Mayaram Surjan, Karpoor Chandra Kulish
(0)
Author:
Satish Jaiswal, Adarsh SharmaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
200
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Available
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हमारे पुरखे योद्धा पत्रकारों का जीवन इसी जिजीविषा का दूसरा नाम है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर निश्चय किया गया कि हिंदी पत्रकारिता के ऐसे शीर्षस्थ पुरोधा संपादकों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को मोनोग्राफ के रूप में सामने लाया जाए जिन्होंने अपनी उत्कृष्ट संपादन-दृष्टि से हिंदी-पत्रकारिता के आदर्श एवं उज्ज्वल प्रतिमान गढ़े हैं। इसी श्रृंखला श्रृंखला की एक कड़ी श्री मायाराम सुरजन एवं कर्पूर चंद्र कुलिश पर लिखा गया यह ग्रंथ है। ‘नवभारत’ नागपुर से अपना पत्रकारीय जीवन प्रारंभ करने वाले श्री मायाराम सुरजन को न केवल इसे बहुसंस्करणीय लोकप्रिय अखबार बनाने का श्रेय है वरन् वे इस समूह के ‘मध्य प्रदेश क्रॉनिकल’ पत्र के भी जनक थे, जो मध्य प्रदेश का पहला अंग्रेजी अखबार था। श्रीसुरजन ने अत्यल्प साधनें के साथ ‘नई दुनिया’ इंदौर के साथ द्विपक्षीय समझौता करके इसका रायपुर संस्करण शुरू किया। दैनिक ‘राष्ट्रदूत’ से अपना पत्रकारीय जीवन प्रारंभ करनेवाले श्री कर्पूर चंद्र कुलिश ने कठोर परिश्रम एवं अनथक अध्यवसाय से ‘राजस्थान पत्रिका’ का विशाल साम्राज्य खड़ा करने का अप्रतिम कार्य किया। ‘राजस्थान पत्रिका’ के प्रकाशन में आई कठिनाइयों का सामना उन्होंने जिस साहस और दृढ़ता के साथ किया वह प्रेरणास्पद है।
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हमारे पुरखे योद्धा पत्रकारों का जीवन इसी जिजीविषा का दूसरा नाम है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर निश्चय किया गया कि हिंदी पत्रकारिता के ऐसे शीर्षस्थ पुरोधा संपादकों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को मोनोग्राफ के रूप में सामने लाया जाए जिन्होंने अपनी उत्कृष्ट संपादन-दृष्टि से हिंदी-पत्रकारिता के आदर्श एवं उज्ज्वल प्रतिमान गढ़े हैं। इसी श्रृंखला श्रृंखला की एक कड़ी श्री मायाराम सुरजन एवं कर्पूर चंद्र कुलिश पर लिखा गया यह ग्रंथ है।
‘नवभारत’ नागपुर से अपना पत्रकारीय जीवन प्रारंभ करने वाले श्री मायाराम सुरजन को न केवल इसे बहुसंस्करणीय लोकप्रिय अखबार बनाने का श्रेय है वरन् वे इस समूह के ‘मध्य प्रदेश क्रॉनिकल’ पत्र के भी जनक थे, जो मध्य प्रदेश का पहला अंग्रेजी अखबार था। श्रीसुरजन ने अत्यल्प साधनें के साथ ‘नई दुनिया’ इंदौर के साथ द्विपक्षीय समझौता करके इसका रायपुर संस्करण शुरू किया।
दैनिक ‘राष्ट्रदूत’ से अपना पत्रकारीय जीवन प्रारंभ करनेवाले श्री कर्पूर चंद्र कुलिश ने कठोर परिश्रम एवं अनथक अध्यवसाय से ‘राजस्थान पत्रिका’ का विशाल साम्राज्य खड़ा करने का अप्रतिम कार्य किया। ‘राजस्थान पत्रिका’ के प्रकाशन में आई कठिनाइयों का सामना उन्होंने जिस साहस और दृढ़ता के साथ किया वह प्रेरणास्पद है।
Book Details
-
ISBN9789350482582
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Vimal Yadav
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- Description: मुझे नहीं पता मैं क्या ढूँढ रहा हूँ? मुझे किसकी तलाश है? मैं बस चल रहा हूँ! क्यों चल रहा हूँ? मैं यह भी बिल्कुल नहीं जानता। मेरे हिस्से में बस सफ़र आया है; एक लंबा अंतहीन सफर! कुछ ख़्वाब सिर्फ़ देखने के लिए होते है। वे कभी पूरे नहीं होते।
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