Khuda Ki Basti
Author:
Shaukat SiddeeqiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 319.2
₹
399
Available
‘ख़ुदा की बस्ती’ शौक़त सिद्दीक़ी का बहुचर्चित-बहुप्रशंसित उपन्यास है। इसे पाकिस्तान के सर्वोच्च पुरस्कार ‘आदमजी प्राइज़’ से सम्मानित किया गया है। इसके उर्दू में पाकिस्तान में तीस संस्करण छप चुके हैं और संसार की सभी भाषाओं में यह उपन्यास अनूदित होकर प्रसिद्धि पा चुका है। इस उपन्यास पर आधारित सिन्ध प्रान्त और कराची के बीच ‘ख़ुदा की बस्ती’ बसाई गई है। इस उपन्यास के सारे चरित्र वही हैं, जो ख़ुदा की जीती-जागती बस्तियों में भी मिल जाते हैं—अच्छे-बुरे, गुंडे, मवाली, शिद्दत से प्रेम वाले और उसी शिद्दत से नफ़रत करनेवाले भी। छोटे-मोटे, चोर-उचक्के, जेबकतरे, राजनीति का एक हिस्सा बन जानेवाले भी। इस उपन्यास के प्रकाशित होते ही उर्दू की साहित्यिक दुनिया में हंगामा मच गया, क्योंकि इससे पहले इस विषय पर और इतने अनोखे अन्दाज़ में उर्दू में कुछ भी नहीं लिखा गया था।
ISBN: 9788119159796
Pages: 392
Avg Reading Time: 13 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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‘चतुरंग’ को बीसवीं शताब्दी के सातवें-आठवें दशक का मुम्बई कॉस्मोपॉलिटन परिवेश एक नया आयाम प्रदान करता है। इसके साथ है दिलीप चित्रे की बिम्बधर्मी अभिव्यक्ति की कई शैलियों को अपनाने वाली सर्जनशील भाषा।
‘चतुरंग’ संग्रह के चारों कथानक अपूर्व, आकर्षक और रहस्यमयी लगते हैं। महानगर की भीड़ में लगातार अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद में भटकते पात्र कहानी में एक अद्भुत नाटकीयता पैदा करते हैं जो लेखक के अपने अनुभवों से निकले हुए प्रतीत होते हैं।
Jai Baba Felunath
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

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Description:
शरलक होम्स और जेम्स बॉण्ड की तरह ही सत्यजित राय के एक दुर्धर्ष पात्र हैं फेलूदा। जटिल से जटिल परिस्थितियों को परत-दर-परत खोलकर सच को सामने लाना उनका काम है। बांग्लाभाषी समाज की एक पूरी पीढ़ी फेलूदा के जासूसी कारनामों को पढ़-पढ़कर सयानी हुई है। आकर्षण कुछ ऐसा कि किशोरावस्था को पीछे छोड़ चुके प्रौढ़ पाठकों के बीच भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं है।
‘जय बाबा फेलूनाथ’ सत्यजित राय के फेलूदा सीरीज़ का एक प्रतिनिधि उपन्यास है। आधुनिक हिन्दी साहित्य में रहस्य-रोमांच और जासूसी पर आधारित लेखन का श्रीगणेश भले ही हुआ हो, परवर्ती रचनाकारों की लिखी ऐसी मनमोहक कृतियाँ नहीं मिलतीं। सत्यजित राय की प्रस्तुत कृति का अनुवाद इस कमी को पूरा करने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है जिस पर उनके द्वारा निर्मित फिल्म भी अत्यन्त लोकप्रियता हासिल कर चुकी है।
Barkha Rachai
- Author Name:
Asghar Wajahat
- Book Type:

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Description:
विमर्शों के इस दौर में भी असग़र वजाहत जीवन को समझने के लिए उसे टुकड़ों में नहीं बाँटते और न किसी फ़ॉर्मूले के अन्तर्गत सुझाव और समाधान प्रस्तुत करते हैं। वे जीवन को उसकी पूरी जटिलता और प्रवाह के साथ सामने लाते हैं। उनका मानना है कि जीवन को समग्रता में ही समझा जा सकता है। इस तरह प्रस्तुत उपन्यास ‘बरखा रचाई’ किसी विमर्श का ठप्पा लगाए बिना ठोस जीवन से जुड़ी बहुत-सी समस्याओं को सामने लाता है।
उपन्यास में एक ऐसे जीवन के दर्शन होते हैं जो लगातार प्रवाह में है। उनके रूपों, रंगों, कोणों से इस जीवन को देखने और समझने का प्रयास ही इसे महत्त्वपूर्ण बनाता है।
उपन्यास का फलक बहुत व्यापक है। दिल्ली के राजनीतिक जीवन की झलकियों के साथ पत्रकार जीवन की झाँकियाँ, मध्यवर्गीय समाज में स्त्री की स्थिति, महानगर के बुद्धिजीवियों की ऊहापोह, गाँव के बदलते सम्बन्ध, स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की जटिलता, विवाह और विवाहेतर सम्बन्ध, छोटे शहरों का बदलता जीवन और वहाँ राजनीति तथा अपराध की बढ़ती भूमिका जैसे प्रसंग उपन्यास में आए हैं।
उपन्यास में न तो वैचारिक पूर्वग्रह और न किसी विशेष ‘शिल्प कौशल’ का दबाव स्वीकार किया गया है। पात्र स्वयं अपनी वकालत करते हैं। लगता है, पात्रों की गति और प्रभाव इतना अधिक हो गया है कि वे उपन्यास के समीकरण को खंडित कर देंगे, पर यह सब बहुत स्वाभाविक ढंग से सामने
आता है।असग़र वजाहत अपनी ‘क़िस्सागोई’ के लिए विख्यात हैं। उन्होंने दास्तानों और कथाओं से जो कुछ हासिल किया है, उसका भरपूर इस्तेमाल अपनी कथाओं में किया है। जिस तरह क़िस्सा सुनानेवाला अपने श्रोता की अनदेखी नहीं कर सकता, उसी तरह वजाहत अपने पाठक की अनदेखी नहीं
करते।‘बरखा रचाई’ केवल घटनाओं का पिटारा नहीं है। यह जीवन को समझने की एक कोशिश भी है। सत्ता, समाज और व्यक्ति के त्रिकोण की गहन व्याख्या भी पाठक को प्रभावित करती है।
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