णन उन्होंने इस उपन्यास में किया है।
एक ऐसी प्राकृतिक आपदा के बाद जिसके सम्मुख मनुष्य अपनी तमाम शक्तिमानता के बावजूद असहाय हो जाता है, हमारा सामाजिक-राजनीतिक ताना-बाना, हमारे मूल्य-मानदंड, जाति-धर्म, हमारा चरित्र और मन क्या-क्या रूप अख़्तियार करता है, यह इस उपन्यास में बख़ूबी चित्रित किया गया है।
लक्ष्मण गायकवाड़ मराठी के अग्रणी लेखकों में हैं। ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से सम्मानित उनकी पुस्तक ‘उचक्का’ विभिन्न भाषाओं में अनूदित हो चुकी है। हमें विश्वास है कि उनका यह उपन्यास भी पाठकों के मन और विचारों को छुएगा।
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