Aadybimb Aur Godan

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'आद्यबिम्ब और गोदान’ पुस्‍तक हिन्दी आलोचना को एक नई दिशा प्रदान करती है। कविता की आद्य बिम्‍बात्मक आलोचना से सम्बन्धित कई पुस्‍तकों का प्रकाशन हिन्दी में हो चुका है, किन्तु कथा साहित्‍य के क्षेत्र में यह प्रथम प्रयास है।</p> <p>'आद्यबिम्‍ब’ शीर्षक पहले निबन्ध में आद्यबिम्ब की स्वरूप-विवृत्ति के लिये हिन्दी में पहली बार युग के ऊर्जीय दूष्‍टिकोण का सारभूत आख्यान तथा यौगपत्य-सिद्धान्त का संक्षिप्त परिचय है। 'आद्यबिम्ब और उपन्यास’ शीर्षक द्वितीय निबन्ध उपन्यासालोचन के क्षेत्र में आद्यबिम्ब की धारणा के संप्रयोग से सम्बन्धित है। इसमें लेखक ने अनेक महत्‍त्‍वपूर्ण सिद्धान्तों की स्थापना की है जिनसे हिन्दी आलोचना के नए विकास की संभावनाएँ बलवती होती हैं। 'आद्यबिम्ब और गोदान' शीर्षक तीसरे निबन्ध में ‘गोदान' का आद्यबिम्बात्मक अध्ययन है। लेखक ने मुख्यत कथानक, उद्देश्य एवं भाषा के बिम्बत्‍व का गभीर विवेचन किया है।</p> <p>'गोदान' की संरचनात्मक गहनताओं का यह अध्ययन उसके लगभग सभी विवादास्पद पहलुओं पर नई रोशनी डालता है। निस्‍सन्‍देह, यह पुस्‍तक हिन्दी आलोचना के क्षेत्र में मील का पत्थर है।</p> <p>&nbsp;

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ISBN
9788119989287
Pages
139
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

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About the Book

'आद्यबिम्ब और गोदान’ पुस्‍तक हिन्दी आलोचना को एक नई दिशा प्रदान करती है। कविता की आद्य बिम्‍बात्मक आलोचना से सम्बन्धित कई पुस्‍तकों का प्रकाशन हिन्दी में हो चुका है, किन्तु कथा साहित्‍य के क्षेत्र में यह प्रथम प्रयास है।</p>
<p>'आद्यबिम्‍ब’ शीर्षक पहले निबन्ध में आद्यबिम्ब की स्वरूप-विवृत्ति के लिये हिन्दी में पहली बार युग के ऊर्जीय दूष्‍टिकोण का सारभूत आख्यान तथा यौगपत्य-सिद्धान्त का संक्षिप्त परिचय है। 'आद्यबिम्ब और उपन्यास’ शीर्षक द्वितीय निबन्ध उपन्यासालोचन के क्षेत्र में आद्यबिम्ब की धारणा के संप्रयोग से सम्बन्धित है। इसमें लेखक ने अनेक महत्‍त्‍वपूर्ण सिद्धान्तों की स्थापना की है जिनसे हिन्दी आलोचना के नए विकास की संभावनाएँ बलवती होती हैं। 'आद्यबिम्ब और गोदान' शीर्षक तीसरे निबन्ध में ‘गोदान' का आद्यबिम्बात्मक अध्ययन है। लेखक ने मुख्यत कथानक, उद्देश्य एवं भाषा के बिम्बत्‍व का गभीर विवेचन किया है।</p>
<p>'गोदान' की संरचनात्मक गहनताओं का यह अध्ययन उसके लगभग सभी विवादास्पद पहलुओं पर नई रोशनी डालता है। निस्‍सन्‍देह, यह पुस्‍तक हिन्दी आलोचना के क्षेत्र में मील का पत्थर है।</p>
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Book Details

  • ISBN
    9788119989287
  • Pages
    139
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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