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Sahitya Sahchar

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साहित्यिक पुस्तकें हमें सुख-दुःख की व्यक्तिगत संकीर्णता और दुनियावी झगड़ों से ऊपर ले जाती हैं और सम्पूर्ण मनुष्य जाति के और भी आगे बढ़कर प्राणिमात्र के दुःख-शोक, राग-विराग, आह्लाद-आमोद को समझने की सहानुभूतिमय दृष्टि देती हैं। वे पाठक के हृदय को इस प्रकार कोमल और संवेदनशील बनाती हैं कि वह अपने क्षुद्र स्वार्थ को भूलकर अशिवों के सुख-दुःख को अपना समझने लगता है। सारी दुनिया के साथ आह्लाद का अनुभव करने लगता है। ...एक शब्द में इस प्रकार के साहित्‍य को ‘रचनात्मक साहित्य’ कहा जा सकता है। क्योंकि ऐसी पुस्तकें हमारे ही अनुभव के ताने-बाने से एक नए रस-लोक, की रचना करती हैं। इस प्रकार की पुस्तकों को ही, संक्षेप में ‘साहित्य’ कहते हैं। साहित्य शब्द का विशिष्ट अर्थ यही है। प्रस्‍तुत पुस्तक में इस श्रेणी की पुस्तकों के अध्ययन करने का तरीक़ा बताना ही आचार्य द्विवेदी जी का संकल्प है।

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साहित्यिक पुस्तकें हमें सुख-दुःख की व्यक्तिगत संकीर्णता और दुनियावी झगड़ों से ऊपर ले जाती हैं और सम्पूर्ण मनुष्य जाति के और भी आगे बढ़कर प्राणिमात्र के दुःख-शोक, राग-विराग, आह्लाद-आमोद को समझने की सहानुभूतिमय दृष्टि देती हैं। वे पाठक के हृदय को इस प्रकार कोमल और संवेदनशील बनाती हैं कि वह अपने क्षुद्र स्वार्थ को भूलकर अशिवों के सुख-दुःख को अपना समझने लगता है। सारी दुनिया के साथ आह्लाद का अनुभव करने लगता है।

...एक शब्द में इस प्रकार के साहित्‍य को ‘रचनात्मक साहित्य’ कहा जा सकता है। क्योंकि ऐसी पुस्तकें हमारे ही अनुभव के ताने-बाने से एक नए रस-लोक, की रचना करती हैं। इस प्रकार की पुस्तकों को ही, संक्षेप में ‘साहित्य’ कहते हैं। साहित्य शब्द का विशिष्ट अर्थ यही है। प्रस्‍तुत पुस्तक में इस श्रेणी की पुस्तकों के अध्ययन करने का तरीक़ा बताना ही आचार्य द्विवेदी जी का संकल्प है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
4th
Publication year
1965
Weight
266 grams
ISBN-13
9788180317767
Pages
148
Reading time
~8 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21 cm
Language
Hindi

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