Aadi Turk Kaleen Bharat (1206-1290)
Author:
Saiyad Athar Abbas RizviPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 560
₹
700
Available
आदि तुर्क वंश के इस इतिहास में 1206 ई. से 1290 ई. तक समस्त प्रमुख फ़ारसी तथा अरबी इतिहास ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद है। इसमें मिनहाज सिराज की ‘तबक़ाते नासिरी’ तथा ज़ियाउद्दीन बरनी की ‘तारीख़े फ़ीरोज़शाही’ को मुख्य आधार माना गया है।</p>
<p>दूसरे भाग में समकालीन इतिहासकारों की कृतियों का अनुवाद है। इनमें फ़ख़रे मुदब्बिर की ‘तारीख़े फ़ख़रुद्दीन मुबारकशाह’, ‘आदाबुल हर्ब वश्शुजाअत’, सद्रे निजशमी की ‘ताजशुल मआसिर’, अमीर ख़ुसरो के ‘दीवाने वस्तुल हयात’ एवं क़ेरानुस्सादैन के संक्षिप्त तथा परमावश्यक अंशों का अनुवाद भी सम्मिलित है। बाद के भी दो प्रमुख इतिहासकारों की रचनाओं के अनुवाद किए गए हैं—एसामी की ‘फ़ुतूहुस्सलातीन’ का और अरबी में लिखी हुई इब्ने बतूता की यात्रा के वर्णन का।</p>
<p>मध्यकालीन भारतीय इतिहास पर प्रामाणिक रोशनी डालनेवाले इन ग्रन्थों का अनुवाद कुछ विद्वानों ने अंग्रेज़ी में भी किया था, लेकिन उनमें पारिभाषिक शब्दों के अंग्रेज़ी अनुवादों में दोष रह गए हैं। इस कारण अनेक भ्रम-पूर्ण रूढ़ियों को आश्रय मिल गया है। इस प्रकार की त्रुटियों से बचने के उद्देश्य से प्रस्तुत ग्रन्थ में पारिभाषिक और मध्यकालीन वातावरण के परिचायक शब्दों को मूल रूप में ही ग्रहण किया गया है और उन शब्दों की व्याख्या पाद-टिप्पणियों में कर दी गई है।
ISBN: 9788126709748
Pages: 314
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: कौन थे जयपाल सिंह मुंडा? इनका भारतीय स्वतंत्रता और नए भारत के निर्माण में राजनीतिक-बौद्धिक योगदान क्या था? वे जिस आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उसकी आकांक्षाएँ क्या थीं? इस बारे में आजादी के सत्तर साल बाद भी इतिहास चुप है। एक तरफ गांधी-नेहरू, जिन्ना, अंबेडकर सहित अनेक राजनीतिज्ञों पर सैंकड़ों पुस्तकें हैं, पर जयपाल सिंह मुंडा पर एक भी नहीं है। यह कितनी हैरत की बात है कि झारखंड आंदोलन में कूदने से पहले और देश के संविधान निर्माण सभा में लाखों आदिवासियों के लिए निडरता से दहाड़नेवाले जिस आदिवासी ने देश के लिए आई.सी.एस. छोड़ी, जिसकी कप्तानी में भारत ने पहला हॉकी का ओलंपिक स्वर्ण जीता, जिसने अफ्रीका और भारत के कॉलेजों में अध्यापन के दौरान अपनी शिक्षकीय योग्यता से प्रभु वर्ग को प्रभावित किया, जो गुलाम भारत में किसी ब्रिटिश कंपनी में सर्वोच्च पद पर काम करनेवाला पहला भारतीय (वह भी आदिवासी) था, जिससे पढ़ने के लिए भारत के राजा-रजवाड़े लालायित रहते थे, जो ऑक्सफोर्ड से अर्थशास्त्र में गोल्डमेडलिस्ट था, हॉकी में एकमात्र भारतीय ‘ऑक्सफोर्ड ब्लू’ खिलाड़ी था और जो कॉलेज के दिनों में विभिन्न सभा-सोसायटियों का नेतृत्वकर्ता संयोजक-अध्यक्ष था, उसे इस लायक भी नहीं समझा गया कि उसकी चर्चा हो। —इसी पुस्तक से
Rajbhasha Hindi
- Author Name:
Dr. Bholanath Tiwari
- Book Type:

- Description: "भारतीय संविधान में ‘राजभाषा’ के रूप में हिंदी को स्वीकृति मिले काफी समय हो गया है; किंतु अभी तक इससे संबद्ध सारी बातें पुसतक रूप में नहीं आ सकी हैं। प्रसिद्ध भाषा-शास्त्री डॉ. भोलानाथ तिवारी ने इस पुस्तक में पहली बार राजभाषा के रूप में हिंदी के उद्भव, विकास, उसकी वर्तमान स्थिति तथा उसके मानकीकरण, आधुनिकीकरण एवं अन्य समस्याओं को विस्तार से लिया है; साथ ही उन समस्याओं के समाधान के लिए यथास्थान सुझाव भी दिए हैं। राजभाषा से राष्ट्रलिपि की समस्या भी जुड़ी है। अत: यहाँ नागरी लिपि के ऐसे रूप पर भी विस्तार से विचार किया गया है, जो सभी भारतीय भाषाओं के लेखन में प्रयुक्त हो सके। इसमें परिवर्द्धित देवनागरी के अनेक चार्ट दिए हैं, जिनसे भारत की सभी लिपियों के साथ इसका तुलनात्मक अध्ययन सुगम हो गया है। पुस्तक का यह दूसरा संस्करण है — पूरी तरह संशोधित और परिवर्द्धित। इसमें अनेक नई चीजें जुड़ने से पहले संस्करण की तुलना में इसकी उपयोगिता और भी बढ़ गई है। "
Rusi Sanskriti : Udbhav Aur Vinash
- Author Name:
Kamlesh
- Book Type:

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Description:
‘‘कवि कमलेश हमारे समय के सबसे पढ़े-लिखे व्यक्ति थे, हालाँकि उन्होंने कभी विद्वता का कोई दावा नहीं किया। उनकी रुचि साहित्य के अलावा संस्कृति और विचार के अनेक अनुशासनों जैसे—दर्शन, मनोविज्ञान, नृतत्त्व आदि में थी। महान् रूसी कवियों और उनके माध्यम से रूसी संस्कृति की उद्भव-गाथा और उसके विनाश की शोक-कथा प्रस्तुत करनेवाली यह अनूठी पुस्तक है। इसमें कवियों का सिर्फ़ वैचारिक विश्लेषण भर नहीं है—कविताओं का हिन्दी अनुवाद भी है। किसी विदेशी भाषा के इतने सारे महान् कवियों और उनके माध्यम से किसी देश की संस्कृति के अध्ययन का ऐसा कोई दूसरा उदाहरण हिन्दी में तो क्या शायद किसी अन्य भारतीय भाषा में भी न होगा। इस अद्वितीय पुस्तक को रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत हम सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।
—अशोक वाजपेयी
Jakheere Mein Shahadat
- Author Name:
Sudhir Vidyarthi
- Book Type:

- Description: भारतीय क्रान्तिकारी दल के मस्तिष्क, दिल्ली में वायसराय ट्रेन बम विस्फोट कांड के प्रमुख सूत्रधार, ‘नौजवान भारत सभा’ व ‘हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ’ के घोषणापत्रों के साथ ही गांधी के ‘कल्ट ऑफ द बम’ के सैद्धान्तिक व तर्कपूर्ण प्रत्युत्तर ‘बम का दर्शन’ के साक्षात् रूप क्रान्तिकारी भगवतीचरण वोहरा की 28 मई, 1930 को बम परीक्षण में रावी तट पर हुई शहादत हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन की अति विशिष्ट घटना है। भगवती भाई क्रान्तिकारी दल के सेनापति चन्द्रशेखर आजाद के दाहिने हाथ थे, तो वहीं भगतसिंह के अन्यतम सहयोगी भी थे। आजाद उनकी क्षमताओं से बखूबी परिचित थे। असेम्बली बम कांड में भगत सिंह की गिरफ्तारी और बाद में भगवती भाई की शहादत आजाद को बहुत अकेला कर गई। यदि आजाद, भगवती और भगत सिंह की क्रान्तिकारी त्रिमूर्ति अधिक समय तक क्रान्तिकारी आन्दोलन का नेतृत्व करने के लिए जिन्दा रहती तो देश के विप्लवी इतिहास को सर्वथा नया आयाम प्राप्त हुआ होता। भगवतीचरण की पत्नी दुर्गा भाभी ने भी अपने कृतित्व से भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन के इतिहास में स्त्री की भूमिका को कदम-ब-कदम अपनी तरह से दर्ज किया है। मुक्ति-संग्राम के इतिहास में भगवती भाई और दुर्गा भाभी के नाम के हरूफ नई पीढ़ी के हृदयों को सदा स्पन्दित और आलोकित करते रहेंगे। भारतीय क्रान्तिकारी संग्राम के सजग अध्येता व विश्लेषक सुधीर विद्यार्थी ने निरन्तर खोजबीन करके क्रान्तिकारी शहीद भगवतीचरण वोहरा के दुर्लभ जीवन-प्रसंगों और उनकी क्रान्तिकारी विचार-यात्रा के पड़ावों को उनके हमसफरों तथा कुछेक दस्तावेजों के जरिए पाठकों के सामने लाने की अनोखी कोशिश की है। इस पुस्तक में उन्होंने भगवतीचरण वोहरा के व्यक्तित्व के चारों ओर बनाए गए कुहासे को भी निष्पक्षता और प्रामाणिकता से छाँटने के जरूरी काम को अंजाम दिया है। पुस्तक में इस कथा की भीतरी परतों को साहसपूर्ण ढंग से अनावृत करने का जोखिम भी दिखाई पड़ता है।
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