Lok Sahitya Evam Sanskriti
About the book
लोक-साहित्य एवं लोक-संस्कृति के संरक्षण, संवर्द्धन एवं उन्नयन के प्रयास के अनुक्रम में ‘लोक साहित्य एवं संस्कृति’ पुस्तक के सृजन की योजना बनी है। इस आशा के साथ कि उच्च शिक्षा में अध्ययनरत छात्रों, शोधार्थियों एवं अकादमिक जगत् से जुड़े हुए विद्वत समाज के मनोविज्ञान में लोक साहित्य और संस्कृति के प्रति एक बौद्धिक व आत्मिक रिश्ते का अंकुरण प्रस्फुटित होगा। भारत की सामासिक संस्कृति, अक्षय सामाजिक-सांस्कृतिक लोक परम्परा, लोकाचार, लोक व्यवहार, लोक विश्वास और लोक मान्यताओं से बनी हुई इस सभ्यता के भीतर दाखिल हो कर हम लोकजीवन व लोक-संस्कृति के सापेक्ष जीवन मूल्यों व ‘जीवन जीने की कला’ के रहस्य सूत्र की तलाश कर सकेंगे। लोक साहित्य व संस्कृति में हमारी सांस्कृतिक विरासतों की गहरी जड़ें व गौरव के भाव सन्निहित हैं। वैश्वीकरण और बाजारवाद के इस दौर में जब हमारे मूल्य, संस्कृति, परम्परा और सरोकार तेजी से धराशायी हो रहे हैं, जब छद्म विकास, अपरिमित मुनाफा और दिखावे का मुखौटा लगाकर हमारी अस्मिता को विनष्ट करने का षड्यंत्र रचा जा रहा हो, जब हमारा जीवन बाजार के हाथों नियंत्रित और संचालित होने लगे, जब हमारी संवेदनाएँ छीजने लगे, जब एकल परिवार हमारी प्राथमिकता में अपनी जगह बनाने लगे, तब ऐसे समय में हमें लोक साहित्य और संस्कृति से वैचारिक ऊष्मा व प्रेरणा की असंख्य रोशनी मिलती है। यह रोशनी समय के तमाम धुंध और अन्धेरे को छांटने में सक्षम और कारगर है। लोक साहित्य में लोक अन्तर्मन की अनुगूँज ध्वनित हैं। इस गूँज में सामूहिकता है। भावनात्मक एकता है। जीवन का राग और सौन्दर्य है। अधिकार, अस्तित्व, अस्मिता, अध्यात्म और जीजिविषा का प्रश्न है। वंचितों और पीड़ितों के जरूरी सवाल हैं। स्त्री स्वायत्तता और अधिकार के प्रश्न केन्द्र में हैं। इसमें निश्छल हँसी भी है और करुण चीत्कार भी है। इसमें सृजन और संहार दोनों का रंग समाहित है। लोक साहित्य की सभी विधाओं में जीवन के सारे अनिवार्य तत्वों का समावेश है। सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से लोक साहित्य का अध्ययन अपेक्षित है। अतएव राष्ट्र निर्माण, सामाजिक भागीदारी व मानवीय विकास में लोक साहित्य की भूमिका अद्वितीय है। इसमें रंच मात्र भी संशय नहीं है।
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About the Book
लोक-साहित्य एवं लोक-संस्कृति के संरक्षण, संवर्द्धन एवं उन्नयन के प्रयास के अनुक्रम में ‘लोक साहित्य एवं संस्कृति’ पुस्तक के सृजन की योजना बनी है। इस आशा के साथ कि उच्च शिक्षा में अध्ययनरत छात्रों, शोधार्थियों एवं अकादमिक जगत् से जुड़े हुए विद्वत समाज के मनोविज्ञान में लोक साहित्य और संस्कृति के प्रति एक बौद्धिक व आत्मिक रिश्ते का अंकुरण प्रस्फुटित होगा। भारत की सामासिक संस्कृति, अक्षय सामाजिक-सांस्कृतिक लोक परम्परा, लोकाचार, लोक व्यवहार, लोक विश्वास और लोक मान्यताओं से बनी हुई इस सभ्यता के भीतर दाखिल हो कर हम लोकजीवन व लोक-संस्कृति के सापेक्ष जीवन मूल्यों व ‘जीवन जीने की कला’ के रहस्य सूत्र की तलाश कर सकेंगे। लोक साहित्य व संस्कृति में हमारी सांस्कृतिक विरासतों की गहरी जड़ें व गौरव के भाव सन्निहित हैं।
वैश्वीकरण और बाजारवाद के इस दौर में जब हमारे मूल्य, संस्कृति, परम्परा और सरोकार तेजी से धराशायी हो रहे हैं, जब छद्म विकास, अपरिमित मुनाफा और दिखावे का मुखौटा लगाकर हमारी अस्मिता को विनष्ट करने का षड्यंत्र रचा जा रहा हो, जब हमारा जीवन बाजार के हाथों नियंत्रित और संचालित होने लगे, जब हमारी संवेदनाएँ छीजने लगे, जब एकल परिवार हमारी प्राथमिकता में अपनी जगह बनाने लगे, तब ऐसे समय में हमें लोक साहित्य और संस्कृति से वैचारिक ऊष्मा व प्रेरणा की असंख्य रोशनी मिलती है। यह रोशनी समय के तमाम धुंध और अन्धेरे को छांटने में सक्षम और कारगर है।
लोक साहित्य में लोक अन्तर्मन की अनुगूँज ध्वनित हैं। इस गूँज में सामूहिकता है। भावनात्मक एकता है। जीवन का राग और सौन्दर्य है। अधिकार, अस्तित्व, अस्मिता, अध्यात्म और जीजिविषा का प्रश्न है। वंचितों और पीड़ितों के जरूरी सवाल हैं। स्त्री स्वायत्तता और अधिकार के प्रश्न केन्द्र में हैं। इसमें निश्छल हँसी भी है और करुण चीत्कार भी है। इसमें सृजन और संहार दोनों का रंग समाहित है। लोक साहित्य की सभी विधाओं में जीवन के सारे अनिवार्य तत्वों का समावेश है। सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से लोक साहित्य का अध्ययन अपेक्षित है। अतएव राष्ट्र निर्माण, सामाजिक भागीदारी व मानवीय विकास में लोक साहित्य की भूमिका अद्वितीय है। इसमें रंच मात्र भी संशय नहीं है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2024
- Weight
- 350 grams
- ISBN-13
- 9788119996377
- Pages
- 192
- Reading time
- ~6 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14.5 × 22 cm
- Language
- Hindi
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