Andamanatil Krantikarak
(0)
Author:
Dr. Rupesh PatkarPublisher:
Manovikas Prakashan LLPLanguage:
MarathiCategory:
General-non-fiction₹
225
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Available
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अंदमान म्हटले की तिथला सेल्युलर जेल आणि तिथे काळ्या पाण्याची शिक्षा भोगायला पाठवलेले क्रांतिकारक आठवतात. अंदमान हे भारतीय स्वातंत्र्यसैनिकांचे क्रांतितीर्थ ! भगतसिंहांचे सहकारी विजयकुमार सिन्हा अंदमानला 'भारताचे बॅस्टील' म्हणतात. बॅस्टील हा फ्रेंच राज्यक्रांतीचे प्रतीक बनलेला तुरुंग. बॅस्टीलच्या तुरुंगात डांबण्यात आलेल्या फ्रेंच क्रांतिकारकांनी सरंजामशाहीची कबर खणत स्वातंत्र्य, समता आणि बंधुभाव ही मूल्ये उद्घोषित केली. फ्रान्ससाठी जसा बॅस्टीलचा तुरुंग तसा भारतासाठी अंदमानचा तुरुंग ! अंदमानच्या या तुरुंगात शेकडो क्रांतिकारकांना डांबण्यात आले होते. पण या तुरुंगातदेखील हे क्रांतिकारक लढत होते, जसे फ्रेंच क्रांतिकारक बॅस्टीलमध्ये लढत होते. फ्रेंच क्रांतिकारकांनी बॅस्टीलचा तुरुंग फोडला तर अंदमानात डांबण्यात आलेल्या क्रांतिकारकांनी चिवट अन्नसत्याग्रह करून ब्रिटिश साम्राज्यशाहीला वाकायला भाग पाडले. त्यासाठी महावीर, मोहित आणि मोहन यांना बलिदान करावे लागले. अंदमानच्या तुरुंगातदेखील जराही न वाकता देदीप्यमान लढा देणाऱ्या क्रांतिकारकांची ही कथा म्हणजे विजयकुमार सिन्हा यांनी लिहिलेले, 'In Andamans, the Indian Bastille' हे पुस्तक. त्या पुस्तकातील गोष्ट मराठी वाचकांना सांगण्याचा हा प्रयत्न.
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अंदमान म्हटले की तिथला सेल्युलर जेल आणि तिथे काळ्या पाण्याची शिक्षा भोगायला पाठवलेले क्रांतिकारक आठवतात. अंदमान हे भारतीय स्वातंत्र्यसैनिकांचे क्रांतितीर्थ ! भगतसिंहांचे सहकारी विजयकुमार सिन्हा अंदमानला 'भारताचे बॅस्टील' म्हणतात. बॅस्टील हा फ्रेंच राज्यक्रांतीचे प्रतीक बनलेला तुरुंग. बॅस्टीलच्या तुरुंगात डांबण्यात आलेल्या फ्रेंच क्रांतिकारकांनी सरंजामशाहीची कबर खणत स्वातंत्र्य, समता आणि बंधुभाव ही मूल्ये उद्घोषित केली. फ्रान्ससाठी जसा बॅस्टीलचा तुरुंग तसा भारतासाठी अंदमानचा तुरुंग !
अंदमानच्या या तुरुंगात शेकडो क्रांतिकारकांना डांबण्यात आले होते. पण या तुरुंगातदेखील हे क्रांतिकारक लढत होते, जसे फ्रेंच क्रांतिकारक बॅस्टीलमध्ये लढत होते. फ्रेंच क्रांतिकारकांनी बॅस्टीलचा तुरुंग फोडला तर अंदमानात डांबण्यात आलेल्या क्रांतिकारकांनी चिवट अन्नसत्याग्रह करून ब्रिटिश साम्राज्यशाहीला वाकायला भाग पाडले. त्यासाठी महावीर, मोहित आणि मोहन यांना बलिदान करावे लागले. अंदमानच्या तुरुंगातदेखील जराही न वाकता देदीप्यमान लढा देणाऱ्या क्रांतिकारकांची ही कथा म्हणजे विजयकुमार सिन्हा यांनी लिहिलेले, 'In Andamans, the Indian Bastille' हे पुस्तक. त्या पुस्तकातील गोष्ट मराठी वाचकांना सांगण्याचा हा प्रयत्न.
Book Details
-
ISBN9789363486770
-
Pages164
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: वीरभद्रासन आणि हनुमानासनापासून मत्स्येंद्रासन, कूर्मासन आणि अनंतासनापर्यंत अनेक योगासनांची लोकप्रिय नावे भारतीय पुराणकथांमधील पात्रे आणि श्रेष्ठ व्यक्तींवर आधारित आहेत. ही पौराणिक पात्रे कोण होती, त्यांच्या कथा काय आहेत आणि योगासनांशी त्यांचा काय संबंध आहे? देवदत्त पट्टनाईक यांचे अलीकडील पुस्तक ‘योग पुराणकथा' (सहलेखक - आंतरराष्ट्रीय योग साधक मॅथ्यू रॉली) हे पुस्तक हिंदू, बौद्ध आणि जैन धर्मातील पूर्वापार चालत आलेल्या लोककथा आपल्याला पुन्हा सांगते. जगाला सुपरिचित असलेल्या योगासनांच्या मागे या कथा आहेत. 64 महत्त्वाच्या आसनांमागील कथांच्या हकिकती सांगताना शाश्वत सत्ये, पुनर्जन्म, मुक्ती आणि सहवेदना या संकल्पनांवर आधारित भारतीय उपखंडातील दृष्टिकोनाकडे देवदत्त आपले लक्ष वेधतात. हजारो वर्षे या संकल्पना योगाचे संवर्धन करत आहेत. या पुस्तकात आसनांमधील शरीराच्या विशिष्ट स्थितीबद्दल विचार मांडले आहेत. असे असले तरी आसने कशी करावीत याविषयी हे पुस्तक नाही. एक ज्ञानशाखा म्हणून योगाकडे बघताना त्याचे मानसिक, आध्यात्मिक दृष्टिकोन आणि योगदान, तसेच त्यामागील तत्त्वज्ञान, परंपरा, संस्कृती समजावून घेणं आवश्यक असते. तीन हजाराहून अधिक वर्ष प्रभाव असलेल्या या कथांनी जागतिक दृष्टिकोन आकारास आणला. अशा सर्वांची ओळख हे पुस्तक करून देते. Yog Purankatha | Devdutt Pattanaik, Matthew Rulli | Translated By : Madhavi Kulkarni योग पुराणकथा | देवदत्त पट्टनायक, मॅथ्यू रॉली | अनुवाद : माधवी कुलकर्णी
Naksaliyon Ke Beech Mere Beete Dinon Ki Romanchak Gatha
- Author Name:
Alpa Shah
- Book Type:

- Description: 2010 में जब भारत सरकार देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी ला रही थी, तो उस समय अल्पा शाह गुरिल्ला प्लाटून केसाथ उन्हीं इलाकों की 250 किलोमीटर लंबे सात रातों के सफर पर निकलीं। एक मानव विज्ञानी केरूप में वह समझना चाहती थीं कि एक नए भारत के उदय की पृष्ठभूम में, क्यों देश के गरीबों ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र से मुँह मोड़कर क्रांतिकारी विचारधारा के साथ एकजुटता दिखाई? गहरे हरे रंग की छापामारा वर्दी पहने, पुरुष के वेश में अल्पा प्लाटून में एकमात्र महिला और एकमात्र ऐसी इनसान थीं जिसके पास बंदूक नहीं थी। कष्टों से भरी उनकी इस यात्रा ने यह खुलासा किया कि क्यों विभिन्न पृष्ठभूमियों केलोग, दुनिया को बदलने के लिए हथियार उठाकर एक साथ इकट्ठा हो गए थे; और साथ ही किन वजहों से फिर उनमें बिखराव हुआ? अल्पा शाह सालों के शोध के साथ ही नक्सलियों के गढ़ में आदिवासी समुदायों के साथ, उनके रोजमर्रा के जीवन में इतना घुलमिल गई थीं कि उनकी पुस्तक ‘नक्सलियों के बीच मेरे बीते दिनों की रोमांचक गाथा’ में वह गइराई और घनिष्ठता साफ नजर आती है और पुस्तक एक थ्रिलर की तरह हमारी आँखों के सामने से गुजरती है। इसी गहन अध्ययन और शोध से पुस्तक में आदिवासी जीवन और उसका संघर्ष जीवंत हो उठता है। यह कृति समकालीन भारत के बीचोबीच आर्थिक वृद्धि, बढ़ती असमानता, विस्थापन और संघर्ष का प्रतिबिंम्ब प्रस्तुत करती है।
Yeh Ram Kaun Hai?
- Author Name:
Neerja Madhav
- Book Type:

- Description: एक तरफ एक विशाल भारतीय जन-समुदाय अयोध्या, काशी और मथुरा के मंदिरों को लेकर भावुक है, दूसरी तरफ सत्ताधारी वोट बटोरने के चक्कर में इन मंदिरों पर हुए बर्बर आक्रमण और ऐतिहासिक सत्य को सत्य कहने में भी हिचकिचा रहे हैं तथा अल्पसंख्यक हितों की रक्षा के नाम पर एक चोट को सहला-सहला कर कैंसर में बदल देना चाहते हैं। पड़ोसी देशों में पुनरुद्धार या विकास के नाम पर धड़ाधड़ राम, कृष्ण एवं शिव मंदिरों को ढहाया जा रहा है। शीतला माता मंदिर या ढाकेश्वरी माता के मंदिरों का स्थानांतरण किया गया है। ऐसा नहीं कि ये हमले आज ही हो रहें हैं। दरअसल इन हमलों का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। ईश्वर, अल्लाह और गॉड को एक ही परम सत्ता के भिन्न-भिन्न नाम माननेवाला हिंदू अपनी उदारता और विश्वास की व्यापकता के कारण बहुदेववादी भी है, मूर्तिपूजक भी है और साथ ही परम सत्ता की मनोरम अभिव्यक्ति प्रकृति को भी उसी का एक रूप मान पूजता है। यह हिंदू आचार-विचार की व्यापकता है। कण-कण में व्याप्त एक अव्यक्त सत्ता।... मंत्रों और ऋचाओं की ऊर्जा से संपूरित मंदिर और मंदिर क्षेत्र ध्वस्तीकरण अथवा आक्रमण की बारंबारता के बिंदु बने।’’ —इसी संग्रह से ललित निबंधों के माध्यम से जन-जन के हृदय में बसे राम को देखने, जानने और अनुभव करने का एक सर्वथा अनूठा प्रयोग है यह पुस्तक, जो हर आयु वर्ग के पाठकों को समान रूप से रुचिकर लगेगी।
The Parsi Contribution to Indian Literature
- Author Name:
Coomi S Vevaina
- Book Type:

- Description: Compilation of papers presented at symposium on Parsin Contribution to Indian Literature organised by Sahitya Akademi in 2015 at Mumbai.
Footprints of Jagadev Ramji
- Author Name:
Vanvasi Kalyan
- Book Type:

- Description: The observations of Jagdev Ram ji encircle the Hindu philosophy along with academic research and study of contemporary social currents. He emphatically proclaimed that the soul of ‘Janjati’ way of life is intrinsically connected to the Hindu way of life. He dedicated his life for the emancipation of the janjati society and his teachings serve as guidance towards adoption of ethical practices to lead better lives.
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