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Cinema Ka Ishq

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पितरस बुख़ारी का पूरा नाम पीर सैयद अहमद शाह बुख़ारी है। आपका ताल्लुक़ पाकिस्तान के पेशावर से हैं। शुरूआती तालीम पाकिस्तान ही में पायी और एम.ए. करने के बाद इंग्लिस्तान की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में डिग्री हासिल की। लाहौर में बतौर उस्ताद आपकी ख़िदमात रहीं और कई बरस तक ऑल इंडिया रेडियो में अलग-अलग ओहदों पर रहे। 1952 में यूनाइटेड नेशन्स में नुमाइन्दे चुने गए, जहाँ 1954 तक रहे। पितरस के लिखे मज़ामीन ज़माने भर में मशहूर हैं मगर इस किताब में मुन्तख़ब 11 मज़ामीन का एक अलग मक़ाम है। आपका लिखा हुआ मिज़ाह उर्दू अदब में बेशक़ीमती सरमाया है। यही वजह है कि आपके इन्तेक़ाल के अगले ही रोज़ न्यूयॉर्क टाईम्स (6 दिसम्बर 1958) ने अपने इदारिया में उनको याद करते हुए 'सिटिज़न सिटिज़न ऑफ वर्ल्ड' कहा। 2013 में पाकिस्तानी हुक़ूमत के ज़रिए आपको मुल्क का दूसरा सबसे बड़ा सिटिज़न अवॉर्ड 'हिलाल-ए-इम्तियाज़' भी दिया गया। शुऐब शाहिद का तआल्लुक़ बुनियादी तौर पर उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर से है। इस वक़्त आपकी शिनाख़्त मुल्क के एक मशहूर बुक कवर डिज़ाइनर के तौर पर होती है। दुनिया की कई मशहूर किताबों पर बतौर आर्टिस्ट काम करने के सबब आपकी अदबी दुनिया में एक ख़ास मक़बूलियत है। मुल्कगीर और बैनुलअक़्वामी सतह पर कई अवार्ड्स के साथ आपका नाम रहा है। आपके लिखे मज़ामीन, ख़ुतूत और बिलख़ुसूस उर्दू मिज़ाह से मुताल्लिक मज़ामीन हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बहुत से रिसालों में अक्सर शाया होते हैं और आप अवाम-ए-ख़ास-ओ-आम में अपने मुन्फ़रद अन्दाज़ के लिए काफ़ी मकबूल हैं। इन दिनों क्लासिकल उर्दू अदब को देवनागरी रस्मुल-ख़त में लाने का तारीख़ी काम अंजाम दे रहे हैं।

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पितरस बुख़ारी का पूरा नाम पीर सैयद अहमद शाह बुख़ारी है। आपका ताल्लुक़ पाकिस्तान के पेशावर से हैं। शुरूआती तालीम पाकिस्तान ही में पायी और एम.ए. करने के बाद इंग्लिस्तान की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में डिग्री हासिल की। लाहौर में बतौर उस्ताद आपकी ख़िदमात रहीं और कई बरस तक ऑल इंडिया रेडियो में अलग-अलग ओहदों पर रहे। 1952 में यूनाइटेड नेशन्स में नुमाइन्दे चुने गए, जहाँ 1954 तक रहे। पितरस के लिखे मज़ामीन ज़माने भर में मशहूर हैं मगर इस किताब में मुन्तख़ब 11 मज़ामीन का एक अलग मक़ाम है। आपका लिखा हुआ मिज़ाह उर्दू अदब में बेशक़ीमती सरमाया है। यही वजह है कि आपके इन्तेक़ाल के अगले ही रोज़ न्यूयॉर्क टाईम्स (6 दिसम्बर 1958) ने अपने इदारिया में उनको याद करते हुए 'सिटिज़न सिटिज़न ऑफ वर्ल्ड' कहा। 2013 में पाकिस्तानी हुक़ूमत के ज़रिए आपको मुल्क का दूसरा सबसे बड़ा सिटिज़न अवॉर्ड 'हिलाल-ए-इम्तियाज़' भी दिया गया। शुऐब शाहिद का तआल्लुक़ बुनियादी तौर पर उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर से है। इस वक़्त आपकी शिनाख़्त मुल्क के एक मशहूर बुक कवर डिज़ाइनर के तौर पर होती है। दुनिया की कई मशहूर किताबों पर बतौर आर्टिस्ट काम करने के सबब आपकी अदबी दुनिया में एक ख़ास मक़बूलियत है। मुल्कगीर और बैनुलअक़्वामी सतह पर कई अवार्ड्स के साथ आपका नाम रहा है। आपके लिखे मज़ामीन, ख़ुतूत और बिलख़ुसूस उर्दू मिज़ाह से मुताल्लिक मज़ामीन हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बहुत से रिसालों में अक्सर शाया होते हैं और आप अवाम-ए-ख़ास-ओ-आम में अपने मुन्फ़रद अन्दाज़ के लिए काफ़ी मकबूल हैं। इन दिनों क्लासिकल उर्दू अदब को देवनागरी रस्मुल-ख़त में लाने का तारीख़ी काम अंजाम दे रहे हैं।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Mandrake Publications
Format
Paperback
Publisher
Mandrake Publications
Weight
130 grams
ISBN-13
9789390540716
Pages
140
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.2 cm
Language
Hindi

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