(0)
Author:
Shamsher Bahadur Singh, Ranjana ArgadePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics₹
795
636 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
शमशेर जी के ये निबन्ध बरबस इस तथ्य को गहराई से रेखांकित करते हैं कि मात्र कविता में ही नहीं, बल्कि गद्य में भी वे लगातार अपने समकालीनों के कृतित्व से जुड़े रहे हैं। उसको पढ़ते हैं, उस पर सोचते हैं और लिखते भी हैं, बल्कि कहीं न कहीं इसे वे अपना आत्मीय फ़र्ज़ भी मानते रहे हैं। अपने बराबर के साथी अपने ज्येष्ठ व कनिष्ठ समकालीनों पर दिल खोलकर इतना अधिक लिखनेवाले साहित्यकार बहुत कम हैं। ‘दोआब’ की ही तरह इस संग्रह में भी उन्होंने अपनी परम्परा के श्रेष्ठ कवियों पर भी लिखा है, जैसे ग़ालिब और रहीम। यह एक बात ग़ौर करने की है, शमशेर जी के इन निबन्धों में लालित्य किस तरह छिपा है। एकाध निबन्धों को छोड़ प्रायः सभी निबन्धों में शमशेर जी के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलू नज़र आते हैं। इन निबन्धों के विषय ललित नहीं हैं, पर अपनी प्रस्तुति और प्रभाव में ये बहुत दूर तक ललित हैं। साहित्य से जुड़े अन्य विषयों पर भी शमशेर जी का चिन्तन इस संग्रह में शामिल निबन्धों में देखा जा सकता है। ये वे चिन्ताएँ हैं, जो शमशेर के अन्दरूनी कलाकार को मथती रहती हैं। चाहे वे ‘सामाजिक सत्य और रचना का माध्यम’ हो या ‘अमूर्त कला’ या फिर हल्का-फुल्का लगनेवाला ‘आशु कविता’ जैसा विषय। उनका जागरूक साहित्यकार भाषा और साहित्य पर एक नए दृष्टिकोण की माँग भी करता है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
शमशेर जी के ये निबन्ध बरबस इस तथ्य को गहराई से रेखांकित करते हैं कि मात्र कविता में ही नहीं, बल्कि गद्य में भी वे लगातार अपने समकालीनों के कृतित्व से जुड़े रहे हैं। उसको पढ़ते हैं, उस पर सोचते हैं और लिखते भी हैं, बल्कि कहीं न कहीं इसे वे अपना आत्मीय फ़र्ज़ भी मानते रहे हैं। अपने बराबर के साथी अपने ज्येष्ठ व कनिष्ठ समकालीनों पर दिल खोलकर इतना अधिक लिखनेवाले साहित्यकार बहुत कम हैं। ‘दोआब’ की ही तरह इस संग्रह में भी उन्होंने अपनी परम्परा के श्रेष्ठ कवियों पर भी लिखा है, जैसे ग़ालिब और रहीम।
यह एक बात ग़ौर करने की है, शमशेर जी के इन निबन्धों में लालित्य किस तरह छिपा है। एकाध निबन्धों को छोड़ प्रायः सभी निबन्धों में शमशेर जी के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलू नज़र आते हैं। इन निबन्धों के विषय ललित नहीं हैं, पर अपनी प्रस्तुति और प्रभाव में ये बहुत दूर तक ललित हैं। साहित्य से जुड़े अन्य विषयों पर भी शमशेर जी का चिन्तन इस संग्रह में शामिल निबन्धों में देखा जा सकता है। ये वे चिन्ताएँ हैं, जो शमशेर के अन्दरूनी कलाकार को मथती रहती हैं। चाहे वे ‘सामाजिक सत्य और रचना का माध्यम’ हो या ‘अमूर्त कला’ या फिर हल्का-फुल्का लगनेवाला ‘आशु कविता’ जैसा विषय। उनका जागरूक साहित्यकार भाषा और साहित्य पर एक नए दृष्टिकोण की माँग भी करता है।
Book Details
-
ISBN9788171190904
-
Pages239
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Itane Pas Apane
- Author Name:
Shamsher Bahadur Singh
- Book Type:

- Description:
अति सूक्ष्म ऐन्द्रिक अनुभूतियों की कविताओं का मजमूआ है ‘इतने पास अपने’। यह संग्रह इस बात का परिचायक है कि शमशेर बहादुर सिंह की कविताएँ रूप और सौन्दर्य की अनुभूतियों में खोती नहीं, बल्कि श्रम से जुड़कर जीवन का यथार्थ बताते हुए कविता के शिखर पर पहुँचती हैं। दूसरा सप्तक से चर्चित हुए कवि शमशेर बहादुर सिंह को कभी अज्ञेय ने ‘कवियों का कवि’ कहा था और हिन्दी कविता जगत में उनकी पहचान शमशेरियत से हुई थी। इस शमशेरियत की बानगी देखिए—‘बात बोलेगी, हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही।’ यह पंक्ति समकालीन कविता का मुहावरा बन चुकी है। इसमें सन्देह नहीं कि शमशेर हमारे समय के ऐसे कवि हैं जिन्होंने अपनी लम्बी काव्य-यात्रा में हिन्दी कविता को समृद्ध किया है। उनकी कविताएँ कवि की प्रतिबद्धता और जिजीविषा का प्रमाण प्रस्तुत करती-सी प्रतीत होती हैं। प्रकृति-प्रेम और मानवीय रूप-सौन्दर्य शमशेर बहादुर सिंह की कविताओं के केन्द्र बिन्दु हैं।
Chuka Bhi Hun Main Nahin !
- Author Name:
Shamsher Bahadur Singh
- Book Type:

- Description:
शमशेर बहादुर सिंह की कविता एक विलक्षण संसार की रचना करती है जिसमें आपको अपनी नहीं उसकी शर्तों पर जाना होता है। इस कविता को आप चलते-जाते ऐसे ही नहीं पढ़ सकते, यह कविता अपने काठिन्य से नहीं, जैसा कि कुछ लोग आरोप लगाते हैं, बल्कि अपनी अद्वितीयता से आपको पढ़ने की आपकी कंडीशंड आदतों से छूटकर वापस नए सिरे से सावधान होने को कहती है। यह शमशेर का उस दौर में आया संग्रह है जब कवि के रूप में उनका स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण हो चुका था। इससे पहले उनकी ‘कुछ कविताएँ’, ‘कुछ और कविताएँ’, और ‘इतने पास अपने’ जैसे संकलन आ चुके थे और हिन्दी कविता की दुनिया में उन्हें लेकर पक्ष-विपक्ष बन चुका था। इसलिए यह संग्रह और भी महत्त्वपूर्ण है, हालाँकि जिस तरह उनके पहले कविता-संग्रह के लिए कविताओं का चयन जगत् शङ्खधर ने किया था, इस किताब में भी चयन उन्हीं का रहा, अर्थात् अब तक अपनी कविता को लेकर उनका संकोच जस का तस था। इस संग्रह की भूमिका में भी वे कहते हैं—‘अपनी काव्य-कृतियाँ मुझे दरअसल सामाजिक दृष्टि से कुछ बहुत मूल्यवान नहीं लगतीं। उनकी वास्तविक सामाजिक उपयोगिता मेरे लिए एक प्रश्नचिह्न-सा ही रही है, कितना ही धुँधला सही।’ अपने काव्य-कर्म को लेकर उनके इसी संशय ने शायद उन्हें भाषा और शिल्प के उस मानक तक पहुँचाया जिसे उनके जीते-जी ही ‘शमशेरियत’ कहा जाने लगा था, और उन्हें ‘कवियों का कवि’। बकौल नामवर सिंह, ‘शमशेर की आत्मा ने अपनी अभिव्यक्ति का जो एक प्रभावशाली भवन अपने हाथों तैयार किया है, उसमें जाने से मुक्तिबोध को भी डर लगता था—उसकी गम्भीर प्रयत्नसाध्य पवित्रता के कारण।’ और बकौल मलयज, ‘एक नितान्त निजी मुहावरा अपने पवित्र दर्प में तना हुआ।’ बहरहाल ‘चुका भी हूँ नहीं मैं’ का यह संस्करण हिन्दी की नई पीढ़ी को एक आमंत्रण के रूप में प्रस्तुत है कि वह भी अपने इस पूर्वज, और कविता-परम्परा के श्रेष्ठतम पैमानों में से एक, कवि की कविताओं को जाने।
Kahin Bahut Door Se Sun Raha Hoon
- Author Name:
Shamsher Bahadur Singh
- Book Type:

- Description:
शमशेर की कविता का स्थायी मूल्य है, स्वच्छ और निर्मल कविता की परख। इसी नाते शमशेर रूपवादी आलोचकों की तरह, परम्परावादी या यथास्थितिशील नहीं हैं। आधुनिक कविता की स्थायी मूल्यदृष्टि की खोज वह कवि के अनुभव और काव्य के उपकरणों की ज़रूरत के अनुसार करते हैं। इस कसौटी पर वे बड़े कड़े हैं। वे परम्परा की श्रेष्ठतम कविता, कला और सौन्दर्य की ‘प्राचीन या आधुनिक’ हार्दिकताओं को विकसित करते हैं। विकास की उनकी ज़मीन व्यापक है। शमशेर हिन्दी-उर्दू के दोआब के कवि हैं। ग़ालिब और निराला की मार्मिक भाषाओं के स्वरूप और नाद को शमशेर ने अपनी कविता में आत्मसात् कर लिया है। शमशेर का कलाकार कवि अपनी कला-प्रयोगशाला में तल्लीन रहनेवाला एक वैज्ञानिक कवि है। वह प्रयोगशाला में ‘अत्याधुनिक मर्म की सूचनाएँ’ खोजता रहता है। पतनशील आधुनिक सभ्यता के बाज़ार की चीख़-पुकार से असन्तुष्ट...शमशेर आत्मज्ञान से विकसित होती कविता या कला के विज्ञान को टटोलते चलते हैं। शमशेर का खोजी सौन्दर्य संगीत की स्वच्छ और निर्मल ऊँचाइयों से कभी निराश नहीं होता। शमशेर के लिए नया रूप लेती मानवीय कला, ऊँची कला का आईना है। वे जानते हैं कि कब पूँजीपति या सत्ता उनकी कविता या कला को संरक्षण देते हैं। शमशेर की ख़ामोशी में एक एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग बनती है, जहाँ कलानुभव का इतिहास, भूले-बिसरे मित्रों की यादें, और अपनी मौत का विडम्बना-भरा प्रसंग घुल-मिल जाता है—कोलाज जैसा। घुल-मिल जाने के अनेक कलानुभवों को वे व्यंग्य की शैली में चित्रित करते हैं और कभी रंगमंच पर ‘जात्रा’ या ‘बाउल’ से लीला करते नज़र आते हैं। ‘काल से होड़ लेता शमशेर’ में —विष्णुचन्द्र शर्मा
Pratinidhi Kavitayen : Shamsher Bahadur Singh
- Author Name:
Shamsher Bahadur Singh +1
- Book Type:

- Description:
निराला को अपना आदर्श माननेवाले शमशेर बहादुर सिंह हिन्दी में ‘कवियों के कवि' शमशेर सिंह के रूप में विख्यात हैं। इस कृति में उनकी चुनिन्दा कविताओं को संकलित किया गया है। शमशेर एक ख़ास सोच और तेवरवाले कवि हैं। उनकी कविता शब्दों तक सीमित नहीं होती, बल्कि ऐसे तमाम शब्द हैं—जिन्हें वे बहुत चुनकर, सोच-समझकर अपनी बात के लिए इस्तेमाल करते हैं— काव्यानुभवों की एक व्यापक और जरा जटिल दुनिया भी रचते हैं। अपनी काव्य-वस्तु के चयन और उसके शिल्प-संगठन में वे बेहद सजग हैं। इसके लिए उन्हें विचार से मार्क्सवादी और शिल्प में रूपवादी-जैसे आरोप भी सहने पड़े हैं, जबकि उनकी स्पष्ट राय है कि कला के संघर्ष को सामाजिक संघर्ष से काटकर नहीं देखा जा सकता। वास्तव में उनकी कविता सीधे-सरल तरीक़े से सामाजिक संघर्ष की कविता नहीं है, बल्कि उसे उनकी कविता-भाषा की बहुस्तरीयता को बेधकर ही समझा जा सकता है; और यह संकल्प उनकी कविताओं की तमाम रचनात्मक विशेषताओं को पूरी विविधता के साथ हमारे सामने रखता है।
Pratinidhi Kavitayen : Shamsher Bahadur Singh
Shamsher Bahadur Singh
20% off₹ 199
₹ 159.2
Available
Faiz
- Author Name:
Faiz Ahmed 'Faiz' +3
- Book Type:

- Description:
“फ़ैज़ की शाइरी ऐसे ज़िन्दा इशारों का पर्याय है जो दर्द की चीख़ और कराह को कसकर अन्दर ही अन्दर दबाये और छुपाये हुए हैं, मगर जो दरअस्ल दबाये दबते हैं न छुपाये छुपते।” “फ़ैज़ की शाइरी एक ऐसा संगीत है जो मालूम तो होता है रोमानी, मगर असलन् इजतिहारी है–अपने रोमानी तेवर में भी ख़ालिसन् इन्क़िलाबी। यानी संघर्षों में उसका जन्म हुआ है।” ‘फ़ैज़’ के कलाम में वह नर्मी और मिठास है जो मन को मोह लेती है। जिस गहरी समझ, भावनागत निश्छलता और कलात्मकता से प्रेमानुभूतियों को उन्होंने सामाजिक समस्याओं के साथ मिलाकर पेश किया है, वह अपने-आपमें अभूतपूर्व है। उनकी नज़्में उर्दू की बेहतरीन नज़्में हैं और नज़्म की सारी विशेषताएँ और भी निखर-सँवरकर उनकी ग़ज़लों में ढल गई हैं। ‘फ़ैज़’ मानवीय मूल्यों की गरिमा के महान नायक हैं। उनकी शाइरी में मानवीय सम्बन्धों की प्रेममय सहजता उजागर हुई है, जिसका लक्ष्य हर तरह के ज़ोर-ज़ुल्म और शोषण-व्यवस्था का उन्मूलन है। उनके दावों और अमल में, कथनी और करनी में कहीं टकराव नहीं, उनके व्यक्तित्व की यह विशिष्टता उनके काव्य की भी शक्ति और विशिष्टता है। भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ विश्व-भर में उनकी असाधारण लोकप्रियता इसका एक ज्वलन्त प्रमाण है।
Tatvamasi
- Author Name:
Dhruv Bhatt +1
- Book Type:

- Description:
‘तत्त्वमसि’ उपन्यास एक ऐसे नायक की कथा है जो सहसा और सहज ही अपने आपको खोजने की एक प्रक्रिया में ख़ुद को पाता है। लेकिन यह ‘आत्मान्वेषण’ ज़िम्मेदारियों से दूर एकान्त में नहीं, बल्कि संघर्ष करते मनुष्यों के बीच प्रकृति के मध्य घटित होता है। मनुष्य को संसाधन माननेवाला यह नायक मनुष्य से ‘मानव’ के रूप में साक्षात्कार करता है। पश्चिम के प्रभावों एवं संस्कारों में लिपटा यह नायक इसी प्रक्रिया में अपने भीतर वर्षों की सोई संस्कृति की जड़ों को अंकुरित होते हुए देखता, अनुभव करता है। इस ‘आत्मान्वेषण’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नायक इस बात से अनभिज्ञ है कि वह ‘आत्मान्वेषण’ की प्रक्रिया में है। विरोध से आरम्भ हुई उसकी यात्रा स्वीकृति में निःशेष होती है। नर्मदा की भौगोलिक, सांस्कृतिक और जीवन्त उपस्थिति इस उपन्यास की विशिष्टता है। यथार्थ, फंतासी और कल्पना एक-दूसरे में ऐसे घुल-मिल गए हैं कि यह उपन्यास पढ़ना अपने आपमें एक विशिष्ट अनुभव की प्रतीति कराता है। जंगल की आग, जंगल की बारिश, जंगल की चुप्पी, जंगल का शोर, जंगल के दिन, जंगल की रातें, जंगलों में रहते आदिवासी, उनकी संस्कृति और परम्पराएँ—सभी कुछ बड़े कौशल के साथ इस उपन्यास में बुना गया है। इसी अर्थ में यह एक भारतीय उपन्यास है।
Aashcharya Lok Mein Alis
- Author Name:
Lui Cairol +1
- Book Type:

- Description:
संसार की प्रायः सभी भाषाओं में अनूदित ‘एलिस इन वंडरलैंड’ का बाल-साहित्य में एक विशिष्ट स्थान है। लुई कैरोल की यह बहुचर्चित कथाकृति बच्चों और किशोरों के मनोविज्ञान तथा उनकी जिज्ञासु कल्पनाशीलता को जिस तरह उजागर करती है, वह बेहद दिलचस्प और अर्थपूर्ण है। एलिस एक छोटी-सी बच्ची है। खेल-खेल में एक ख़रगोश का पीछा करते हुए वह एक ऐसे आश्चर्यलोक में जा पहुँचती है, जहाँ कुछ भी असम्भव नहीं। वहाँ कौतुक और अपनी आवश्यकता के कारण वह न सिर्फ़ अपना क़द घटा-बढ़ा सकती है, बल्कि अनेकानेक पशु-पक्षियों को बुद्धू या कहें कि ‘उल्लू’ भी बनाती रहती है। दूसरे शब्दों में, एलिस स्वयं पशु-पक्षियों के दु:ख-सुख और उनकी तरह की शैतानियों में शामिल हो जाती है। यही नहीं, ताश के पत्तों—बादशाह-बेगम-ग़ुलाम और दुग्गी-तिग्गी-सत्ते आदि के माध्यम से वह उस न्याय-व्यवस्था की मूर्खताओं पर भी हैरान होती है, जिसमें ‘पहले सज़ा और पीछे फ़ैसला’ सुनाया जाता है। कहने की आवश्यकता नहीं कि बाल-मनोविज्ञान के विभिन्न स्तरों का उद्घाटन करते हुए लेखक वर्तमान देश-काल पर भी टिप्पणी करता है। वस्तुतः इस उपन्यास की इन्हीं विशेषताओं के कारण इसके प्रायः सभी अनुवाद महत्त्वपूर्ण रचनाकारों द्वारा हुए हैं। इस दृष्टि से हिन्दी के लब्धप्रतिष्ठ कवि शमशेर बहादुर सिंह द्वारा किया गया यह अनुवाद भी अपनी रचनात्मक ताज़गी से इस कृति को और अधिक महत्त्वपूर्ण बनाता है।
Sahitya Siddhant
- Author Name:
Rene Wellek +2
- Book Type:

- Description:
प्रसिद्ध अमेरिकी आलोचकों ‘रेने वेलेक और आस्टिन वारेन’ की यह कृति अपने विषयगत वैज्ञानिक विवेचन एवं शैलीगत सहजता के कारण अभूतपूर्व लोकप्रियता प्राप्त कर चुकी है। विद्वान् लेखकों ने एक ओर तो काव्यशास्त्र और अलंकारशास्त्र (जिसकी परम्परा अरस्तू से शुरू होकर ब्लेयर, कैम्पबेल और केम्स तक आई हुई है) के विभिन्न पक्षों का सम्यक् विवेचन प्रस्तुत किया है और दूसरी ओर ललित साहित्य की विधाओं और शैलीशास्त्र तथा साहित्यालोचन के प्रमुख सिद्धान्तों से भी पाठकों को परिचित कराया है। इसके साथ ही अनुसन्धान, साहित्य का इतिहास, साहित्य का मूल्यांकन, कॉलेजों में साहित्य का अध्ययन जैसी ज्वलन्त समस्याओं का समाधान भी सुझाने का सफल प्रयास किया है। प्रस्तुत पुस्तक में ‘काव्यशास्त्र’ (या साहित्य-सिद्धान्त) और ‘आलोचना (साहित्य का मूल्यांकन) को पांडित्य (अनुसन्धान) और साहित्यिक इतिहास (सिद्धान्त और आलोचना के रूढ़पथ के विपरीत, साहित्य के गतिशील पक्ष) से भी जोड़ना चाहा है। शब्दावली, टोन और बल में निःसन्देह दोनों लेखकों में थोड़ी-बहुत असंगतियाँ रह गई हैं। परन्तु वे यह भी सोचते हैं कि इस कमी की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि दो व्यक्ति मूलत: एक ही निष्कर्ष पर पहुँचे हैं।
Vichar Ka Aina Kala Sahitya Sanskriti : Mahatma Gandhi
- Author Name:
Mahatma Gandhi +1
- Book Type:

- Description:
विचार का आईना शृंखला के अन्तर्गत ऐसे साहित्यकारों, चिन्तकों और राजनेताओं के ‘कला साहित्य संस्कृति’ केन्द्रित चिन्तन को प्रस्तुत किया जा रहा है जिन्होंने भारतीय जनमानस को गहराई से प्रभावित किया। इसके पहले चरण में हम मोहनदास करमचन्द गांधी, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, प्रेमचन्द, जयशंकर प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, राममनोहर लोहिया, रामचन्द्र शुक्ल, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा, सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ और गजानन माधव मुक्तिबोध के विचारपरक लेखन से एक ऐसा मुकम्मल संचयन प्रस्तुत कर रहे हैं जो हर लिहाज से संग्रहणीय है। मोहनदास करमचन्द गांधी ऐसे जननेता हैं जो वैश्विक उपस्थिति रखते हैं। वे भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के ऐसे नायक हैं जिन्होंने इसे जनता का आन्दोलन बना दिया। औपनिवेशिक सत्ता का प्रतिरोध करते हुए उन्होंने सत्य और अहिंसा को अपनी लड़ाई का केन्द्रीय शिल्प बनाया। उन्होंने साध्य ही नहीं साधन की भी पवित्रता की बात की, बेलगाम उपभोग की संस्कृति का विरोध किया। सत्याग्रही के रूप में विरोधी के प्रति भी किसी तरह की कटुता न रखने की बात कही। अपने समय के शीर्ष लेखकों, चिन्तकों और कलाकारों पर गांधी के विचारों का गहरा असर रहा। वे लोगों से निरन्तर संवादरत रहे और अपने विचारों को मजबूती से रखते रहे। हमें उम्मीद है कि उनके कला, साहित्य और संस्कृति सम्बन्धी लेखन को पढ़ते हुए इस कठिन समकाल से जूझने की अनेक राहें रोशन होंगी।
Hindi Sufi Kavya Ka Samgra Anushilan
- Author Name:
Shivsahay Pathak
- Book Type:

- Description:
चौदहवीं शताब्दी ईसवी से लेकर 20वीं शताब्दी ईसवी तक के छह सौ वर्षों की सुदीर्घ अवधि में शताधिक सूफी काव्यों से हिन्दी-साहित्य समृद्ध हुआ है। साहित्य और संस्कृति की अनेकानेक धाराएँ हिन्दी सूफी काव्य में अनुस्यूत हैं। अनेक परम्पराओं, धर्म, दर्शनों, साधनाओं आदि ने सूफी काव्य को अनुप्राणित किया है। हिन्दी सूफी काव्य का अध्ययन स्वयं में अत्यन्त मनोरंजक और महत्त्वपूर्ण विषय है। सूफी संतों ने धर्म और मजहब से ऊपर मनुष्यत्व का परिचय दिया है। इनके काव्यों में प्रेम-पीर की स्निग्ध पुकार है, विरह की प्रशान्त-गम्भीर तड़प है, आत्मसमर्पण का परम पुनीत आग्रह है। इसीलिए ये काव्य हमारे हृदयों को सहज ही छूकर झंकृत कर देते हैं। इन संतों का उद्देश्य संकीर्णताओं से ऊपर उठकर आत्मशुद्धि और जनजीवन में प्रेम-सन्देश का सम्प्रसार था। इसी उद्देश्य का सुफल सूफी काव्य है। सूफीमतवाद की विशेषता रही है कि वह कभी जीवन की उपेक्षा करके नहीं चला। सूफी कवि सही अर्थों में जनकवि थे। उत्तरी हिन्दी के सूफी कवियों ने ठेठ अवधी– जनता की बोली को काव्य की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया है। पन्द्रहवीं शताब्दी ईसवी से बीसवीं शताब्दी ईसवी तक की जीवन्त अवधी भाषा इनके काव्य का आधार- शृंगार है। इस पुस्तक में एक नवीन दृष्टि से हिन्दी सूफी काव्यों पर विचार किया गया है। फारसी में लिखे गए प्रमुख सूफी काव्यों और अंग्रेजी-फारसी-उर्दू में लिखे गए इस विषय के प्रामाणिक ग्रन्थों के अध्ययन के अनन्तर ही लेखक ने इस शोध-कार्य को सम्पन्न किया। काव्य-परम्परा, प्रबन्ध-योजना, प्रतीक पद्धति, उपमान, कथानक-रूढ़ि, अध्यात्म और दर्शन आदि के फारसी, अरबी और भारतीय मूल प्रेरणास्रोतों का सन्धान करके और उन्हें दृष्टिपथ में रख करके किए गए इस अध्ययन (और निकाले गए निष्कर्षों) से हिन्दी सूफी काव्य-विषयक अनेक भ्रान्त धारणाओं का निराकरण भी लेखक ने किया है।
Sher Behtar Kaise Hua?
- Author Name:
Akash Arsh
- Book Type:

- Description:
"Sher Behtar Kaise Hua" is a documentation of the classical tradition in Urdu poetry, in which masters would guide their disciples by correcting flaws in their verses. Through this gradual process, the students were introduced to the finer nuances—both strengths and weaknesses—of poetic craft. This book is a compilation of such corrections (islaah) offered by great poets like Mir, Ghalib, Nasikh, and Daagh on the verses of their disciples. Through these curated islaahs and their interpretations, the book teaches readers how to recognise and refine errors in Urdu poetry. It serves as an essential reference for students, lovers, and aspiring poets of Urdu literature. Aakash ‘Arsh’ (Aakash Tiwari) was born on May 2, 2001, in Sultanpur, Uttar Pradesh. He received his early education in Jagraon, Punjab. He holds a deep interest in the literature of four languages—Urdu, Hindi, English, and Punjabi. Alongside writing poetry in Urdu and Punjabi, he is also actively engaged in translation and editorial work. Currently, he serves as an editor at the Rekhta Foundation.
Urdu Shabdon Ka Guldasta
- Author Name:
Azra Naqvi
- Book Type:

- Description:
उर्दू अपनी खूबसूरती, नफ़ासत और बेहतरीन शब्द-भंडार के लिए जानी जाती है। "उर्दू शब्दों का गुलदस्ता" रेख़्ता फ़ाउंडेशन की एक अनोखी पहल है, जो आपको मज़ेदार और आसान तरीके से उर्दू शब्द सीखने में मदद करती है। पारंपरिक शब्दकोश के बजाय, यह किताब कहानियों के ज़रिए उर्दू शब्द पेश करती है, जिससे शब्द सीखना और भी मज़ेदार हो जाता है। शब्दों को संदर्भ के अनुसार बांटा गया है ताकि सीखने वाले एक ही मूल शब्द से जुड़े दूसरे शब्द भी सीख सकें। हर अध्याय के आखिर में जल्दी दोहराने के लिए अभ्यास दिए गए हैं। यह किताब उर्दू शायरी में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले शब्दों और बातचीत के बुनियादी हुनर में महारत हासिल करने के लिए एक बेहतरीन गाइड है। कृपया इस किताब के बारे में अपनी राय और सुझाव दें। 'वर्ड पावर मेड ईज़ी' की तर्ज़ पर बनी यह किताब आपको तेज़ी से अपना उर्दू शब्द-भंडार बढ़ाने और बेहतर बनाने में मदद करती है। इसमें कई तरह के विषय शामिल हैं, जैसे अभिवादन, प्यार, ज्ञान, रिश्ते, लोग, घर की चीज़ें, कपड़े, स्वाद, रंग, शरीर के अंग, बाज़ार, यात्रा, पेशे, शायरी, मयख़ाने, बाग़-बगीचे और प्रकृति। अध्यायों के दौरान, आप आम गलतियों, सही उच्चारण और वर्तनी के बारे में जानेंगे, और शब्दों के मूल रूप, उनके अलग-अलग रूप और बहुवचन बनाने के नियम समझेंगे। साथ ही, आप अलग-अलग मौकों पर अभिवादन करने, मेहमाननवाज़ी करने और आभार व्यक्त करने के तरीके भी सीखेंगे। आसान व्याख्या, बुनियादी व्याकरण और अध्याय-वार अभ्यास के साथ, यह किताब उर्दू बोलने में आपका आत्मविश्वास बढ़ाती है। आखिर में, यह किताब आपको उर्दू भाषा और तहज़ीब की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करेगी।
Urdu Shayari Ka Shabd Sansar
- Author Name:
Azra Naqvi
- Book Type:

- Description:
उर्दू कई तहज़ीबों और भाषाओं के मेल से बनी है और शायरी की रिवायत (काव्य-परम्परा) में फ़ारसी, अरबी, संस्कृत और तुर्की के रंग शामिल हैं। ये किताब एक शब्दकोश न हो कर उर्दू शायरी में आने वाले विभिन्न विषयों पर ख़ूबसूरत शेरों के संकलन पर आधारित है। शायरी की दुनिया की सैर कराते हुए ये किताब आपको नए-नए शब्दों और उनके उपयोग की बारीकियों के बारे में बताती है और शायरी में इस्तेमाल होने वाले अहम लफ़्ज़ों, तरकीबों और तल्मीहात के मानी और उनके विभिन्न सन्दर्भों को विस्तार से समझाया गया है। ये किताब शायराना लफ़्ज़ों के कलात्मक इस्तेमाल और उनके गहरे अर्थों को समझने में मददगार होगी, और उर्दू शायरी के अथाह ख़ज़ाने का भरपूर लुत्फ़ उठाने का मौक़ा देगी।
Saat Bhumikayen
- Author Name:
Mahadevi Verma +1
- Book Type:

- Description:
छायावाद की यशस्वी रचनाकार महादेवी वर्मा का लेखन किसी न किसी रूप में पाठकों व आलोचकों को आन्दोलित करता आया है। कभी उनकी रचनाओं में उनके जीवन के बिखरे सूत्र रेखांकित किए जाते हैं तो कभी उनके जीवन में रचनाओं के स्रोत खोजे जाते हैं। महादेवी द्वारा लिखित प्रत्येक शब्द स्वयं को ध्यान से पढ़े जाने का आग्रह करता है। सात भूमिकाएँ’ में ‘रश्मि’, ‘सांध्यगीत’, ‘आधुनिक कवि’, ‘दीपशिखा’, ‘बंग–दर्शन’, ‘सप्तपर्णा’ एवं ‘हिमालय’ कविता–संग्रहों की भूमिकाएँ हैं। महादेवी वर्मा लिखित इन भूमिकाओं का ऐतिहासिक महत्त्व है। ये भूमिकाएँ उनकी तत्कालीन मन:स्थिति को प्रकट करने के साथ उनके समग्र लेखन पर एक ‘अन्त:साक्ष्य’ की भाँति हैं। ‘सात भूमिकाओं’ के सम्पादक दूधनाथ सिंह का सम्पादकीय ‘छायावाद : व्यथा का सवेरा’ अत्यन्त विचारोत्तेजक है। अपनी विशिष्ट ‘तर्कसंगत पद्धति’ से दूधनाथ सिंह ने महादेवी के रचनाकर्म को विवेचित किया है—‘उनके वाक्य स्पष्ट, पारदर्शी व निर्भ्रान्त हैं, ‘महादेवी की आलोचनाएँ शब्द–अलंकृति अधिक हैं, आलोचनाएँ कम। उनका सारा वैचारिक गद्य–लेखन लगभग ऐसा ही है। उनमें तर्क और विश्लेषण का अभाव है। अपनी हर अगली बात के लिए महादेवी तर्क की जगह कोई प्रतीक–बिम्ब ढूँढ़ने लगती हैं।’ दूधनाथ सिंह के सम्पादकीय के प्रकाश में महादेवी की इन सात भूमिकाओं को पढ़ना एक आलोचनात्मक अनुभव है। तब और भी जब महादेवी के चुटीले ‘सुरक्षात्मक वाक्य’ उनकी प्रत्येक भूमिका में हैं। ‘रश्मि’ संग्रह की ‘अपनी बात’ का पहला ही वाक्य, ‘अपने विषय में कुछ कहना प्राय: बहुत कठिन हो जाता है, क्योंकि अपने दोष देखना अपने आपको अप्रिय लगता है और इनको अनदेखा कर जाना औरों को...।’ एक संग्रहणीय पुस्तक।
Shabd Purush Agyey
- Author Name:
Naresh Mehta
- Book Type:

- Description:
आधुनिक हिन्दी साहित्य के लिए यह एक ऐतिहासिक संयोग था कि उसे ‘अज्ञेय’ जैसा विशिष्ट व्यक्ति मिला, जो न केवल अपने निजी लेखन से ही महत्त्वपूर्ण था, बल्कि साहित्य के सभी क्षेत्रों और विषयों पर भी चिन्तातुर था। शायद भारतेन्दु के बाद ऐसी प्रामाणिक साहित्यिक चिन्ता वात्स्यायन में ही दिखलाई देती है। वस्तुत: यह आलेख उनके लेखन और व्यक्ति का आकलन नहीं, बल्कि स्मरण है, और वह भी संस्मरणात्मक आत्मीय भूमि पर से ही किया गया है। साथ ही एक अग्रज समकालीन को जिस सम्यकता से देखा जाना चाहिए, की चेष्टा है।
Kavya Bhasha Par Teen Nibandh
- Author Name:
Ramswaroop Chaturvedi +1
- Book Type:

- Description:
काव्य-भाषा सम्बन्धी चिन्तन समकालीन आलोचना के केन्द्र में आ गया है। हिन्दी में, इस विषय पर मौलिक दृष्टि से लिखी गई पुस्तकें बहुत कम हैं। प्रख्यात आलोचक डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी के आलोचनात्मक चिन्तन का प्रमुख प्रतिमान काव्य-भाषा रही है। इस पुस्तक में उन्हीं के लिखे हुए तीन निबन्ध संकलित हैं जिनकी हिन्दी आलोचना में प्रशंसा होती रही है। इस विषय पर इन निबन्धों का ऐतिहासिक और वैचारिक महत्त्व है।
Meera Aur Meera
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

- Description:
‘मीरा और मीरा’ छायावाद की मूर्तिमान गरिमा महीयसी महादेवी वर्मा के चार व्याख्यानों का संग्रह है। महादेवी जी ने ये व्याख्यान जयपुर में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की राजस्थान शाखा के निमंत्रण पर दिए थे। इन चार व्याख्यानों के शीर्षक हैं–मीरा का युग, मीरा की साधना, मीरा के गीत और मीरा का विद्रोह। इनमें महादेवी ने मध्यकालीन स्त्री की स्थिति का विशेष सन्दर्भ लेकर भक्ति, मुक्ति, आत्मनिर्णय, विद्रोह और निजपथ-निर्माण आदि को विश्लेषित किया है। ‘मीरा और मीरा’ को प्रकाशित करते हुए हमें इसलिए भी विशेष प्रसन्नता है कि यह समय अस्मिता-विमर्श का है। स्त्री-विमर्श के ‘समय विशेष’ में स्त्री-अस्मिता के दो शिखर व्यक्तित्वों का ‘रचनात्मक संवाद’ महत्त्वपूर्ण है। इन दो दीपशिखाओं के आलोक में परम्परा और आधुनिकता के जाने कितने निहितार्थ स्पष्ट होते हैं। ‘शृंखला की कड़ियाँ’ की लेखिका ने ‘सूली ऊपर सेज पिया की’ का गायन करने वाली रचनाकार के मन में प्रवेश किया है। यह दो समयों (मध्यकाल और आधुनिक युग) का संवाद भी है। यह सोने पर सुहागा ही कहा जाएगा कि प्रस्तुत पुस्तक की भूमिका सुप्रसिद्ध कवि, कथाकार व विमर्शकार अनामिका ने लिखी है। कहना न होगा कि यह लम्बी भूमिका एक मुकम्मल आलोचनात्मक आलेख है।
Meghdoot : Ek Adhyayan
- Author Name:
Kalidas +1
- Book Type:

- Description:
महाकवि कालिदास की कालजयी कृति ‘मेघदूत’ सदियों से प्रेम और विरह की श्रेष्ठ अभिव्यक्ति के रूप में समादृत रही है। संस्कृत साहित्य में ‘उपमा कालिदासस्य’ प्रसिद्ध उक्ति है ही और इस कृति में कालिदास की रचनात्मकता शिखर पर है। इसीलिए ‘मेघदूत’ शताब्दियों से काव्य का प्रतिमान रहा है। रसिकों-विज्ञजनों में महान कृतियों के विशेष अध्ययन की सुस्थापित परम्परा रही है ताकि कृतियों में निहित विशेष भावों, सन्दर्भों, उक्तियों-अन्योक्तियों, कथाओं-अन्तर्कथाओं का खुलासा कर रचना का पूरा आनन्द लिया जा सके, और यदि यह अध्ययन डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल जैसे इतिहास-संस्कृति-मर्मज्ञ का हो तो पाठक रचना-रस से आप्लावित हो उठेंगे। डॉ. अग्रवाल ने स्वयं लिखा : ‘‘यह अध्ययन ‘मेघदूत मीमांसा’ के नाम से 1927 की शरद ऋतु में लिखा गया था। उस समय मैं यौवन के ललाम भाव से परिचित ही हुआ था और मेरा मन उसके अतिरेक सुखों की उस भावभूमि के लिए उन्मुक्त था, जो ‘मेघदूत’ काव्य का सनातन धरातल है। न जाने किस पूर्व पुण्य से काशी विश्वविद्यालय में जब मैं बी.ए. की शिक्षा प्राप्त कर रहा था, तब किसी एकान्त दिवस में स्वर्गिक ज्योति की कोई किरण मेरे मानस में वह अभिज्ञान ले आई, जिसने मेरे लिए इस काव्य का अर्थ ही बदल डाला और इसके स्थूल रूप को सूक्ष्म बाण से बेध दिया। उसने एक साथ ही अध्यात्म और श्रृंगार के नील-लोहित धनुष से ‘मेघदूत’ के भावलोक को जीतकर मुझे भी उसका नागरिक बना लिया।’’ अरसे से अनुपलब्ध इस कृति का प्रकाशन हमारा गौरव है और काव्य-रसिकों के लिए उल्लास का अवसर भी।
Hindi Sahitya : Ek Saral Parichay
- Author Name:
Suraiyya Sheikh
- Book Type:

- Description:
इतिहास ग्रन्थों के अतिरिक्त हिन्दी साहित्य के विभिन्न कालखंडों, काल-रूपों और धाराओं पर अनेक शोध-प्रबन्ध एवं समीक्षात्मक ग्रन्थ प्रकाश में आए हैं। इनमें साहित्य के अनेक अज्ञात तथ्यों और अनिर्णीत प्रश्नों को नवीन दृष्टिकोण से नवालोक में प्रस्तुत किया गया है, किन्तु हिन्दी अनुसन्धान-जगत के इन नवीन निष्कर्षों और परिणामों का अतीव सतर्कतापूर्वक समन्वय एवं समाहितीकरण इतिहास-लेखन की दिशा में अभी शेष है। अतः नवीन शोध-परिणामों और विकसित साहित्य-चेतना के आलोक में हिन्दी साहित्य के इतिहास का पुनर्गठन और लेखन आवश्यक है। निस्सन्देह आज हिन्दी साहित्य के इतिहास में सम्बन्धित शताब्दिक पुस्तकें उपलब्ध हैं, किन्तु अभी तक इस दिशा में उचित व सन्तोषजनक प्रगति नहीं हुई है। हमने उस अभाव को दृष्टि में रखकर इस ग्रन्थ का प्रणयन किया है।
DIDDA : Kashmir Ki Yoddha Rani | दिद्दा : कश्मीर की योद्धा रानी
- Author Name:
Ashish Kaul
- Book Type:

- Description:
यह कहानी इतिहास के मलबे में करीब 1200 सालों से दबी हुई थी। यह एक ऐसी कहानी है, जिसमें वीरता, पराक्रम, त्याग जैसे शब्द एक ऐसी स्त्री के साथ जुड़े हुए हैं, जिसने अपनी शारीरिक अपंगता को धता बताकर मध्यकालीन विश्व में इतिहास में सबसे लंबे समय तक राज किया, को महान् रानी के रूप में याद किया जाता है। यह कहानी है कश्मीर की योद्धा रानी ‘दिद्दा’ की, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कश्मीर को ऊँचाइयों तक पहुँचाया और मध्यकालीन एशिया का सबसे सशक्त राज्य बनाकर स्थापित किया। भगवान् ने दिद्दा को अलौकिक दिव्य शक्तियाँ प्रदान की थीं, वे बहुत बुद्धिमान थीं और एक असाधारण वक्ता भी। दिद्दा ने न सिर्फ अपनी विकलांगता पर विजय पाई, बल्कि अपने बिखरते साम्राज्य को एकजुट करके भी रखा। अपने 79 वर्ष के जीवनकाल में दिद्दा एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में निखरकर आईं, जिनके नाममात्र से ही दुश्मन काँपने लगते थे। दिद्दा कोई साधारण महिला नहीं थीं, पर इस बात में कोई शक नहीं कि उनका पूरा जीवनकाल असाधारणता की मिसाल रहा। ‘दिद्दा’ एक नाम भर नहीं है, बल्कि यह पर्याय है भारतीय नारी की अस्मिता का, गौरव का, संघर्ष का, त्याग का, पराक्रम का। ‘दिद्दा’ एक प्रेरणापुंज है जिससे हमारी आज की मातृशक्ति का भविष्य प्रकाशमान होगा।
DIDDA : Kashmir Ki Yoddha Rani | दिद्दा : कश्मीर की योद्धा रानी
Ashish Kaul
20% off₹ 300
₹ 240
Available
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book