Adhunik Bharat ka Aitihasik Yatharth
(0)
Author:
Hitendra PatelPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
499
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<span style="font-weight: 400;">साहित्य आमतौर पर जीवन और समय के उन क्षणों को दर्ज करता है जो इतिहास की निगाह में अक्सर नहीं आते, या इतिहास की परम्परागत अवधारणा उन्हें अपने पन्नों पर अंकित करने लायक नहीं मानती। वे क्षण, जो अगर अनचीन्हे ही लुप्त हो जाएँ तो बहुत महत्त्वपूर्ण कुछ हमसे हमेशा के लिए छूट जाता है, साहित्य उन्हें संरक्षित करता है। साथ ही कई बार वह उन आख्यानों, और लोक-स्मृति का हिस्सा बन चुके तथ्यों को भी अपना विषय बनाता है जो प्राथमिक तौर पर इतिहास का विषय होते हैं, और किसी समय-विशेष को जानने में इतिहास के लिए भी उपयोगी होते हैं।</span></p> <p><span style="font-weight: 400;">इसीलिए अब इतिहास के अध्ययन में अन्य दस्तावेजों के साथ-साथ साहित्यिक स्रोतों की अहमियत पर भी जोर दिया जाने लगा है जिनसे इतिहास को न सिर्फ किसी एक घटना को अन्य कई पहलुओं से जानने, बल्कि अपनी दृष्टि का विस्तार करने के लिए भी जरूरी सामग्री मिल सकती है।</span></p> <p><span style="font-weight: 400;">हिन्दी में उपन्यासों ने यह काम बखूबी किया है। बीसवीं सदी में अनेक ऐसे उपन्यास लिखे गए जिनमें अपने समय की राजनीति को तत्कालीन सामाजिक सन्दर्भों के साथ अंकित किया गया। आधुनिक भारत का ऐतिहासिक यथार्थ में ऐसे ही उपन्यासों को आधार बनाकर 1919 से लेकर 1962 तक की भारतीय राजनीति को समझने की कोशिश की गई है। यह पुस्तक इन तीनों घटकों के अन्तर्सम्बन्धों को जानने की एक प्रविधि भी निर्मित करती चलती है।</span></p> <p><span style="font-weight: 400;">इस अध्ययन में उन्हीं उपन्यासों को रखा गया है जिनमें स्वतंत्रता आन्दोलन के इस शिखर-काल, गांधी और आजादी के बाद नेहरू के युग को गम्भीरतापूर्वक देखा, समझा और प्रस्तुत किया गया है। भगवतीचरण वर्मा, अमृतलाल नागर और यशपाल सरीखे लेखकों के साथ इसीलिए यहाँ गुरुदत्त के उपन्यास भी विचारणीय रहे, जिनको पढ़ना हिन्दू-राष्ट्र के नैरेटिव को समझने के लिए आज और जरूरी है।</span>
Read moreAbout the Book
<span style="font-weight: 400;">साहित्य आमतौर पर जीवन और समय के उन क्षणों को दर्ज करता है जो इतिहास की निगाह में अक्सर नहीं आते, या इतिहास की परम्परागत अवधारणा उन्हें अपने पन्नों पर अंकित करने लायक नहीं मानती। वे क्षण, जो अगर अनचीन्हे ही लुप्त हो जाएँ तो बहुत महत्त्वपूर्ण कुछ हमसे हमेशा के लिए छूट जाता है, साहित्य उन्हें संरक्षित करता है। साथ ही कई बार वह उन आख्यानों, और लोक-स्मृति का हिस्सा बन चुके तथ्यों को भी अपना विषय बनाता है जो प्राथमिक तौर पर इतिहास का विषय होते हैं, और किसी समय-विशेष को जानने में इतिहास के लिए भी उपयोगी होते हैं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसीलिए अब इतिहास के अध्ययन में अन्य दस्तावेजों के साथ-साथ साहित्यिक स्रोतों की अहमियत पर भी जोर दिया जाने लगा है जिनसे इतिहास को न सिर्फ किसी एक घटना को अन्य कई पहलुओं से जानने, बल्कि अपनी दृष्टि का विस्तार करने के लिए भी जरूरी सामग्री मिल सकती है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">हिन्दी में उपन्यासों ने यह काम बखूबी किया है। बीसवीं सदी में अनेक ऐसे उपन्यास लिखे गए जिनमें अपने समय की राजनीति को तत्कालीन सामाजिक सन्दर्भों के साथ अंकित किया गया। आधुनिक भारत का ऐतिहासिक यथार्थ में ऐसे ही उपन्यासों को आधार बनाकर 1919 से लेकर 1962 तक की भारतीय राजनीति को समझने की कोशिश की गई है। यह पुस्तक इन तीनों घटकों के अन्तर्सम्बन्धों को जानने की एक प्रविधि भी निर्मित करती चलती है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस अध्ययन में उन्हीं उपन्यासों को रखा गया है जिनमें स्वतंत्रता आन्दोलन के इस शिखर-काल, गांधी और आजादी के बाद नेहरू के युग को गम्भीरतापूर्वक देखा, समझा और प्रस्तुत किया गया है। भगवतीचरण वर्मा, अमृतलाल नागर और यशपाल सरीखे लेखकों के साथ इसीलिए यहाँ गुरुदत्त के उपन्यास भी विचारणीय रहे, जिनको पढ़ना हिन्दू-राष्ट्र के नैरेटिव को समझने के लिए आज और जरूरी है।</span>
Book Details
-
ISBN9789392757952
-
Pages432
-
Avg Reading Time14 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक ऐसा सांस्कृतिक संगठन है, जिसके लाखों समर्पित स्वयंसेवक राष्ट्र-निर्माण में लगे हैं और भारत को परम वैभव संपन्न बनाने के लिए कृतसंकल्पित हैं। परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने सन् 1925 की विजयादशमी को इसी उद्देश्य से संघ की स्थापना की। समर्पित भाव से व्यक्ति-निर्माण के महती कार्य को लक्षित कर संघ के स्वयंसेवक देश-समाज के प्रायः सभी क्षेत्रों—सेवा, विद्या, चिकित्सा, छात्र, मजदूर, राजनीति—में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के मूलमंत्र को जीवन का ध्येय मानकर प्राणपण से जुटे हैं। संघ दुनिया में अपनी तरह का अकेला संगठन है। पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निकट से जानने और गहराई से समझने की जिज्ञासा बढ़ी है। संघ के छठे और वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत के विचारों पर आधारित यह पुस्तक इस दिशा में दीपशिखा का काम करेगी। यह पुस्तक अलग-अलग अवसरों पर दिए उनके व्याख्यानों का संग्रह है। ‘हिंदुत्व का विचार’, ‘भारत की प्राचीनता’, ‘हमारी राष्ट्रीयता’, ‘समाज का आचरण’, ‘स्त्री सशक्तीकरण’, ‘विकास की अवधारणा’, ‘अहिंसा का सिद्धांत’, ‘बाबा साहेब आंबेडकर’ और ‘भारत का भवितव्य’ जैसे विषयों पर दिए गए उनके व्याख्यान संघ को समझना आसान बना देते हैं। वैसे अपने व्याख्यानों में मोहनराव भागवत बार-बार कहते हैं कि ‘संघ को समझना हो तो संघ में आइए’। यह पुस्तक पाठक के विचारों को परिष्कृत करेगी और समाज में ऐसे राष्ट्रभाव जाग्रत् करेगी, जिससे ‘यशस्वी भारत’ का लक्ष्य सिद्ध होगा।
Jharkhand Mein Vidroh Ka Itihas
- Author Name:
Shailendra Mahto
- Book Type:

- Description: झारखंड संघर्ष की धरती रही है। यहाँ के आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता की पहली लड़ाई लड़ी थी। ‘झारखंड में विद्रोह का इतिहास’ नामक इस पुस्तक में 1767 से 1914 तक हुए संघर्ष का जिक्र है। धालभूम विद्रोह के संघर्ष से कहानी आरंभ होती है। उसके बाद चुआड़ विद्रोह, तिलका माझी का संषर्घ, कोल विद्रोह, भूमिज विद्रोह, संथाल विद्रोह, बिरसा मुंडा का उलगुलान आदि सभी संघर्ष-विद्रोहों के बारे में इस पुस्तक में विस्तार से चर्चा की गई है। संथाल विद्रोह के तुरंत बाद ही, यानी 1857 में झारखंड क्षेत्र में भी सिपाही विद्रोह हुआ। झारखंड के वीरों ने इस विद्रोह में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राजा अर्जुन सिंह, नीलांबर-पीतांबर, ठाकुर विश्वनाथ शाही, पांडेय गणपत राय, उमरांव सिंह टिकैत, शेख भिखारी आदि उस विद्रोह के नायक थे। इस पुस्तक में उनके संघर्ष के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। पुस्तक में चानकु महतो, तेलंगा खडि़या, सरदारी लड़ाई, टाना भगतो के आंदोलन, गंगानारायण सिंह, बुली महतो से संघर्ष का भी जिक्र है। बिरसा मुंडा के एक सहयोगी गया मुंडा और उनके परिवार के संघर्ष का जीवंत विवरण दिया गया है। प्रयास है कि झारखंड के वीरों और उनके संघर्ष की जानकारी जन-जन तक पहुँचे और किसी भी विद्रोह का इतिहास छूट न जाए। इस पुस्तक की खासियत यह है कि सभी विद्रोहों-संघर्षों का प्रामाणिक विवरण एक जगह दिया गया है। झारखंड में जल-जंगल-जमीन का अधिकार, अपनी अस्मिता और भारत मुक्ति आंदोलन की लड़ाई को भी समाहित किया गया है, ताकि पुस्तक का क्षेत्र और व्यापक हो जाए।
Swatantrata Sangram Mein Jharkhand Ke Acharchit Nayak
- Author Name:
Vivek aryan
- Book Type:

- Description: ‘स्वतंत्रता संग्राम में झारखंड के अचर्चित नायक’ इतिहास के एक ओझल लेकिन अपरिहार्य पक्ष को सामने लाता है। आजादी की लड़ाई में झारखंड के आदिवासियों ने भी बढ़-चढ़कर शिरकत की थी। औपनिवेशिक पराधीनता के खिलाफ संघर्ष की शुरूआत और अगुआई करने से लेकर बलिदान देने तक, वे कभी पीछे नहीं रहे। लेकिन बिरसा मुंडा और सिदो-कानू जैसे कुछेक नायकों को छोड़ दें तो उनमें से ज्यादातर सेनानियों और शहीदों के बारे में लोग कुछ नहीं जानते। उन्हें इतिहास की मुख्यधारा में कभी जगह नहीं दी गई। बेशक जन-मन के किस्से-कहानियों-गीतों में उनकी स्मृतियाँ बची रहीं लेकिन वह जन-मन प्रायः उनके अपने वंशजों, समुदाय और क्षेत्र तक सीमित था। स्पष्टतः उन पुरखा नायकों को अपने पन्नों पर यथोचित जगह दिए बिना हमारा इतिहास मुकम्मल नहीं हो सकता था। इस सन्दर्भ में यह पुस्तक विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें झारखंड के कुछेक आदिवासी शहीद स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनगाथा किंचित पहली बार व्यवस्थित रूप से प्रकाशित हुई है। इन शहीदों-सेनानियों में शामिल हैं—हाथीराम मुंडा, हाड़ी मुंडा, होपन मांझी, बैरू मांझी, अर्जुन मांझी, रूपु मांझी, चम्पाइ मांझी, शाम परगना, भाको मुर्मू, भुगलू मुर्मू और जीतराम बेदिया। इनके साथ ही इस शोधपरक पुस्तक में अन्य कई अज्ञात-अल्पज्ञात शहीदों और स्वतन्त्रता सेनानियों का भी उल्लेख किया गया है। एक अध्याय बिरसा मुंडा के आन्दोलन में शामिल महिलाओं पर केन्द्रित है जिसमें इतिहास की एक दिलचस्प विडम्बना नजर आती है, जब कई महिला स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र हम उनके पतियों के हवाले से पाते हैं। दरअसल कालक्रम में उन महिला सेनानियों का नाम खो चुका है। संक्षेप में, यह पुस्तक इतिहास की कई बन्द खिड़कियों को खोलती है और स्वतंत्रता संघर्ष की उस महान परम्परा और विरासत से परिचित कराती है जो अब तक अँधेरे में पड़ी हुई थी।
IAF Strikes @ 0328 Hours
- Author Name:
Mukesh Kaushik +1
- Book Type:

- Description: ‘IAF Strikes @ 0328 hours’ is a comprehensive account of the events that unfolded that night. I want to express that whatever surfaced following the attacks in the Indian media is largely true. On the other hand, whatever surfaced in Pakistan is imaginative, at best. I want to congratulate Mr. Mukesh Kaushik and Mr. Sanjay Singh, for this book. Their efforts and attention to detail is highly commendable. —Air Marshal C. Hari Kumar Former Chief of Western Air Command
Bharatiya Pariprekshya
- Author Name:
Anil Joshi +1
- Book Type:

- Description: संकल्प’ संस्था सिविल सेवा के विद्यार्थियों में सामाजिक प्रतिबद्धता और समाज-परिवर्तन का दृष्टिकोण और भाव जाग्रत कर रही है। यह उसकी तीन दशक से ज्यादा की साधना है। इसके सूत्रधार श्री संतोष तनेजा हैं। यह तथ्य प्राय: ज्ञात है, परंतु साथ ही संकल्प संस्था वैचारिक यज्ञ भी कर रही है। इसी कड़ी में वर्ष 2015 से ‘संकल्प व्याख्यानमाला’ प्रारंभ हुई। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक बोध के लेखकों, चिंतकों और विचारकों के माध्यम से देश के प्रबुद्ध समाज में विचारशील लोगों तक एक विमर्श (डिस्कोर्स ) और आख्यान (नैरेटिव) को स्थापित करना था। इन व्याख्यानों का संकलन कर प्रकाशित किया जाए, यह विचार और सुझाव आदरणीय डॉ. कृष्ण गोपालजी का था। व्याख्यानमाला के इन कार्यक्रमों के आयोजन और इन महत्त्वपूर्ण विचारों की प्रस्तुति तथा प्रकाशन के प्रयत्नों को दिशा श्री संतोष तनेजा द्वारा दी गई। इसके लिए पहल एवं सतत प्रयत्न श्री राजेंद्र आर्य ने किया। यह पुस्तक वास्तव में उनके अथक प्रयासों का फल है। अनुक्रम श्रीराम जन्मभूमि और व्यापक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य — डॉ. कृष्ण गोपाल राष्ट्रीय सुरक्षा : वर्तमान परिप्रेक्ष्य जम्मू-कश्मीर और धारा 370 — अमित शाह अद्वितीय प्रशासक थे छत्रपति शिवाजी महाराज — स्व. अनिल माधव दवे भारतीय संस्कृति के माध्यम से विश्व की चुनौतियों का समाधान — स्व. सुषमा स्वराज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अल्पसंख्यकों के प्रति दृष्टिकोण — रमेश पतंगे संस्कृति, अध्यात्म और प्रशासन — आदित्यनाथ योगी सामाजिक समरसता एवं भारत की संत परंपरा — डॉ. कृष्ण गोपाल व्यावसायिक शिक्षा का माध्यम बनें भारतीय भाषाएँ — संतोष तनेजा हमने भारतीय भाषाओं को व्यावसायिक पाठ्यक्रम में लाने की पहल कर दी है — डॉ. अनिल सहस्रबुद्धे भारतीय भाषाओं के संबंध में चुनौतियां — अनिल जोशी विदेश नीति : भारत एवं पड़ोसी देश — विष्णु प्रकाश विकास के इस तथाकथित मॉडल पर प्रश्नचिन्ह हैं — डॉ. मुरली मनोहर जोशी नई शिक्षा नीति — डॉ. ओमप्रकाश कोहली
Vivekanand Ki Atmakatha
- Author Name:
Sankar
- Book Type:

- Description: "स्वामी विवेकानंद नवजागरण के पुरोधा थे। उनका चमत्कृत कर देनेवाला व्यक्तित्व, उनकी वाक्शैली और उनके ज्ञान ने भारतीय अध्यात्म एवं मानव-दर्शन को नए आयाम दिए। मोक्ष की आकांक्षा से गृह-त्याग करनेवाले विवेकानंद ने व्यक्तिगत इच्छाओं को तिलांजलि देकर दीन-दुःखी और दरिद्र-नारायण की सेवा का व्रत ले लिया। उन्होंने पाखंड और आडंबरों का खंडन कर धर्म की सर्वमान्य व्याख्या प्रस्तुत की। इतना ही नहीं, दीन-हीन और गुलाम भारत को विश्वगुरु के सिंहासन पर विराजमान किया। ऐसे प्रखर तेजस्वी, आध्यात्मिक शिखर पुरुष की जीवन-गाथा उनकी अपनी जुबानी प्रस्तुत की है प्रसिद्ध बँगला लेखक श्री शंकर ने। अद्भुत प्रवाह और संयोजन के कारण यह आत्मकथा पठनीय तो है ही, प्रेरक और अनुकरणीय भी है।
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