Lahooluhan Afganistan
(0)
Author:
Shridhar Rao, Mahendra VedPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
350
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Unavailable
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अफ़ग़ानिस्तान की भौगोलिक संरचना उसकी स्थिति को अनूठा बनाती है। सभ्यता की शुरुआत से ही ये विभिन्न क़ाफ़िलों के आने-जाने का मार्ग रहा है। जो भी सुदूर पूर्व या भारत के जंगलों तथा नदियों की तरफ़ जाना चाहता, उसे अफ़ग़ानिस्तान की घाटियों तथा पहाड़ियों को ज़रूर पार करना पड़ता। एशिया और यूरोप, अरब दुनिया और दक्षिण एशिया और मध्य एशिया एवं पश्चिम एशिया के बीच स्थित होने की वजह से ये हर किसी को लुभाता है। क्या तालिबान के हटने तथा नई सत्ता के आने से ये लोभ-लालच ख़त्म होगा? पाँच साल के तालिबान शासन ने अफ़ग़ानिस्तान को सदियों पीछे ढकेल दिया है। शासकों ने बामियान की बौद्ध मूर्तियों के रूप में अपनी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर खो दी। ये एक तरह से द्वेष में आकर अपनी ही नाक काट लेने जैसा था, क्योंकि दुनिया ने तालिबान के तौर-तरीक़ों तथा विश्व आतंकवाद के निर्माता के रूप में उसे नामंज़ूर कर दिया था। काबुल के संग्रहालय को प्रसिद्ध गांधार चित्रों तथा प्रतिमाओं से वंचित कर दिया गया। कम्युनिस्ट शासन के दौरान महिलाओं को काम करने की पूरी आज़ादी थी, मगर अफ़ग़ानिस्तान इस स्थिति से उस स्थिति में ले जाया गया जहाँ तालिबान का राज था और जिसमें महिलाएँ दरवाज़ों के पीछे क़ैद कर दी गईं। स्कूल-कॉलेज तथा कामकाज की जगहों से हटाकर उन्हें बलात्कार के लिए छोड़ दिया गया। अपने समूचे ख़ूनी इतिहास में सम्भवतः एक बरबाद समाज ने सबसे ज़्यादा विधवाएँ और अनाथ देखे। इससे भी बुरा ये हुआ कि जो भी पढ़ा-लिखा था और मुल्क से जा सकता था, वो अपनी ज़िन्दगी की हिफ़ाज़त के लिए चला गया। क्या उनमें से कुछ लोग वापस लौटेंगे? उम्मीद करनी चाहिए कि लौटेंगे, मगर कुछ समय के बाद ही क्योंकि आज की हालत डरावनी है। अब इतिहास ने अफ़ग़ानिस्तान को एक और मौक़ा प्रदान किया है। विश्व बिरादरी के लिए भी ये एक अवसर है जब वो अफ़ग़ानिस्तान में एक सामूहिक भूमिका अदा कर सकती है। अफ़ग़ानिस्तान के अतीत और वर्तमान पर एक अनिवार्यतः पठनीय पुस्तक।
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अफ़ग़ानिस्तान की भौगोलिक संरचना उसकी स्थिति को अनूठा बनाती है। सभ्यता की शुरुआत से ही ये विभिन्न क़ाफ़िलों के आने-जाने का मार्ग रहा है। जो भी सुदूर पूर्व या भारत के जंगलों तथा नदियों की तरफ़ जाना चाहता, उसे अफ़ग़ानिस्तान की घाटियों तथा पहाड़ियों को ज़रूर पार करना पड़ता। एशिया और यूरोप, अरब दुनिया और दक्षिण एशिया और मध्य एशिया एवं पश्चिम एशिया के बीच स्थित होने की वजह से ये हर किसी को लुभाता है।
क्या तालिबान के हटने तथा नई सत्ता के आने से ये लोभ-लालच ख़त्म होगा? पाँच साल के तालिबान शासन ने अफ़ग़ानिस्तान को सदियों पीछे ढकेल दिया है। शासकों ने बामियान की बौद्ध मूर्तियों के रूप में अपनी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर खो दी। ये एक तरह से द्वेष में आकर अपनी ही नाक काट लेने जैसा था, क्योंकि दुनिया ने तालिबान के तौर-तरीक़ों तथा विश्व आतंकवाद के निर्माता के रूप में उसे नामंज़ूर कर दिया था। काबुल के संग्रहालय को प्रसिद्ध गांधार चित्रों तथा प्रतिमाओं से वंचित कर दिया गया।
कम्युनिस्ट शासन के दौरान महिलाओं को काम करने की पूरी आज़ादी थी, मगर अफ़ग़ानिस्तान इस स्थिति से उस स्थिति में ले जाया गया जहाँ तालिबान का राज था और जिसमें महिलाएँ दरवाज़ों के पीछे क़ैद कर दी गईं। स्कूल-कॉलेज तथा कामकाज की जगहों से हटाकर उन्हें बलात्कार के लिए छोड़ दिया गया। अपने समूचे ख़ूनी इतिहास में सम्भवतः एक बरबाद समाज ने सबसे ज़्यादा विधवाएँ और अनाथ देखे। इससे भी बुरा ये हुआ कि जो भी पढ़ा-लिखा था और मुल्क से जा सकता था, वो अपनी ज़िन्दगी की हिफ़ाज़त के लिए चला गया। क्या उनमें से कुछ लोग वापस लौटेंगे? उम्मीद करनी चाहिए कि लौटेंगे, मगर कुछ समय के बाद ही क्योंकि आज की हालत डरावनी है।
अब इतिहास ने अफ़ग़ानिस्तान को एक और मौक़ा प्रदान किया है। विश्व बिरादरी के लिए भी ये एक अवसर है जब वो अफ़ग़ानिस्तान में एक सामूहिक भूमिका अदा कर सकती है। अफ़ग़ानिस्तान के अतीत और वर्तमान पर एक अनिवार्यतः पठनीय पुस्तक।
Book Details
-
ISBN9788126705122
-
Pages232
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: यह विडंबना ही है कि स्वतंत्रता पाने के बाद जिन तथ्यों को लेखनीबद्ध करके देश की भावी पीढि़यों के लिए सहेजा जाना चाहिए था, वह कार्य आज भी अधूरा है। भारत की शिक्षा-व्यवस्था, भारत की स्वास्थ्य सेवाएँ और भारत के उद्योग, इन सबका हृस अंग्रेजी शासन में कैसे होता गया, इस पर विस्तार से कभी नहीं लिखा गया। अंग्रेजों की क्रूरता, बर्बरता, निर्ममता और भारतीयों पर किए हुए उनके अन्याय व अत्याचार के साथ ही अंग्रेजों द्वारा भारत की लूट का तथ्यपूर्ण विवरण इस पुस्तक में संकलित हैं। साथ ही अंग्रेजों के आने के पहले भारत की स्थिति क्या थी, अंग्रेजों ने कैसे भारत की जमी-जमाई व्यवस्थाओं को छिन्न-भिन्न किया और उनके जाने के बाद भारत की स्थिति क्या रही इस पर विस्तार से प्रकाश डालनेवाली यह पुस्तक अपनी सहज-सरल प्रस्तुति तथा प्रवाहपूर्ण भाषा-शैली के चलते नई पीढ़ी को अपनी ओर अवश्य आकर्षित करेगी।
PVTGs In Jharkhand: An Anthropological Perspective (Particularly Vulnerable Tribal Groups)
- Author Name:
Dr. Birendra Prasad +2
- Book Type:

- Description: "India is home to hundreds of tribal communities, each with their own unique cultures, traditions and ways of life. Among these are the Particularly Vulnerable Tribal Groups (PVTGs), who are identified as being at risk of losing their distinct identities, livelihoods and traditional practices. This book takes an in-depth look at the PVTGs residing in the state of Jharkhand through the analytical lens of anthropology. It consists of untold stories on its indigenous people as a tribute to their reliance, wisdom and unwavering Spirit. Through a chronological exploration, the book aims to understand the pivotal role played in shaping regional identity with political historicity, livelihood practices, indigenous knowledge, dynamic interest with local life and to investigate the indigenous’ contribution. The authors evaluate current policies related to the preservation and empowerment of PVTGs. The book highlights the urgent need to protect and uplift these ancient but vulnerable communities before their irreplaceable cultures are lost forever."
Bharat-Afghanistan Sambandh
- Author Name:
Shri Saroj Kumar Rath
- Book Type:

- Description: प्राचीन साहित्य पर आधारित लेखों से प्रेरणा लेते हुए तथा अबतक अज्ञात अभिलेखीय दस्तावेजों पर निर्भर करते हुए इस पुस्तक के शोधकार्य में अधुनातन शोध-शैली को अपनाया गया है और भारत-अफगानिस्तान संबंध पर अकाट्य स्पष्टीकरण एवं सुस्पष्ट निष्कर्ष प्रदान करने का प्रयास किया गया है। बहुमूल्य यूनानी और चीनी स्रोतों का उपयोग करते हुए इस पुस्तक में प्राचीन अफगानिस्तान के भारत से जुड़े दिलचस्प संबंधों को उजागर किया गया है, जिनका संस्कृत-साक्ष्यों के प्रकाश में भी परीक्षण किया गया है। दोनों देशों की दिलचस्प तथा अब तक बहुत कम ज्ञात बातों का ब्योरा इस शोध पुस्तक में है। यूनानी और भारतीय साहित्य इस रोचक तथ्य का समर्थन करता है कि भारत और अफगानिस्तान आधुनिक सीमाओं के सीमांकन से पहले सहस्लाब्दियों तक लगभग सबकुछ साझा करते थे। यह पुस्तक भारत, अफगानिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन में उपलब्ध अभिलेखीय आलेखों के आधार पर भारत-अफगान द्विपक्षीय संबंधों की विवेचना करती है। इस अध्ययन में भारत की अफगान नीति के विकास की प्रयोगसिद्ध अकादमिक व्याख्या देने का प्रयास किया गया है| इसमें इस सवाल की भी पड़ताल की गई है कि किस तरह से तालिबान द्वारा दो बार तख्तापलट और जबरन शासन अवधि के बाहर, बड़ी शक्तियों और पड़ोसी देशों के साथ अफगानिस्तान के बहुपक्षीय संबंधों का भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
Vikas Ki Rajneeti
- Author Name:
Vinay Sahasrabuddhe
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
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