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Hindi Sahitya Ka Parichayatmak itihas

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जो साहित्य युगान्तर तक जीवित रहता है उसमें निश्चय ही कुछ जीवन्त तत्त्व रहते हैं, उनका विश्लेषण करना अभीष्ट होना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए तीन कालखंडों में विभाजित ‘हिन्दी साहित्य का परिचयात्मक इतिहास’ शीर्षक इस पुस्तक का प्रणयन किया गया है। पुस्तक के प्रत्येक कालखंड में प्रचलित साहित्यिक धाराओं और युगों का अलग-अलग स्पष्ट परिचय दिया गया है तथा साहित्यकार और उसकी रचनाओं का तथ्यात्मक विवरण पूर्ण रूप से देने का प्रयत्न किया गया है। आधुनिक काल के अन्तर्गत काव्य और गद्य साहित्य की विविध विधाओं का अलग-अलग युगानुसार परिचय दिया गया है। गद्य साहित्य के साथ अन्त में हिन्दी पत्रकारिता के विकास का भी संक्षिप्त विवरण दे दिया गया है, क्योंकि हिन्दी गद्य की विविध विधाओं के विकास और प्रचार में उसका महत्त्वपूर्ण योगदान है। काव्य के इतिहास के प्रसंग में और विशेष रूप से प्राचीन और मध्यकालीन काव्यधाराओं के परिचय में कवि-परिचय के साथ-साथ उसकी विशिष्टताओं को स्पष्ट करने के लिए काव्य की कुछ पंक्तियाँ भी उदाहरणस्वरूप दी गई हैं। इससे जहाँ एक ओर तथ्यात्मक विवरण की नीरसता दूर हो जाती है, वहीं दूसरी ओर काव्य-युगों को समझने में भी सुविधा होती है। इस संक्षिप्त, किन्तु पूरे हिन्दी साहित्य के विवरण का अवलोकन करने से यह बात भली भाँति समझ में आ जाती है कि हिन्दी भाषा और उसके साहित्य में कितनी विविधता और व्यापकता है।

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जो साहित्य युगान्तर तक जीवित रहता है उसमें निश्चय ही कुछ जीवन्त तत्त्व रहते हैं, उनका विश्लेषण करना अभीष्ट होना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए तीन कालखंडों में विभाजित ‘हिन्दी साहित्य का परिचयात्मक इतिहास’ शीर्षक इस पुस्तक का प्रणयन किया गया है।

पुस्तक के प्रत्येक कालखंड में प्रचलित साहित्यिक धाराओं और युगों का अलग-अलग स्पष्ट परिचय दिया गया है तथा साहित्यकार और उसकी रचनाओं का तथ्यात्मक विवरण पूर्ण रूप से देने का प्रयत्न किया गया है। आधुनिक काल के अन्तर्गत काव्य और गद्य साहित्य की विविध विधाओं का अलग-अलग युगानुसार परिचय दिया गया है। गद्य साहित्य के साथ अन्त में हिन्दी पत्रकारिता के विकास का भी संक्षिप्त विवरण दे दिया गया है, क्योंकि हिन्दी गद्य की विविध विधाओं के विकास और प्रचार में उसका महत्त्वपूर्ण योगदान है।

काव्य के इतिहास के प्रसंग में और विशेष रूप से प्राचीन और मध्यकालीन काव्यधाराओं के परिचय में कवि-परिचय के साथ-साथ उसकी विशिष्टताओं को स्पष्ट करने के लिए काव्य की कुछ पंक्तियाँ भी उदाहरणस्वरूप दी गई हैं। इससे जहाँ एक ओर तथ्यात्मक विवरण की नीरसता दूर हो जाती है, वहीं दूसरी ओर काव्य-युगों को समझने में भी सुविधा होती है।

इस संक्षिप्त, किन्तु पूरे हिन्दी साहित्य के विवरण का अवलोकन करने से यह बात भली भाँति समझ में आ जाती है कि हिन्दी भाषा और उसके साहित्य में कितनी विविधता और व्यापकता है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2010
Weight
178 grams
ISBN-13
9788183614061
Pages
180
Reading time
~6 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13.5 × 21.5 cm
Language
Hindi

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