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Sahitya Aur Samiksha

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‘साहित्य और समीक्षा’ में किसी एक लेखक या आलोचक के कृतित्व पर विचार नहीं किया गया है। लेखक ने इस पुस्तक में साहित्य और समालोचना से जुड़ी कुछ ऐसे बिन्दुओं और समस्याओं पर विचार किया है जो किसी भी भाषा के साहित्य को समझने के लिए जरूरी हैं। राजनाथ अंग्रेजी साहित्य और पाश्चात्य साहित्य-आलोचना के मर्मज्ञ विद्वान हैं। पाश्चात्य साहित्य-समीक्षा के सन्दर्भ में लिखे गए उनके ये लेख साहित्य के अध्ययन, अध्यापन और विश्लेषण के विभिन्न आयामों पर विचार करते हैं। पुस्तक में संकलित समीक्षात्मक निबंधों में ​साहित्य के विश्लेषण और मूल्यांकन पर सर्वाधिक बल दिया गया है। साहित्य, सिद्धान्त और आलोचना के क्षेत्र में काम करने वाले अध्येताओं के अलावा शोधार्थियों, अध्यापकों और छात्रों के लिए भी यह एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक साबित होगी।

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‘साहित्य और समीक्षा’ में किसी एक लेखक या आलोचक के कृतित्व पर विचार नहीं किया गया है। लेखक ने इस पुस्तक में साहित्य और समालोचना से जुड़ी कुछ ऐसे बिन्दुओं और समस्याओं पर विचार किया है जो किसी भी भाषा के साहित्य को समझने के लिए जरूरी हैं। राजनाथ अंग्रेजी साहित्य और पाश्चात्य साहित्य-आलोचना के मर्मज्ञ विद्वान हैं। पाश्चात्य साहित्य-समीक्षा के सन्दर्भ में लिखे गए उनके ये लेख साहित्य के अध्ययन, अध्यापन और विश्लेषण के विभिन्न आयामों पर विचार करते हैं।

पुस्तक में संकलित समीक्षात्मक निबंधों में ​साहित्य के विश्लेषण और मूल्यांकन पर सर्वाधिक बल दिया गया है। साहित्य, सिद्धान्त और आलोचना के क्षेत्र में काम करने वाले अध्येताओं के अलावा शोधार्थियों, अध्यापकों और छात्रों के लिए भी यह एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक साबित होगी।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2024
Weight
318 grams
ISBN-13
9789360864293
Pages
168
Reading time
~6 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22 cm
Language
Hindi

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