Pashchatya Itihas Darshan Evam Itihas Lekhan
Author:
Heramb ChaturvediPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 480
₹
600
Available
"अराजक का अव्यवस्थित असंख्य तथ्यों के मध्य एक क्रम स्थापित करके मानव के विकास-क्रम को अनुरेखित करना ही इतिहास का विवरण प्रस्तुत करना होता है। वैसे इस अर्थ को दोनों रूपों में देखा-समझा जा सकता है-प्रथम तो संरचना के स्तर पर और दूसरे, उसके लेखन अथवा चित्रण के उद्देश्य के माध्यम से!""</p>
<p>"द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् शीत-युद्ध से लेकर भू- मंडलीकरण एवं उदारवाद से होते हुए सोवियत संघ के विघटन और 'वैश्विक ग्राम' की परिकल्पना के बाद के क्रम में जिस प्रकार, उत्तर-संरचनावाद, उत्तर- धुनिकतावाद, उपाक्रमी इतिहास लेखन से लेकर उत्तर-सत्य ('पोस्ट-टुथ') का दौर चल रहा है उसमें भाषाई बाजीगरी (सिमेटिक जग्लरी) में एक अजब दुविधापूर्ण स्थिति उत्पन्न कर दी है। यह दो विरोधाभासी विशेषताओं से युक्त काल प्रतीत हो रहा है, जिसमें एक ओर, मानव विश्व एकीकृत लगता है किन्तु दूसरी तरफ एक निश्चित ही भीषण अराजकता का काल है।"<br>"...एक ओर वह तकनीकी परिवर्तनों की स्वीकृति सेजूझता है और दूसरी तरफ तकनीकी एकता से संगठितहोने का लाभार्थी भी है। वैसे तो विश्व संक्रमणशीलहोने के नाते सदैव ही अनिर्णायक एवं अराजक-साप्रतीत होता है... पहली बार इस अराजकता को'तकनीकी उत्प्रेरक' ने उसे एक निश्चित ही अलग दशाऔर दिशा प्रदान की है। इसी अराजकता के कारण हम 'टुथ' या ऐतिहासिक तथ्यों की खोज में 'पोस्ट टुथ' तक पहुंच गए हैं।"
ISBN: 9788119133598
Pages: 176
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Kaggattala Kala
- Author Name:
Shashi Tharoor
- Rating:
- Book Type:

- Description: Bharatadalli British Samrajya:Kannada translation by S.B. Ranganath of Shashi Tharoor,s award winning English prose,An Era of Darkness-The British Empire in India
Appa Deepo Bhava
- Author Name:
Kalraj Mishra
- Book Type:

- Description: अप्पो दीपो भव' पुस्तक शिक्षा की भारतीय संस्कृति के केंद्र में समसामयिक संदर्भो से जुड़ी महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। इसमें राजस्थान के राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, संविधान और संस्कृति-मर्मज्ञ श्री कलराज मिश्र के समय- समय पर दिए गए चिंतनपरक भाषण संकलित हैं। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति से जुड़ी हमारी संस्कृति के आलोक में यह पुस्तक शिक्षा में सीखे गए और शिक्षण संस्थाओं में प्राप्त किए गए ज्ञान से समाज को आलोकित करने की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण विचार-सामग्री लिये हुए है। पुस्तक की बड़ी विशेषता यह भी है कि इसमें प्रवाहपूर्ण भाषा में भारतीय संस्कृति और सभ्यता के साथ शिक्षा से जुड़े हमारे प्राचीन चिंतन और शोध की संस्कृति पर महत्त्वपूर्ण विचार हैं। नई शिक्षा नीति और उससे जुड़े विभिन्न सरोकारों के साथ ही इसमें आत्मनिर्भर भारत की सोच के अंतर्गत विश्वविद्यालयों में रोजगारोन्मुखी शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जुड़े अध्ययन-अध्यापन के भी बहुत से आयामों, सुझावों के साथ मौलिक स्थापनाएँ हैं । पुस्तक में शिक्षा को ज्ञान-हस्तांतरण की सर्वोत्कृष्ट प्रक्रिया बताते हुए लेखक ने भारतीय संविधान में समाहित उदात्त भारतीय जीवन-मूल्यों, वैश्वीकरण में स्थानीय विकास की चुनौतियों और प्रजातंत्र में मतदान के जरिए व्यवहार में जनभागीदारी, सर्वश्रेष्ठ के लिए संकल्पबद्ध होकर युवाओं को कार्य करने, युवाओं में उद्यमिता विकास आदि विषयों पर मौलिक चिंतन है।
Gandhi : Rise of a Mahatma and Diaspora
- Author Name:
Dr. Ruchi Verma +2
- Book Type:

- Description: The year 2019-2020 marked the 150 birth anniversary of Mahatma Gandhi that was widely commemorated in India and in many parts of the world remembering Gandhiji’s philosophy and teachings. During his education of law in the UK, Gandhiji developed firm faith in the principles and merits of the rule of law. Ironically, this faith was severely challenged when he moved as a lawyer to assist some Indian origin businessmen in South Africa. There, Gandhiji came face to face not only with violations of the sacrosanct principles of the rule of law but also the discrimination built in the laws themselves. This shock laid the foundation of barrister Gandhi’s journey in the process of making of a mahatma. Though Gandhiji’s commitment to Swaraj through Satyagraha has a much wider global appeal, his path to sainthood was inseparably intertwined with his experiences with the Indian diaspora. In keeping with Antar Rashtriya Sahayog Parishad (ARSP’s) pioneering work with Indian diaspora, Diaspora Research and Resource Centre of ARSP, in collaboration with Gandhi Smriti and Darshan Samiti, New Delhi organised a series of conferences on the theme ‘Gandhi and diaspora’, which were attended by over 100 experts from India and abroad. This book is a compilation of the proceedings, presentations and the outcomes of these important events. We hope, this publication would be useful to academics and scholars dealing with Gandhian teachings, ideology and diaspora studies.
Maharaja Chhatrasal
- Author Name:
Vidya Chouhan
- Book Type:

- Description: शौर्य, पुरुषार्थ और मानवीय मूल्यों के किस्सों से बुना ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित उपन्यास है, 'महाराजा छत्रसाल'! यह कहानी इतिहास के उस कालखंड की है, जब भारतवर्ष पर विदेशी आक्रांताओं की कुत्सित दृष्टि पड़ी और उन्होंने आक्रमण कर इस समर्थ राष्ट्र को खूब लूटा। मुगल भारत आए और यहाँ की एकता-अखंडता की जड़ों को खोखला करने लगे। इनके शासनकाल में आमजन समुदाय पर अत्याचार बढ़ने लगे और लोगों के बीच भय, अनिश्चितता और निराशा पनपने लगी। समृद्ध भारत को दासता की बेड़ियों में जकड़ने का प्रयास जारी था। इन्हीं परिस्थितियों में बुंदेलखंड की धरती से विलक्षण प्रतिभा संपन्न अप्रतिम योद्धा 'छत्रसाल' अपने बाहुबल से परिवर्तन की गाथा लिख रहे थे। उन्हें अपने माता-पिता से देशभक्ति और वीरता, विरासत में मिली थी। कलम और तलवार, दोनों की साधना करते हुए इस विरले राष्ट्रभक्त ने मातृभूमि की संस्कृति और स्वाभिमान को बचाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। 82 वर्ष की आयु में उस रणबाँकुरे ने 62 वर्ष रणभूमि में बिताए। अपने आत्मबल से उन्होंने मुगलों के सबसे क्रूर और शक्तिशाली शासक औरंगजेब का बुंदेलखंड जीतने का स्वप्न कभी पूरा नहीं होने दिया। संकट में धैर्य को परखने का नाम है, 'छत्रसाल'। अपूर्व शौर्य और पराक्रम का पर्याय है, 'छत्रसाल' और अपनी अस्मिता के रक्षार्थ शत्रुओं को धूल में मिलाने का सामर्थ्य है 'छत्रसाल'। राष्ट्रभक्ति, पराक्रम, शूरवीरता और समर्पण के प्रतीक 'महाराजा छत्रसाल' की प्रेरक यशोगाथा ।
Bihar Ke Gandhi Nitish Kumar
- Author Name:
Shambhavi Choudhary +1
- Book Type:

- Description: "जो लोग बिहार से सारी उम्मीदें छोड़ चुके थे, उनकी नजर में नीतीश कुमार ने एक चमत्कारी पुरुष का दर्जा हासिल कर लिया है। आखिर उन्होंने राज्य के पुनरुत्थान का काम कैसे किया ? नीतीश कुमार कोई पेशेवर प्रबंधक नहीं, एक राजनीतिज्ञ हैं। नवंबर 2005 में जब उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री का पद ग्रहण किया, वे अधिकारियों को अकसर याद दिलाते थे कि सरकार के प्रदर्शन में उनके मंत्रालय का सबकुछ दाँव पर लगा है, न कि नौकरशाही का। अगर सरकार को कामयाबी मिलती है तो उसका सारा श्रेय उनके मंत्रालय को मिलेगा; अगर वह असफल रही तो उनके मंत्रालय को सारा दोष अपने सिर लेना होगा। नौकरशाहों की नौकरियाँ नहीं जाएँगी, उन्हें (मुख्यमंत्री को) जाना होगा। इस प्रकार नीतीश कुमार ने जनता की मूल जरूरतों से जुड़े मुद्दों को हल करने की दिशा में काम करके लोगों के दिलों में स्थायी जगह बना ली और सामाजिक क्रांति के पुरोधा के रूप में उभरे। सुधार की यह प्रक्रिया अनवरत जारी है। नीतीश कुमार की सामाजिक क्रांति की अनकही, प्रेरक, रोचक और साहसिक अभियानों से रू-ब-रू कराती एक पठनीय एवं संग्रहणीय औपन्यासिक गाथा।"
Meri Jhansi : Ak Parichayatmak Vritt
- Author Name:
Surendra Dubey
- Book Type:

- Description: कोई इतिहास ग्रन्थ नहीं है, किन्तु इसे पढ़कर बुन्देलखण्ड, विशेषकर झाँसी को जाना जा सकता है। झाँसी के इतिहास, साहित्य, संस्कृति, कला, उद्योग-धंधे, समाज, अर्थव्यवस्था आदि के अनेक पहलू ऐसे हैं, जो किसी लिखित दस्तावेज़ में उपलब्ध नहीं हैं, लोकमन में हैं। उन्हें समेटकर संकलित करना ही हमारा लक्ष्य रहा है जिसकी कोशिश हमने की है। लोकमन ने इतिहास से इतर अपने लिए प्रेरक सांस्कृतिक तत्त्वों—साहित्य, संगीत, कला आदि को अपनी स्मृति का हिस्सा बनाया। राजा लड़ते रहे, साम्राज्य बढ़ते-सिकुड़ते और बदलते रहे, किन्तु हमारी संस्कृति ज्यों की त्यों अक्षुण्ण रही और इसीलिए वह लोक-स्मृतियों में जीवित भी रही। इस पुस्तक के लेखकों ने झाँसी से जुड़ा जो भी वृत्त-पुरावृत्त प्रस्तुत किया है, उसे कतिपय काट-छाँट के बाद जस का तस प्रस्तुत किया गया है। लेखकों द्वारा उपलब्ध प्रामाणिकता के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। लेखकों ने अपनी सोच और दृष्टि से सँवारकर जो भी तथ्य उपलब्ध कराए हैं, वे इस संग्रह में मूल रूप में प्रकाशित हैं। पश्चिमी सोच से निर्मित मन के लिए ‘मेरी झाँसी’ उपयोगी हो न हो, भारतीय सोच से निर्मित मन के लिए अवश्य उपयोगी होगी। बुन्देलखण्ड, विशेषकर झाँसी का अतीत और वर्तमान निश्चित ही पाठकों को ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक आदि दृष्टि से उर्वर धरती के विभिन्न पहलुओं से अवगत तो कराएगा ही, रचनात्मक भी बनाने में अपनी भूमिका निभाएगा, ऐसा हमारा विश्वास ह
Arya Evam Hadappa Sanskritiyon Ki Bhinnata
- Author Name:
Ramsharan Sharma
- Book Type:

-
Description:
यह पुस्तक आर्य एवं हड़प्पा सभ्यता का एक गहन अध्ययन है। इसमें प्रो. शर्मा ने आर्यों के मूल स्थान की खोज की कोशिश के साथ-साथ ज़्यादा ज़ोर इन सभ्यताओं के सांस्कृतिक पहलू पर दिया है।
लेखक ने अपने अध्ययन के दौरान इस पुस्तक में आर्य एवं हड़प्पा संस्कृतियों की भिन्नता को दर्शाया है। लेखक का मानना है कि हड़प्पा सभ्यता नगरी है लेकिन वैदिक सभ्यता में नगर का कोई चिह्न नहीं है। कांस्य युग का हड़प्पा सभ्यता में प्रमाण मिलता है। हड़प्पा में लेखन-कला प्रचलित थी लेकिन वैदिक युग में लेखन-कला का कोई प्रमाण नहीं है।
अपनी सूक्ष्म विश्लेषण-दृष्टि और अकाट्य तर्कशक्ति के कारण यह कृति भी लेखक की पूर्व-प्रकाशित अन्य कृतियों की तरह पठनीय और संग्रहणीय होगी, ऐसा हमारा विश्वास है।
Loktantra Ki Chaukidari
- Author Name:
Steven Levitsky and Daniel Ziblatt
- Rating:
- Book Type:

- Description: लोकतंत्र कैसे ख़त्म होता है? अपने लोकतंत्र को बचाने के लिए हम क्या कर सकते हैं? इतिहास हमें क्या सिखाता है? इक्कीसवीं सदी में लोकतंत्र जितना ख़तरे में है, पहले कभी नहीं रहा। समूचे इतिहास से सबक लेते हुए—चिली में पिनोशे की ख़ूनी सत्ता से लेकर चुपचाप ढहते तुर्की में एर्दुआं की सरकार तक—हार्वर्ड के प्रोफ़ेसर स्टीवेन लेवित्सकी और डेनियल ज़िब्लाट यह समझाते हैं कि लोकतंत्र क्यों नाकाम हो जाते हैं, ट्रम्प जैसे नेता कैसे उसे नष्ट करते हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए हम में से हर एक व्यक्ति क्या कर सकता है। विशेषज्ञों की राय जो भी लोकतंत्र के भविष्य को लेकर चिन्तित है उसे यह सहज, सरल किताब पढ़नी चाहिए। जो चिन्तित नहीं हैं, उन्हें तो ज़रूर पढ़नी चाहिए। दारोन एसेमोगलू ‘व्हाई नेशंस फ़ेल’ के लेखक और 2024 के नोबेल पुरस्कार विजेता लेवित्सकी और ज़िब्लाट ने कितनी कुशलता से यह दलील रखी है कि हम सबको इस देश के रुझानों पर चिन्तित होना चाहिए, अमेरिकी संविधान का ज़बर्दस्त प्रशंसक होने के नाते मेरे लिए यह पढ़ना हताशाजनक था। ‘यह यहाँ नहीं हो सकता’ वाली धारणा लेवित्सकी और ज़िब्लाट के विश्लेषण में नहीं टिकती...क्या शानदार लिखा है। डेनियल डब्ल्यू. ड्रेज़नर ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ उत्कृष्ट, विद्वत्तापूर्ण, पठनीय, चिन्ताजनक और सन्तुलित निक कोहेन ‘ऑब्ज़र्वर’
Aupniveshik Shasan : Unneesveen Shatabdi Aur Stree Prashn
- Author Name:
Rupa Gupta
- Book Type:

-
Description:
पिछली और वर्तमान सदी की आधुनिक स्त्री की समस्याएँ जब बार-बार परम्परा और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में ही समाधान खोजती हैं तो सुदूर मानव इतिहास में न सही निकट के इतिहास में जाकर खोजबीन आवश्यक हो जाती है। उन्नीसवीं सदी नवजागरण की सदी है और आधुनिकता इसी नवजागरण का प्रतिफलन है। चूँकि ’आधुनिक स्त्री’ के जन्म का श्रेय भी इसी शती को दिया जाता है तो इक्सीसवीं सदी में आधुनिक स्त्री की समस्या का समाधान खोजने इसी शताब्दी के पास जाना होगा। यह पुस्तक इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में भी आधुनिक स्त्रियों के सामने मुँह बाए खड़े प्रश्नों की जड़ तक पहुँचने की वह दृष्टि है जिसे विभिन्न घटकों से गुज़रते हुए व्याख्यायित करने की कोशिश की गई है।
पहले अध्याय में जहाँ 'भारतेन्दु युग : उन्नीसवीं शताब्दी और औपनिवेशिक परिस्थितियाँ’ में उन्नीसवीं सदी की औपनिवेशिक परिस्थितियों और हिन्दी नवजागरण के अन्तर्सम्बन्धों का विश्लेषण किया गया है, वहीं द्वितीय अध्याय ‘औपनिवेशिक आर्थिक शोषण, हिन्दी नवजागरण और भारतेन्दु हरिश्चन्द्र' में औपनिवेशिक शासन-काल में हिन्दी नवजागरण के बीज और उसके पल्लवन के परिवेश की प्रस्तुति का प्रयास है। तृतीय अध्याय में ‘धर्म, खंडित आधुनिकता एवं स्त्री' में केवल हिन्दी या भारतीय नहीं बल्कि पूरे विश्व की स्त्रियों के प्रति धर्म की विद्वेषपूर्ण भावना का एक विहंगम अवलोकन है। चतुर्थ अध्याय 'स्त्री और उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध का हिन्दी साहित्य’ में पैंतीस वर्षों के सामाजिक प्रश्नों में समाविष्ट स्त्री-प्रश्नों को सम्बोधित करने की जुगत है। ये पैंतीस वर्ष वस्तुत: भारतेन्दु के जीवन-वर्ष हैं। वहीं पंचम अध्याय ‘उन्नीसवीं सदी के अन्तिम डेढ़ दशक और स्त्री-प्रश्न' में उन्नीसवीं सदी के अन्तिम डेढ़ दशकों में सम्बोधित स्त्री-प्रश्नों को ‘मूल’ के साथ चिन्हित किया गया है।
कह सकते हैं कि पुस्तक में उन्नीसवीं शताब्दी के औपनिवेशिक शासन-काल में स्त्री-परिप्रेक्ष्य में धारणाओं-रूढ़ियों, भावनाओँ-पूर्वग्रहों, आग्रहों-दुराग्रहों, अनमेल विवाह, वर-कन्या विक्रय, स्त्री-दासता, स्त्री-अशिक्षा, स्त्री-परित्याग, छुआछूत आदि से टकराते तर्क और विश्लेषण की जो ज़मीन तैयार की गई है, वह अपने चिन्तन मेँ महत्त्वपूर्ण तो है ही, विरल भी है।
Aadhunik Kala Aandolan : Vishva Kala Ki Aadhunik Yatra : 1400-1965
- Author Name:
Jyotish Joshi
- Book Type:

-
Description:
आधुनिक कला आन्दोलन विश्व कला को आधुनिक बनाने के क्रम में हुए पश्चिमी कला आन्दोलनों पर आधारित पुस्तक है जिसमें सन् 1400 से 1965 तक, लगभग छह सौ वर्षों का कला-इतिहास है। दो खंडों में विन्यस्त इस पुस्तक का पहला खंड है—पश्चिमी कला आन्दोलन’ जिसमें पुनर्जागरणकालीन कला से लेकर अतियथार्थवादी कला आन्दोलन तक—सभी कला आन्दोलनों के जन्म की पृष्ठभूमि, प्रवृत्तिगत और शैलीगत वैशिष्ट्य की विवेचना है, साथ ही, लियोनार्दो दा विंची और माइकेल एंजेलो से वान गॉग, फ्रिदा काहलो, पिकासो और डाली तक, उन सभी प्रतिनिधि कलाकारों के अवदान का मूल्यांकन है जो उन आन्दोलनों में शामिल थे और जिनके प्रयत्नों से कला ने वैश्विकता पाई और आधुनिक दृष्टियों से उसका नवाचार हुआ।
पुस्तक के दूसरे खंड—आधुनिक भारतीय कला में बंगाल कला आन्दोलन जैसे पहले और एकमात्र भारतीय कला आन्दोलन सहित बाद में बने प्रभावी कला-समूहों का परिचयात्मक इतिवृत्त है। इसके साथ रवि वर्मा, अवनीन्द्रनाथ ठाकुर, नन्दलाल बोस और अमृता शेरगिल से हुसेन, रज़ा, सूज़ा और जगदीश स्वामीनाथन तक। उन सभी महत्त्वपूर्ण कलाकारों के वैशिष्ट्य का परिचय भी है जिन्होंने भारतीय कला को आधुनिक रूप दिया है। इस खंड में कला अकादमियों के गठन और प्रभाव का आकलन करने के साथ-साथ पुस्तक के उपसंहार में आधुनिक भारतीय कला में उपलब्धि के मानक बने उन कलाकारों की भी चर्चा है जो किसी समूह का हिस्सा नहीं रहे।
वस्तुत: यह पुस्तक हिन्दी में लिखित कला-इतिहास और आलोचना का वह जरूरी काम है जिसका लम्बे समय से अभाव था। निश्चय ही यह पुस्तक कला के साथ-साथ उन सभी अनुशासनों में रुचि रखनेवालों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी जो उन्हें उनके वैश्विक परिदृश्य के साथ समझना चाहते हैं।
Wo Satrah Din
- Author Name:
Brajesh Rajput
- Book Type:

- Description: राजनीति में जो होता है वो दिखता नहीं और जो दिखता है वो होता नहीं इसलिये पर्दे के पीछे की कहानी बताना एक पत्रकार के लिये बहुत चुनौती भरा काम होता है। इस किताब के जरिये आप ये समझ पायेंगे कि कांग्रेस और बीजेपी की राजनीति में ऐसा क्या हुआ कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पिता की विरासत वाली पार्टी छोड़कर बीजेपी में चले गये और कमलनाथ की सरकार भरभराकर गिर गयी। अभिज्ञान प्रकाश, जाने माने टीवी पत्रकार तेज़ी से घटने वाली राजनीतिक घटनाओं पर नज़र रखना और उनका विश्लेषण दर्शकों तक पहुँचाना हम टीवी पत्रकारों के लिए बेहद चुनौती का काम होता है मगर उन घटनाओं को क़लमबद्ध कर उसे किताब की शक्ल देना उससे भी मुश्किल काम होता है जो ब्रजेश राजपूत ने किया है। रोचक अंदाज़ में लिखी इस किताब को पढ़कर आप कुछ जगहों पर चौंक जाएँगे और कहेंगे ये तो हमें मालूम ही नहीं था। मध्यप्रदेश की पल-पल बदलती राजनीति और रंग बदलते नेताओं पर लिखी गयी एक बेहतर किताब है "वो सत्रह दिन"। -सुमित अवस्थी, एबीपी न्यूज़ "कहते हैं कि ब्रजेश राजपूत का है अंदाज़-ए-बयाँ और..." जी हाँ, राजनीतिक रिपोर्टिंग की आँखों देखी, कानों सुनी, दिलचस्प दास्ताँ ब्रजेश के कलम से कुछ अलग ही रंग रूप रखती है। "वह सत्रह दिन" उसका एक बेहतरीन नमूना है । सत्ता के उतार चढ़ाव में लालसा, प्रतिस्पर्धा, तिरस्कार का भाव, रणनीति, साधन व कुटिलता.... कुछ भी ब्रजेश की नजर व कलम से बच नहीं सकता -रशीद किदवई, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक
Keral Ke Hindi Sahitya Ka Itihas
- Author Name:
P. Lata
- Book Type:

-
Description:
केरल का प्रथम हिन्दी रचनाकार महाराजा स्वाति तिरुनाल राम वर्मा को माना जाता है जिनका जन्म तिरुवितांकूर के राजा मार्तंड वर्मा के राजवंश में सन् 1813 में हुआ था। उनकी रचनाएँ मध्यकालीन हिन्दी कवियों की तरह भक्ति-प्रधान गीत थे जिनका संकलन बाद में आकर किया गया। इसके बाद लगातार इस अहिन्दीभाषी राज्य में हिन्दी में मौलिक लेखन करनेवाले रचनाकार सक्रिय रहे हैं, न सिर्फ़ कविता में बल्कि कहानी, उपन्यास, निबन्ध व अन्यान्य विधाओं में भी।
केरल की रचनाकार और विद्वान पी. लता ने अपनी इस पुस्तक में केरल की समूची हिन्दी रचनात्मकता का सर्वांगीण इतिहास प्रस्तुत किया है। साथ ही वे उस विचार-यात्रा को भी रेखांकित करती चली हैं जो केरलीय हिन्दी लेखकों, कवियों की रचनाओं के सरोकारों की प्रेरणा-शक्ति और पृष्ठभूमि रही।
मौलिक साहित्य के साथ लेखक ने इसमें अनूदित साहित्य का भी क्रमबद्ध विवरण दिया है और साथ ही व्याकरण तथा कोश आदि विषयों पर हुए लेखन को भी समाहित किया है। प्रकाशित पुस्तकों के अलावा उन्होंने पत्र-पत्रिकाओं में छपी रचनाओं और साहित्य की भूमिका लेखन तथा सम्पादकीय लेखन जैसी शाखाओं को भी अपने विश्लेषण का आधार बनाया है और केरलीय हिन्दी साहित्य के इतिहास में उनकी अवस्थिति को दर्ज किया है।
डॉ. पी. लता के प्रशंसनीय उद्यम से सम्भव हुई यह पुस्तक न सिर्फ़ छात्रों के लिए बल्कि उन हिन्दी प्रेमियों के लिए भी अनिवार्यतः पठनीय है जो हिन्दी चेतना के अखिल भारतीय विस्तार की संरचना तथा व्याप्ति को जानना चाहते हैं।
Madhyakalin Bharat Me Rajniti
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक को लिखने की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई क्योंकि इतिहास और राजनीति शास्त्र के विद्यार्थी मात्र इतिहासक्रम के अध्ययन से ही संतुष्ट नहीं होते अपितु वे ऐतिहासिक प्रक्रिया के विश्लेषण को भी महत्व प्रदान करते हैं और यही विषय को समझने की उनकी दृष्टि को भी विकसित करती है। इसी प्रकार के अध्ययन से समाज की शक्तियों और राज्य की शक्तियों की परस्परता और अंतरक्रियाएं समझ आती हैं।
इस कृति में इस्लाम के अंतर्गत राज्य की अवधारणा की पृष्ठभूमि में मध्यकालीन भारत में राज्य की प्रकृति का विश्लेषण; दोनों विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों, यथा उलेमा (धर्माधिकारियों) तथा उमरा (अमीरों) की संरचना, विशेषताओं और समकालीन राज्य में उनकी भूमिका की व्याख्या की गई है अर्थात ऐतिहासिक घटनाक्रम के कारणों की पड़ताल पर विशेष जोर दिया गया है।
Rebels Against the Raj
- Author Name:
Ramchandra Guha +1
- Book Type:

- Description: भारतीय स्वातंत्र्यासाठी झालेला संघर्ष आणि लढा यांचा असाधारण इतिहास म्हणजे ‘रिबेल्स अगेन्स्ट द राज' हे पुस्तक होय. जो देश स्वत:चा नाही, त्याच्यासाठी लढणाऱ्या सात वीरांची ही बव्हंशी अपरिचित अशी कहाणी आहे. भारताच्या स्वातंत्र्यलढ्याला हातभार लावण्यासाठी एकोणिसाव्या शतकाच्या अखेरीपासून हे विदेशी वीर देशात दाखल होऊ लागले होते. या सातांपैकी चार ब्रिटिश होते, दोन अमेरिकी होते, तर एक आयरिश होती. त्यांत चार पुरुष आणि तीन स्त्रिया होत्या. कारावास भोगण्याआधी वा हद्दपार केले जाण्याआधी त्यांनी अनेक क्षेत्रांत पायाभूत कार्य केले होते. त्यांत पत्रकारिता, सामाजिक सुधारणा, शिक्षण, सेंद्रीय शेती आणि पर्यावरण यांचा अंतर्भाव होता. हे पुस्तक त्यांच्या कहाण्या सांगते. प्रत्येक बंडखोर आदर्शवाद आणि सच्च्या समर्पणवृत्तीने भारावलेला होता. प्रत्येक या ना त्या प्रकारे गांधींशी जोडला गेलेला होता. त्यांतील काही अनुयायी म्हणून तर काही त्यांच्या दृष्टिकोनाचे संतप्त विरोधक म्हणून. संघर्षाची परिणती तुरुंगवासात होऊ शकते, आणि त्यांचे उर्वरित आयुष्य भारतातच जाऊ शकते वा येथेच त्यांचा मृत्यूही होऊ शकतो, याची खूणगाठही प्रत्येकाने मनाशी बांधलेली होती. आपापल्या कार्यक्षेत्रात प्रत्येकाने आपला अमीट ठसा उमटवला होता आणि त्यांनी उभ्या केलेल्या संस्था तसेच त्यांनी घडविलेल्या पिढ्या व व्यक्ती यांच्या रूपाने त्यांचा वारसा आजही जिवंत आहे. आपसात गुंतलेल्या त्यांच्या जीवन प्रवासाच्या या गोष्टी, जगातील सर्वोत्तम इतिहासकारांमध्ये गणल्या जाणाऱ्या लेखकाने लक्षवेधकपणे मांडल्या आहेत. अर्थात या केवळ गोष्टी नाहीत, तर भारत आणि पाश्चात्त्य जग यांचे संबंध, ब्रिटिश वसाहतवादी सत्तेपलीकडील आपली ओळख तसेच नागरी स्वातंत्र्ये यांचा शोध घेणारे राष्ट्र म्हणून भारताची धडपड, यांविषयीची सखोल अंतर्दृष्टी देणाऱ्या अनोख्या कहाण्या आहेत. Rebels Against The Raj | Ramachandra Guha Translated By : Satish Kamat रिबेल्स अगेन्स्ट द राज | रामचंद्र गुहा अनुवाद : सतीश कामत
Vikas Ki Rajneeti
- Author Name:
Vinay Sahasrabuddhe
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mughal Kaleen Bharat : Humayun Vol. 1
- Author Name:
Saiyad Athar Abbas Rizvi
- Book Type:

-
Description:
हुमायूँ से सम्बन्धित फ़ारसी स्रोतों का अनुवाद ‘मुग़लकालीन भारत’ भाग-1 और भाग-2 में प्रकाशित किया गया है। इन दोनों भागों में भी पूर्व ग्रन्थों की भाँति हुमायूँ के समकालीन फ़ारसी स्रोतों का हिन्दी भाषान्तर प्रस्तुत किया गया है। प्रथम भाग में जिन इतिहासकारों के ग्रन्थों के हिन्दी अनुवाद सम्मिलित किए गए हैं, उनमें मुख्य हैं : ख़्वन्द मीर का ‘क़ानूने हुमायूँनी’, मिर्ज़ा हैदर का ‘तारीख़े रशीदी’, मीर अल्ला उद्दौला का ‘नफ़ायसुल मआसिर’, गुलबदन बेगम का ‘हुमायूँनामा’ एवं शेख अबुल फ़ज़ल का ‘अकबरनामा’ आदि। यही नहीं, डॉ. अतहर अब्बास रिज़वी ने हुमायूँ के इतिहास से सम्बन्धित अफ़ग़ान स्रोतों को भी इस भाग में सम्मिलित किया है। कुछ ग्रन्थों के अनुवाद मूल पाठ में न देकर पादटिप्पणियों में सम्मिलित कर लिए गए हैं। इन ग्रन्थों के अनुवादों के कारण ग्रन्थ की उपादेयता में वृद्धि हो गई है।
जिन ग्रन्थों के संक्षिप्त अनुवाद किए गए हैं, उनका अनुवाद करते समय इस बात का प्रयत्न किया गया है कि कोई भी महत्त्वपूर्ण घटना अथवा सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक महत्त्व की बात छूटने न पाए।
अन्य ग्रन्थों की तरह यह ग्रन्थ भी हुमायूँकालीन इतिहास के अध्ययन के लिए अत्यन्त उपयोगी है। विशेषत: उनके लिए, जो फ़ारसी से अनभिज्ञ हैं लेकिन इस काल पर शोध करना चाहते हैं, उनको एक ही स्थान पर सम्पूर्ण सामग्री उपलब्ध हो जाती है।
Bogi Number 2003
- Author Name:
Harish Naval
- Book Type:

- Description: "‘बोगी नंबर 2003’ इतिहास का वह हिस्सा है जहाँ संस्कृति, शिक्षा, जन सेवाएँ, राजनीति और समाज केविभिन्न वर्गों के कालापन से उपजी विसंगतियाँ, विडंबनाएँ और विद्रूपताएँ इस उपन्यास में रोचकतापूर्ण मनोरंजन सहित ढली हैं। इस व्यंग्य-उपन्यास में की पीढ़ी उस राजनीतिक काल की पीढ़ी है, जब देश के नियामक रक्षक से भक्षक बनने लगे थे। बहुत से राजनेता धन जमा करने की होड़ में जुटने लगे थे और भ्रष्टाचार जीवन का मूलमंत्र बनने लगा था। ‘काले धन की बैसाखी’ शासन-कर्ताओं को अनिवार्य लगने लगी थी। इन्हीं भ्रष्ट जन का अनुकरण जीवन का व्यवहार बनने लगा था, जिससे बेईमानी का कद बढ़ रहा था। इसके अतिरिक्त इस पीढ़ी पर फिल्मों का प्रभाव बेहद रहा। विवेकानंद, स्वामी दयानंद, सुभाष, भगतसिंह, चंद्रशेखर से कहीं अधिक यह पीढ़ी फिल्मी सितारों को चाहने लगी। महात्मा गांधी तो केवल दो अक्तूबर तक सीमित रह गए, गांधी के नाम पर लूट-खसोट करनेवालों को देख यह पीढ़ी उनकी तरह तुरंत अमीर होना और अय्याशी परस्ती पसंद करने लगी थी। प्रस्तुत कृति में इसका विशद चित्रण आप प्रत्यक्ष भी और परोक्ष भी पाएँगे। "
Himalaya Ka Itihas
- Author Name:
Madan Chandra Bhatt
- Book Type:

-
Description:
हिमालय का गहरा नाता भारत के इतिहास और संस्कृति से है। लेकिन अपनी विशिष्ट भौगोलिक अवस्थिति और अनूठी सांस्कृतिक महत्ता के कारण, यह जन-सामान्य के लिए इतिहास का विषय उतना नहीं रहा है जितना गौरव और श्रद्धा की वस्तु। वास्तव में एक मानवीय पर्यावास और सभ्यता के केन्द्र के रूप में हिमालय का इतिहास अब भी काफी कुछ अजाना है। इस सन्दर्भ में मदन चन्द्र भट्ट की यह पुस्तक एक महत्त्वपूर्ण पाठ है, जिसमें भारत के उत्तरी, दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र का सारगर्भित ऐतिहासिक आकलन प्रस्तुत किया गया है।
लेखक ने हिमालय क्षेत्र में मौजूद शैलचित्रों, अभिलेखों, स्थापत्य और शिल्प अवशेषों, ताम्रपत्रों, सिक्कों जैसे पुरातात्त्विक साक्ष्यों को ही नहीं, बल्कि प्राचीन ग्रन्थों, लोक अनुश्रुतियों और राजस्व विवरणों में उल्लिखित विवरणों को आधार बनाकर एक सिलसिलेवार चित्र उकेरा है। उसका जोर सम्पूर्ण और प्रामाणिक लेखा प्रस्तुत करने तथा सर्वमान्य निष्कर्षों को प्रमुखता देने पर रहा है। जो तथ्य-निष्कर्ष विवादित रहे हैं उनका भी यथास्थान उल्लेख किया गया है।
सुदूर अतीत में अन्य क्षेत्रों की तरह हिमालय क्षेत्र में भी छोटे राज्यों ने आंचलिक और जनपदीय संस्कृतियों का निर्माण किया था। स्वाभाविक ही उनमें स्थानीयता का दृष्टिकोण विकसित हुआ, जब-तब सामाजिक-सांस्कृतिक संकीर्णता के कतिपय तत्त्व भी पनपे। लेकिन अन्य राज्यों और संस्कृतियों से वे कटे नहीं रहे और भारतवर्ष की बुनियादी एकता को मजबूत बनाने में उनका भी योगदान रहा। इस तथ्य को सप्रमाण बतलाते हुए यह पुस्तक एक तरफ उपेक्षित,ओझल पक्षों को सामने लती है, तो दूसरी तरफ भारत के इतिहास में हिमालय क्षेत्र के इतिहास को यथोचित स्थान देने का प्रस्ताव करती है।
इतिहास के अध्येताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों से लेकर आम पाठक तक के लिए समान रूप से पठनीय और संग्रहणीय कृति!
Bharat Mein Digital Kranti
- Author Name:
Pradeep Thakur
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharatiya Sabhyata Ki Nirmiti
- Author Name:
Bhagwan Singh
- Book Type:

- Description: भारतीय सभ्यता की निर्मिति’ भारतीय सभ्यता के इतिहास की उस बड़ी कमी को दूर करने का सुचिन्तित प्रयास है, जो सभ्यता के निर्माताओं के बजाय भोक्ताओं को केन्द्र में रख कर लिखने से पैदा हुई है। वास्तव में भोक्ताओं को केन्द्र में रखकर लिखा गया इतिहास दमन के औजारों, हथियारों, संस्थाओं और वर्चस्व के रूपों का इतिहास होता है, जिसमें अर्थव्यवस्था और सामाजिक सम्बन्धों के बजाय अधिरचना को प्रमुखता दी जाती है। इससे इतिहास में समाज के वही तबके अनुल्लिखित रह जाते हैं जिनके बिना सभ्यता ही सम्भव नहीं हो पाती। यह समस्या केवल भारतीय सभ्यता के इतिहास की नहीं, बल्कि समूचे ‘सभ्य’ संसार की रही है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए यह पुस्तक इतिहास के उन अनदेखे-ओझल-पक्षों की सूक्ष्मता से और सप्रमाण विवेचना करती है, जिनके बिना भारतीय सभ्यता की महायात्रा से परिचित होना सम्भव नहीं है।
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...