Dr. Lohia Ka Samajwad
Author:
Ramgopal YadavPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 480
₹
600
Unavailable
भारतीय समाजवाद के आकाश में डॉ. राममनोहर लोहिया का उदय एक ऐतिहासिक घटना थी। उनका सम्पूर्ण जीवन सदियों से उपेक्षित रहे लोगों के प्रति समर्पित था—फिर चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या वर्ग का हो। यही कारण है कि समाजवाद के पुरोधा के रूप में उनका नाम हमेशा अग्रणी रहा है।</p>
<p>समाजवादी चिन्तक प्रो. रामगोपाल यादव द्वारा प्रणीत यह पुस्तक डॉ. लोहिया के अक्षय व्यक्तित्व एवं कृतित्व का बहुआयामी मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। डॉ. लोहिया की वैश्विक दृष्टि की व्यापकता का संज्ञान कराती एवं सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में उन्हें प्रतिष्ठित करती हुई यह कृति एक नया चिन्तन प्रस्तुत करती है। डॉ. लोहिया का जीवन-संघर्ष निरन्तर सामाजिक या उत्थानवादी चेतना के द्वन्द्व को रूपायित करता है। आर्थिक ग़ैर-बराबरी दूर करने और समतामूलक समाज बनाने में उनका चिन्तन मार्क्सवादियों से भिन्न था।</p>
<p>भारतीय समाजवाद के प्रवर्तक डॉ. लोहिया की 105वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में प्रो. यादव द्वारा रचित इस किताब की उपादेयता समाजवाद के विकास की दिशा में एक अमूल्य योगदान है। पुस्तक की उपादेयता इस अर्थ में भी बढ़ जाती है कि यह लोहिया जी के व्यक्तित्व और उनकी निज परिमार्जित की हुई विचारधारा और उनके योगदान सब पर समुचित प्रकाश डालती है।
ISBN: 9788126728770
Pages: 272
Avg Reading Time: 9 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: FlyWings Classics लेकर आये हैं वर्ल्ड, क्लासिक फंतासी चिल्ड्रेन सीरीज में 'Five Children and IT by E. Nesbit (हिंदी अनुवाद- मोहम्मद अज़ीम) - - - सिरिल, रॉबर्ट, एन्थिया, जेन और हिलेरी अपने माता-पिता के साथ लंदन शहर से दूर गाँव के शांत वातावरण में बने घर में रहने के लिए आते हैं। फिर उन्हें घर के पीछे रेत के पुराने बड़े से टीले के पार खेल-खेल में मिलता है 'सैमिएड' नाम का एक विचित्र रेत-परी, जो प्रागैतिहासिक काल से लंबी नींद के बाद अब जाग उठा है... जिसके पास हैं अद्भुत जादुई शक्तियाँ, जिससे वो उनकी कोई भी इच्छा पूरी कर सकता है...उन जादुई इच्छाओं से उन बच्चों को वो सब कुछ मिलता है जो वो चाहते हैं...अतुल्य सुंदरता, असीमित धन, उड़ने की शक्ति, और भी बहुत कुछ, जिसकी अब तक उन्होंने सिर्फ कल्पनाएं ही की थीं... लेकिन साथ ही उनका नया दोस्त सैमिएड उन्हें चेतावनी भी देता है कि, "जो चाहे वो माँगो... लेकिन ज़रा संभलकर..!" क्योंकि हर जादुई इच्छा पूरी होने के साथ ही बदकिस्मती से हर बार उन्हें करना पड़ता है कई अनचाही मुसीबतों का सामना भी...कभी वो खुद अपने ही घर से बेघर कर दिए जाते हैं, कभी वो खुद को घर से कोसों दूर एक अनजान चर्च-टॉवर पर अकेला फँसा हुआ पाते हैं, कभी उनके छोटे भाई को हर कोई अगवा कर लेना चाहता है तो कभी उनका दूसरा भाई बन जाता है एक विशालकाय दानव... और अभी ये उनके अनचाहे रोमांच की बस एक शुरुआत भर है..!!
Meri Dhaka Diary
- Author Name:
Madhu Kankariya
- Book Type:

- Description: वरिष्ठ कथाकार मधु कांकरिया की 'मेरी ढाका डायरी' एक प्रबुद्ध व्यक्ति की आँख से एक देश और उसके समाज की ली गई थाह है। यह देश है पड़ोस का बांग्लादेश जिससे हम भारतीयों की हमेशा से साझेदारी रही है, कुछ इतनी गहरी कि वक़्त की करवटों की बदौलत बीच में खिंच गई नई सरहद के बावजूद, आज भी दोनों देशों के आम अवाम के दिल में बहुत कुछ एक-सा धड़कता है। यह किताब वक़्त की उन करवटों और उस ‘एक-सी धड़कन’, दोनों का जायज़ा लेती है। लेखक की ख़ासियत यह है कि बांग्लादेश में प्रवास के दौरान वह न केवल वहाँ की परिस्थितियों को हिसाब में लेती हैं बल्कि उन परिस्थितियों से प्राप्त सूत्रों से उन कारणों की शिनाख़्त भी करती चलती हैं जिनसे ‘सोनार बांग्ला’ की श्यामल भूमि का सहज हास बाधित हो रहा है। ये कारण हैं ग़रीबी की गहरी जड़ें, बहुसंख्यक आबादी के बीच साम्प्रदायिकता की बढ़ती पैठ और अल्पसंख्यकों में बढ़ता असुरक्षाबोध आदि। एक संवेदनशील लेखक के तौर पर मधु कांकरिया आज के बांग्लादेश के इन सभी पहलुओं को देखती हैं और ढाका के अभिजात इलाक़ों से लेकर ग़रीब-गुरबा की दैनिक जद्दोजहद तक को अपने दायरे में लेती हुईं वर्तमान बांग्लादेश से हमारा परिचय कराती हैं। कह सकते हैं कि यह पाठ एक देश ही नहीं, मानवीय जीवन की भी महागाथा है।
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