Kadam Ki Phooli Daal
(0)
Author:
Vidhyaniwas MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics₹
425
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Available
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प्रस्तुत संग्रह ‘कदम की फूली डाल’ में शतकिञ्जल्कित कुसुम को अक्षय सौन्दर्य तथा सौभाग्य की पूर्णता दर्शाई गई है जिसमें इसकी आराधना तीन सोपानों में संकलित है। पहला है भ्रमण, जिसके अन्तर्गत विन्ध्यभूमि के सौन्दर्य-दर्शन से आकलित अनुभव संगृहीत हैं, दूसरा है चिन्तन, जिसमें साहित्य के कुछ तात्कालिक प्रश्नों की जिज्ञासा है और अपनी मान्यताओं के समर्थन में कुछ विशिष्ट कवियों या काव्यों का पर्यालोचन है और तीसरा है स्वप्न, जिसमें बौद्धिक धरातल से ऊपर उठकर अन्तःकरण अपनी आराध्य भावभूमि में पहुँचकर आश्वस्त हो गया है। अन्तिम खंड सबसे छोटा है, क्योंकि ऐसी आश्वस्तता के क्षण इधर बहुत वायरल रहे हैं।
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प्रस्तुत संग्रह ‘कदम की फूली डाल’ में शतकिञ्जल्कित कुसुम को अक्षय सौन्दर्य तथा सौभाग्य की पूर्णता दर्शाई गई है जिसमें इसकी आराधना तीन सोपानों में संकलित है। पहला है भ्रमण, जिसके अन्तर्गत विन्ध्यभूमि के सौन्दर्य-दर्शन से आकलित अनुभव संगृहीत हैं, दूसरा है चिन्तन, जिसमें साहित्य के कुछ तात्कालिक प्रश्नों की जिज्ञासा है और अपनी मान्यताओं के समर्थन में कुछ विशिष्ट कवियों या काव्यों का पर्यालोचन है और तीसरा है स्वप्न, जिसमें बौद्धिक धरातल से ऊपर उठकर अन्तःकरण अपनी आराध्य भावभूमि में पहुँचकर आश्वस्त हो गया है। अन्तिम खंड सबसे छोटा है, क्योंकि ऐसी आश्वस्तता के क्षण इधर बहुत वायरल रहे हैं।
Book Details
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ISBN9789352210923
-
Pages152
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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“ऐसे युग में जहाँ मान्यताएँ विवादग्रस्त और अनिश्चित हों, ऐन्द्रिय विषय ही निश्चित हैं और उन्हीं का यथातथ्य चित्रण सम्भव भी है। यही वजह है कि आज के अधिकांश किशोर तथा किशोर-मति कवि प्राकृतिक चित्रों की खोज में विकल हैं। झंझटों से बाहर निकलने का यह आसान तरीक़ा है। समाज से कम झंझट प्रकृति में है और प्रकृति में भी इन्द्रियग्राह्य प्रभावों के चित्रण में सबसे कम झंझट है।” नामवर जी ने यह टिप्पणी 1957 में 'कवि' पत्रिका के 'विशिष्ट कवि' शीर्षक स्तम्भ में मुक्तिबोध से अन्य कवियों की तुलना करते हुए की थी। उल्लेखनीय है कि इस काल-खंड में उन्होंने श्री विष्णुचन्द्र शर्मा द्वारा सम्पादित पत्रिका ‘कवि' के लिए ‘कविमित्र' नाम से काफ़ी समय तक एक स्तम्भ लिखा था जिसमें वे समकालीन कविता और कवियों पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ करते थे। इस संकलन में उनमें से ज़्यादातर को ले लिया गया है।
पुस्तक में शामिल अन्य आलेख भी ज़्यादातर पाँचवें दशक में लिखे गए थे जिनमें से कुछ प्रकाशित हैं और कुछ अप्रकाशित। ऐसे अधूरे आलेख भी यहाँ जुटाए गए हैं जो किसी कारण से पूरे नहीं लिखे जा सके और जिन्हें काशीनाथ जी ने अपने पास सहेजकर रखा था। कहना न होगा कि इस पुस्तक में उस दौर के नामवर जी से हमारा परिचय होगा जब वे अपनी स्थापनाओं को आकार दे रहे थे और जिन्हें हमने बाद में आई उनकी पुस्तकों में देखा।
Pashchatya Sahitya Chintan
- Author Name:
Nirmala Jain
- Book Type:

- Description: पश्चिम में साहित्य-चिन्तन की सुदीर्घ परम्परा को हिन्दी के पाठकों के लिए प्रामाणिक और सहज ग्राह्य रूप में सुलभ कराने की दिशा में प्रस्तुत ग्रन्थ एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। प्लेटो से बीसवीं शताब्दी तक पाश्चात्य काव्य-चिन्तन में योगदान देनेवाले सभी महत्त्वपूर्ण विचारकों और प्रवृत्तियों का प्रामाणिक विवेचन इस रचना की विशेषता है; अकादमिक अनुशासन से एक साथ युक्त और मुक्त विश्लेषण-पद्धति इसका प्रमुख आकर्षण है। ग्रन्थ की सामग्री का आधार मूल स्रोत है। बक़ौल प्लेटो : ‘सत्य के अनुकरण का अनुकरण ग्रन्थ की विश्वसनीयता तथा लेखिका की प्रतिबद्धता’ का कारण भी यही है। प्रस्तुत कृति से इस विषय के सुधी पाठकों की बहुत बड़ी आवश्यकता की पूर्ति होती है।
Rahasyavad
- Author Name:
Rammurti Tripathi
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में रहस्यवाद जैसे गूढ़, गहन और अस्पष्ट विषय पर साहित्य और दर्शन के अध्येता डॉ. राममूर्ति त्रिपाठी ने स्पष्ट और सांगोपांग विवेचन प्रस्तुत किया है। पुस्तक पाँच अध्यायों में विभक्त है। प्रथम अध्याय—स्वरूप तथा प्रकार; द्वितीय अध्याय—अनुभूत रहस्य तत्त्व का स्वरूप; तृतीय अध्याय—रहस्यानुभूति की प्रक्रिया; चतुर्थ अध्याय—साधनात्मक रहस्यवाद; पंचम अध्याय—रहस्य की अभिव्यक्ति।
रहस्यवाद के स्वरूप पर विचार करते हुए लेखक ने स्पष्ट किया है कि रहस्यवाद ‘मिस्टीसिज़्म’ का रूपान्तर नहीं है बल्कि स्वतंत्र शब्द है और स्वतंत्र रूप में यह शब्द भारतीय प्रयोगों के आधार पर सुनिश्चित अर्थ से सम्पन्न है। ‘अनुभूत रहस्य तत्त्व का स्वरूप’ बताते हुए लेखक ने उपनिषद, तंत्र एवं नाथसिद्ध विचार परम्परा के आधार पर रहस्यानुभूति की व्याख्या की है।
पुस्तक का सबसे महत्त्वपूर्ण अध्याय ‘रहस्यानुभूति की प्रक्रिया’ है जिसमें लेखक ने कबीर, जायसी आदि प्राचीन सन्त कवियों एवं प्रसाद, महादेवी आदि आधुनिक छायावादी कवियों के काव्य में प्राप्त रहस्यानुभूति के विविध रूपों का विवेचन किया है। रहस्यवादी कवियों की रूपगत और शिल्पगत विशेषताओं के विवेचन की दृष्टि से इस पुस्तक का अन्तिम अध्याय 'रहस्य की अभिव्यक्ति' विशेष रूप से द्रष्टव्य है।
Doosari Parampra Ki Khoj
- Author Name:
Namvar Singh
- Book Type:

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Description:
‘दूसरी परम्परा की खोज’ में नामवर सिंह आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के माध्यम से भारतीय संस्कृति और साहित्य की उस लोकोन्मुखी क्रान्तिकारी परम्परा को खोजने का सर्जनात्मक प्रयास करते हैं जो कबीर के विद्रोह के साथ ही सूरदास के माधुर्य और कालिदास के लालित्य से रंगारंग है।
आठ अध्यायों वाली इस पुस्तक के प्रत्येक अध्याय का प्रस्थान-बिन्दु आचार्य द्विवेदी की कोई-न-कोई कृति है, किन्तु यह पुस्तक उन कृतियों की व्याख्या मात्र नहीं है और न उनके मूल्यांकन का प्रयास है बल्कि उनके माध्यम से उस मौलिक इतिहास-दृष्टि के उन्मेष को पकड़ने की कोशिश की गई है जिसके आलोक में समूची परम्परा एक नए अर्थ के साथ उद्भासित हो उठती है।
‘दूसरी परम्परा की खोज’ से एक ऐसा व्यक्तित्व उभरता है जो अपनी सहजता में मोहक है, अपने संघर्ष और पराजय में भी गरिमामय है और अपनी मानव-आस्था में परम्परा के सर्वोत्तम मूल्यों का साक्षात् विग्रह है—कुटज के समान साधारण होते हुए भी मनस्वी और देवदारु के समान मस्ती से झूलते हुए भी अभिजात तथा अपनी ऊँचाइयों में एकाकी। आलोचना कितनी सर्जनात्मक हो सकती है, इसका उदाहरण है—‘दूसरी परम्परा की खोज’।
Duniya Ko Badal Denewale 50 Yuddha
- Author Name:
Pallav Kishore
- Book Type:

- Description: प्रकति में जब भूकंप या सूनामी इत्यादि आपदाओं के कारण उथल-पुथल मचती है तो दुनिया के नक्शे में बदलाव होता है और जब कतिपय कारणों से सामाजिक वर्णों में युद्ध छिड़ता है तो समाज के स्तर पर दुनिया में बड़ा बदलाव आता है। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद अनेक यूरोपीय और अफ्रीकी देशों की भू- सीमाओं और मानविकी में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ, जिससे स्थानीय सभ्यता और संस्कृति पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा। दूसरे विश्वयुद्ध ने आग में घी का काम किया और पूरी दुनिया को प्रभावित किया। भारत के आजादी के संग्राम और उसके बाद भारत का विभाजन कर पाकिस्तान बनाया गया--उस दौरान हुए भीषण संघर्ष में न केवल दुनिया के नक्शे पर एक नए देश का आविर्भाव हुआ, वरन् भयंकर रक्तक्रांति भी हुईं। इसने आगामी अनेक वर्षों तक मानव सभ्यता को प्रभावित किया। दरअसल जब से दुनिया बनी है, युद्ध कहीं-न-कहीं होते रहे हैं। आज भी अनेक देश युद्ध की आग में झुलस रहे हैं--सीरिया संकट, उत्तर कोरिया संकट, अफगानिस्तान में तालिबान संकट, भारत- पाक तना-तनी, इजराइल-फिलिस्तीन संकट। दुनिया में अमन-शांति के लिए आवश्यक है कि मानवहित में इन युद्धों पर पूर्णविराम लगे।
Aastha Aur Saundarya
- Author Name:
Ramvilas Sharma
- Book Type:

-
Description:
डॉ. रामविलास शर्मा की यह मूल्यवान आलोचनात्मक कृति भारोपीय साहित्य और समाज में क्रियाशील आस्था और सौन्दर्य की अवधारणाओं का व्यापक विश्लेषण करती है। इस सन्दर्भ में रामविलास जी के इस कथन को रेखांकित किया जाना चाहिए कि अनास्था और सन्देहवाद साहित्य का कोई दार्शनिक मूल्य नहीं है, बल्कि वह यथार्थ जगत की सत्ता और मानव-संस्कृति के दीर्घकालीन अर्जित मूल्यों के अस्वीकार का ही प्रयास है। उनकी स्थापना है कि साहित्य और यथार्थ जगत का सम्बन्ध सदा से अभिन्न है और कलाकार जिस सौन्दर्य की सृष्टि करता है, वह किसी समाज-निरपेक्ष व्यक्ति की कल्पना की उपज न होकर विकासमान सामाजिक जीवन से उसके घनिष्ठ सम्बन्ध का परिणाम है।
रामविलास जी की इस कृति का पहला संस्करण 1961 में हुआ था। इस संस्करण में दो नए निबन्ध शामिल हैं। एक ‘गिरिजाकुमार माथुर की काव्ययात्रा के पुनर्मूल्यांकन’ और दूसरा ‘फ़्रांस की राज्यक्रान्ति तथा मानवजाति के सांस्कृतिक विकास की समस्या’ को लेकर। इस विस्तृत निबन्ध में लेखक ने दो महत्त्वपूर्ण सवालों पर ख़ास तौर से विचार किया है कि क्या मानवजाति के सांस्कृतिक विकास के लिए क्रान्ति आवश्यक है और फ़्रांस ही नहीं, रूस की समाजवादी क्रान्ति भी क्या इसके लिए ज़रूरी थी? कहना न होगा कि समाजवादी देशों की वर्तमान उथल-पुथल के सन्दर्भ में इन सवालों का आज एक विशिष्ट महत्त्व है।
संक्षेप में, यह एक ऐसी विवेचनात्मक कृति है जो किसी भी सौन्दर्य-सृष्टि की समाज-निरपेक्षता का खंडन करते हुए उसके सामाजिक-सांस्कृतिक सम्बन्धों और आस्थावादी मूल्यों का तलस्पर्शी उद्घाटन करती है।
Kargil: A Saga of Sacrifice & Heroism
- Author Name:
Rishi Raj
- Book Type:

- Description: This book is a great tribute to our brave soldiers who fought fiercely in the Kargil War. In this book, you will know about the lives of various Kargil heroes such as Captain Saurabh Kalia, Captain Vijyant Thapar, Captain Vikram Batra, Captain Manoj Pandey, and many other young soldiers who had sacrificed their lives for the pride of Mother India. You will learn how our nerves had refused to admit defeat, even under adverse conditions and now they turned the tables on Pakistan no had assumed the war to be already won. in this book, the author Is also sharing his experience of meeting the families of the martyrs. The Kargil war was an outcome of Pakistan's betrayal as they had used Stealth to occupy 150 posts located along the 160 Km long Line of Control. This book also sheds light on our political and diplomatic victory and various other aspects of the Kargil War like the refusal of both China and the United States to provide any support to the Pakistani forces. This book Is an attempt by the author to keep alive the memories of all those martyrs, who laid their lives in the service of nation.
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