Gatiman Uttar Pradesh: 5 Varsh 100 Din Yogi Sarkar
Author:
Dr. Sheelwant SinghPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 396
₹
495
Available
यह पुस्तक योगी सरकार द्वारा प्रदेश के समावेशी व सतत विकास हेतु विशेष रूप से “महिलाओं, किसानों तथा युवाओं” के लिए उठाए गए कदमों की चर्चा करती है। साथ ही कानून-व्यवस्था, सामाजिक, आर्थिक व अवसंरचनात्मक स्तर पर होने वाले कार्यो, प्रगति व उपलब्धियों का विवरण तथा केंद्र व राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की गई योजनाओं की प्रगति को सारगर्भित रूप से प्रस्तुत करती है। वर्ष 2017 से पूर्व व मार्च 2017 के बाद प्रदेश की स्थितियों के तुलनात्मक तथ्यों, आँकड़ों एवं सूचनाओं का विश्लेषण भी पुस्तक की विशेषता है।
यह पुस्तक योगी सरकार के 5 वर्ष व 100 दिन के कार्यों, नीतिगत निर्णयों, योजनाओं, कार्यक्रमों तथा सभी वर्गों व क्षेत्रों के लिए की जा रही नवाचारी पहलों को व्यवस्थित ढंग से पूर्ण तटस्थ होकर प्रस्तुत करती है।
यह पुस्तक गतिमान उत्तर प्रदेश का आईना है जो कि योगी सरकार के द्वितीय कार्यकाल ( 2022-2027 ) के विकास मॉडल के ब्लू प्रिंट को भी समाहित किए हुए है।
ISBN: 9789355210852
Pages: 324
Avg Reading Time: 11 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: "मानवजाति के विकास का मूल अधिकार ही मानवाधिकार है। मानवाधिकारों के विश्वव्यापी घोषणा-पत्र में नागरिक, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक अधिकारों पर 30 अनुच्छेद हैं। भारत के संविधान के अंतर्गत मानवीय मूल्यों का विकास और मानव के सम्मान की रक्षा हो सके, यह मानवाधिकार आयोग के कार्यक्षेत्र में है। विश्व समुदाय में शांति, सद्भाव, भाईचारा बना रहे और वह अपनी निजता के साथ अपने नैसर्गिक अधिकारों का उपयोग कर सके, इस बात को ध्यान में रखकर संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर, 1948 को मानवाधिकारों के विश्वव्यापी घोषणा-पत्र को स्वीकार किया गया। ऐसे सभी अधिकार, जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा से जुड़े हैं, भारतीय संविधान के भाग-3 में मूलभूत अधिकारों के रूप में वर्णित हैं। इसके अतिरिक्त ऐसे अधिकार, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा मान्यता प्राप्त है, मानवाधिकार कहा गया है। मानवाधिकारों का सही ढंग से संरक्षण हो और उसका उल्लंघन करनेवालों को दंडित किया जाए, इस उद्देश्य से मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया है। आयोग को मुख्यत: मानवाधिकारों के संरक्षण, प्रशासन व्यवस्था में सुधार आदि की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीड़ित व्यक्ति आयोग के माध्यम से अपने अधिकारों का संरक्षण कर सकता है। मानवाधिकार आयोग समाज में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता जाग्रत् करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रस्तुत पुस्तक आम जन को इस विषय में विस्तृत जानकारी देने का विनम्र प्रयास है। "
Nagvansh Ki Purakathayein
- Author Name:
Shivkumar Tiwari
- Book Type:

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Description:
‘नागवंश की पुराकथाएँ’ ऐतिहासिक भारत के उस आदि समाज की कथाएँ हैं जिनके सूत्र संस्कृत, पालि एवं प्राकृत भाषाओँ में लिखे प्राचीन ग्रन्थों में मिलते हैं। वस्तुतः नाग संस्कृति मानव समाज की उन गिनी-चुनी विश्व-संस्कृतियों में से एक है, जिसका अविच्छिन्न प्रवाह विगत चार या पाँच सहस्राब्दियों से अब तक गतिमान है। भारत में नागों के नाम पर नदियाँ हैं, क्षेत्र हैं, नगर हैं तथा व्यक्तियों के उपनाम हैं, ये नाग संस्कृति की जीवन्तता के प्रमाण हैं।
‘नागवंश की पुराकथाएँ’ भारत की एक अति प्राचीन किन्तु दीर्घजीवी विस्मृत-से पुरातन नाग संस्कृति के कुछ तिनकों को साथ रखकर रूपायित करने का प्रयास है। ग्रन्थ में संकलित कथाओं को सर्गों में विभाजित किया गया है। स्थापित कथाओं की चर्चा न करते हुए यह ग्रन्थ अल्पज्ञात पौराणिक संकेतों और लोककथाओं में प्रचलित आख्यानों के आधार पर नाग समाज की संस्कृति और सामाजिक विशेषताओं को कथाओं के माध्यम से प्रस्तुत करने का यत्न करता है। यह प्रयास अपने आप ही इस ग्रन्थ को दूसरे ग्रन्थों के मुक़ाबले अग्रिम भूमिका में लाकर खड़ा कर देता है। नागों की संस्कृति के अध्ययन में निश्चय ही यह एक उल्लेखनीय ग्रन्थ है।
Fatehpur Sikri : Udbhav Vikas Evam Nagriya Sanrachna
- Author Name:
Anil Kumar Yadav
- Book Type:

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Description:
फतेहपुर की नगरीय संरचना और उसके राजनैतिक महत्व को इतिहास की दृष्टि से देखने-परखने के उद्देश्य से लिखी गयी यह पुस्तक अत्यंत प्रासंगिक है। इस पुस्तक में अकबर के नगरीय-बोध, स्थापत्य संबंधी रुचि और विकास की अवधारणा को लेकर कई उल्लेखनीय स्थापनाएं की गयी हैं। अकबर ने फतेहपुर सीकरी का निर्माण सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के प्रति आदर प्रकट करने के उद्देश्य से कराया था लेकिन फतेहपुर सीकरी अकबर के लिए रणनीतिक, राजनीतिक और वैचारिक रूप से भी हितकर था। असल में सीकरी अजमेर और आगरा के बीच एक गलियारे के रूप में स्थित था। इस दृष्टिकोण से देखें तो गंगा घाटी में पड़ने वाले मैदानों की ओर प्रसार करने की योजना के लिए यह अत्यंत उपयुक्त था। इतना ही नहीं फतेहपुर सीकरी में महलों के बीच बनी मस्जिद में सूफी संत शेख सलीम चिश्ती का मकबरा बनाकर अकबर राजनीतिक और आध्यात्मिक सत्ता का परस्पर समन्वयन संयोजन करने में भी कामयाबी हासिल की।
अकबर ने अपनी राजधानी फतेहपुर सीकरी से वापस कर ली और फिर वहां कभी भी राजधानी नहीं बनायी। जिस नगर से बेपनाह मोहब्बत हो और जो दुनिया के महानतम नगरों में से एक हो, उससे विरक्ति का भाव पैदा होना विचार का विषय है। इस पर डॉ अनिल कुमार यादव ने गंभीरतापूर्वक कलम चलायी है।कुमार वीरेन्द्र
Marang Gomke Jaipal Singh Munda
- Author Name:
Ashwani Kumar 'Pankaj'
- Book Type:

- Description: कौन थे जयपाल सिंह मुंडा? इनका भारतीय स्वतंत्रता और नए भारत के निर्माण में राजनीतिक-बौद्धिक योगदान क्या था? वे जिस आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उसकी आकांक्षाएँ क्या थीं? इस बारे में आजादी के सत्तर साल बाद भी इतिहास चुप है। एक तरफ गांधी-नेहरू, जिन्ना, अंबेडकर सहित अनेक राजनीतिज्ञों पर सैंकड़ों पुस्तकें हैं, पर जयपाल सिंह मुंडा पर एक भी नहीं है। यह कितनी हैरत की बात है कि झारखंड आंदोलन में कूदने से पहले और देश के संविधान निर्माण सभा में लाखों आदिवासियों के लिए निडरता से दहाड़नेवाले जिस आदिवासी ने देश के लिए आई.सी.एस. छोड़ी, जिसकी कप्तानी में भारत ने पहला हॉकी का ओलंपिक स्वर्ण जीता, जिसने अफ्रीका और भारत के कॉलेजों में अध्यापन के दौरान अपनी शिक्षकीय योग्यता से प्रभु वर्ग को प्रभावित किया, जो गुलाम भारत में किसी ब्रिटिश कंपनी में सर्वोच्च पद पर काम करनेवाला पहला भारतीय (वह भी आदिवासी) था, जिससे पढ़ने के लिए भारत के राजा-रजवाड़े लालायित रहते थे, जो ऑक्सफोर्ड से अर्थशास्त्र में गोल्डमेडलिस्ट था, हॉकी में एकमात्र भारतीय ‘ऑक्सफोर्ड ब्लू’ खिलाड़ी था और जो कॉलेज के दिनों में विभिन्न सभा-सोसायटियों का नेतृत्वकर्ता संयोजक-अध्यक्ष था, उसे इस लायक भी नहीं समझा गया कि उसकी चर्चा हो। —इसी पुस्तक से
Yashpal Ka Viplav-Vol. 4
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

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Description:
‘यशपाल का विप्लव’-4 में संकलित लेख स्वातंत्र्योत्तर भारत के लगभग सभी पहलुओं पर मंत्रणा करते दिखते है। फिर चाहे मुद्दा साहित्य, संस्कृति और भाषा का हो, कांग्रेसवाद बनाम मार्क्सवाद का हो, या एक नयी वैश्विक व्यवस्था में भारत की छवि और कर्तव्यों का हो। यहाँ एक ऐसी विस्तृत और समावेशी तस्वीर उभरती है जिसे किसी एक उपन्यास या कई कहानियों में भी समेटना नामुमकिन है। इस लिहाज़ से 'विप्लव' का चौथा भाग भारत के बौद्धिक इतिहास की प्रस्तावना उकेरता है—एक ऐसी पृष्ठभूमि जो आजादी से लेकर अबतक हमारे सामाजिक जीवन को प्रभावित-पोषित करता आई है।
इन लेखों में यशपाल एक दुस्साहसी संपादक के रूप में निखरते हैं जो अपनी लेखनी में तटस्थ पत्रकारिता, तथ्यपरक विवेचना और साहित्यिक स्वायत्तता की एक अनूठी मिसाल प्रस्तुत करता है। शैली और भाषा का एक ऐसा नमूना जो आज के दौर में बेहद प्रासंगिक है। यह कहना उचित होगा कि यशपाल का साहित्य और उनकी पत्रकारिता, दोनों क्रांतिकारी संघर्ष की बौद्धिक उपज हैं। और एक दूसरे के पूरक भी हैं। इसलिए यह किताब हिंदी साहित्य और भारतीय इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए अनिवार्य है।
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