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Pashchatya Itihas Darshan Evam Itihas Lekhan

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"अराजक का अव्यवस्थित असंख्य तथ्यों के मध्य एक क्रम स्थापित करके मानव के विकास-क्रम को अनुरेखित करना ही इतिहास का विवरण प्रस्तुत करना होता है। वैसे इस अर्थ को दोनों रूपों में देखा-समझा जा सकता है-प्रथम तो संरचना के स्तर पर और दूसरे, उसके लेखन अथवा चित्रण के उद्देश्य के माध्यम से!"" "द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् शीत-युद्ध से लेकर भू- मंडलीकरण एवं उदारवाद से होते हुए सोवियत संघ के विघटन और 'वैश्विक ग्राम' की परिकल्पना के बाद के क्रम में जिस प्रकार, उत्तर-संरचनावाद, उत्तर- धुनिकतावाद, उपाक्रमी इतिहास लेखन से लेकर उत्तर-सत्य ('पोस्ट-टुथ') का दौर चल रहा है उसमें भाषाई बाजीगरी (सिमेटिक जग्लरी) में एक अजब दुविधापूर्ण स्थिति उत्पन्न कर दी है। यह दो विरोधाभासी विशेषताओं से युक्त काल प्रतीत हो रहा है, जिसमें एक ओर, मानव विश्व एकीकृत लगता है किन्तु दूसरी तरफ एक निश्चित ही भीषण अराजकता का काल है।" "...एक ओर वह तकनीकी परिवर्तनों की स्वीकृति सेजूझता है और दूसरी तरफ तकनीकी एकता से संगठितहोने का लाभार्थी भी है। वैसे तो विश्व संक्रमणशीलहोने के नाते सदैव ही अनिर्णायक एवं अराजक-साप्रतीत होता है... पहली बार इस अराजकता को'तकनीकी उत्प्रेरक' ने उसे एक निश्चित ही अलग दशाऔर दिशा प्रदान की है। इसी अराजकता के कारण हम 'टुथ' या ऐतिहासिक तथ्यों की खोज में 'पोस्ट टुथ' तक पहुंच गए हैं।"

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"अराजक का अव्यवस्थित असंख्य तथ्यों के मध्य एक क्रम स्थापित करके मानव के विकास-क्रम को अनुरेखित करना ही इतिहास का विवरण प्रस्तुत करना होता है। वैसे इस अर्थ को दोनों रूपों में देखा-समझा जा सकता है-प्रथम तो संरचना के स्तर पर और दूसरे, उसके लेखन अथवा चित्रण के उद्देश्य के माध्यम से!""

"द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् शीत-युद्ध से लेकर भू- मंडलीकरण एवं उदारवाद से होते हुए सोवियत संघ के विघटन और 'वैश्विक ग्राम' की परिकल्पना के बाद के क्रम में जिस प्रकार, उत्तर-संरचनावाद, उत्तर- धुनिकतावाद, उपाक्रमी इतिहास लेखन से लेकर उत्तर-सत्य ('पोस्ट-टुथ') का दौर चल रहा है उसमें भाषाई बाजीगरी (सिमेटिक जग्लरी) में एक अजब दुविधापूर्ण स्थिति उत्पन्न कर दी है। यह दो विरोधाभासी विशेषताओं से युक्त काल प्रतीत हो रहा है, जिसमें एक ओर, मानव विश्व एकीकृत लगता है किन्तु दूसरी तरफ एक निश्चित ही भीषण अराजकता का काल है।"
"...एक ओर वह तकनीकी परिवर्तनों की स्वीकृति सेजूझता है और दूसरी तरफ तकनीकी एकता से संगठितहोने का लाभार्थी भी है। वैसे तो विश्व संक्रमणशीलहोने के नाते सदैव ही अनिर्णायक एवं अराजक-साप्रतीत होता है... पहली बार इस अराजकता को'तकनीकी उत्प्रेरक' ने उसे एक निश्चित ही अलग दशाऔर दिशा प्रदान की है। इसी अराजकता के कारण हम 'टुथ' या ऐतिहासिक तथ्यों की खोज में 'पोस्ट टुथ' तक पहुंच गए हैं।"

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2023
Weight
185 grams
ISBN-13
9788119133642
Pages
176
Reading time
~6 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

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