Siyasat
Author:
Shivani SibbalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 239.2
₹
299
Available
निजी महत्त्वाकांक्षाओं, पारिवारिक सीमाओं और सामाजिक बदलावों की दिलचस्प कहानी!</p>
<p>एक ही घर में एक ही स्त्री के पाले अहान सिकन्द और राजेश कुमार बचपन के मित्र हैं लेकिन दोनों की दुनिया बहुत अलग है। अहान अमीर परिवार का इकलौता वारिस है जबकि राजेश उसी परिवार के ड्राइवर का लड़का। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, बचपन की उनकी दोस्ती बदलने लगती है। आहान से यह आशा की जाती है कि वह उत्तराधिकार में मिले विरासत को आगामी पीढ़ी के लिए बचाकर रखे जबकि वहीं राजेश से दुनिया की यही आशा है कि वह अधिक से अधिक अपने पिता की तरह घरेलू नौकर बनकर न जिये। लेकिन उसकी योजनाएँ बड़ी हैं।</p>
<p>सियासत एक नई प्रतिभाशाली कलम के आगमन का एलान है जो नई दिल्ली के व्यावसायिक एवं राजनीतिक परिवारों की गोपन दुनिया का परीक्षण करती है।
ISBN: 9789360864446
Pages: 200
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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निराला के शब्दों में ‘हास्य लिये एक स्केच’ कहा गया यह उपन्यास अपनी यथार्थवादी विषयवस्तु और प्रगतिशील जीवनदृष्टि के लिए बहुचर्चित है। बिल्लेसुर एक ग़रीब ब्राह्मण है, लेकिन ब्राह्मणों के रूढ़िवाद से पूरी तरह मुक्त। ग़रीबी से उबार के लिए वह शहर जाता है और लौटने पर बकरियाँ पाल लेता है। इसके लिए वह बिरादरी की रुष्टता और प्रायश्चित्त के लिए डाले जा रहे दबाव की परवाह नहीं करता। अपने दम पर शादी भी कर लेता है।
वह जानता है कि ज़ात-पाँत इस समाज में महज़ एक ढकोसला है जो आर्थिक वैषम्य के चलते चल रहा है। यही कारण है कि ‘पैसेवाला’ होते ही बिल्लेसुर का जाति-बहिष्कार समाप्त हो जाता है। संक्षेप में यह उपन्यास बदलते आर्थिक सम्बन्धों में सामन्ती जड़वाद की धूर्तता, पराजय और बेबसी की कहानी है।
Mahamuni Agastya
- Author Name:
Ramnath Neekhara
- Book Type:

- Description: “वृत्तेन भवति आर्येण विद्यया न कुलेन च के सिद्धान्तानुसार ऋषित्व व महानता कुल तथा विद्या की उच्चता पर नहीं, कर्म एवं आचरण की श्रेष्ठता पर निर्भर करती है; अतः यह प्रश्न नहीं उठता कि किसने किससे जन्म ग्रहण किया, प्रश्न यह आता है कि गुण व कर्म की श्रेष्ठता किसमें कम है और किसमें अधिक है।” इस पौराणिक सिद्धांत को आधार बनाकर तर्कसंगत नया आख्यान रचा है हिंदी के जाने-माने विद्वान रामनाथ नीखरा ने अपनी इस पुस्तक ‘महामुनि अगस्त्य’ में! महामुनि अगस्त्य समाज, राष्ट्र व संसार से पूर्णतः उदासीन निरे वैरागी नहीं थे, वह मंत्र-स्रष्टा तो थे ही, क्रान्ति-द्रष्टा भी थे। वह सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक गरिमा के संवाहक ही नहीं थे; राष्ट्रीय अस्मिता, एकता व अखंडता के संरक्षक भी थे, और वे राष्ट्रहिताय आयोज्य कर्म-यज्ञ के सच्चे अर्थ में प्रणेता, होता व पुरोधा थे। किन्तु पुराणकर्ताओं ने उनकी इस महत्ता को रहस्यात्मक ढंग से प्रस्तुत कर अनुद्घाटित ही रहने दिया है। प्रस्तुत उपन्यास ‘महामुनि अगस्त्य’ उनकी इसी महानता को उद्घाटित करने का तर्कसंगत, सार्थक एवं प्रामाणिक प्रयास है।
A Rogue's Love Diary
- Author Name:
Krish Gangadharan
- Book Type:

- Description: Staring at more than ten years of prison time for attempted manslaughter, Dr Chandran Ramachandran’s life was all but finished. At least, the victim and the witnesses were sure about that. They hoped that the monster would get beaten up by the prison inmates and die in there, like the street mongrel that he was. Chandru was doing himself no favours by choosing to remain silent in court. Awaiting his sentence, he reflected on the verses of Kahlil Gibran: “The river cannot go back. Nobody can go back. To go back is impossible in existence. ” The son of docile, orthodox, middle-class parents, and the grandson of a holy priest, Chandru did not lead the life that was expected of him, nor was he meant for the end that loomed large. Sixteen years ago, he was a University topper, a champion chess player, an expert swimmer, and a Bravery Award recipient. But all that had been frittered away in hurt, grief, anger, jealousy, and debauchery. A spurned love had turned him into a selfish, deceitful, immoral and ruthless rogue. He connived his way to money, success, sex, and a marriage, only to lose everything in his chosen path of self-destruction. But every loss is a harbinger of a gain, and Chandru was redeemed by the grace of the divine. Yet, the paths to redemption are seldom smooth. The demons from the past return to haunt Chandru. What if everything he had believed turned out to be lies? What if the truths that were buried are more dangerous than the lies that had ruined him? What if it all unravels? Will Chandru be able to save those who love him? Will Chandru unleash the rogue in him, one last time, for love? In the ending, will the beginning lie? Join the rogue in his incredible journey of love, guilt, deviousness, duplicity, and unbridled perversion as it unveils in the pages of his stolen diary – A Rogue’s Love Diary.
Tarang
- Author Name:
Kamlakant Tripathi
- Book Type:

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Description:
देश के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य की विसंगतियों, द्वंद्वों और दुविधाओं के उत्स की तलाश है ‘तरंग’। यह तलाश इतिहास के जिस कालखंड (1934-42 ) में ले जाती है उसकी धड़कनें स्वातंत्र्योत्तर भारत की बुनियाद में अन्तर्भुक्त हैं और उसकी यात्रा को लगातार विचलित-आलोड़ित करती रही हैं। उस कालखंड में इन विसंगतियों, द्वंद्वों और दुविधाओं को जिस तरह बरता गया, उसका फलित हमें आज भी उद्भ्रान्त किए हुए है। उपन्यास के रूप में ‘तरंग’ उसी कालखंड की गहन पड़ताल करती एक बहुआयामी कथा है जिसकी जड़ों के रेशे पिछली सदी के आरम्भ तक जाते हैं।
भगत सिंह और चन्द्रशेखर आज़ाद के बलिदान के साथ ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ की क्रान्तिकारी धारा का अवसान नहीं हो गया था, उसमें बिखराव ज़रूर आया था। ‘तरंग’ एक औपन्यासिक कृति के रूप में उसी अवशिष्ट धारा के एक विच्छिन्न समूह के गुमनाम क्रान्तिकारियों के अन्तरंग से साक्षात्कार कराती है। उसी धारा को केन्द्र में रखकर वैश्विक परिप्रेक्ष्य में स्वतंत्रत आन्दोलन की मुख्यधारा का प्रतिपाठ भी रचती है और इतिहास के कई मिथकों का भेदन करती है। इस अर्थ में ‘तरंग’ भारतीय और विश्व इतिहास के एक अहम अध्याय में उपन्यासकार का सुचिन्तित सृजनात्मक हस्तक्षेप है। गांधी-नेहरू-पटेल की अन्तर्विरोधी धारा के बरअक्स उपन्यास का विशाल फलक स्वामी सहजानन्द, डॉ. अम्बेडकर, एम.एन. रॉय और सुभाषचन्द्र बोस के गिर्द घूमता है और अकादमिक इतिहास-लेखन के कुहासे को भेदकर उसके उपेक्षित या अल्पज्ञात पक्ष को निर्मम यथार्थ की रोशनी में उद्घाटित करता है। इस अर्थ में उपन्यास उस कालखंड के ज़मीनी, अन्तरंग और ज़रूरी दस्तावेज़ की निर्मिति भी है। अकादमिक रिक्ति को भरने का एक श्रमसाध्य, निष्ठावान और सृजनात्मक उपक्रम।
उस कालखंड में किसान आन्दोलन की एक उत्कट क्रान्तिकारी धारा भी प्रवाहित है जो जमींदारों, ताल्लुकेदारों के विरुद्ध किसान-संघर्ष की नई प्रविधि ईजाद करती है। क्रान्तिकारियों का उक्त समूह स्वामी सहजानन्द के उत्प्रेरण में इस ईजाद के केन्द्र में है। इस ब्याज से उपन्यास सबाल्टर्न इतिहास के एक अँधेरे कोने को दीप्त करता है। क्रान्ति-पथ को स्खलित करने की ओर प्रवृत्त ऐन्द्रिक स्त्री-पुरुष सम्बन्ध का कलात्मक अतिक्रमण भी ‘तरंग’ का एक अहम उपजीव्य है।
Hidden From The World
- Author Name:
Ganga
- Book Type:

- Description: Penned thoughts, that travel beyond life and reality…!!! a book made out of few thoughts a young wanderer had and kept to herself, hidden from the world. Hope you will enjoy and like the aftertaste.
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