New Dharshans
(1)
Author:
Ponneelan, S. NagarajanPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
EnglishCategory:
Historical-fiction₹
555
₹ 460.65 (17% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
"New Dharshans" is a powerful novel that vividly depicts the profound impact of socio-political conflicts and rural issues on remote areas, influencing daily life. Placing emphasis on the individual, this humanistic novel shines a light on the diminishing levels of humanism, honesty, kindness, and morality in the world. In addition, this fast-paced novel underscores the significance of traditions, communist ideals, and emphasizes the need for humanity to reconnect with and revisit its roots. Against the backdrop of turbulent events in India during the 1970s, this novel set new standards in the sub-genre of Tamil realistic fiction.
Read moreAbout the Book
"New Dharshans" is a powerful novel that vividly depicts the profound impact of socio-political conflicts and rural issues on remote areas, influencing daily life. Placing emphasis on the individual, this humanistic novel shines a light on the diminishing levels of humanism, honesty, kindness, and morality in the world. In addition, this fast-paced novel underscores the significance of traditions, communist ideals, and emphasizes the need for humanity to reconnect with and revisit its roots. Against the backdrop of turbulent events in India during the 1970s, this novel set new standards in the sub-genre of Tamil realistic fiction.
Book Details
-
ISBN9788126049806
-
Pages936
-
Avg Reading Time31 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Treta
- Author Name:
Ashish Prakash
- Book Type:

- Description:
त्रेतायुग की अनसुनी कहानियां त्रेता युग द्वापर से पहले क्यों आया, क्या है वाल्मीकि रामायण और तुलसी के मानस में अन्तर, कैसे हैं लक्ष्मण राम से भी अधिक महान योद्धा, कैसे शत्रुघ्न सा भाई मिलना मुश्किल है, क्या है हनुमान जी की अष्टसिद्धियां। इस तरह के अनेक प्रश्नों का उत्तर ले के आ गई है आशीष प्रकाश की किताब "त्रेता"।
Uttarkatha : Vol. 2
- Author Name:
Shri Naresh Mehta
- Book Type:

- Description:
‘उत्तरकथा’ के प्रथम खंड को पढ़ते हुए महसूस होता है कि जैसे लेखक, लूसिएँ गोल्डमान के उत्पत्तिमूलक संघटनात्मक समाजशास्त्र के सहारे पुराने मालवा के ख़ौफ़नाक अँधेरे को एक विशिष्ट सामाजिक स्थिति में एक निश्चित वरण की अनिवार्यता का सामना करते हुए उभार रहा है और उजाले में समस्याओं की एक शृंखला प्रस्तुत करते हुए आलोचनात्मक चित्र और चरित्र उकेरते हुए सार्थक समाधान की सम्भावना तक आना चाहता है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह कि पूरा उपन्यास आध्यात्मिक सरोकारों से विच्छिन्न नहीं है। उपन्यास का नायक शिवशंकर आचार्य दुःख-भोग और दायित्व वहन के क्रम में करुणा का अकलंक पुरुष है। ...त्रयम्बक और दुर्गा भारतीय दम्पति के शिवपार्वती जैसे आदर्श हैं। शिवशंकर आचार्य, भारतीय मनीषा की चारित्रिक स्थिति का नाम है। यह चरित्र नहीं है। यह बीज-चरित्र को गोद लेकर वृक्षत्व प्रदान करते हैं...लेखक ने केवल कथा नहीं कही है, बल्कि...उनके बीच से चेतना के अनिवार्य नैरन्तर्य को तलाशा है...तभी तो यह केवल कथा नहीं है, उत्तरकालीन कथा नहीं है, बल्कि प्रश्नों के समाधान की, उत्तर की भी कथा है। —श्री श्रीराम वर्मा (जनपक्ष)
Sampradayikta Ka Zahar
- Author Name:
Ranjit
- Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद, आचार्य नरेन्द्रदेव, जयप्रकाश नारायण, डॉ. भीमराव आंबेडकर, डॉ. राममनोहर लोहिया, शहीदे आज़म भगतसिंह, किशन पटनायक, गणेशशंकर विद्यार्थी, प्रेमचन्द, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, मस्तराम कपूर, विभूति नारायण, पुरुषोत्तम अग्रवाल, असगर अली इंजीनियर, राजकिशोर, डॉ. रमेन्द्र, डॉ. राम पुनियानी, तस्लीमा नसरीन, मधु किश्वर, इरफ़ान इंजीनियर आदि के लेख संकलित हैं। स्पष्ट है कि इसमें स्वाधीनता से पूर्व और स्वाधीनता के बाद के भारत में साम्प्रदायिकता की समस्या के बदलते हुए रूपों और फैलते हुए आयामों पर, भारतीय मनीषा ने जो भी कुछ सोचा है, एक प्रकार से उसका निचोड़ आ गया है। हिन्दी में शायद ही कोई और ऐसी पुस्तक हो, जिसमें इतने व्यापक फ़लक पर इस समस्या को रखकर देखा गया है। अन्त में देवी प्रसाद मिश्र की कविता के द्वारा हमारे सबसे बड़े अल्पसंख्यक वर्ग को, हमारे आम नज़रिये की रौशनी में, मर्मस्पर्शी, प्रस्तुति ने, सोने में सुहागे का काम किया है। अपने विषय की एक अपरिहार्य पुस्तक।
Those Fifteen Days
- Author Name:
Prashant Pole
- Book Type:

- Description:
The future of every character, every person during those 15 days was different...very different...! in thinking, in working style, in behaviour, and in everything...! Those fifteen days taught us alot... We saw Nehru ready to unfurl the Union Jack in India at the behest of Mountbatten. On the same day and at the same time when Gandhiji was telling the refugees in Lahore, if Lahore is falling to death, you should face death with a smile, the chief of Rashtriya Swayamsevak Sangh—Guruji was giving the mantra of ‘getting inspiration from King Dahir, unite and live with courage’ just 800 miles away from Gandhiji, at Hyderabad (Sindh). At a time when Congress president’s wife Sucheta Kripalani was telling Sindhi women in Karachi that ‘Muslim goons tease you because of your make-up and low-cut blouses’, Mavashi Kelkar of Rashtra Sevika Samiti, was trying to make Hindu women empowered and strong while becoming cultured, at Karachi. While the Hindu workers of the Congress were trying to flee from Punjab and Sindh to India, the RSS Swayamsevaks were risking their lives to protect the Hindus and Sikhs and bring them safely to India. This book describes the happenings in 15 days, before India got the Independence, in an interesting manner.
Bhagat Singh Ko Fansi : Vol. 1
- Author Name:
Malvender Jit Singh Waraich +1
- Book Type:

- Description:
भगत सिंह को फाँसी-1 यह कैसे हुआ कि मामूली हथियारों से लैस कुछ नौजवानों को ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया, जिसके चलते उन्हें उम्रकैद और फाँसी की सजा हुई! ‘युद्ध’, जो उन्होंने लड़ा हालाँकि ‘‘यह युद्ध उपनिवेशवादियों व पूँजीपतियों के विरुद्ध लड़ा गया।’’ और जो ‘‘ न ही यह हमारे साथ शुरू हुआ और न ही यह हमारे जीवन के साथ खत्म होगा।’’ और, मात्र 30 महीने की उल्लेखनीय अवधि में 8-9 सितम्बर 1928 को ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन’ की स्थापना के साथ शुरू होकर, यह सम्पन्न हो गया। विश्वास से भरपूर भगत सिंह के शब्द थे, कि ‘‘मैं अपने देश के करोड़ों लोगों की ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की हुंकार सुन पा रहा हूँ। काल-कोठरी की मोटी दीवारो के पीछे बैठे हुए भी मुझे कहै कि यह नारा हमारे स्वतंत्राता संघर्ष को प्रेरणा देता रहेगा।’’ इस पुस्तक में प्रस्तुत है इसका प्रथमद्रष्टया विवरण।
The Raja The Rebel and The Monk
- Author Name:
J. N. Sinha
- Book Type:

- Description:
In late eighteenth century India, an obscure king who ruled over Huseypur in northwest Bihar, challenged the might of the British. When overpowered by the East India Company forces, he escaped into the jungles of Gorakhpur, raised a people’s army and fought a guerilla war against them for nearly thirty years. Beaten many times, he always bounced back and did not surrender ever. He was Maharaja Fateh Bahadur Sahi. A warrior, patriot and innovator, Sahi visualised the dangers of impending imperialism and rose to meet the challenge. He devised new war logistics and resorted to guerilla warfare, including ascetics, destitute and bandits in his unique army. This happened years before the Indian Revolt of 1857 and the revolutions in America and France. Mainstream history is yet to look at him, but in the middle-Ganga valley, Sahi is remembered as a folk hero and a people’s king. This work is an effort to unravel Sahi’s unusual life. How did he operate and survive for so long? Could he be considered the progenitor of India’s first war of independence? The Raja, the Rebel and the Monk attempts to answer.
The Lost Diary of Kastur, My Ba
- Author Name:
Tushar Gandhi +1
- Book Type:

- Description:
तिच्या सोबतीवाचून अहिंसा आणि आत्मशिस्तीच्या माझ्या प्रयत्नांमध्ये मला यश मिळालं नसतं, हे सत्य मी मान्य करायला हवं. इतर कुणाच्याही तुलनेत ती मला अधिक चांगलं समजून घेऊ शकायची. तिची निष्ठा अद्वितीय होती. आयुष्याचा निरोप घेताना ती कुणाच्या मांडीवर, त्या क्षणी डोके टेकवून डोळे मिटेल हे मलाही शेवटपर्यंत माहीत नव्हतं, पण तिनं शेवटच्या क्षणी मला बोलावलं आणि माझ्या मांडीवर डोकं ठेवून अखेरचा श्वास घेतला. अशी होती बा! तिच्यासारखी निर्दोष श्रद्धा, नि:स्वार्थ भक्ती आणि सेवाभाव माझ्या पाहण्यात नाही. आमचं लग्न झाल्यापासून ती माझ्या आयुष्यातील सर्व संघर्षांमध्ये अतूट निष्ठेनं माझ्या पाठीशी उभी राहिली. शरीर-आत्म्यासह आपलं सर्वस्व अर्पून तिनं स्वत:ला माझ्या जीवनकार्याला वाहून घेतलं. अशा प्रकारच्या समर्पणाचं दुसरं उदाहरण क्वचितच सापडेल. महात्मा गांधी कस्तुरबांच्या तिसऱ्या स्मृतिदिनानिमित्त बोलताना 22 फेब्रुवारी 1947, नोआखाली. The Lost Diary of Kastur, My Ba | Tushar Gandhi Translated by : Sonali Navangul द लॉस्ट डायरी ऑफ कस्तुर, माय बा । तुषार गांधी अनुवाद : सोनाली नवांगुळ
Awadheshwari
- Author Name:
Shankar Mokashi Punekar
- Book Type:

- Description:
Awadheshwari, released in 1987, received the Sahitya Akademi Award (the National Academy of Letters, India) in 1988. This well-researched political novel set in Vedic times paints a vivid picture of the social and political ethos of the era. It specifically focuses on the concept of NiYoga, a prevalent practice of legal adultery where an infertile husband permits his wife to conceive with another man. Through various plots and subplots, the novel illustrates the circumstances leading to the practice's decline. It stands out as one of the best creative fictions in Kannada literature.
Ramkrishan Paramhans Ke 101 Prerak Prasang
- Author Name:
Rashmi
- Book Type:

- Description:
"स्वामी राम कृष्ण परमहंस एक महान संत, समाजसुधारक और हिंदू धर्म के प्रणेता थे। उनका मानना था कि यदि मनुष्य के हृदय में सच्ची श्रद्धा और लगन जग जाए तो ईश्वर का साक्षात्कार कतई मुश्किल नहीं है। वे कहते कि ईश्वर एक ही है, मनुष्यों ने उस तक पहुँचने के मार्ग अलगअलग बना लिये हैं। वे स्वयं माँ काली के अनन्य भक्त थे और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन उन्हीं की आराधना में व्यतीत किया। उन्होंने हिंदू धर्म की प्रतिष्ठा का कार्य अपने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि युवा नरेंद्र के रूप में हिंदुत्व की प्रतिष्ठा को विश्वमंच पर प्रस्थापित करने का पुरुषार्थ कर दिखाया। वे स्वयं पढ़ेलिखे नहीं थे, किंतु उन्होंने विश्व को विवेकानंद जैसा सार्वकालिक धर्मप्रवर्तक दिया। परमहंस के जीवन काल में ही उनकी ख्याति दूरदूर तक फैल गई थी। फलस्वरूप मैक्समूलर और रोम्याँ रोलाँ जैसे सुप्रसिद्ध पाश्चात्य विद्वानों ने उनकी जीवनी लिखकर अपने को धन्य माना। इस पुस्तक में स्वामी रामकृष्ण परमहंस के जीवन से जुड़े रोचक एवं प्रेरक प्रसंगों का संकलन किया गया है। इसकी सामग्री रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद पर उपलब्ध साहित्य से प्राप्त की गई। यह पुस्तक स्वामीजी के जीवन को समझने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है। आशा है, हमारे प्रबुद्ध पाठक इस पुस्तक को पढ़कर स्वामीजी के जीवन और जीवनदर्शन को समझ पाएँगे।
Ramkatha Ke naye Aayam
- Author Name:
Dr. Shankarlal Purohit
- Book Type:

- Description:
हिंदी में रामकथा पर बहुत कुछ काम हुआ है। इसमें सर्वाधिक विस्तृत संपूर्ण सर्वेक्षण फादर कामिल बुल्के (रामकथा) का है। रामचरितमानस और आधुनिक भारतीय भाषाओं में रचित रामचरितों का तुलनात्मक अध्ययन कई विद्वानों ने किया है। अभी तक गुजराती, मराठी, बँगला, तेलुगु एवं तमिल आदि भाषाओं के प्रमुख रामचरित काव्यों और उनमें उपलब्ध रामकथा का तुलसी के मानस के साथ तुलनात्मक अध्ययन हो चुका है। परंतु बलरामदास की दांडी रामायण और मानस की रामकथा का तुलनात्मक अध्ययन कम ही हुआ है। प्रसिद्ध समालोचक एवं अनुवादक डॉ. शंकरलाल पुरोहित ने बलरामदास के राम-संबंधी दृष्टिकोण के मूल में जगन्नाथ और तुलसी के राम-संबंधी दर्शन के मूल में ब्रह्म की बात को ध्यान में रखकर यह पुस्तक लिखी है। रामकथा जहाँ भी, जिस रूप में भी कही गई है, उसके मूल में भक्तिधारा रही है। तुलसी और बलराम की रामकथा-धारा में अवगाहन कर हम इसी निष्कर्ष पर पहँुचते हैं और यह भक्तिधारा मानव मंगल तथा जनकल्याण के लिए एक विराट् फलक पर उत्कीर्ण हुई है।
Jara Yaad Unhen Bhi Kar Lo
- Author Name:
Chiranjeev Sinha
- Book Type:

- Description:
साधारणतया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का कालखंड 1857 से 1947 तक माना जाता है, लेकिन विदेशी शासन का सबल प्रतिरोध इससे 332 वर्ष पहले सन् 1525 में ही प्रारंभ हो गया था, जब कर्नाटक के उलल्लाल नगर की रानी अब्बका चौटा, जो अग्निबाण चलानेवाली भारतवर्ष की अंतिम योद्धा थी, ने बढ़ते पुर्तगाली आधिपत्य को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इस संग्रह में 1525 से 1947 अर्थात् लगभग सवा चार सौ वर्षों तक अनवरत प्रवहमान रहे विश्व के सर्वाधिक लंबे समय तक चले स्वतंत्रता संग्राम का वर्णन किया गया है। सबसे कम आयु में माँ भारती के लिए बलिदान होनेवाले ओडिशा के 12 वर्षीय बाजीराव राठउत के अमर बलिदान को पढ़कर भला कौन किशोर और युवा रोमांचित नहीं होगा! दुर्गा भाभी तमाम बंदिशों को धता बताते हुए किस चतुराई से भगत सिंह को अंग्रेजों की नाक के नीचे से लाहौर से कलकत्ता निकाल ले गईं, यह आज भी मिशन शक्ति की प्रेरणा है। तात्या टोपे की बिटिया मैना देवी ने जनरल आउट्रम के सामने झुकने की जगह जिंदा आग में जलना स्वीकार किया और अजीजन बाई ने यह दिखाया कि समाज का हर तबका चाहे वह तवायफ ही क्यों न हो, देश की आजादी के लिए मर-मिटने को तैयार रहता है। भारतवर्ष के ऐसे ही 75 वीरों और वीरांगनाओं का दाँतों तले उँगली दबाने सदृश अनछुआ वर्णन जो इन अनजाने क्रांतिवीरों के प्रति स्वाभाविक श्रद्धा और सम्मान सृजित करेगा ।
Chandrashekhar Azad Viveksheel Krantikari
- Author Name:
Rajwanti Mann +1
- Book Type:

- Description:
‘चन्द्रशेखर आज़ाद : विवेकशील क्रान्तिकारी’ प्रत्येक भारतीय के लिए एक अनिवार्य पाठ्य-पुस्तक की तरह है। चन्द्रशेखर आज़ाद ने भारत के स्वाधीनता संग्राम में महानायक की भूमिका निभाई। सच्चे अर्थों में उनका तन-मन-धन भारतमाता की सेवा में समर्पित रहा। वे आज़ाद जिए और अन्त तक पुलिस के हाथ न आए। आज़ाद ने अपने साहसी व्यक्तित्व से आज़ादी के देशव्यापी अभियान को क्रान्ति की अद्भुत गरिमा प्रदान की। उनके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर असंख्य युवाओं ने क्रान्ति के मार्ग पर क़दम बढ़ाए। सरदार भगत सिंह के साथ तो आज़ाद का विशेष लगाव था। इस पुस्तक के अनुसार, ‘भगत सिंह को आज़ाद केवल पार्टी के एक सदस्य के नाते ही नहीं देखते थे, बल्कि उन्हें अपने भाई की तरह, अपने परिवार के व्यक्ति की तरह मानते और अत्यधिक स्नेह करते थे।’ सत्य तो यह है कि आज़ाद को प्रत्येक क्रान्तिकारी में अपना ही रूप दिखाई देता था। प्रस्तुत पुस्तक अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद के जीवन-वृत्तान्त के साथ उनके युग की महान गाथा रेखांकित करती है। समकालीन सन्दर्भों में यह पुस्तक अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हो उठती है।
Chakravyuh
- Author Name:
Jagdish Prasad Singh
- Book Type:

- Description:
“महाराज, जब मैं सुदेश की प्रजा को मिट्टी और फूस के मकानों में रहते देखती हूँ तो मुझे यह संगमरमर का महल काट खाने को दौड़ता है; जब मैं उन्हें सूखी रोटियाँ खाते देखती हूँ तो सोलह प्रकार के व्यंजन मुझे विषतुल्य लगते हैं। मैं भगवान शंकर से हमेशा यही प्राथना करती हूँ कि वह हमारी प्रजा को हर तरह से समृद्धि दें। महाराज, प्रजा की चिन्ता अक्सर रातों को मेरी नींद चुरा लेती है। राजधानी देवल के उत्तर देवदार वृक्षों के जंगल के बीच मैंने इसी उद्देश्य से एक तंत्रगृह बनवाया है कि मैं गुणियों और सिद्धों से उचित परामर्श कर सुदेश की जनता के कल्याण के लिए उचित उपाय ढूँढ़ सके। मैं जानती हूँ कि मेरे दुश्मन मेरे विरुद्ध गन्दे प्रचार करते रहते हैं। वे मुझे, एक साधारण को जो न बहुत लम्बी है और न बहुत नाटी, न बहुत मोटी है और न पतली, न बहुत गोरी है और न बहुत काली, अपने अमर्ष का शिकार बनाने पर तुले हैं। लेकिन मैं अपने सुख-दुख की चिन्ता कभी नहीं करती, और न इस बात की परवाह करती हूँ कि मेरे दुश्मन मेरे बारे में क्या सोचते हैं और कहते हैं। मैं या तो अपने अन्तःकरण की आवाज सुनती हूँ या सुदेश की साधारण जनता की, क्योंकि मैं जानती हूँ कि लोक-मंगल से बढ़कर अन्य कोई सुकर्म नहीं है।” —इसी पुस्तक से
The Life and Death of Sambhaji
- Author Name:
Medha Deshmukh Bhaskaran
- Book Type:

- Description:
It begins to dawn on nine-year-old Sambhaji that his father has fled from Mughal emperor Aurangzeb and left him behind. He now has to find his way home with the help of strangers... Under the shadow of a renowned father, Sambhaji is thrown into the Maratha-Mughal conflict from a young age. His mistakes cost him dearly, and when his father suddenly dies and he becomes the chhatrapati, it's like inheriting a crown of thorns. Over the next nine years, he fights a constant battle-internally, as palace intrigues threaten his life, and externally, as Aurangzeb advances into the Deccan with his army. Even Shivaji had never faced such outright Mughal aggression. Can he protect the Maratha nation and Swaraj, his father's dream? Will he prove himself a worthy son in life and death? Though history has often been unkind to Sambhaji, it cannot deny that he inspired a generation of Maratha warriors who ultimately ended Aurangzeb's jihad.
Once Upon a Curfew
- Author Name:
Srishti Chaudhary
- Book Type:

- Description:
It is 1974. Indu has inherited a flat from her grandmother and wants to turn it into a library for women. Her parents think this will keep her suitably occupied until she marries her fiancé, Rajat, who's away studying in London. But then she meets Rana, a young lawyer with sparkling wit and a heart of gold. He helps set up the library, and their days light up with playful banter and the many Rajesh Khanna movies they watch together. When the Emergency is declared, Indu's life turns upside down. Rana finds himself in trouble, while Rajat decides it's time to visit India and settle down. As the Emergency pervades their lives, Indu must decide not only who but what kind of life she will choose.
Sambhaji Maharaj (Hindi Translation of Life and Death of Sambhaji)
- Author Name:
Medha Deshmukh Bhaskaran
- Book Type:

- Description:
संभाजी महाराज की नजर महादजी की ओर जाती है। यह सही बातें कहने और करने का समय है। अभी वे जो करेंगे, वह उनके देश की नियति बदल देगा। वे मराठी में कहते हैं, ''महादजी, आबा साहिब ने हर सैनिक के जीवन का सम्मान किया। वे चाहते थे कि हम बेवजह शहादत से बचें और जीवित रहें, ताकि हम स्वराज के लिए, मराठा राष्ट्र के लिए एक और लड़ाई लड़ सकें, लेकिन उन्होंने कभी भी मराठा राष्ट्र के बदले में जीवन को गले नहीं लगाया होता। संभाजी महाराज फर्श पर एक ढेर की तरह गिर जाते हैं। वे जानते हैं कि कुछ ही दिनों में उनकी आँखें निकाल ली जाएँगी। लेकिन औरंगजेब बस इतना ही कर सकता है। संभाजी महाराज मराठों के दिलों में एक आग जला जाएँगे और वे दावानल में बदल जाएँगे, जो औरंगजेब के सपनों को जलाकर राख कर देंगे। युद्ध चलता रहेगा लेकिन वह कभी दक्कन नहीं जीत पाएगा। —इसी पुस्तक से छत्रपति शिवाजी महाराज के उतने ही प्रतापी पुत्र संभाजी महाराज के शौर्य और पराक्रम की यशोगाथा बताती अनुपम कृति। आक्रांताओं के दाँत खट्टे कर मराठा स्वाभिमान को जाग्रत करने में संभाजी महाराज के योगदान को रेखांकित करनेवाली कृति। हर भारतीय के राष्ट्रभाव को जाग्रत करनेवाली पठनीय कृति।
Sultan Razia : Raziyyat-Ud-Duniya Va-Ud-Din
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

- Description:
रज़िया ने चन्द्रप्रभा से आखिर में बस यही कहा, “न जाने समय और तारीख हमें कैसे मूल्यांकित करेगी क्रूर, ख़ुदगर्ज़ अमीरों या दकियानूसी उलेमा के नज़रिए से...या आम आदमी की हिफाज़त, ख़ुशी और ख़ुशहाली के लिए काम करने वाली सुलतान के रूप में...” अभी वह इतना कह ही पाई थी कि एक ज़बरदस्त वार तलवार का हुआ और ख़ून का ऊँचा फव्वारा फूट गया...देखते ही देखते रज़िया का सर धड़ से अलग हो गया...जैसे ही चन्द्रप्रभा के मुँह से हाय राम निकला हिन्दू भीड़ एकदम से सकते में आ गई और जब उन्हें ज्ञात हुआ कि मरने वाली रज़िया सुल्तान थी तब वे अफ़सोस में डूब गए...मगर अफ़सोस के अलावा अब कर भी क्या सकते थे? राजसत्ता शायद किसी की भी सगी नहीं होती और न जाने क्यों जाने-अनजाने ही कैसे-कैसे लोगों की शत्रुता आमंत्रित कर लेती है?
Vaijayantipura Kadamba Mayooravarmana Maha Charite
- Author Name:
Santoshkumar Mehandale
- Book Type:

- Description:
DESCRIPTION AWAITED
Vaijayantipura Kadamba Mayooravarmana Maha Charite
Santoshkumar Mehandale
15% off₹ 395
₹ 335.75
Available
Shukmaya Hangma
- Author Name:
Shobha Limboo
- Book Type:

- Description:
‘शुकमाया हाङमा’ लिम्बू आदिवासी समुदाय की एक सशक्त, स्वाभिमानी स्त्री की सच्ची कहानी पर आधारित उपन्यास है। शुकमाया के जीवन का आरम्भ नैसर्गिक सुषमा से परिपूर्ण और पारम्परिक जीवनशैली की प्रधानता वाले परिवेश में होता है। लेकिन विवाह के बाद वह ख़ुद को न केवल नई जगह और नए परिवेश में पाती है, बल्कि उसका जीवन भी नई चुनौतियों से घिर जाता है। बर्मा युद्ध का छिड़ना शुकमाया के लिए एक प्रचंड आघात साबित होता है जिसमें उसे अपने पति, पुत्र और श्वसुर को खो देना पड़ता है। वस्तुत: बर्मा युद्ध को पृष्ठभूमि बनाकर रची गई यह कृति उस युद्ध के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पीड़ा और क्षत-विक्षत मन की कहानी को भी पूरी मार्मिकता से सामने लाती है। विपरीत-से-विपरीत परिस्थितियों में शुकमाया जिस दृढ़ता से खड़ी रहती है और जीवन को सँभालती चलती है, वह अपनी परवर्ती पीढ़ी के लिए प्रेरक और स्मरणीय बन जाती है। जिस आदिवासी समुदाय और जिस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अंकन इस उपन्यास में किया गया है वह हिन्दी पाठकों के लिए अपेक्षाकृत कम जाना-सुना है। इस तरह देखें तो यह उपन्यास हिन्दी साहित्य में एक नया अध्याय जोड़ता है।
Chhaava Sambhaji Maharaj Son of Chhatrapati Shivaji Maharaj Saga of Bravery An Invincible King of India Great Warrior Chhava
- Author Name:
Medha Deshmukh Bhaskaran
- Book Type:

- Description:
संभाजी महाराज की नजर महादजी की ओर जाती है। यह सही बातें कहने और करने का समय है। अभी वे जो करेंगे, वह उनके देश की नियति बदल देगा। वे मराठी में कहते हैं, ""महादजी, आबा साहिब ने हर सैनिक के जीवन का सम्मान किया। वे चाहते थे कि हम बेवजह शहादत से बचें और जीवित रहें, ताकि हम स्वराज के लिए, मराठा राष्ट्र के लिए एक और लड़ाई लड़ सकें, लेकिन उन्होंने कभी भी मराठा राष्ट्र के बदले में जीवन को गले नहीं लगाया होता। संभाजी महाराज फर्श पर एक ढेर की तरह गिर जाते हैं। वे जानते हैं कि कुछ ही दिनों में उनकी आँखें निकाल ली जाएँगी। लेकिन औरंगजेब बस इतना ही कर सकता है। संभाजी महाराज मराठों के दिलों में एक आग जला जाएँगे और वे दावानल में बदल जाएँगे, जो औरंगजेब के सपनों को जलाकर राख कर देंगे। युद्ध चलता रहेगा लेकिन वह कभी दक्कन नहीं जीत पाएगा। - इसी पुस्तक से छत्रपति शिवाजी महाराज के उतने ही प्रतापी पुत्र संभाजी महाराज के शौर्य और पराक्रम की यशोगाथा बताती अनुपम कृति। आक्रांताओं के दाँत खट्टे कर मराठा स्वाभिमान को जाग्रत् करने में संभाजी महाराज के योगदान को रेखांकित करनेवाली कृति। हर भारतीय के राष्ट्रभाव को जाग्रत् करनेवाली पठनीय कृति ।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
4 out of 5
Book