Ek Doosre Shikhar se
(0)
Author:
ChandrashekharPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
795
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Available
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यह तीसरा खंड पूर्व के दोनों खंडों से इसलिए भी भिन्न है क्योंकि इस दौरान चन्द्रशेखर देश के मुख्य कार्यकारी की भूमिका में हैं। इस दौरान वे देश की जनता की बुनियादी समस्याओं के बारे में कैसा रुख रखते हैं और इनके निदान के लिए उनके पास क्या कार्यक्रम है, इसकी झलक इस खंड के साक्षात्कारों से मिलती है। प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने धर्म, सांप्रदायिकता, राजनीति, राष्ट्रीय सरकार, समाजवाद, विदेश नीति तथा अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मसलों पर खुलकर अपना पक्ष रखा है। प्रधानमंत्री के रूप में दिए गए चन्द्रशेखर के साक्षात्कारों की विशेषता है कि वे दृढ़ता से भारत का पक्ष रखते हैं। भेंटवार्ताओं में विभिन्न बुनियादी मुद्दों पर चन्द्रशेखर के विचार अनायास व्यक्त हुए हैं। विभिन्न मुद्दों पर चन्द्रशेखर की मान्यताओं से उनकी अंतर्दृष्टि का भी पता चलता है। उन्हें और मूलभूत राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रश्नों को जानने-समझने में भी ये साक्षात्कार मदद पहुँचाते हैं। सत्तर के दशक से शुरू हुआ विमर्श पूर्व-पक्ष है तो इस तीसरे खंड का विमर्श उत्तर-पक्ष।
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यह तीसरा खंड पूर्व के दोनों खंडों से इसलिए भी भिन्न है क्योंकि इस दौरान चन्द्रशेखर देश के मुख्य कार्यकारी की भूमिका में हैं। इस दौरान वे देश की जनता की बुनियादी समस्याओं के बारे में कैसा रुख रखते हैं और इनके निदान के लिए उनके पास क्या कार्यक्रम है, इसकी झलक इस खंड के साक्षात्कारों से मिलती है। प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने धर्म, सांप्रदायिकता, राजनीति, राष्ट्रीय सरकार, समाजवाद, विदेश नीति तथा अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मसलों पर खुलकर अपना पक्ष रखा है। प्रधानमंत्री के रूप में दिए गए चन्द्रशेखर के साक्षात्कारों की विशेषता है कि वे दृढ़ता से भारत का पक्ष रखते हैं। भेंटवार्ताओं में विभिन्न बुनियादी मुद्दों पर चन्द्रशेखर के विचार अनायास व्यक्त हुए हैं। विभिन्न मुद्दों पर चन्द्रशेखर की मान्यताओं से उनकी अंतर्दृष्टि का भी पता चलता है। उन्हें और मूलभूत राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रश्नों को जानने-समझने में भी ये साक्षात्कार मदद पहुँचाते हैं। सत्तर के दशक से शुरू हुआ विमर्श पूर्व-पक्ष है तो इस तीसरे खंड का विमर्श उत्तर-पक्ष।
Book Details
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ISBN9788126704675
-
Pages229
-
Avg Reading Time8 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: "In the eyes of those who had lost all hopes in Bihar, Nitish Kumar has acquired the status of a miracle man. After all, how did he work for the revival of the state? Nitish Kumar is not a professional manager, he is a politician. When he took over as the Chief Minister of Bihar in November 2005, he frequently reminded the officials that the performance of the government was at stake in his ministry and not in the bureaucracy. If the government succeeds, then all the credit will be given his ministry. If it fails, his ministry will have to own the responsibility. Bureaucrats would not lose their jobs, but he (the Chief Minister) will have to go. Inspite of all this, Nitish Kumar earned a permanent place in the hearts of the people by working towards solving the issues related to the basic needs of the people and he emerged as the pioneer of social revolution. This process of improvement continues unabated. A readable and collectable saga that introduces you to the untold, inspiring, interesting, and adventurous campaigns of the social revolution of Nitish Kumar."
Bharat Ka Saral Itihas
- Author Name:
Om Prakash Prasad +1
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक में बारह अध्याय हैं। इतिहास की परिभाषा एवं अवधारणा तथा इतिहास लेखन के विभिन्न पहलुओं पर प्रथम अध्याय में प्रकाश डाला गया है। सातवीं शताब्दी से भारत में सामन्तवादी तत्त्व विकसित होकर भारत को विखंडित कर दिए। एक नवीन भारत मुस्लिमकाल में अवतरित हुआ जहाँ शूद्र और ब्राह्मण के बीच की दूरी कम होती गई और चूँकि शूद्र (दलित) सम्मिलित कर लिए गए, अत: तथाकथित हिन्दुओं की संख्या में वृद्धि हुई। मुस्लिम माहौल में दलितों के साथ भेदभाव की भावना घटी। अंग्रेज़ी काल का ज़माना आया क्योंकि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पश्चिम की तुलना में मुग़लकाल का भारत पिछड़ गया।
Surgical Strike
- Author Name:
Ish Kumar Gangania
- Book Type:

- Description: "माना जाता है कि कथा-साहित्य का उदय संभवत: कहानी-लेखन से संभव हो सका है। यह भी माना जाता है कि उपन्यास का उदय लंबी कहानियों के लेखन के प्रादुर्भाव के साथ-साथ हुआ है, किंतु कहानी और उपन्यास के बीच जो खास अंतर है, उसे समझने के लिए ज्यादा उलझन का सामना नहीं करना पड़ता। दरअसल कहानी जीवन तथा समाज के किसी विशेष भाग को विश्लेषित करती है, जबकि अर्नेस्ट ए. बेकर ने उपन्यास की परिभाषा देते हुए उसे गद्यबद्ध कथानक के माध्यम द्वारा जीवन तथा समाज की व्याख्या का सर्वोत्तम साधन बताया है। उपन्यास लिखने के पीछे समाज में कुछ ऐसी अप्रिय व हिंसक घटनाओं का बढ़ जाना है, जो लोकतंत्र को सीधे चुनौती देती नजर आती हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की गतिविधियाँ इनके निराकरण की अपेक्षा एक प्रकार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इनका समर्थन करती नजर आती हैं। उपन्यास 'सर्जिकल स्ट्राइक' लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में एक जज्बाती जंग है। उपन्यास में पुलवामा के आतंकी हमले की पृष्ठभूमि मौजूद है, यह हकीकत है। उपन्यास का घटनाक्रम फरवरी से मई के पूर्वार्ध 2019 तक सिमटा है। बेहद रोमांचक एवं कथारस से भरपूर एक उपन्यास।"
Rashtra, Dharma Aur Sanskriti
- Author Name:
Hanuman Prasad Shukla
- Book Type:

- Description: आचार्य वासुदेवशरण अग्रवालजी के समूचे चिंतन-लेखन की धुरी राष्ट्र का गौरव और मातृभूमि की महिमा है। वे राष्ट्रभक्त मनीषी थे। वैष्णव स्वभाव और कर्मनिष्ठा के साथ अंतिम साँस तक वे अपनी अविचल राष्ट्र-भक्ति और अविरल ज्ञान-साधना में निमग्न रहे। वे भारत के मृण्मय स्वरूप पर अत्यंत मुग्ध थे; पर उसके चिन्मय स्वरूप को उद्घाटित करने का यत्न करने में ही उन्होंने अपने भौतिक जीवन को निःशेष कर दिया । चिन्मय भारत का विग्रह धर्मस्वरूप है। वैदिक ऋषियों ने जिस सनातन सृष्टि-तत्त्व को ऋत कहा था, वही धर्म है और धर्म ही संस्कृति है, जो नाना रूपों में अभिव्यक्त होती है और हमारे आचरण या कि चरित्र में परिलक्षित होती है। इस तरह भारत राष्ट्र का निर्माण धर्म और संस्कृति की भित्ति पर हुआ है। इसीलिए इस संचयन का नाम 'राष्ट्र, धर्म और संस्कृति' रखा गया है। इसमें द्वीपांतर से लेकर ईरान और मध्य एशिया तक तथा आसेतुहिमाचल मृण्मय भारत और चिन्मय भारत से संबद्ध वासुदेवजी के निबंध संगृहीत हैं । चिन्मय भारत सहस्र - सहस्र वर्षों से प्रवाहित अजस्त्र धारा का सनातन प्रवाह है; यही इन निबंधों की टेक है; प्रतिपाद्य है ।
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