Mayaram Surjan, Karpoor Chandra Kulish

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हमारे पुरखे योद्धा पत्रकारों का जीवन इसी जिजीविषा का दूसरा नाम है। इसी उद‍्देश्‍य को ध्यान में रखकर निश्‍चय किया गया कि हिंदी पत्रकारिता के ऐसे शीर्षस्थ पुरोधा संपादकों के व्यक्‍तित्व एवं कृतित्व को मोनोग्राफ के रूप में सामने लाया जाए जिन्होंने अपनी उत्कृष्‍ट संपादन-दृष्‍टि से हिंदी-पत्रकारिता के आदर्श एवं उज्ज्वल प्रतिमान गढ़े हैं। इसी श्रृंखला श्रृंखला की एक कड़ी श्री मायाराम सुरजन एवं कर्पूर चंद्र कुलिश पर लिखा गया यह ग्रंथ है। ‘नवभारत’ नागपुर से अपना पत्रकारीय जीवन प्रारंभ करने वाले श्री मायाराम सुरजन को न केवल इसे बहुसंस्करणीय लोकप्रिय अखबार बनाने का श्रेय है वरन् वे इस समूह के ‘मध्य प्रदेश क्रॉनिकल’ पत्र के भी जनक थे, जो मध्य प्रदेश का पहला अंग्रेजी अखबार था। श्रीसुरजन ने अत्यल्प साधनें के साथ ‘नई दुनिया’ इंदौर के साथ द्विपक्षीय समझौता करके इसका रायपुर संस्करण शुरू किया। दैनिक ‘राष्‍ट्रदूत’ से अपना पत्रकारीय जीवन प्रारंभ करनेवाले श्री कर्पूर चंद्र कुलिश ने कठोर परिश्रम एवं अनथक अध्यवसाय से ‘राजस्थान पत्रिका’ का विशाल साम्राज्य खड़ा करने का अप्रतिम कार्य किया। ‘राजस्थान पत्रिका’ के प्रकाशन में आई कठिनाइयों का सामना उन्होंने जिस साहस और दृढ़ता के साथ किया वह प्रेरणास्पद है।

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ISBN
9789350482582
Pages
144
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

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About the Book

हमारे पुरखे योद्धा पत्रकारों का जीवन इसी जिजीविषा का दूसरा नाम है। इसी उद‍्देश्‍य को ध्यान में रखकर निश्‍चय किया गया कि हिंदी पत्रकारिता के ऐसे शीर्षस्थ पुरोधा संपादकों के व्यक्‍तित्व एवं कृतित्व को मोनोग्राफ के रूप में सामने लाया जाए जिन्होंने अपनी उत्कृष्‍ट संपादन-दृष्‍टि से हिंदी-पत्रकारिता के आदर्श एवं उज्ज्वल प्रतिमान गढ़े हैं। इसी श्रृंखला श्रृंखला की एक कड़ी श्री मायाराम सुरजन एवं कर्पूर चंद्र कुलिश पर लिखा गया यह ग्रंथ है।
‘नवभारत’ नागपुर से अपना पत्रकारीय जीवन प्रारंभ करने वाले श्री मायाराम सुरजन को न केवल इसे बहुसंस्करणीय लोकप्रिय अखबार बनाने का श्रेय है वरन् वे इस समूह के ‘मध्य प्रदेश क्रॉनिकल’ पत्र के भी जनक थे, जो मध्य प्रदेश का पहला अंग्रेजी अखबार था। श्रीसुरजन ने अत्यल्प साधनें के साथ ‘नई दुनिया’ इंदौर के साथ द्विपक्षीय समझौता करके इसका रायपुर संस्करण शुरू किया।
दैनिक ‘राष्‍ट्रदूत’ से अपना पत्रकारीय जीवन प्रारंभ करनेवाले श्री कर्पूर चंद्र कुलिश ने कठोर परिश्रम एवं अनथक अध्यवसाय से ‘राजस्थान पत्रिका’ का विशाल साम्राज्य खड़ा करने का अप्रतिम कार्य किया। ‘राजस्थान पत्रिका’ के प्रकाशन में आई कठिनाइयों का सामना उन्होंने जिस साहस और दृढ़ता के साथ किया वह प्रेरणास्पद है।

Book Details

  • ISBN
    9789350482582
  • Pages
    144
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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