Chautha Shauhar
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This book is a collection of fascinating stories that beautifully portray human emotions, relationships, and the delicate bond between dreams and reality. Each story reflects glimpses of ordinary people’s lives, who at times go through extraordinary circumstances—sometimes in fleeting moments of joy, and at other times in life-changing decisions. Through these stories, Fatima Hasan takes the reader on a journey across different places and atmospheres, where love, sorrow, and the quiet struggle of hope can be felt. The characters and their experiences are so compelling that, after reading, one is prompted to reflect upon their own life and the world around them. Begum Fatima Hasan (1940–1998) was a renowned writer. She authored six books, and much of her work was broadcast on All India Radio, Lucknow, through urduprograms, as well as published in prominent urdumagazines. Among her writings, three collections of stories stand out: Chautha Shauhar, Awara Bagoole, and Gul-o-Khaar. In addition, she also wrote a book for children titled Qabaili Kahaniyan. She took the initiative to publish the works of her father, Professor S. M. Zamin Ali, in book form as well.
Read moreAbout the Book
This book is a collection of fascinating stories that beautifully portray human emotions, relationships, and the delicate bond between dreams and reality. Each story reflects glimpses of ordinary people’s lives, who at times go through extraordinary circumstances—sometimes in fleeting moments of joy, and at other times in life-changing decisions. Through these stories, Fatima Hasan takes the reader on a journey across different places and atmospheres, where love, sorrow, and the quiet struggle of hope can be felt. The characters and their experiences are so compelling that, after reading, one is prompted to reflect upon their own life and the world around them. Begum Fatima Hasan (1940–1998) was a renowned writer. She authored six books, and much of her work was broadcast on All India Radio, Lucknow, through urduprograms, as well as published in prominent urdumagazines. Among her writings, three collections of stories stand out: Chautha Shauhar, Awara Bagoole, and Gul-o-Khaar. In addition, she also wrote a book for children titled Qabaili Kahaniyan. She took the initiative to publish the works of her father, Professor S. M. Zamin Ali, in book form as well.
Book Details
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ISBN9788198188885
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Pages132
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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रोली घमंडी है, रोली अकडू है, रोली ज़िद्दी है... ऐसी तमाम तोहमतों के बीच रोली है कि नौकरी पाने, नौकरी की जगह तक पहुँच पाने और वहाँ से घर लौटने की जद्दोजेहद से रोज़ गुज़र रही है। यक़ीन कीजिए कि ये साधारण सी दिखने वाली बातें एक वर्किंग वूमन के लिये रोज़ लड़ी जाने वाली लड़ाइयाँ हैं। जेंडर, आयु और शहरी/ग्रामीण पृष्ठभूमि को केंद्र में रखकर किये जाने वाले कई सूक्ष्म और स्थूल भेदभाव हैं जिनका सामना रोली और उस जैसी तमाम कामकाजी स्त्रियों को रोज़ करना होता है। परिवार, समाज और रोज़गार के मुश्किल कुरुक्षेत्र में जूझती रोली को केंद्र में रखकर लिखी गई ये कहानियाँ हर कामकाजी स्त्री के जीवन, स्वप्न और संघर्ष का सूक्ष्म और मार्मिक दस्तावेज़ बन पड़ी हैं।
Viparyast
- Author Name:
Samresh Basu
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शहरी जीवन के हाशियों और क़स्बों की निम्नवित्तीय कथाओं के चर्चित बांग्ला लेखक समरेश बसु का यह उपन्यास परम्परागत पारिवारिक ज़िन्दगी के अन्तर्विरोधों, बेरोज़गारी, प्रेम और उसमें दख़ल देती व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षाओं की कहानी है।
अपने बहुविध-बहुरंगी निजी अनुभवों का उपयोग करके अनेक कहानियों को निराशा, जिजीविषा और करुणा के प्रामाणिक दस्तावेज़ बना देने की लेखक की क्षमता इस उपन्यास में भी साफ़ दिखाई देती है। यह कुछ बांग्ला कथा-शैली का कमाल है और कुछ स्वयं समरेश बसु की संवेदना का कि जीवन यहाँ अपनी पूरी सघनता के साथ जस का तस चित्रित हेाता लगता है। परिस्थितियों से त्रस्त कथानायक का यह बयान उन तमाम विडम्बनाओं पर एक साथ रोशनी डालता है, जो उसने सही है—‘लोग-बाग उँगलियों पर गिनकर बता देते हैं कि दुनिया में कौन-कौन से आश्चर्य हैं। मेरे पिताजी को किस नम्बर पर रखा जाएगा, यही जानने की ख़्वाहिश मुझे हुई थी।...बसीरहाट के नाना की सम्पत्ति अपने नाम लिखा लेना, पुन: गृहत्याग, फिर लौटकर आना। पता नहीं अब भी उन्हें कोई बड़ा कारनामा करके दिखाना है या नहीं।’
खुकु यानी जोछना यानी ज्योत्स्ना को पाकर उसके जख़्म कुछ देर को भरते हैं। लेकिन वह भी हमेशा के लिए नहीं हो पाया। सत्तर के दशक में जब देश राजनीतिक उठापटक का सामना कर रहा था, युवा पीढ़ी भी अलग-अलग दिशाओं में बदल रही थी। खुकु को भी अपनी इच्छाओं को अभिव्यक्त करना था, जिसका नतीजा भीषण अलगाव में हुआ।
बेरोक-टोक अगर कुछ जारी रहा तो नियति का दुष्चक्र।
Deaf Girl
- Author Name:
Adesh Kumar
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20-year-old Adesh Kumar has quite a story. Internet and technology don’t care for age, and this youngster, having found a penchant for how the web works, started working very early in his life, at the tender age of 13. And by 17, he had started his first company- foodzo, an online food delivery service for college students. Unfortunately, the model has shut down, and the company will soon be out with its new model. He is also Co-founder of skypix labs, a software development firm based in Delhi and Dehradun.
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