Anveshan

(0)

Author:

Akhilesh

Language:

Hindi

199

₹ 159.2 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


संवेदनशील कथाकार अखिलेश का पहला उपन्यास ‘अन्वेषण’ जीवन-संग्राम की एक विराट् प्रयोगशाला है जहाँ उच्छल प्रेम, श्रमाकांक्षी भुजाओं और जन-विह्वल आवेगों को हर पल एक अम्ल परीक्षण से गुज़रना पड़ता है। सहज मानवीय ऊर्जा से भरा इसका नायक एक चरित्र नहीं, हमारे समय की आत्मा की मुक्ति की छटपटाहट का प्रतीक है। उसमें ख़ून की वही सुर्ख़ी है, जो रोज़-रोज़ अपमान, निराशा और असफलता के थपेड़ों से काली होने के बावजूद सतत संघर्षों के महासमर में मुँह चुराकर जड़ता की चुप्पी में प्रवेश नहीं करती, बल्कि अँधेरी दुनिया की भयावह छायाओं में रहते हुए भी उस उजाले का ‘अन्वेषण’ करती रहती है जो वर्तमान बर्बर और आत्माहीन समाज में लगातार ग़ायब होती जा रही है। ‘अर्थ’ के इस्पाती इरादों के आगे वह बौना बनकर अपनी पहचान नहीं खोता, बल्कि ठोस धरातल पर खड़ा रहकर चुनौतियों को स्वीकार करता है। यही कारण है कि द्वन्द्व में फँसा नायक बदल रहे समय और समाज के संकट की पहचान बन गया है।</p> <p>‘अन्वेषण’ की भाषा पारदर्शी है। कहीं-कहीं वह स्फटिक-सी दृढ़ और सख़्त भी हो गई है। इसमें एक ऐसा औपन्यासिक रूप पाने का प्रयत्न है, जिसमें काव्य जैसी एकनिष्ठ एकाग्रता सन्तुलित रूप में विकसित हुई है।</p> <p>सही मायने में ‘अन्वेषण’ आज के आदमी के भीतर प्रश्नों की जमी बर्फ़ के नीचे दबी चेतना को मुखर करने की सफल चेष्टा है।

Read more

ISBN
9788183613514
Pages
128
Avg Reading Time
4 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

संवेदनशील कथाकार अखिलेश का पहला उपन्यास ‘अन्वेषण’ जीवन-संग्राम की एक विराट् प्रयोगशाला है जहाँ उच्छल प्रेम, श्रमाकांक्षी भुजाओं और जन-विह्वल आवेगों को हर पल एक अम्ल परीक्षण से गुज़रना पड़ता है। सहज मानवीय ऊर्जा से भरा इसका नायक एक चरित्र नहीं, हमारे समय की आत्मा की मुक्ति की छटपटाहट का प्रतीक है। उसमें ख़ून की वही सुर्ख़ी है, जो रोज़-रोज़ अपमान, निराशा और असफलता के थपेड़ों से काली होने के बावजूद सतत संघर्षों के महासमर में मुँह चुराकर जड़ता की चुप्पी में प्रवेश नहीं करती, बल्कि अँधेरी दुनिया की भयावह छायाओं में रहते हुए भी उस उजाले का ‘अन्वेषण’ करती रहती है जो वर्तमान बर्बर और आत्माहीन समाज में लगातार ग़ायब होती जा रही है। ‘अर्थ’ के इस्पाती इरादों के आगे वह बौना बनकर अपनी पहचान नहीं खोता, बल्कि ठोस धरातल पर खड़ा रहकर चुनौतियों को स्वीकार करता है। यही कारण है कि द्वन्द्व में फँसा नायक बदल रहे समय और समाज के संकट की पहचान बन गया है।</p>
<p>‘अन्वेषण’ की भाषा पारदर्शी है। कहीं-कहीं वह स्फटिक-सी दृढ़ और सख़्त भी हो गई है। इसमें एक ऐसा औपन्यासिक रूप पाने का प्रयत्न है, जिसमें काव्य जैसी एकनिष्ठ एकाग्रता सन्तुलित रूप में विकसित हुई है।</p>
<p>सही मायने में ‘अन्वेषण’ आज के आदमी के भीतर प्रश्नों की जमी बर्फ़ के नीचे दबी चेतना को मुखर करने की सफल चेष्टा है।

Book Details

  • ISBN
    9788183613514
  • Pages
    128
  • Avg Reading Time
    4 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

0 out of 5

Book

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp