Na Hanyante
(0)
Author:
Maitriye DeviPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत मैत्रेयी देवी के आद्यन्त रसपूर्ण इस उपन्यास में प्रेम के अमर तत्त्व ने समय की अबाध गति को न केवल रोक दिया है, वरन् उसे अतीत की ओर मोड़ दिया है—बयालीस वर्ष पूर्व नवयौवन के निश्छल, निष्पाप प्रेम के सहज और अबोध दिनों की ओर। आज की पकी उम्र की श्वेत-केशिनी, झुर्रियों-भरे चेहरे और ढीले बदन की अमृता; बेटों-पोतोंवाली, सम्पन्न परिवार की सम्भ्रान्त अमृता एक ऐसे असमंजस का शिकार हो गई है, जिसे न तो वह छोड़ ही पा रही है और न अपने हृदय से भींच-बाँधकर रख सकती है। बयालीस वर्ष पहले वह सब कुछ, जो एक विदेशी छात्र को लेकर उसके साथ हुआ था, वह प्रेम ही था न! प्रेम नहीं था तो इस तरह, इस उम्र में, आज की परिस्थितियों में उसकी याद ने उसे इतना क्यों झकझोर दिया है? आधी सदी पहले सात समन्दर पार से आए उस अपरिचित से मिलने को आज वह एकाएक कातर क्यों हो उठी है और अपने अत्यन्त सहनशील पति से उसे एक बार देख आने की अनुमति क्यों चाह रही है? प्रेम जन्म-रहित है, शाश्वत व पुरातन है—शरीर का नाश होने पर भी वह नहीं मरता। न हन्यते हन्यमाने शरीरे।
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साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत मैत्रेयी देवी के आद्यन्त रसपूर्ण इस उपन्यास में प्रेम के अमर तत्त्व ने समय की अबाध गति को न केवल रोक दिया है, वरन् उसे अतीत की ओर मोड़ दिया है—बयालीस वर्ष पूर्व नवयौवन के निश्छल, निष्पाप प्रेम के सहज और अबोध दिनों की ओर। आज की पकी उम्र की श्वेत-केशिनी, झुर्रियों-भरे चेहरे और ढीले बदन की अमृता; बेटों-पोतोंवाली, सम्पन्न परिवार की सम्भ्रान्त अमृता एक ऐसे असमंजस का शिकार हो गई है, जिसे न तो वह छोड़ ही पा रही है और न अपने हृदय से भींच-बाँधकर रख सकती है। बयालीस वर्ष पहले वह सब कुछ, जो एक विदेशी छात्र को लेकर उसके साथ हुआ था, वह प्रेम ही था न! प्रेम नहीं था तो इस तरह, इस उम्र में, आज की परिस्थितियों में उसकी याद ने उसे इतना क्यों झकझोर दिया है? आधी सदी पहले सात समन्दर पार से आए उस अपरिचित से मिलने को आज वह एकाएक कातर क्यों हो उठी है और अपने अत्यन्त सहनशील पति से उसे एक बार देख आने की अनुमति क्यों चाह रही है? प्रेम जन्म-रहित है, शाश्वत व पुरातन है—शरीर का नाश होने पर भी वह नहीं मरता। न हन्यते हन्यमाने शरीरे।
Book Details
-
ISBN9788171196447
-
Pages287
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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महान फ़िल्मकार और अनूठे कथाकार सत्यजित राय के चर्चित जासूस किरदार फेलूदा का एक लोमहर्षक कारनामा है— ‘कैलास में गोलमाल’। इस बहुचर्चित उपन्यास में फेलूदा का सामना होता है प्राचीन मूर्तियों की तस्करी करनेवालों से। भुवनेश्वर के एक प्रसिद्ध मन्दिर से यक्षिणी की मूर्ति के मस्तक गायब होने की घटना से शुरू हुआ यह मामला उस वक्त बेहद पेचीदा हो जाता है, जब सम्भावित तस्कर वस्तुतः एक जासूस निकलता है।
रहस्य-रोमांच के बेहद चक्करदार रास्तों से होकर गुजरती इस कथा में भरपूर रोमांच और मनोरंजन तो है ही, देश की ऐतिहासिक और कलात्मक धरोहर के संरक्षण तथा उसके प्रति प्रेम का सन्देश भी निहित है।
Mafi Kabhi Nahin
- Author Name:
Renate Dorrestein
- Book Type:

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रेनाट डोरेस्टीन नीदरलैंड की सबसे अधिक पढ़ी जानेवाली उपन्यासकार हैं। 1983 में अपनी लेखन-यात्रा शुरू करनेवाली रेनाट ने कई उपन्यास लिखे, जिनमें ‘ए हर्ट ऑफ़ स्टोन’, ‘अननेचुरल मदर’, ‘फेटल लॉस’, ‘नो मर्सी’ प्रमुख हैं। ‘फेटल लॉस’ के लिए ‘गोल्डन आउल पुरस्कार’ सहित उन्हें लेखन में उनके योगदान के लिए विशिष्ट ‘एनी रोमेन पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया।
बेहतरीन कल्पना-जाल, मानसिक-द्वन्द्व और आश्चर्यचकित करनेवाले सस्पेंस अपने उपन्यासों में बुनने में रेनाट महारत रखती हैं। उनके उपन्यास अब तक अंग्रेज़ी और हिन्दी सहित कई भाषाओं में अनूदित हो चुके हैं। सस्पेंस और दर्द, कोमल मानवीय भावनाएँ, रिश्ते, भावनात्मक संघर्ष—सब कुछ अपने उपन्यासों में रेनाट एक मनोवैज्ञानिक की तरह अन्दरूनी सिलवटों के साथ उभार लाती हैं। रेनाट के मन पर उनकी बहन की आत्महत्या का बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा था, जो उनके अन्य उपन्यास पात्रों के साथ इस उपन्यास के मुख्य पात्र फीनुस और फ्रांका के दु:ख में भी छिपा दिखाई देता
है।‘विदाउट मर्सी’—‘माफी कभी नहीं’, रेनाट की सर्वाधिक चर्चित रचनाओं में से एक है। एक सम्पूर्ण और ख़ुशहाल परिवार—पति-पत्नी और एक बेटा, फिर एक दुर्घटना—जिसने सम्पूर्णता को तार-तार कर
दिया : स्त्री और पुरुष के बीच का भावनात्मक अन्तर इस उपन्यास में उभारा गया है। बेटे, येम की हत्या के बाद कैसे फीनुस और फ्रांका इस तकलीफ़ को अलग-अलग झेलते हैं, कैसे एक-दूसरे से दूर होते जाते हैं। एक तरफ़ फ्रांका येम को उसकी चीज़ों में जीवित रखना चाहती है, दूसरी तरफ़, फीनुस अलगाव ढूँढ़ता है। घरेलू ख़ुशहाली के नीचे की अनिश्चितता इस बार रेनाट की मनोविश्लेषक निगाह में आई है। उपन्यास में एक कोमल मोड़ भी आता है जब फीनुस और फ्रांका अपने टूटते रिश्ते को बचाने की कोशिश करते हैं।एहतियात से सधी हुई भाषा में उकेरा गया एक उपन्यास, धारदार, स्पष्ट पात्र-चित्रण...कभी न भूले जा सकनेवाली किताबों में से एक। ‘द बॉल्टीमॉर सन’ (प्रसिद्ध समाचार-पत्र)
बेहतरीन ढंग से बुनी हुई...असाधारण...अविस्मरणीय लेखक
—ग्वीन हाइमन रुबीयो (आइसी स्पार्क्स की लेखक)
Trikal Sandhya
- Author Name:
Paramjeet S. Judge
- Book Type:

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‘त्रिकाल संध्या’ की कथा के केन्द्र में चक दौलतराम नाम के एक गाँव का सिर्फ़ एक दिन है। कथानक गाँव के उन वृद्धों के बारे में है जो अपनी उम्र के चलते अब गाँव की उत्पादन-प्रणाली के लिए अप्रासंगिक हो चुके हैं और उनका दिन गाँव के बाहर मौजूद एक नीम के पेड़ के नीचे बीतता है। उनके जीवन में ऐसा कुछ भी घटित नहीं होता जिसे महत्त्वपूर्ण कहा जा सके, फिर भी उनके जीवन में एक गति निहित है जो गाँव की जीवनधारा और वहाँ के सामाजिक रिश्तों के लिए बहुत अहम है।
उपन्यास के मुख्य पात्र इंदर को अफ़ीम की लत है जिसका उसे कोई पश्चात्ताप नहीं है, लेकिन गाँव की गतिविधियों से वह बेहद जुड़ाव महसूस करता है।
नीम का पेड़ जहाँ बूढ़ों की ठहरी हुई ज़िन्दगी के प्रतीक के तौर पर उपन्यास में आता है, वहीं गाँव के पास से गुज़रने वाली ट्रेन उन्हें गुज़रते वक़्त का भी आभास कराती है। जीवन की सन्ध्या में पहुँचे इन लोगों की स्थिति ज़िन्दगी और मौत के बीच का एक पड़ाव है जो लज्जा और ग्लानि के क्षणों में सुन्दर सिंह द्वारा की गई आत्महत्या के रूपक में अभिव्यक्त भी होती है।
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