Chunav 2019 : Kahani Modi 2.0 Ki
(0)
Author:
Aaku ShrivastavaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
300
₹ 240 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार की शुरुआत सब दलों ने विकास की बातों से की, लेकिन प्रचार जब चरम पर पहुँचा तो यह एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने पर केंद्रित हो गया। यहाँ तक कि नेताओं के बिगड़े बोलों से आजिज आकर सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग को निर्देश देने पड़े। दूसरी ओर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी खूब सवाल उठाए गए। ई.वी.एम. की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। चुनाव प्रचार निम्न स्तर पर पहुँच गया था। इस तरह से वर्ष 2019 का चुनाव पिछले सत्तर वर्षों में एक अलग ही तरह का चुनाव देखा गया। इस चुनाव में प्रचार के पारंपरिक तरीके तो गायब हुए ही, जनता के सरोकार भी बहुत पीछे छूट गए। इसके अलावा इस लोकसभा चुनाव में कई ऐसे सवाल खड़े किए, जो 2014 में उठाए गए थे। कुछ के जवाब मिले, कुछ ने और सवालों को जन्म दिया; कुछ भुला दिए गए तो कुछ बहस का मुद्दा बन गए। क्या भविष्य होगा, इन सवालों का और उनके जवाबों का—इसी पर एक गहन चर्चा इस पुस्तक में की गई है।.
Read moreAbout the Book
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार की शुरुआत सब दलों ने विकास की बातों से की, लेकिन प्रचार जब चरम पर पहुँचा तो यह एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने पर केंद्रित हो गया। यहाँ तक कि नेताओं के बिगड़े बोलों से आजिज आकर सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग को निर्देश देने पड़े। दूसरी ओर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी खूब सवाल उठाए गए। ई.वी.एम. की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। चुनाव प्रचार निम्न स्तर पर पहुँच गया था। इस तरह से वर्ष 2019 का चुनाव पिछले सत्तर वर्षों में एक अलग ही तरह का चुनाव देखा गया। इस चुनाव में प्रचार के पारंपरिक तरीके तो गायब हुए ही, जनता के सरोकार भी बहुत पीछे छूट गए। इसके अलावा इस लोकसभा चुनाव में कई ऐसे सवाल खड़े किए, जो 2014 में उठाए गए थे। कुछ के जवाब मिले, कुछ ने और सवालों को जन्म दिया; कुछ भुला दिए गए तो कुछ बहस का मुद्दा बन गए। क्या भविष्य होगा, इन सवालों का और उनके जवाबों का—इसी पर एक गहन चर्चा इस पुस्तक में की गई है।.
Book Details
-
ISBN9789353226312
-
Pages280
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Mamta Ka Mahataandav Karahata Bangal
- Author Name:
Sanjay Rai
- Book Type:

- Description: पश्चिम बंगाल अपनी समृद्ध, वैभवशाली, ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। लेकिन पिछले दस वर्षों से तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री के रूप में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन-गण-मन’ की इस भूमि को, जहाँ सांस्कृतिक नवजागरण का उदय हुआ, आतंकवादियों, घुसपैठियों और रोहिंग्या शरणार्थियों की पनाहगाह बनाकर रख दिया है। ममता की छत्रच्छाया में पल-बढ़ रहे ये राष्ट्रद्रोही तत्त्व आज पूरे देश की आंतरिक सुरक्षा को भस्मासुर की तरह चुनौती देते नजर आ रहे हैं, जो हर राष्ट्रवादी के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। माँ, माटी और मानुष का नारा देकर ममता बनर्जी ने राज्य की जनता के साथ जो छल किया है, वह लोकतंत्र पर एक धब्बा है। समाज को खंडित करने के कुत्सित प्रयासों का अंत करने, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता-अखंडता को पुष्ट करने, भारतीय पुनर्जागरण का जयघोष करने के लिए आज बंगाल में राष्ट्रीय विचारों की पुनर्स्थापना का महती काम होना आवश्यक है। लहूलुहान और कराहते बंगाल की व्यथाकथा बयान करती यह विचारोत्तेजक पुस्तक बंगाल के सामाजिक-सांस्कृतिक नवर्निर्माण के प्रति आश्वस्ति भाव जाग्रत् करती है।
Sansad mein Vikas Ki Baaten
- Author Name:
Narendra Pathak
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Aadhunik Kala Aandolan : Vishva Kala Ki Aadhunik Yatra : 1400-1965
- Author Name:
Jyotish Joshi
- Book Type:

-
Description:
आधुनिक कला आन्दोलन विश्व कला को आधुनिक बनाने के क्रम में हुए पश्चिमी कला आन्दोलनों पर आधारित पुस्तक है जिसमें सन् 1400 से 1965 तक, लगभग छह सौ वर्षों का कला-इतिहास है। दो खंडों में विन्यस्त इस पुस्तक का पहला खंड है—पश्चिमी कला आन्दोलन’ जिसमें पुनर्जागरणकालीन कला से लेकर अतियथार्थवादी कला आन्दोलन तक—सभी कला आन्दोलनों के जन्म की पृष्ठभूमि, प्रवृत्तिगत और शैलीगत वैशिष्ट्य की विवेचना है, साथ ही, लियोनार्दो दा विंची और माइकेल एंजेलो से वान गॉग, फ्रिदा काहलो, पिकासो और डाली तक, उन सभी प्रतिनिधि कलाकारों के अवदान का मूल्यांकन है जो उन आन्दोलनों में शामिल थे और जिनके प्रयत्नों से कला ने वैश्विकता पाई और आधुनिक दृष्टियों से उसका नवाचार हुआ।
पुस्तक के दूसरे खंड—आधुनिक भारतीय कला में बंगाल कला आन्दोलन जैसे पहले और एकमात्र भारतीय कला आन्दोलन सहित बाद में बने प्रभावी कला-समूहों का परिचयात्मक इतिवृत्त है। इसके साथ रवि वर्मा, अवनीन्द्रनाथ ठाकुर, नन्दलाल बोस और अमृता शेरगिल से हुसेन, रज़ा, सूज़ा और जगदीश स्वामीनाथन तक। उन सभी महत्त्वपूर्ण कलाकारों के वैशिष्ट्य का परिचय भी है जिन्होंने भारतीय कला को आधुनिक रूप दिया है। इस खंड में कला अकादमियों के गठन और प्रभाव का आकलन करने के साथ-साथ पुस्तक के उपसंहार में आधुनिक भारतीय कला में उपलब्धि के मानक बने उन कलाकारों की भी चर्चा है जो किसी समूह का हिस्सा नहीं रहे।
वस्तुत: यह पुस्तक हिन्दी में लिखित कला-इतिहास और आलोचना का वह जरूरी काम है जिसका लम्बे समय से अभाव था। निश्चय ही यह पुस्तक कला के साथ-साथ उन सभी अनुशासनों में रुचि रखनेवालों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी जो उन्हें उनके वैश्विक परिदृश्य के साथ समझना चाहते हैं।
Kargil
- Author Name:
Rachna Bisht Rawat
- Book Type:

- Description: कारगिल युद्ध की बीसवीं वर्षगाँठ पर इसके वीर सैनिकों की कहानियों के जरिए बेहद ठंडे युद्धक्षेत्र का दोबारा अनुभव कीजिए। असहाय पैराट्रूपर के एक समूह ने अपनी ही पोजीशन पर बोफोर्स गनों से फायर करने को क्यों कहा? पालमपुर का एक वृद्ध व्यक्ति अपने शहीद फौजी बेटे को न्याय दिलाने के लिए आखिर क्यों लड़ रहा है? एक शहीद जवान का पिता हर साल एक कश्मीरी युवती के घर क्यों जाता है? ‘कारगिल’ पर लिखी यह पुस्तक आपको ऐसे दुर्गम पर्वत शिखरों पर ले जाती है, जहाँ भारतीय सेना ने कुछ रक्तरंजित लड़ाइयाँ लड़ीं। इस युद्ध को लड़नेवाले जवानों और शहीदों के परिवारवालों से साक्षात्कार के बाद रचना बिष्ट रावत ने अदम्य मानवीय साहस दिखानेवाली ये कहानियाँ लिखी हैं, जिनका सरोकार केवल वर्दीधारियों से नहीं, बल्कि उन्हें सबसे ज्यादा प्यार करनेवाले लोगों से भी है। अप्रतिम साहस की कहानियाँ सुनाती यह पुस्तक हमारे लिए अपने प्राणों की आहुति देनेवाले 527 युवा बहादुरों के अलावा उन शूरवीरों को भी एक श्रद्धांजलि है, जो इस आहुति को देने के लिए तैयार बैठे थे।
Haldighati ka Yuddh
- Author Name:
Dr. Radhaswami
- Book Type:

- Description: "यह सार्वभौम सत्य है कि जैसे-जैसे मानव समुदाय, स्वराज्य व स्वराष्ट्र की रक्षा की जिम्मेदारी रहेगी, युद्ध अनिवार्य रहेगा। वर्तमान काल में युद्ध की प्रक्रिया एवं साधन के रूपों में नवीनतम बदलाव आया है। इसके साथ ही युद्धनीति एवं नवीन शस्त्रों में भी मूलभूत बदलाव हुआ है। वर्तमान समय में प्रत्येक युद्ध विगत युद्ध से कठिन एवं भयानक होता जा रहा है। यह सभी जानते हैं कि युद्ध एक आवश्यक बुराई है। इसलिए हम युद्ध संबंधी तथ्यों का अध्ययन कर इसकी बुराइयों की अवहेलना करते हुए शांति की खोज को वास्तविक रूप में बताना चाहते हैं, जो बहुत ही आवश्यक है। इस पुस्तक में युद्ध संबंधी घटनाओं का जो भी वर्णन है, उसमें मानव समुदाय को इस संकट से उबारने का भरसक प्रयास किया गया है। हल्दीघाटी का युद्ध क्यों हुआ?इसके क्या कारण थे? यह सब इस पुस्तक में बड़े ही मार्मिक ढंग से ऐतिहासिक शोधों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। आज इस बात की बड़ी आवश्यकता है कि आनेवाली पीढ़ी को किस प्रकार से युद्धों से बचाया जाए, जिससे वे शांति का मार्ग अपना सकें। यह पुस्तक निस्संदेह अध्यापन एवं संग्रह के योग्य है। इसमें हल्दीघाटी के युद्ध का प्रारंभिक काल से लेकर युद्ध के अंतिम छोर तक वर्णन किया गया है।
Narendra Modi Ke Panch Prana
- Author Name:
Himanshu Kumar C.A.
- Book Type:

- Description: 15 अगस्त, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को विकास की चतुर्दिक ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए देशवासियों के बीच ‘पाँच प्रण’ का बिगुल फूँका। ये पाँच प्रण हैं—बड़े संकल्प के साथ आगे बढऩा है और वह बड़ा संकल्प एक ‘विकसित भारत’ का है। दूसरा प्रण है, हमारे अस्तित्व के किसी भी हिस्से में, हमारे मन या आदतों के किसी कोने में ‘गुलामी का कोई अंश नहीं होना चाहिए।’ तीसरा प्रण है, हमें अपनी ‘विरासत’ पर गर्व अनुभव करना चाहिए, क्योंकि यह वही विरासत है, जिसने भारत को अतीत में स्वर्णिम काल दिया था। चौथा प्रण है—‘एकता और एकजुटता’। 135 करोड़ देशवासियों के बीच जब सद्भाव और सौहार्द होता है तो एकता उसका सबसे मजबूत गुण बन जाती है। पाँचवाँ प्रण ‘नागरिकों का कर्तव्य’ है, जिससे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री भी विमुख नहीं हो सकते, क्योंकि वे भी जिम्मेदार नागरिक हैं और राष्ट्र के प्रति उनका कर्तव्य है। यदि हम अगले 25 वर्षों के लिए अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं तो यह गुण महत्त्वपूर्ण जीवन-शक्ति बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन्हीं पाँच प्रणों को विस्तार देती एक रोचक, प्रेरक और संग्रहणीय पुस्तक। इसके अध्ययन से हम भारतवर्ष के अमृतकाल में यशस्विता प्राप्ïत कर पाएँगे और पुन: विश्वगुरु बनकर पूरे विश्व का मार्गदर्शन कर सकेंगे।
Aadi Turk Kaleen Bharat (1206-1290)
- Author Name:
Saiyad Athar Abbas Rizvi
- Book Type:

-
Description:
आदि तुर्क वंश के इस इतिहास में 1206 ई. से 1290 ई. तक समस्त प्रमुख फ़ारसी तथा अरबी इतिहास ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद है। इसमें मिनहाज सिराज की ‘तबक़ाते नासिरी’ तथा ज़ियाउद्दीन बरनी की ‘तारीख़े फ़ीरोज़शाही’ को मुख्य आधार माना गया है।
दूसरे भाग में समकालीन इतिहासकारों की कृतियों का अनुवाद है। इनमें फ़ख़रे मुदब्बिर की ‘तारीख़े फ़ख़रुद्दीन मुबारकशाह’, ‘आदाबुल हर्ब वश्शुजाअत’, सद्रे निजशमी की ‘ताजशुल मआसिर’, अमीर ख़ुसरो के ‘दीवाने वस्तुल हयात’ एवं क़ेरानुस्सादैन के संक्षिप्त तथा परमावश्यक अंशों का अनुवाद भी सम्मिलित है। बाद के भी दो प्रमुख इतिहासकारों की रचनाओं के अनुवाद किए गए हैं—एसामी की ‘फ़ुतूहुस्सलातीन’ का और अरबी में लिखी हुई इब्ने बतूता की यात्रा के वर्णन का।
मध्यकालीन भारतीय इतिहास पर प्रामाणिक रोशनी डालनेवाले इन ग्रन्थों का अनुवाद कुछ विद्वानों ने अंग्रेज़ी में भी किया था, लेकिन उनमें पारिभाषिक शब्दों के अंग्रेज़ी अनुवादों में दोष रह गए हैं। इस कारण अनेक भ्रम-पूर्ण रूढ़ियों को आश्रय मिल गया है। इस प्रकार की त्रुटियों से बचने के उद्देश्य से प्रस्तुत ग्रन्थ में पारिभाषिक और मध्यकालीन वातावरण के परिचायक शब्दों को मूल रूप में ही ग्रहण किया गया है और उन शब्दों की व्याख्या पाद-टिप्पणियों में कर दी गई है।
Bharat Ka Saral Itihas
- Author Name:
Om Prakash Prasad +1
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक में बारह अध्याय हैं। इतिहास की परिभाषा एवं अवधारणा तथा इतिहास लेखन के विभिन्न पहलुओं पर प्रथम अध्याय में प्रकाश डाला गया है। सातवीं शताब्दी से भारत में सामन्तवादी तत्त्व विकसित होकर भारत को विखंडित कर दिए। एक नवीन भारत मुस्लिमकाल में अवतरित हुआ जहाँ शूद्र और ब्राह्मण के बीच की दूरी कम होती गई और चूँकि शूद्र (दलित) सम्मिलित कर लिए गए, अत: तथाकथित हिन्दुओं की संख्या में वृद्धि हुई। मुस्लिम माहौल में दलितों के साथ भेदभाव की भावना घटी। अंग्रेज़ी काल का ज़माना आया क्योंकि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पश्चिम की तुलना में मुग़लकाल का भारत पिछड़ गया।
Rashtra Prem Ki Kahaniyan
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description: This book does not have any description.
Gandhi Ek Asambhav Sambhavna
- Author Name:
Sudhir Chandra
- Book Type:

-
Description:
साल-दर-साल दो बार गांधी को रस्मन याद कर बाक़ी वक़्त उन्हें भुलाए रखने के ऐसे आदी हो गए हैं हम कि उनके साथ हमारा विच्छेद कितना गहरा और पुराना है, इसकी सुध तक हमें नहीं है। एक छोटी-सी, पर बड़े मार्के की, बात भी हम भूले ही रहे हैं। वह यह कि पूरे 32 साल तक गांधी अंग्रेज़ी राज के ख़िलाफ़ लड़ते रहे, पर अपने ही आज़ाद देश में वह केवल साढ़े पाँच महीने—169 दिन—ज़िन्दा रह पाए। इतना ही नहीं कि वह ज़िन्दा रह न सके, हमने ऐसा कुछ किया कि 125 साल तक ज़िन्दा रहने की इच्छा रखनेवाले गांधी अपने आख़िरी दिनों में मौत की कामना करने लगे। अपनी एक ही वर्षगाँठ देखी उन्होंने आज़ाद हिन्दुस्तान में। उस दिन शाम को प्रार्थना-सभा में बोलते हुए उन्होंने कहा : ‘‘मेरे लिए तो आज मातम मनाने का दिन है। मैं आज तक ज़िन्दा पड़ा हूँ। इस पर मुझको ख़ुद आश्चर्य होता है, शर्म लगती है, मैं वही शख़्स हूँ कि जिसकी ज़ुबान से एक चीज निकलती थी कि ऐसा करो तो करोड़ों उसको मानते थे। पर आज तो मेरी कोई सुनता ही नहीं है। मैं कहूँ कि तुम ऐसा करो, ‘नहीं, ऐसा नहीं करेंगे’ ऐसा कहते हैं।...ऐसी हालत में हिन्दुस्तान में मेरे लिए जगह कहाँ है और मैं उसमें ज़िन्दा रहकर क्या करूँगा? आज मेरे से 125 वर्ष की बात छूट गई है। 100 वर्ष की भी छूट गई है और 90 वर्ष की भी। आज मैं 79 वर्ष में तो पहुँच जाता हूँ, लेकिन वह भी मुझको चुभता है।’’
क्या हुआ कि गांधी ऊपर उठा लिए जाने की प्रार्थना करने लगे दिन-रात? कौन-सी बेचारगी ने घेर लिया उन्हें? क्यों 32 साल के अपने किए-धरे पर उन्हें पानी फिरता नज़र आने लगा? निपट अकेले पड़ गए वह।
गांधी के आख़िरी दिनों को देखने-समझने की कोशिश करती है यह किताब। इस यक़ीन के साथ कि यह देखना-समझना दरअसल अपने आपको और अपने समय को भी देखना-समझना है। एक ऐसा देखना-समझना, गांधी की मार्फ़त, जो शायद हमें और हमारी मार्फ़त हमारे समय को थोड़ा बेहतर बना दे।
गहरी हताशा में भी, भले ही शेखचिल्ली की ही सही, कोई आशा भी बनाए रखना चाहती है गांधी को एक असम्भव सम्भावना मानती है यह किताब।
Sarabjit Singh : A Case of Mistaken Identity
- Author Name:
Awaish Sheikh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Two Plans
- Author Name:
Deendayal Upadhyay
- Book Type:

- Description: Distinguished by originality, lucidity and analytical faculty, this book presents a critical study of the Two (First & Second Five Year) Plans. Its penetrating analysis and sound approach shed a great deal of light on conception, inception, execution, promises and performance of the Plans. Not only that, it gives a timely warning to the airy idealists, selfcomplacent people in power and outside, theoretical statisticians and totalitarian thinkers that it would be desirable to reconsider our whole attitude towards planning, and if we cannot take to correct policies, the future of the whole nation may be jeopardised. Planning is a dynamic process and is based on the traditional values and fundamental postulates of a country�s life and culture. The persons responsible for planning in India seem to have been either ignorant or deliberately preferred to ignore this important consideration. The book by eminent nationalist thinker Pandit Deendayal Upadhyay raises critical questions and vital issues concerning our socioeconomic ills and evils and their patent and popular remedies imported and imbibed either from the Communist or the Capitalist countries.
Chandrashekhar Azad : Mithak Banam yatharth
- Author Name:
Pratap Gopendra
- Book Type:

-
Description:
असहयोग आन्दोलन के स्थगन से निराश युवा गुप्त संगठनों से जुड़कर अपनी विचारधारा एवं कार्यक्रमों के द्वारा ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिलाने लगे। इन संगठनों में ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ यानी एच.एस.आर.ए. का स्थान सर्वोपरि है और उतना ही विशिष्ट है— एच.एस.आर.ए. के शीर्षस्थ नेता अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद का स्थान। मिथकों के ढेर में दबी क्रान्तिकारी विचारधारा भारत के आधुनिक इतिहास लेखन में जितनी दुर्बोध बनी हुई है, उतना ही अज्ञात है आज़ाद का जीवन। सुदूर भाबरा के जंगलों में भील समुदाय के बीच पला-बढ़ा सामान्य शिक्षा-दीक्षा और साधारण शक्ल-ओ-सूरत का एक निर्धन बालक, काशी आकर कैसे एक प्रचण्ड राष्ट्रभक्त में विकसित हुआ और अन्तत: अपनी आहुति देकर राष्ट्र का अभिमान बन गया, इसे समझे बिना स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास को पूर्णत: नहीं समझा जा सकता।
यह कृति विश्वसनीय एवं प्राथमिक अध्ययन स्रोतों के गहन विश्लेषण के आधार पर चन्द्रशेखर आज़ाद के जीवन को और सम्पूर्ण क्रान्तिकारी विचारधारा को मिथकों से अलग कर ऐतिहासिक सन्दर्भों में समझने का एक विनम्र प्रयास है।
Upari Gangaghati Dwitiya Nagarikaran
- Author Name:
Sanju Mishra
- Book Type:

- Description: ऊपरी गंगा के मैदान में नगरीकरण से सम्बन्धित ज्ञान के मुख्य आधार साहित्यिक साक्ष्यों के साथ-साथ पुरातात्त्विक अन्वेषण एवं उत्खनन है। भारत में नगरों के आविर्भाव की प्राचीनता ताम्राश्म काल में हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो नामक स्थानों पर बने हुए नगरों के सन्निवेश तथा उनके सामाजिक एवं आर्थिक जीवन के दृष्टान्तों से सिद्ध हो जाती है, किन्तु द्वितीय सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व के मध्य में सैन्धव सभ्यता के विनाश के साथ ही सम्पूर्ण भारत पुनः ग्राम्य संस्कृति में लौट आया तथा एक हजार वर्षों के लम्बे अन्तराल के पश्चात् छठी शताब्दी ईसा पूर्व में, गंगा के मैदान में षोडश महाजनपदों का उद्भव राजनीतिक इकाइयों के रूप में उत्तर भारत में हुआ। छठी शताब्दी ईसा पूर्व का काल उत्तर भारत में अनेकानेक नवीन परिवर्तनों का काल था तथा ये परिवर्तन जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई देते हैं। इसे द्वितीय नगरीकरण की संज्ञा दी गई है। पुरातात्त्विक भाषा में इसे उत्तरी कृष्ण मार्जित पत्र-परम्परा संस्कृति के प्रारम्भ का काल माना जा सकता है। इस शोध-प्रबन्ध के माध्यम से ऊपरी गंगा के मैदान के पुरातात्त्विक अनुक्रम का तथा द्वितीय नगरीकरण से सम्बन्धित नगरीय साक्ष्यों का क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक अध्धयन प्रस्तुत करने का यथासम्भव प्रयास किया गया है।
Pagha Jori-Jori Re Ghato
- Author Name:
Rose Kerketta
- Book Type:

- Description: "रोज ने अपने कथा-संग्रह में आदिवासी जीवन को सघनता और संपूर्णता के साथ शामिल किया है। जो जिया है, उसे ही लिखा है। संग्रह में व्यापकता है, विविधता है, आधुनिकता है, और जो सबसे बड़ी बात है, वह है प्रतिरोध का राजनीतिक स्वर। इसमें हिंदी साहित्य में चल रहे स्त्री विमर्श से अलग ढंग की कहानियाँ हैं, जो पुरुष के विरोध में नहीं, व्यवस्था के विरोध में खड़ी हैं। यहाँ अलग तरह का नारीवाद है। जल, जंगल, जमीन पर हो रहे हमले के खिलाफ लड़ता हुआ नारीवाद। —वीरभारत तलवार ऐसे मौसम में जबकि रचनात्मकता में एक प्रकार का सुखाड़ एवं अकाल है, रोज दी ने वैसी कहानियाँ दी हैं, जो बिल्कुल ही एक नए स्वाद की कहानियाँ हैं। समाज में जो लड़ाई है, उस लड़ाई को ताकत देने के लिए यह किताब है। —किशन कालजयी रोज दी की प्रमुख विशेषता यह है कि वे कहानियाँ लिखती नहीं कहती हैं, यानी एक कहानीकार का पाठक के साथ जो एक संवाद हो सकता है, पाठक में जो विश्वास हो सकता है, पाठक के साथ जो साझेदारी या भागीदारी हो सकती है, वह रोज दी की कहानियों में दिखती है। उनका जो देशज स्वर है, वह सीमित भौगोलिक दायरे में नहीं सिमटता है। हिंदी में जनजातीय पात्रों को लेकर जो कहानियाँ लिखी गई हैं, ये कहानियाँ उनसे भिन्न हैं। —रविभूषण इस कथा-संग्रह से गुजरते हुए आदिवासी समाज की वाचिक परंपरा-किस्सागोई का आस्वाद अनायास हमारे मन-मस्तिष्क को भिगोता है। इन कहानियों में लेखिका ने शिल्प के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं किया है। कथ्य के साथ सादा-सा शिल्प सहज रूप से आया है। एक नैसर्गिक आदिवासी सादगी मौलिकता-सहजता के साथ। —रणेंद्र
Bhartiya Rajniti Par Ek Drishti
- Author Name:
Kishan Patnayak
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में आज़ादी के बाद की भारतीय राजनीति के परिदृश्य का उसके समस्त आयामों में गम्भीर विश्लेषण मिलता है। सम्यक् विश्लेषण के साथ-साथ लेखक ने आधुनिक राजनीति की सभी अवधारणाओं, मूल्यों, मान्यताओं, विधायिका-कार्यपालिका-न्यायपालिका आदि संस्थाओं, विविध प्रक्रियाओं-घटनाओं, नेताओं आदि पर अपना मत रखा है। आधुनिक राजनीति के बीजपदों—संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, समाजवाद, गांधीवाद, साम्यवाद, राष्ट्र, राज्य, राष्ट्र-राज्य, राष्ट्रीय सम्प्रभुता, राष्ट्रीय अस्मिता, क्षेत्रीय अस्मिता, अन्तरराष्ट्रीयता, अर्थनीति, विदेशनीति, कूटनीति, उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद, तानाशाही, फासीवाद, साम्प्रदायिकता, जगतीकरण आदि का अर्थभेदन समता के विचार की ज़मीन पर खड़े होकर किया है। भारतीय के अलावा दुनिया की राजनीति पर भी पैनी और गहरी निगाह डाली है। भारत और दुनिया के प्राचीन राजनैतिक अनुभव और ज्ञान का हवाला भी कई जगह आया है।
किशन पटनायक इस दौर के ज़्यादातर बुद्धिजीवियों की तरह महज विश्लेषण के लिए विश्लेषण नहीं करते। वे देश के अकेले ऐसे चिन्तक हैं जिन्होंने उदारीकरण-ग्लोबीकरण के हमले की आहट सबसे पहले सुनी। भारत के राजनेताओं और बुद्धिजीवियों को चेतावनी देने के साथ उन्होंने देशव्यापी जनान्दोलनों की एकजुटता और राजनीतिकरण का निरन्तर प्रयास किया। इसी क्रम में उन्होंने भारत सहित दुनिया में तेज़ी से फैलते पूँजीवादी साम्राज्यवाद के मुक़ाबले एक वैकल्पिक विचारधारा (समाजवादी) गढ़ने का भी निरन्तर प्रयास किया। उनके बाक़ी लेखन के समान इस पुस्तक में भी वैकल्पिक विचारधारा के सूत्र और कार्यप्रणाली दर्ज हुए हैं।
पिछले पाँच वर्षों से चर्चा में चली आ रही ‘विकल्पहीन नहीं है दुनिया’ के बाद किशन पटनायक की यह दूसरी पुस्तक है। यूँ तो जीवन के सभी क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए यह पुस्तक पठनीय है, लेकिन परिवर्तनकारी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए यह एक अपरिहार्य पुस्तक है। इसके साथ एक छोटी पुस्तक ‘किसान आन्दोलन : दशा और दिशा’ भी प्रकाशित हुई है।
Sarabjit Singh ki Ajeeb Dastan
- Author Name:
Awaish Sheikh
- Book Type:

-
Description:
सरबजीत के मामले में अभियोजन पक्ष के सबूत बहुत ही कमज़ोर हैं। उसका नाम एफ़आईआर में भी दर्ज नहीं था।
—न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू; पूर्व अध्यक्ष, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया, भारत के उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और फ्री सरबजीत कमेटी के अध्यक्ष
सीमा के दोनों ओर इस तरह के कई मामले हैं। इन मामलों का पुनर्निरीक्षण होना चाहिए और अविलम्ब कैदियों की अदला-बदली होनी चाहिए। भारत और पाकिस्तान, दोनों को ही इस तरह के कैदियों की पहचान करके उन्हें जेनेवा कन्वेंशन के प्रावधानों के आधार पर छोड़ना चाहिए।
—कमल एम. मोरारका; पूर्व केन्द्रीय मंत्री, समाजसेवी एवं फ्री सरबजीत कमेटी के सदस्य
दोनों देशों की सरकारें एक दूसरे के नागरिकों के साथ बन्धकों जैसा व्यवहार करती हैं, यद्यपि लोग अच्छे पड़ोसियों की तरह रहने की कामना करते हैं। लोगों को सरकारों पर दबाव बनाने के लिए आगे आना चाहिए, ताकि भारत और पाकिस्तान में कोई दूसरा सरबजीत न हो।
संतोष भारतीय; प्रधान सम्पादक, ‘चौथी दुनिया’, साप्ताहिक अख़बार
सरबजीत के केस की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई। यह विडम्बना है। अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों की विचित्रता और दोषपूर्ण न्याय-प्रणाली का आपसी मेल इस व्यक्ति के दुर्भाग्य का कारण बना।
—ज़ुबैदा मुस्तफ़ा; पॉपुलेशन इंस्टीट्यूट, वाशिंगटन, अमेरिका द्वारा दिए जानेवाले ‘ग्लोबल मीडिया अवार्ड फ़ॉर एक्सीलेंस’ 1986 व 2004 की विजेता
Bharat Mein Videshi Log Evam Videshi Bhashayen
- Author Name:
Shreesh Chaudhary
- Book Type:

- Description: भारत की प्राकृतिक सम्पदा, ज्ञान-विज्ञान, कला एवं शिल्प ने हज़ारों वर्षों से विदेशियों को आकर्षित किया है। यहाँ की वाणिज्यिक एवं सांस्कृतिक परम्परा के कारण यहाँ पर अरबी, बैक्ट्रियन, चीनी, डच, अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, यूनानी, हिब्रू, लैटिन, फ़ारसी, पुर्तगाली, तुर्की तथा अन्य भाषाएँ बोली एवं सुनी गईं। संस्कृत आम लोगों की भाषा भले ही न रही हो, परन्तु इसका इस उपमहाद्वीप की हज़ारों भाषाओं के साथ शाब्दिक आदान-प्रदान रहा है। कालक्रम से ये सभी भाषाएँ एक समय में लोकप्रियता एवं सत्ता के शिखर तक पहुँचीं और फिर किसी अन्य भाषा के लिए स्थान ख़ाली कर हट गईं। इस प्रक्रिया में इन भाषाओं का अनेक देशज भाषाओं के साथ सम्पर्क हुआ तथा शब्दों एवं अभिव्यक्तियों का आदान-प्रदान हुआ। समय-समय पर नई भाषाओं का जन्म तथा पुरानी भाषाओं का लोप भी हुआ। प्रस्तुत पुस्तक भारत में भाषाओं के इसी उद्भव-विकास, लोप एवं अवशेष की लम्बी शृंखला की कहानी कहती है।
Utpeediton Ke Vimarsh
- Author Name:
Vir Bharat Talwar
- Book Type:

- Description: आदिवासी समाज को ज्यादातर रोमांटिक दृष्टि से देखा गया है। सिर्फ उनके हितैषी गैर-आदिवासी कार्यकर्ताओं और विद्वानों द्वारा ही नहीं, बल्कि खुद कुछ आदिवासियों द्वारा भी। कुछ आदिवासी साहित्यकार अपने विमर्श में आदिवासी समाज का जैसा सुन्दर, सर्वांगपूर्ण चित्र खींचते हैं, उस चित्र का खुद उन्हीं के द्वारा लिखी हुई कहानियों और उपन्यास में व्यक्त यथार्थ से कोई मेल नहीं बैठता; दोनों के बीच दूरी और अन्तर्विरोध दिखाई देता है। विमर्श में यह दावा किया जाता है कि दुनिया की सारी समस्याओं का हल आदिवासी समाज दर्शन से ही निकलेगा जबकि आदिवासी खुद कई समस्याओं से घिरे हुए हैं और अपनी ही समस्याओं को हल नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा आदिवासी-विमर्श भी एक अतिवाद ही है। जैसे एक अतिवाद यह है कि हमें आदिवासियों का उद्धार करना है, वैसे ही दूसरा अतिवाद यह है कि आदिवासी से ही सबका उद्धार होगा। आदिवासी दर्शन के प्रवक्ता आदिवासी समाज की उन वास्तविकताओं को नहीं देखते, उन कमजोरियों को नहीं देखते जिनके खिलाफ लड़कर आदिवासियों को सचेत करने की जरूरत है। उलटे कभी-कभी ये कमियाँ भी उनकी नजर में गौरवपूर्ण बन जाती हैं। यह एक तरह की मनोवैज्ञानिक क्षतिपूर्ति है। उदाहरण के लिए कुछ लोग कहते हैं कि श्रम आदिवासी जीवन का बहुत बड़ा मूल्य है। यह बात दलितों के प्रसंग में भी कुछ विद्वानों ने कही है। सचाई यह है कि आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टि से जितने भी कमजोर और पिछड़े हुए समाज हैं—जिनमें आदिवासी और दलित भारत में मुख्य हैं—उन सबमें श्रम करने का लगभग सारा बोझ स्त्रियों के सिर पर डाल दिया गया। श्रम उनके पुरुषों को भी करना पड़ता है, लेकिन पुरुषों के जिम्मे सिर्फ कुछ एक महत्त्वपूर्ण काम होते हैं तथा उनका बहुत-सा समय सोने, तमाखू पीने, दारू पीने, जुआ खेलने या स्थानीय राजनीति करने जैसे कामों में खर्च होता है। चाहे बर्मा की सीमा पर बसे मिजो आदिवासियों का समाज हो अथवा तिब्बत की सीमा पर बसे भोटियों का समाज हो—सभी आदिवासी समाजों में स्त्रियों को ज्यादा-से-ज्यादा काम करना पड़ता है। —इसी पुस्तक से
Gathbandhan Ki Rajneeti Speeches By Shri Atal Bihari Vajpayee
- Author Name:
Dr. N.M. Ghatate
- Book Type:

- Description: भारतीय राजनीति गठबंधन के दौर में में न केवल प्रवेश कर चुकी है, गठबंधन की सरकारों का गठन अब भारतीय लोकतंत्र का वर्तमान और आगामी अतीत नजर आ रहा है। राष्ट्रीय दलों ही नहीं, क्षेत्रीय दलों की पैठ मतदाताओं में जितनी गहरी होती जाएगी, यह चलन बढ़ेगा। क्षेत्रीय मुद्दों पर ही नहीं, राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने क्षेत्रीय दलों पर मतदाता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि मतदाता चाहता है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसका प्रतिनिधित्व उसके क्षेत्रीय दल करें। पिछले लगभग एक दशक से मतदाताओं ने गठबंधन की सरकारों के गठन का जनादेश दिया है। अपने प्रधानमंत्रित्व काल में श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं, उन्हें सहज शब्दों में कहा जा सकता है-जो कहा, वह कर दिखाया। प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के बाद भी उनकी कथनी और करनी एक ही बनी रही। अपनी बात को स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में कहना अटलजी जैसे निर्भय और सर्वमान्य व्यक्ति के लिए सहज और संभव रहा है। मुद्दा चाहे पड़ोसियों से संबंध सुधारने की दिशा में चीन यात्रा का हो, लाहौर बस यात्रा हो या कारगिल से दुश्मन को खदेड़ना, आगरा वार्ता हो या फिर से खेल संबंधों की बहाली, परमाणु परीक्षण हो या डब्ल्यू.टी.ओ. पर दो टूक राय या अमेरिका की मध्यस्थता को ठुकराने का फैसला। अटलजी के शासनकाल में देश की अर्थव्यवस्था ने नई ऊँचाइयों को छुआ। विदेशी मुद्रा भंडार, सूचना प्रौद्योगिकी, आउट सोर्सिंग, किसान बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, ग्रामीण सड़क योजना, स्वर्ण चतुर्भुज राजमार्ग, नदियों का एकीकरण, सागर माला, दूरसंचार सुविधाओं का विकास, ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार जैसी दर्जनों योजनाएँ हैं, जो अटल जी के कार्यकाल में शुरू हुईं और जो आगामी अतीत में भारत को विकसित देशों की पंक्ति में स्थान दिलाने में सफल होंगी। भारतीय राजनीति को अटल जी का योगदान है- समन्वय की राजनीति, सामंजस्य की राजनीति, मिल- जुलकर राष्ट्रहित में आगे बढ़ने की दिशा देना।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book