Art And Crafts Of Chhattisgarh
Author:
Niranjan MahawarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 320
₹
400
Available
Chhattisgrah has many archaeological sites of great historical importance. The archaeological history of this region starts from the early Gupta period. The vast sites of Malhar in Bilaspur district, Dipadiha in Surguja, Sirpur (Shreepur) in Raipur and Barsur in Dantewada (Old Bastar district) are very rich. The punch mark coins have been found from Tarapur, Udela and Arng. Coins of Mouriyan period, Satvahan, Kushan, Gupta kings and local dynasties-Sharabhpuria, Nal, Pandu, and Kalchury have also been found at several places. Besides this the metal work was practiced and beautiful bronzes were found from Sirpur site. These bronzes were casted in the sixth or seventh century A.D. Iron working was also prevalent in this region. Agaria tribe was mining iron ore and smelting it and making iron tools and agricultural equipments. There are several brick temples too in Chhattisgarh. This book talks in depth about chhattisgarh and its arts and crafts. The author, a distinguished expert on traditional arts and crafts and working on the subject since 1960s, has documented all major and minor craft forms in this book. We hope the readers will find it extremely useful as to acquainted them with the rich tradition of region.
ISBN: 9788190540179
Pages: 104
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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G. M. Pawar
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- Description: “स्वार्थावर लाथ मारून गळ्यात झोळी अडकवून संस्थेकरता - अर्थात आमच्या लोकांकरिता - संस्थेचे जे चालक भिक्षांदेही करीत दारोदार फिरतात व त्यांना त्यात कितीही अल्प यश आले तरी ते पर्वा न करता चंदनासारखे स्वत: झिजू दुसर्यांना- आम्हांला - सुख देण्याकरिता, आमची स्थिती सुधारण्याकरिता आपला प्रयत्न चालू ठेवतात, त्या संतांची किंमत आजपर्यंत झालेल्या कोणत्याही संतापेक्षा आम्हांला यत्किं चितही कमी वाटत नाही. कित्येकांना ती जास्त वाटेल.’’ श्री. गणेश आकाजी गवई डी. सी. मिशनच्या महाराष्ट्र परिषदेत केलेले भाषण, पुणे, 1912 “इतिहास असे सांगतो की, ज्यापासून राष्ट्राचा विकास होतो, अशा सर्व प्रकारच्या चळवळींचा उगम थोड्याशा व्यक्तींच्या कार्यात सापडतो. प्रस्तुतच्या बाबतीत त्या व्यक्ती म्हणजे, ज्यांची प्रथम प्रथम हेटाळणी झाली ते डिप्रेस्ड क्लासेस मिशनचे गृहस्थ होत. त्यांच्या कार्याने प्रचंड अशा हिंदू समाजाची सदसद्विवेकबुद्धी जागृत झाली.’’ न्यायमूर्ती सर नारायणराव चंदावरकर डी. सी. मिशनची अस्पृश्यतानिवारक परिषद , मुंबई, 1918 “मराठ्यांतील कार्यशक्ती काय करू शकते, असा जर कोणी आपल्याला प्रश्न विचारला, तर अण्णासाहेब शिंद्यांच्या कार्याकडे बोट करा. मराठ्यांतील स्वार्थत्यागाचे उदाहरण दाखविण्याचा प्रसंग आला, तर आपण अण्णासाहेब शिंद्यांचे नाव घ्या. परकीय सत्तेचा विध्वंस शिवाजीमहाराजांनी केला; वर्णवर्चस्वाचा विध्वंस शाहूमहाराजांनी केला व अस्पृश्यतेच्या विध्वंसनाचे कार्य करण्याकरिता तितक्याच धडाडीने अण्णासाहेबांनी आपले आयुष्य वेचले.’’ श्री. बाबुराव जेधे मुंबई इलाखा शेतकरी परिषद, पुणे, 1928 “शिंद्यांचा जिला भरीव हातभार लागला नाही, अशी लोकसेवेची व समाजोन्नतीची चळवळ दाखवून देणे कठीण आहे. राजकारण, समाजकारण, धर्मकार्य, शिक्षणकार्य; इतकेच नव्हे, तर वाङ्मयसेवा आणि इतिहास संशोधन या सर्वांत शिंद्यांचा भाग आहे; आणि फार महत्त्वाचा भाग आहे. ज्या काळी विधवाविवाहासारखे साधे प्रश्न सुटणे दुरापास्त होते, अशा त्या घनदाट धर्मवेडाच्या काळात अस्पृश्योद्धाराची चळवळ सुरू करणे, त्यासाठी डिप्रेस्ड क्लासेस मिशन ही संस्था काढणे; इतकेच नव्हे, तर अस्पृश्यांत जाऊन त्यांच्यापैकी एक झाल्याप्रमाणे त्यांच्यात वागणे, या गोष्टींसाठी अतुल स्वमतधैर्याची; एवढेच नव्हे, तर मूलमार्गी बुद्धीची व समाजाविषयी खर्या कळकळीचीही गरज होती. इतक्या व्यापक व सूक्ष्म दृष्टीच्या कार्यकर्त्याची दृष्टी सबंध देशाइतकी विशाल विस्तृत असावी लागते. म्हणूनच श्री. शिंदे सामाजिक चळवळींप्रमाणेच अनेक राजकीय चळवळींतही भाग घेताना दिसत.’’ न्यायमूर्ती भवानीशंकर नियोगी महाराष्ट्र साहित्य संमेलन नागपूर, 1933 Maharshi Vitthal Ramaji Shinde : Jeevan Va Karya / G. M. Pawar महर्षी विठ्ठल रामजी शिंदे : जीवन व कार्य । गो. मा. पवार
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