Aadhunik Kavi
(0)
₹
210
₹ 168 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
बीसवीं शताब्दी में खड़ी बोली का काव्य इतना समृद्ध हो गया है कि उसे संसार के किसी भी सभ्य देश के काव्य की तुलना में रखा जा सकता है। इस युग में विभिन्न साहित्यिक वादों और आन्दोलनों का प्रचार हुआ, इस युग ने हमें प्रथम श्रेणी के अनेक महाकाव्य और खंड-काव्य दिए और इसी युग में एक ओर गीति-काव्य और दूसरी ओर मुक्त छंद का ऐसा प्रसार हुआ, जिसकी समता अतीत के सम्पूर्ण इतिहास में नहीं मिलती। अत: समय की माँग है कि आधुनिक काव्य के भावगत एवं कलागत सौन्दर्य का लेखा-जोखा अब लिया जाए।</p> <p>औद्योगीकरण एवं उपभोक्तावादी संस्कृति का प्रभाव केवल निम्न वर्ग पर ही नहीं, बल्कि उसकी गिरफ़्त में सम्पूर्ण मानवीय समाज है। धर्म की अमानवीय व्याख्या स्वार्थपरकता, अर्थलोलुपता, विज्ञान के द्वारा विकसित विनाश के विभिन्न साधन आदि के कारण सम्पूर्ण मनुष्यता के लिए ही संकट पैदा हुआ। मनुष्य का बचना बहुत प्राथमिक है। अभी भी मनुष्य जीवन और मृत्यु के अनेक प्रश्नों से टकरा रहा है। परिवर्तन की गति इतनी तेज है कि यह आशंका होने लगती है कि मनुष्य की पहचान करानेवाले लक्षण ही न लुप्त हो जाएँ। अशोक वाजपेयी ऐसे रचनाकार हैं जो मनुष्यता के व्यापक प्रश्नों से टकराते हैं और नई परिस्थितियों में मानवीय सभ्यता को रचना के माध्यम से स्थापित करते हैं।</p> <p>नयी कविता से जुड़े अनेक कवियों ने अपनी निजी अनुभूति और शिल्प के द्वारा रचनात्मक ऊँचाई हासिल की, उनकी रचनाधर्मिता को काव्यधारा के दायरे में पूरी तरह से नहीं समझा जा सकता है, बल्कि उनका अलग-अलग विवेचन अपेक्षित है।</p> <p>इस ग्रन्थ में भारतेन्दु से लेकर अरुण कमल तक ऐसे चौवालीस प्रतिनिधि कवियों के काव्य का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है जिनका साहित्य के इतिहास में विशेष महत्व है और जिन्होंने अपनी साधना से अपने व्यक्तित्व की छाप इस युग पर किसी न किसी रूप में छोड़ी है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
बीसवीं शताब्दी में खड़ी बोली का काव्य इतना समृद्ध हो गया है कि उसे संसार के किसी भी सभ्य देश के काव्य की तुलना में रखा जा सकता है। इस युग में विभिन्न साहित्यिक वादों और आन्दोलनों का प्रचार हुआ, इस युग ने हमें प्रथम श्रेणी के अनेक महाकाव्य और खंड-काव्य दिए और इसी युग में एक ओर गीति-काव्य और दूसरी ओर मुक्त छंद का ऐसा प्रसार हुआ, जिसकी समता अतीत के सम्पूर्ण इतिहास में नहीं मिलती। अत: समय की माँग है कि आधुनिक काव्य के भावगत एवं कलागत सौन्दर्य का लेखा-जोखा अब लिया जाए।</p>
<p>औद्योगीकरण एवं उपभोक्तावादी संस्कृति का प्रभाव केवल निम्न वर्ग पर ही नहीं, बल्कि उसकी गिरफ़्त में सम्पूर्ण मानवीय समाज है। धर्म की अमानवीय व्याख्या स्वार्थपरकता, अर्थलोलुपता, विज्ञान के द्वारा विकसित विनाश के विभिन्न साधन आदि के कारण सम्पूर्ण मनुष्यता के लिए ही संकट पैदा हुआ। मनुष्य का बचना बहुत प्राथमिक है। अभी भी मनुष्य जीवन और मृत्यु के अनेक प्रश्नों से टकरा रहा है। परिवर्तन की गति इतनी तेज है कि यह आशंका होने लगती है कि मनुष्य की पहचान करानेवाले लक्षण ही न लुप्त हो जाएँ। अशोक वाजपेयी ऐसे रचनाकार हैं जो मनुष्यता के व्यापक प्रश्नों से टकराते हैं और नई परिस्थितियों में मानवीय सभ्यता को रचना के माध्यम से स्थापित करते हैं।</p>
<p>नयी कविता से जुड़े अनेक कवियों ने अपनी निजी अनुभूति और शिल्प के द्वारा रचनात्मक ऊँचाई हासिल की, उनकी रचनाधर्मिता को काव्यधारा के दायरे में पूरी तरह से नहीं समझा जा सकता है, बल्कि उनका अलग-अलग विवेचन अपेक्षित है।</p>
<p>इस ग्रन्थ में भारतेन्दु से लेकर अरुण कमल तक ऐसे चौवालीस प्रतिनिधि कवियों के काव्य का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है जिनका साहित्य के इतिहास में विशेष महत्व है और जिन्होंने अपनी साधना से अपने व्यक्तित्व की छाप इस युग पर किसी न किसी रूप में छोड़ी है।
Book Details
-
ISBN9788180319181
-
Pages360
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Pracheen Kavi
- Author Name:
Vishvambhar 'Manav' +1
- Book Type:

- Description:
हिन्दी के विशाल वाङ्मय के अन्तर्गत ब्रज, अवधी और खड़ी बोली तीनों का काव्य आता है; पर खड़ी बोली के प्रति अत्यधिक मोह होने के कारण हमने अपने को एक गौरवशाली परम्परा से विच्छिन्न कर लिया है और इस प्रकार अपने उत्तराधिकार से स्वयं वंचित हो गए हैं। अतीत के काव्य का अपना एक महत्त्व है, एक स्थान है, एक सौन्दर्य है।
आलोचक के लिए साहित्य के सम्पूर्ण विकास की जानकारी अपेक्षित है, अत: आधुनिक काव्य को समझने के लिए भी प्राचीन काव्य का अध्ययन अनिवार्य रहेगा—अपनी परम्परा के परिचय के लिए भी और उसे उचित परिप्रेक्ष्य में रखकर देखने के लिए भी। यदि हम साहित्य के किसी भी काल से अपरिचित हैं, तो हम उसके किसी अन्य काल के प्रति भी न्याय नहीं कर सकेंगे। हमें अपने साहित्य की सभी युगों की ऊँचाइयों से परिचित होना चाहिए। मेरा विश्वास है कि जो व्यक्ति ‘रामचरितमानस’, ‘पद्मावत’ और ‘सूरसागर’ की गरिमा को नहीं पहचानता, वह ‘साकेत’, ‘कामायनी’ और ‘प्रिय-प्रवास’ के सम्बन्ध में भी अतिरंजित ढंग की बातें करेगा।
रीतिकालीन-काव्य चिन्तन-प्रधान भी है। चिन्तन जीवन की सीमाओं के भीतर से उसकी ज्वलन्त समस्याओं को लेकर हुआ है। जीवन में केवल भावना से काम नहीं चलता, उसके पथ की बाधाओं को पार करने के लिए बुद्धि के सहयोग की भी अपेक्षा है। जीवन की कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करने के लिए जन-धारणाओं को अनुभवी लोगों के व्यावहारिक ज्ञान की आवश्यकता पड़ती ही है।
इस समीक्षा ग्रन्थ में चन्द बरदाई से लेकर दीनदयाल गिरि तक सत्रह प्रमुख प्राचीन कवियों के जीवन और काव्य का विवेचन इस रूप में किया गया है, जिससे बीसवीं शताब्दी के पूर्व के सम्पूर्ण ब्रज और अवधी काव्य का सौन्दर्य आज के प्रबुद्ध पाठक के सामने प्रत्यक्ष होकर, कबीर और जायसी, सूर और तुलसी, देव और बिहारी आदि में हमारी अनुरक्ति नए सिरे से जगा सके।
Kamayani : Moolpath Evam Teeka
- Author Name:
Vishvambhar 'Manav' +1
- Book Type:

- Description:
‘कामायनी’ एक महाकाव्य है। इसकी प्रधान पात्र श्रद्धा है। काम की पुत्री होने के कारण उसका दूसरा नाम कामायनी भी है। प्रसाद जी ने इस गरिमामयी नारी को सम्मान देने के लिए ही अपने महाकाव्य का नाम ‘कामायनी’ रखा है। इसकी कथा का आधार ‘ऋग्वेद’, ‘छांदोग्य’ ‘उपनिषद्’, ‘शतपथ ब्राह्मण’ और ‘श्रीमद्भागवत’ है। घटनाओं का चयन प्रसाद ने मुख्यत: ‘शतपथ ब्राह्मण’ से किया है। उसमें मनु, श्रद्धा, इड़ा, किलात और आकुलि के नाम आए हैं। जल-प्लावन की घटना का उसमें कुछ विस्तार से वर्णन है। मनु देव-जाति में उत्पन्न होने पर भी मानवों के आदि पुरुष हैं। इसी से उनमें देवत्व और मानवत्व के सम्मिलित संस्कार पाए जाते हैं। इस पात्र की महत्ता इस बात में निहित है कि उसके माध्यम से देव-संस्कृति के विनाश के उपरान्त मानव-सभ्यता के विकास की कहानी कही गई है। ‘कामायनी’ में मनु, श्रद्धा और इड़ा, मन, हृदय और बुद्धि के प्रतीक हैं। इस दृष्टि से यह कृति अन्त:करण में वृत्तियों के विकास की गाथा भी कहती है। ‘कामायनी’ में सर्गों का नामकरण इन्हीं वृत्तियों के आधार पर हुआ है। यह मानवीय मनोविकारों का विराट रूपक है।
Bhasha-Chintan Ke Naye Aayam
- Author Name:
Ramkishor Sharma +1
- Book Type:

- Description:
चिन्तन-मनन, ज्ञान के प्रसारण, सम्प्रेषण आदि के लिए भाषा की आवश्यकता है। भिन्न-भिन्न प्रयोजनों के लिए भाषा के अलग-अलग प्रारूप भी निर्मित हो जाते हैं। अन्य ज्ञान-विज्ञान की तरह भाषाविज्ञान में भी भाषा को विभिन्न कोणों से देखने-परखने की प्रक्रिया दृष्टिगोचर हो रही है। ‘भाषाविज्ञान’ जो आरम्भ में एक विषय के रूप में प्रतिष्ठित हुआ, वह आज एक ज्ञान का संकाय बन गया है। भाषा-चिन्तन की अनेक शाखाएँ-प्रशाखाएँ बनती जा रही हैं। साहित्य के अध्येताओं के लिए भाषा पर हो रहे विचारों तथा उनके निष्कर्षों से परिचित होना आवश्यक है।
विश्वास है कि भाषा-चिन्तन के नए क्षेत्रों का सांगोपांग परिचय पुस्तक के द्वारा पाठकों को मिल सकेगा। एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कृति।
Sampoorn Rachnayen : Rahim
- Author Name:
Ramkishor Sharma +1
- Book Type:

- Description:
रहीम मध्यकाल के ऐसे विलक्षण कवि हैं, जिनके अनुभव बहुआयामी हैं। इन्होंने जीवन में वैभव, सम्पन्नता तथा प्रतिष्ठा प्राप्त की और विपन्नता, तिरस्कार तथा बर्बर व्यवहार की पीड़ा भी झेली। इन्होंने धर्मनीति, राजनीति तथा लोकनीति से सम्बन्धित अपने अनुभूत विचारों को छन्दबद्ध करके जन-साधारण को चमत्कृत कर दिया। तुलसीदास, कबीरदास आदि भक्तों की तरह यदि किसी की उक्ति सामान्य शिक्षित व्यक्ति के द्वारा समय-समय पर उद्धृत की जाती है तो वह है रहीम की नीति सम्बन्धी उक्ति का कथन। रहीम की रचनाओं को सही ढंग से समझने के लिये उनका सटीक संस्करण प्रस्तुत किया जा रहा है। इनमें उनकी हिन्दी, संस्कृत तथा ज्योतिष सम्बन्धित सभी रचनाओं को समाहित किया गया है। एक लम्बी भूमिका में उनकी रचना की विशेषताओं को उद्घाटित किया गया है। भारतीय सांस्कृतिक उदारता, आस्था, विश्वास तथा सहिष्णुता आदि रहीम को उसी आलोक में परखने की चेष्टा इस कृति की विशेषता है। पूर्ण विश्वास है कि प्रस्तुत ग्रन्थ रहीम की रचनाओं के मूल अभिप्राय को समझने में अध्येताओं, छात्रों तथा प्राध्यापकों के लिए उपयोगी होगा।
Bhasha Vigyan : Hindi Bhasha Aur Lipi
- Author Name:
Ramkishor Sharma +1
- Book Type:

- Description:
सभ्यता और संस्कृति के विकास के साथ भाषा प्रयोग के आयाम में विस्तार एवं सूक्ष्मता आई है। अपने सामाजिक परिवेश में सहज ढंग से सीखी गई मातृभाषा के द्वारा बृहत्तर विश्व-समाज के साथ सम्पर्क स्थापित करना सम्भव नहीं है। विश्व-समाज में भाषा व्यवहार के विविध सन्दर्भों को समझने के लिए भाषा-विज्ञान का अध्ययन आवश्यक हो गया है। भाषा की विविध प्रयुक्तियों, भाषा-चिन्तन की परम्परा, भाषा-संरचना के तत्त्वों, ध्वनि, शब्द, पद, अर्थ आदि क्षेत्रों में सम्पन्न भाषा वैज्ञानिक आधुनिकतम विचारों तथा निष्पत्तियों को एक साथ समाहित करनेवाली यह पुस्तक छात्रों, अनुसन्धानकर्ताओं तथा अन्य जिज्ञासुओं के लिए उपादेय होगी। हिन्दी-भाषा तथा लिपि पर भी इसमें बड़े विस्तार से विचार किया गया है। विषय को सुबोध बनाने के लिए परिचित उदाहरणों का सहारा लिया गया है, विषय की गम्भीरता तथा स्तर को सुरक्षित रखते हुए सरल, सुबोध भाषा शैली अपनाई गई। विवेचन क्रम में व्यर्थता का त्याग तथा आवश्यक सामग्री के ग्रहण का प्रयत्न रहा है। इसी आधार पर पुस्तक के कलेवर को संयमित किया गया है।
Kavya-Pustak Samiksha Ka Swaroop
- Author Name:
Ramkishor Sharma +1
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Aadhunik Bhasha Vigyan Ke Siddhant
- Author Name:
Ramkishor Sharma +1
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत पुस्तक में भाषा-प्रयोग के विविध पक्षों का वैज्ञानिक परिचय देने का प्रयत्न किया गया है। भाषाविज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन मान्यताओं एवं विचारों की वर्तमान उपयोगिता क्या है तथा उनके आधार पर नवीन दिशाओं में जो कार्य हुआ है, उन सभी को समाहित करने की चेष्टा की गई है। विदेशी चिन्तकों द्वारा विश्व की अनेक भाषाओं को ध्यान में रखकर जो अध्ययन प्रस्तुत किया गया है, उसमें हिन्दी भाषा का समावेश नगण्य है। इस पुस्तक में नवीन सिद्धान्तों का आकलन तथा विवेचन करते समय 'हिन्दी' को केन्द्र में रखा गया है। अनूदित पुस्तकों को छोड़कर नवीन विषयों पर समग्रत: भाषा का सैद्धान्तिक विवेचन प्रस्तुत करने वाली पुस्तकों का प्राय: अभाव है। इसी अभाव की पूर्ति के लिए इस पुस्तक की रचना की गई है।
Hindi Sahitya Ka Samagra Itihas
- Author Name:
Ramkishor Sharma +1
- Book Type:

- Description:
हिन्दी साहित्य का समग्र इतिहास’ पुस्तक नए अनुसन्धानों, विमर्शों के परिप्रेक्ष्य में समाज सापेक्षता तथा कला-मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत की गई है। इसमें हिन्दी भाषी प्रान्तों के अलावा अन्य प्रान्तों में रहनेवाले, हिन्दीतर भारतीय भाषाओं के प्रयोक्ता लेखकों एवं कवियों की रचनाओं को समाहित किया गया है।
नई विधाओं जैसे हिन्दी गज़ल, नवगीत, अनुगीत, हाइकू के रचना-शिल्प पर समुचित प्रकाश डाला गया है।
स्वतंत्रता के बाद के ऐसे रचनाकारों की रचनाओं पर विचार किया गया है जो आन्दोलनों से न जुड़कर स्वतंत्र लेखन कर रहे थे। रचनाकारों तथा रचनाओं का मूल्यांकन दुराग्रहमुक्त होकर निष्पक्ष भाव से किया गया है।
हिन्दी और उर्दू का गहरा रिश्ता है, अतः हिन्दी के अध्येताओं को उर्दू साहित्य से भी परिचित होना चाहिए, इसी दृष्टि से उर्दू साहित्य का अति संक्षिप्त इतिहास दर्शाया गया हैं। समकालीन अनेक रचनाओं को शामिल किया गया है जो साहित्यिक दृष्टि से उत्कृष्ट हैं किन्तु साहित्येतिहासों में जिनकी उपेक्षा की गई है। आधुनिक युग में ब्रज तथा अवधी साहित्य की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला गया है। विवेचन की भाषा-शैली स्पष्ट, सुबोध तथा निष्पक्ष है। हिन्दी साहित्य के समग्र इतिहास में काव्य-प्रवृतियों का अभिनव दृष्टि से मूल्यांकन किया गया है। नए विमर्शों तथा पुनर्पाठ की दृष्टि से नई सामग्री का समावेश भी किया गया है। हिन्दी ग़ज़ल, हाइकू, बोलियों के साहित्य को भी यथास्थान अंकित किया गया है।
Meerabai Ki Sampurna Padawali
- Author Name:
Ramkishor Sharma +2
- Book Type:

- Description:
भक्तिकाल में मीराँ की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई थी। मीराँ के विषय में अनेक किंवदन्तियाँ भी गढ़ ली गईं। किंवदन्तियाँ भले ही ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित न हों, किन्तु उनसे इतना अवश्य ज़ाहिर होता है कि मीराँ अपनी विद्रोही चेतना के कारण लोकप्रिय अवश्य हो गई थीं। जो रचनाकार जितना अधिक लोकप्रिय होता है, उतना अधिक उसके कृतित्व का देशकाल के अनुसार रूपान्तरण होता है। मीराँ के पद गेय थे, अत: एक प्रान्त से दूसरे प्रान्त में साधु, सन्तों तथा गायकों के द्वारा मौखिक ढंग से प्रचारित-प्रसारित होते रहे। मीराँ सर्जनात्मक चेतना को भी उद्वेलित करती हैं। मीराँ के पदों में पाठ-भेद होने के लिए प्रादेशिक भेद तथा मौखिक गेय परम्परा को ज़िम्मेदार ठहराया गया है। उनके औचित्य पर प्रश्नचिह्न लगाए बिना एक सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि मीराँ ने कुछ पदों को दुबारा कुछ विस्तार से तथा कुछ परिवर्तन के साथ गाया होगा। आत्मोल्लास या उन्माद के क्षणों में गाए जानेवाले गीतों में गायक को इसकी सुध-बुध कहाँ रहती है कि वह अपने पूर्व कथन को दुहरा रहा है। उन्होंने अपने जीवन में घटित हुए कटु एवं तीक्ष्ण अनुभवों को वाणी दी है, राणा के द्वारा जो व्यवहार किया गया था, मीराँ भावावेश के क्षणों में उनका कई पदों में स्मरण करती हैं और भगवद् कृपा की महिमा का अनुभव करती हैं। शोधार्थियों और अध्येताओं के लिए एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण और संग्रहणीय पुस्तक।
Kabir Granthawali (Sateek)
- Author Name:
Ramkishor Sharma +1
- Book Type:

- Description:
कबीर निर्गुण सन्त काव्यधारा के ऐसे शब्द-साधक हैं जिन्होंने अपने युग की धार्मिक, सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था से टकराकर अद्भुत शक्ति प्राप्त की। पारम्परिक सांस्कृतिक प्रवाह में सम्मिलित प्रदूषित तत्त्वों को छानकर उसे मध्यकाल के लिए ही आस्वादनीय नहीं, बल्कि आधुनिक जनमानस के लिए भी उपयोगी बना दिया। भारतीय धर्म साधना में ऐसा निडर तथा अकुंठित व्यक्तित्व विरला है।
पंडितों, मौलवियों, योगियों आदि से लोहा लेकर कबीर ने जनसाधारण के स्वानुभूतिजन्य विचारों और भावों की मूल्यवत्ता स्थापित की। कबीर की वाणी सन्त-कंठ से निसृत होकर साधकों, अनुयायियों एवं लोक-जीवन में स्थान एवं रुचि भेद के अनुसार विविध रूपों में परिणत हो गई। इसलिए कबीर की वाणी के प्रामाणिक पाठ निर्धारण की जटिल समस्या कड़ी हो गई।
कबीर पन्थ में बीजक की श्रेष्ठता मान्य है, विद्वानों ने ग्रन्थावलियों को महत्त्व दिया है। सामान्य जन के लिए लोक में व्याप्त कबीर वाणी ग्राह्य है। अतः तीनों परम्पराओं में से किसी को भी त्यागना उचित नहीं है। फलत: कबीर की रचनाओं का समग्र रूप तीनों के समाहार से ही सम्भव है। प्रस्तुत ग्रन्थावली का सम्पादन इसी दृष्टि से किया गया है। मूल पाठ के साथ कबीर की मूल साधना तथा मन्तव्य के अनुकूल भाष्य प्रस्तुत किया गया है। इसमें अपनी इच्छित दिशा में आवश्यकता से अधिक खींचकर पाठकीय सोच को कुंठित करने की चेष्टा नहीं की गई है। कबीर-वाणी के प्रामाणिक एवं समग्र पाठ की दृष्टि से तथा उसमें निहित विचारों, भावों एवं अनुभूतियों को उद्घाटित करने की दृष्टि से यह कृति निश्चित ही महत्त्वपूर्ण एवं संग्रहणीय है।
Sahitya Siddhant
- Author Name:
Rene Wellek +2
- Book Type:

- Description:
प्रसिद्ध अमेरिकी आलोचकों ‘रेने वेलेक और आस्टिन वारेन’ की यह कृति अपने विषयगत वैज्ञानिक विवेचन एवं शैलीगत सहजता के कारण अभूतपूर्व लोकप्रियता प्राप्त कर चुकी है। विद्वान् लेखकों ने एक ओर तो काव्यशास्त्र और अलंकारशास्त्र (जिसकी परम्परा अरस्तू से शुरू होकर ब्लेयर, कैम्पबेल और केम्स तक आई हुई है) के विभिन्न पक्षों का सम्यक् विवेचन प्रस्तुत किया है और दूसरी ओर ललित साहित्य की विधाओं और शैलीशास्त्र तथा साहित्यालोचन के प्रमुख सिद्धान्तों से भी पाठकों को परिचित कराया है। इसके साथ ही अनुसन्धान, साहित्य का इतिहास, साहित्य का मूल्यांकन, कॉलेजों में साहित्य का अध्ययन जैसी ज्वलन्त समस्याओं का समाधान भी सुझाने का सफल प्रयास किया है।
प्रस्तुत पुस्तक में ‘काव्यशास्त्र’ (या साहित्य-सिद्धान्त) और ‘आलोचना (साहित्य का मूल्यांकन) को पांडित्य (अनुसन्धान) और साहित्यिक इतिहास (सिद्धान्त और आलोचना के रूढ़पथ के विपरीत, साहित्य के गतिशील पक्ष) से भी जोड़ना चाहा है। शब्दावली, टोन और बल में निःसन्देह दोनों लेखकों में थोड़ी-बहुत असंगतियाँ रह गई हैं। परन्तु वे यह भी सोचते हैं कि इस कमी की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि दो व्यक्ति मूलत: एक ही निष्कर्ष पर पहुँचे हैं।
Vichar Ka Aina Kala Sahitya Sanskriti : Mahatma Gandhi
- Author Name:
Mahatma Gandhi +1
- Book Type:

- Description:
विचार का आईना शृंखला के अन्तर्गत ऐसे साहित्यकारों, चिन्तकों और राजनेताओं के ‘कला साहित्य संस्कृति’ केन्द्रित चिन्तन को प्रस्तुत किया जा रहा है जिन्होंने भारतीय जनमानस को गहराई से प्रभावित किया। इसके पहले चरण में हम मोहनदास करमचन्द गांधी, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, प्रेमचन्द, जयशंकर प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, राममनोहर लोहिया, रामचन्द्र शुक्ल, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा, सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ और गजानन माधव मुक्तिबोध के विचारपरक लेखन से एक ऐसा मुकम्मल संचयन प्रस्तुत कर रहे हैं जो हर लिहाज से संग्रहणीय है।
मोहनदास करमचन्द गांधी ऐसे जननेता हैं जो वैश्विक उपस्थिति रखते हैं। वे भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के ऐसे नायक हैं जिन्होंने इसे जनता का आन्दोलन बना दिया। औपनिवेशिक सत्ता का प्रतिरोध करते हुए उन्होंने सत्य और अहिंसा को अपनी लड़ाई का केन्द्रीय शिल्प बनाया। उन्होंने साध्य ही नहीं साधन की भी पवित्रता की बात की, बेलगाम उपभोग की संस्कृति का विरोध किया। सत्याग्रही के रूप में विरोधी के प्रति भी किसी तरह की कटुता न रखने की बात कही। अपने समय के शीर्ष लेखकों, चिन्तकों और कलाकारों पर गांधी के विचारों का गहरा असर रहा। वे लोगों से निरन्तर संवादरत रहे और अपने विचारों को मजबूती से रखते रहे। हमें उम्मीद है कि उनके कला, साहित्य और संस्कृति सम्बन्धी लेखन को पढ़ते हुए इस कठिन समकाल से जूझने की अनेक राहें रोशन होंगी।
Sher Behtar Kaise Hua?
- Author Name:
Akash Arsh
- Book Type:

- Description:
"Sher Behtar Kaise Hua" is a documentation of the classical tradition in Urdu poetry, in which masters would guide their disciples by correcting flaws in their verses. Through this gradual process, the students were introduced to the finer nuances—both strengths and weaknesses—of poetic craft. This book is a compilation of such corrections (islaah) offered by great poets like Mir, Ghalib, Nasikh, and Daagh on the verses of their disciples. Through these curated islaahs and their interpretations, the book teaches readers how to recognise and refine errors in Urdu poetry. It serves as an essential reference for students, lovers, and aspiring poets of Urdu literature. Aakash ‘Arsh’ (Aakash Tiwari) was born on May 2, 2001, in Sultanpur, Uttar Pradesh. He received his early education in Jagraon, Punjab. He holds a deep interest in the literature of four languages—Urdu, Hindi, English, and Punjabi. Alongside writing poetry in Urdu and Punjabi, he is also actively engaged in translation and editorial work. Currently, he serves as an editor at the Rekhta Foundation.
Urdu Shayari Ka Shabd Sansar
- Author Name:
Azra Naqvi
- Book Type:

- Description:
उर्दू कई तहज़ीबों और भाषाओं के मेल से बनी है और शायरी की रिवायत (काव्य-परम्परा) में फ़ारसी, अरबी, संस्कृत और तुर्की के रंग शामिल हैं। ये किताब एक शब्दकोश न हो कर उर्दू शायरी में आने वाले विभिन्न विषयों पर ख़ूबसूरत शेरों के संकलन पर आधारित है। शायरी की दुनिया की सैर कराते हुए ये किताब आपको नए-नए शब्दों और उनके उपयोग की बारीकियों के बारे में बताती है और शायरी में इस्तेमाल होने वाले अहम लफ़्ज़ों, तरकीबों और तल्मीहात के मानी और उनके विभिन्न सन्दर्भों को विस्तार से समझाया गया है। ये किताब शायराना लफ़्ज़ों के कलात्मक इस्तेमाल और उनके गहरे अर्थों को समझने में मददगार होगी, और उर्दू शायरी के अथाह ख़ज़ाने का भरपूर लुत्फ़ उठाने का मौक़ा देगी।
Urdu Shabdon Ka Guldasta
- Author Name:
Azra Naqvi
- Book Type:

- Description:
Urdu is celebrated for its beauty, elegance, and rich vocabulary. “Urdu Shabdon ka Guldasta” is a unique initiative by Rekhta Foundation to help you learn Urdu words in an engaging and easy way. Instead of a traditional dictionary, this book presents Urdu words through stories, making vocabulary building more enjoyable. Words are categorised by context to enable learners to acquire related words from a single root. Each chapter ends with exercises for quick revision. This book serves as a valuable guide to mastering commonly used words in Urdu poetry and basic communication skills. Please share your feedback and comments about the book. Styled after ‘Word Power Made Easy, ’ it helps you quickly expand and improve your Urdu vocabulary. It covers a wide range of topics, including Greetings, Love, Knowledge, Relationships, People, Household Items, Clothing, Tastes, Colours, Body Parts, Markets, Travel, Professions, Poetry, Taverns, Gardens, and Nature. Throughout the chapters, you'll learn common mistakes, correct pronunciation and spelling, and understand word roots, forms, and pluralisation rules. Additionally, you will learn how to greet, host, and express gratitude on various occasions. With simple explanations, basic grammar, and chapter-wise exercises, the book boosts your confidence in speaking Urdu. Ultimately, this book will help you develop a refined understanding of the Urdu language and etiquette.
Saat Bhumikayen
- Author Name:
Mahadevi Verma +1
- Book Type:

- Description:
छायावाद की यशस्वी रचनाकार महादेवी वर्मा का लेखन किसी न किसी रूप में पाठकों व आलोचकों को आन्दोलित करता आया है। कभी उनकी रचनाओं में उनके जीवन के बिखरे सूत्र रेखांकित किए जाते हैं तो कभी उनके जीवन में रचनाओं के स्रोत खोजे जाते हैं। महादेवी द्वारा लिखित प्रत्येक शब्द स्वयं को ध्यान से पढ़े जाने का आग्रह करता है। ‘सात भूमिकाएँ’ में ‘रश्मि’, ‘सांध्यगीत’, ‘आधुनिक कवि’, ‘दीपशिखा’, ‘बंग–दर्शन’, ‘सप्तपर्णा’ एवं ‘हिमालय’ कविता–संग्रहों की भूमिकाएँ हैं। महादेवी वर्मा लिखित इन भूमिकाओं का ऐतिहासिक महत्त्व है। ये भूमिकाएँ उनकी तत्कालीन मन:स्थिति को प्रकट करने के साथ उनके समग्र लेखन पर एक ‘अन्त:साक्ष्य’ की भाँति हैं। ‘सात भूमिकाओं’ के सम्पादक दूधनाथ सिंह का सम्पादकीय ‘छायावाद : व्यथा का सवेरा’ अत्यन्त विचारोत्तेजक है। अपनी विशिष्ट ‘तर्कसंगत पद्धति’ से दूधनाथ सिंह ने महादेवी के रचनाकर्म को विवेचित किया है—‘उनके वाक्य स्पष्ट, पारदर्शी व निर्भ्रान्त हैं, ‘महादेवी की आलोचनाएँ शब्द–अलंकृति अधिक हैं, आलोचनाएँ कम। उनका सारा वैचारिक गद्य–लेखन लगभग ऐसा ही है। उनमें तर्क और विश्लेषण का अभाव है। अपनी हर अगली बात के लिए महादेवी तर्क की जगह कोई प्रतीक–बिम्ब ढूँढ़ने लगती हैं।’
दूधनाथ सिंह के सम्पादकीय के प्रकाश में महादेवी की इन सात भूमिकाओं को पढ़ना एक आलोचनात्मक अनुभव है। तब और भी जब महादेवी के चुटीले ‘सुरक्षात्मक वाक्य’ उनकी प्रत्येक भूमिका में हैं। ‘रश्मि’ संग्रह की ‘अपनी बात’ का पहला ही वाक्य, ‘अपने विषय में कुछ कहना प्राय: बहुत कठिन हो जाता है, क्योंकि अपने दोष देखना अपने आपको अप्रिय लगता है और इनको अनदेखा कर जाना औरों को...।’ एक संग्रहणीय पुस्तक।
Kavya Bhasha Par Teen Nibandh
- Author Name:
Ramswaroop Chaturvedi +1
- Book Type:

- Description:
काव्य-भाषा सम्बन्धी चिन्तन समकालीन आलोचना के केन्द्र में आ गया है। हिन्दी में, इस विषय पर मौलिक दृष्टि से लिखी गई पुस्तकें बहुत कम हैं। प्रख्यात आलोचक डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी के आलोचनात्मक चिन्तन का प्रमुख प्रतिमान काव्य-भाषा रही है। इस पुस्तक में उन्हीं के लिखे हुए तीन निबन्ध संकलित हैं जिनकी हिन्दी आलोचना में प्रशंसा होती रही है।
इस विषय पर इन निबन्धों का ऐतिहासिक और वैचारिक महत्त्व है।
Meera Aur Meera
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

- Description:
‘मीरा और मीरा’ छायावाद की मूर्तिमान गरिमा महीयसी महादेवी वर्मा के चार व्याख्यानों का संग्रह है। महादेवी जी ने ये व्याख्यान जयपुर में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की राजस्थान शाखा के निमंत्रण पर दिए थे।
इन चार व्याख्यानों के शीर्षक हैं–मीरा का युग, मीरा की साधना, मीरा के गीत और मीरा का विद्रोह। इनमें महादेवी ने मध्यकालीन स्त्री की स्थिति का विशेष सन्दर्भ लेकर भक्ति, मुक्ति, आत्मनिर्णय, विद्रोह और निजपथ-निर्माण आदि को विश्लेषित किया है।
‘मीरा और मीरा’ को प्रकाशित करते हुए हमें इसलिए भी विशेष प्रसन्नता है कि यह समय अस्मिता-विमर्श का है। स्त्री-विमर्श के ‘समय विशेष’ में स्त्री-अस्मिता के दो शिखर व्यक्तित्वों का ‘रचनात्मक संवाद’ महत्त्वपूर्ण है। इन दो दीपशिखाओं के आलोक में परम्परा और आधुनिकता के जाने कितने निहितार्थ स्पष्ट होते हैं। ‘शृंखला की कड़ियाँ’ की लेखिका ने ‘सूली ऊपर सेज पिया की’ का गायन करने वाली रचनाकार के मन में प्रवेश किया है। यह दो समयों (मध्यकाल और आधुनिक युग) का संवाद भी है।
यह सोने पर सुहागा ही कहा जाएगा कि प्रस्तुत पुस्तक की भूमिका सुप्रसिद्ध कवि, कथाकार व विमर्शकार अनामिका ने लिखी है। कहना न होगा कि यह लम्बी भूमिका एक मुकम्मल आलोचनात्मक आलेख है।
Meghdoot : Ek Adhyayan
- Author Name:
Kalidas +1
- Book Type:

- Description:
महाकवि कालिदास की कालजयी कृति ‘मेघदूत’ सदियों से प्रेम और विरह की श्रेष्ठ अभिव्यक्ति के रूप में समादृत रही है।
संस्कृत साहित्य में ‘उपमा कालिदासस्य’ प्रसिद्ध उक्ति है ही और इस कृति में कालिदास की रचनात्मकता शिखर पर है। इसीलिए ‘मेघदूत’ शताब्दियों से काव्य का प्रतिमान रहा है। रसिकों-विज्ञजनों में महान कृतियों के विशेष अध्ययन की सुस्थापित परम्परा रही है ताकि कृतियों में निहित विशेष भावों, सन्दर्भों, उक्तियों-अन्योक्तियों, कथाओं-अन्तर्कथाओं का खुलासा कर रचना का पूरा आनन्द लिया जा सके, और यदि यह अध्ययन डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल जैसे इतिहास-संस्कृति-मर्मज्ञ का हो तो पाठक रचना-रस से आप्लावित हो उठेंगे।
डॉ. अग्रवाल ने स्वयं लिखा : ‘‘यह अध्ययन ‘मेघदूत मीमांसा’ के नाम से 1927 की शरद ऋतु में लिखा गया था। उस समय मैं यौवन के ललाम भाव से परिचित ही हुआ था और मेरा मन उसके अतिरेक सुखों की उस भावभूमि के लिए उन्मुक्त था, जो ‘मेघदूत’ काव्य का सनातन धरातल है। न जाने किस पूर्व पुण्य से काशी विश्वविद्यालय में जब मैं बी.ए. की शिक्षा प्राप्त कर रहा था, तब किसी एकान्त दिवस में स्वर्गिक ज्योति की कोई किरण मेरे मानस में वह अभिज्ञान ले आई, जिसने मेरे लिए इस काव्य का अर्थ ही बदल डाला और इसके स्थूल रूप को सूक्ष्म बाण से बेध दिया। उसने एक साथ ही अध्यात्म और श्रृंगार के नील-लोहित धनुष से ‘मेघदूत’ के भावलोक को जीतकर मुझे भी उसका नागरिक बना लिया।’’
अरसे से अनुपलब्ध इस कृति का प्रकाशन हमारा गौरव है और काव्य-रसिकों के लिए उल्लास का अवसर भी।
Hindi Sahitya : Ek Saral Parichay
- Author Name:
Suraiyya Sheikh
- Book Type:

- Description:
इतिहास ग्रन्थों के अतिरिक्त हिन्दी साहित्य के विभिन्न कालखंडों, काल-रूपों और धाराओं पर अनेक शोध-प्रबन्ध एवं समीक्षात्मक ग्रन्थ प्रकाश में आए हैं। इनमें साहित्य के अनेक अज्ञात तथ्यों और अनिर्णीत प्रश्नों को नवीन दृष्टिकोण से नवालोक में प्रस्तुत किया गया है, किन्तु हिन्दी अनुसन्धान-जगत के इन नवीन निष्कर्षों और परिणामों का अतीव सतर्कतापूर्वक समन्वय एवं समाहितीकरण इतिहास-लेखन की दिशा में अभी शेष है। अतः नवीन शोध-परिणामों और विकसित साहित्य-चेतना के आलोक में हिन्दी साहित्य के इतिहास का पुनर्गठन और लेखन आवश्यक है। निस्सन्देह आज हिन्दी साहित्य के इतिहास में सम्बन्धित शताब्दिक पुस्तकें उपलब्ध हैं, किन्तु अभी तक इस दिशा में उचित व सन्तोषजनक प्रगति नहीं हुई है। हमने उस अभाव को दृष्टि में रखकर इस ग्रन्थ का प्रणयन किया है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book