Europe Ke Adhunik Kavi
(0)
Author:
Shriprakash MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics₹
450
360 (20% off)
Available
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हिन्दी के तमाम पाठक यूरोप की कविता और कवियों को इक्का-दुक्का तथा अपर्याप्त अनुवादों से जानते हैं। इससे वहाँ के कवियों के बारे में उनकी जानकारी आधी-अधूरी ही रहती है। श्रीप्रकाश मिश्र ने करीब साठ कवियों पर अलग-अलग लगभग पूरी जानकारी इस पुस्तक में समाहित की है, जिससे इस कमी की काफ़ी पूर्ति हो सकेगी। उन्होंने एक भाषा के कवियों को उनके कालक्रम के अनुसार एक साथ रखा है और उस सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि की भी जानकारी दी है जिसमें उनकी कविताओं ने जन्म लिया है। यूरोप की आधुनिकतावादी कविताओं की सामान्य विशेषताओं और स्वयं आधुनिकतावाद पर स्वतंत्र अध्याय उस कविता सम्बन्धी जानकारी को और समृद्ध करते हैं। वे स्वयं कवि हैं और</p> <p>कवि पर उनकी एक निजी दृष्टि है—इसका भी प्रमाण इस पुस्तक में मिलता है। उम्मीद है, यूरोप की कविता के तमाम पाठकों को यह पुस्तक बड़ी उपादेय होगी।
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हिन्दी के तमाम पाठक यूरोप की कविता और कवियों को इक्का-दुक्का तथा अपर्याप्त अनुवादों से जानते हैं। इससे वहाँ के कवियों के बारे में उनकी जानकारी आधी-अधूरी ही रहती है। श्रीप्रकाश मिश्र ने करीब साठ कवियों पर अलग-अलग लगभग पूरी जानकारी इस पुस्तक में समाहित की है, जिससे इस कमी की काफ़ी पूर्ति हो सकेगी। उन्होंने एक भाषा के कवियों को उनके कालक्रम के अनुसार एक साथ रखा है और उस सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि की भी जानकारी दी है जिसमें उनकी कविताओं ने जन्म लिया है। यूरोप की आधुनिकतावादी कविताओं की सामान्य विशेषताओं और स्वयं आधुनिकतावाद पर स्वतंत्र अध्याय उस कविता सम्बन्धी जानकारी को और समृद्ध करते हैं। वे स्वयं कवि हैं और</p>
<p>कवि पर उनकी एक निजी दृष्टि है—इसका भी प्रमाण इस पुस्तक में मिलता है। उम्मीद है, यूरोप की कविता के तमाम पाठकों को यह पुस्तक बड़ी उपादेय होगी।
Book Details
-
ISBN9788180315497
-
Pages374
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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शहीद भगत सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। हम सब जानते हैं कि उन्होंने 17 दिसंबर, 1928 को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सांडर्स की हत्या अमेरिका में बने एक .32 कोल्ट पिस्टल से की थी। लेकिन हम यह नहीं जानते कि उसके बाद उस पिस्टल का क्या हुआ और कैसे यह स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन गई थी। हम यह भी नहीं जानते कि उस हुतात्मा ने फिर कभी किसी की हत्या क्यों नहीं की। वह पिस्टल 86 वर्षों तक इतिहास की परतों में और सरकारी दस्तावेजों के अनुसार तब तक गुम ही रही, जब तक कि इस पुस्तक के लेखक ने उस हथियार के सफर का पता नहीं लगा लिया और उसे लोगों के सामने लेकर नहीं आए। क्या थी उस पिस्टल की रहस्यमयी कहानी ? कैसे भगत सिंह शायद महात्मा गांधी से भी बड़े अहिंसा के पुजारी थे, यह जानने के लिए इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें ।
Bhagat Singh Jail Diary
- Author Name:
Yadvinder Singh Sandhu
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"माँ भारती के अमर सपूत शहीद भगतसिंह के बारे में हम जब भी पढ़ते हैं, तो एक प्रश्न हमेशा मन में उठता है कि जो कुछ भी उन्होंने किया, उसकी प्रेरणा, हिम्मत और ताकत उन्हें कहाँ से मिली? उनकी उम्र 24 वर्ष भी नहीं हुई थी और उन्हें फाँसी पर चढ़ा दिया गया। लाहौर (पंजाब) सेंट्रल जेल में आखिरी बार कैदी रहने के दौरान (1929-1931) भगतसिंह ने आजादी, इनसाफ, खुद्दारी और इज्जत के संबंध में महान् दार्शनिकों, विचारकों, लेखकों तथा नेताओं के विचारों को खूब पढ़ा व आत्मसात् किया। इसी के आधार पर उन्होंने जेल में जो टिप्पणियाँ लिखीं, यह जेल डायरी उन्हीं का संकलन है। भगतसिंह ने यह सब भारतीयों को यह बताने के लिए लिखा कि आजादी क्या है, मुक्ति क्या है और इन अनमोल चीजों को बेरहम तथा बेदर्द अंग्रेजों से कैसे छीना जा सकता है, जिन्होंने भारतवासियों को बदहाल और मजलूम बना दिया था। भगतसिंह की फाँसी के बाद यह जेल डायरी भगतसिंह की अन्य वस्तुओं के साथ उनके पिता सरदार किशन सिंह को सौंपी गई थी। सरदार किशन सिंह की मृत्यु के बाद यह नोटबुक (भगतसिंह के अन्य दस्तावेजों के साथ) उनके (सरदार किशन सिंह) पुत्र श्री कुलबीर सिंह और उनकी मृत्यु के पश्चात् उनके पुत्र श्री बाबर सिंह के पास आ गई। श्री बाबर सिंह का सपना था कि भारत के लोग भी इस जेल डायरी के बारे में जानें। उन्हें पता चले कि भगतसिंह के वास्तविक विचार क्या थे। भारत के आम लोग भगतसिंह की मूल लिखावट को देख सकें। आखिर वे प्रत्येक जाति, धर्म के लोगों, गरीबों, अमीरों, किसानों, मजदूरों, सभी के हीरो हैं। भगतसिंह जोशो-खरोश से लबरेज क्रांतिकारी थे और उनकी सोच तथा नजरिया एकदम साफ था। वे भविष्य की ओर देखते थे। वास्तव में भविष्य उनकी रग-रग में बसा था। उनके अपूर्व साहस, राष्ट्रभक्ति और पराक्रम की झलक मात्र है हर भारतीय के लिए पठनीय यह जेल डायरी।"
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