Path Sampadan Ke Siddhant
(0)
Author:
Kanhaiya SinghPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics₹
450
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Available
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प्राचीन कवियों के पाठों का जैसा वैज्ञानिक सम्पादन चाहिए, वैसा हिन्दी में कम हुआ है। जायसी और तुलसी के पाठ-सम्पादन के महत्त्वपूर्ण कार्य हुए हैं। अन्य कवियों के पाठों के अभी इतने सन्तोषजनक परिणाम नहीं मिले हैं। भाषा विषयक शोध, ऐतिहासिक शोध तथा रचनाकार की साहित्यिक सैद्धान्तिक समालोचना के लिए सर्वप्रथम उसकी रचना का मूलपाठ स्थिर होना आवश्यक होता है। इस पुस्तक में पाठ-सम्पादन के सिद्धान्त और अन्य सहायक विषयों की चर्चा की गई है।
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प्राचीन कवियों के पाठों का जैसा वैज्ञानिक सम्पादन चाहिए, वैसा हिन्दी में कम हुआ है। जायसी और तुलसी के पाठ-सम्पादन के महत्त्वपूर्ण कार्य हुए हैं। अन्य कवियों के पाठों के अभी इतने सन्तोषजनक परिणाम नहीं मिले हैं। भाषा विषयक शोध, ऐतिहासिक शोध तथा रचनाकार की साहित्यिक सैद्धान्तिक समालोचना के लिए सर्वप्रथम उसकी रचना का मूलपाठ स्थिर होना आवश्यक होता है। इस पुस्तक में पाठ-सम्पादन के सिद्धान्त और अन्य सहायक विषयों की चर्चा की गई है।
Book Details
-
ISBN9788180311529
-
Pages157
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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सन् 1994 में बीस साल की गुंजन सक्सेना पायलट कोर्स के लिए चौथे शॉर्ट सर्विस कमिशन (महिलाओं के लिए) की चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए मैसूर जानेवाली ट्रेन पर सवार होती है। चौहत्तर सप्ताह की कमरतोड़ ट्रेनिंग के बाद वह डिंडीगुल स्थित एयरफोर्स एकेडमी से पायलट ऑफिसर गुंजन सक्सेना के रूप में पास आउट होती है। 3 मई, 1999 को स्थानीय चरवाहों ने कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ की खबर दी। मध्य मई तक घुसपैठियों को खदेड़ने के मकसद से हजारों भारतीय सैनिक पहाड़ पर लड़े जानेवाले युद्ध में शामिल थे। भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ का आगाज किया, जिसमें उसके सभी पायलट मोर्चे पर थे। महिला पायलटों को जहाँ अब तक युद्ध क्षेत्र में नहीं उतारा गया था, वहीं उन्हें घायलों के बचाव, रसद गिराने और टोह लेने के लिए भेजा गया। गुंजन सक्सेना को अपनी क्षमता प्रमाणित करने का यह स्वर्णिम अवसर था। द्रास और बटालिक क्षेत्रों में बेहद जरूरी आपूर्ति को हवा से गिराने और लड़ाई के बीच से घायलों का बचाव करने से लेकर, पूरी सावधानी से दुश्मनों के ठिकानों की जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों तक पहुँचाने और एक बार तो अपनी एक उड़ान के दौरान पाकिस्तानी रॉकेट मिसाइल से बाल-बाल बचने तक, सक्सेना ने निर्भीकतापूर्वक अपने दायित्वों को निभाया, जिससे उन्होंने यह नाम अर्जित किया—कारगिल गर्ल। महिलाओं की सामर्थ्य, क्षमताओं और अद्भुत जिजीविषा की कहानी है गुंजन सक्सेना की यह प्रेरणाप्रद पुस्तक
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1974 में परमाणु-परीक्षण 'स्माइलिंग बुद्धा' की सफलता ने भारत को परमाणु-शक्ति के तौर पर उल्लेखनीय गति प्रदान की। लेकिन पोखरण के निवासियों, विशेषकर चैतन्य पर, इसके दुष्प्रभाव की खबर मीडिया की सुर्खियाँ नहीं बनीं । बहुत जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि रेडियो एक्टिव फॉलआउट के इर्द-गिर्द बुने गए इस षड्यंत्र का गहरा संबंध इसकी स्थापना से जुड़ा था। इस षड्यंत्र को छिपाने में जिनका हाथ है, वे इस राज को दफनाने के लिए भरपूर और हरसंभव प्रयास कर रहे हैं । चैतन्य इस सच्चाई को उजागर करने की राह पर चल पड़ता है। जारा का साथ पाकर उसे विश्वास हो जाता है कि वह लोगों को न्याय दिला सकता है । लेकिन जब नियति जारा को उससे दूर कर देती है, तो वह प्रतिशोेध की आग में जलने लगता है। धमकियों से डरे बिना वह एक मिशन पर निकल पड़ता है, जो उसे पोखरण के रेगिस्तान से सीरिया की जमीन तक पहुँचा देता है और एम.आई.टी. की सभाओं तक। एक दिलचस्प मोड़ लेते हुए ' पोखरण' मुख्य रूप से बदले की असाधारण यात्रा, साहस, प्रेम और अजेय मानवीय शक्ति की कहानी है, जिसे पढ़कर पाठक रोमांचित हो जाएँगे।
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