GK QUIZ
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"सवाल करना और उनके जवाब पाने की उत्सुकता व्यक्ति में सहज ही खोजी जा सकती है। पृथ्वी कैसे बनी? महासागर कहाँ से आए? महाद्वीप कैसे बने? मनुष्य का क्रमविकास कैसे हुआ? पृथ्वी पर जंतु ज्यादा हैं या मनुष्य? मनुष्य को दहलानेवाले जलजले, सुनामी, ज्वालामुखी कैसे बनते हैं? इस प्रकार के प्रश्नों के प्रति व्यक्ति आरंभ से ही जिज्ञासु रहा है। प्रश्न करने और उनका समुचित समाधान पाने से व्यक्ति की मेधा और तर्क शक्ति को बल मिलता है। इसी ज्ञानार्जन से व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करता है। आज के युग में हर क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्द्धा है और प्रतियोगी को हर परीक्षा में नएनए प्रकार के प्रश्नों का सामना करना पड़ता है। प्रस्तुत पुस्तक भी प्रश्नोत्तरी द्वारा ज्ञानवर्द्धन की कड़ी में एक महती प्रयास है। इसके अध्ययन से पाठक लाभान्वित होकर सफलता के नए सोपान चढ़ेंगे। इसका एकएक प्रश्न उत्तर के साथ जुड़कर आपकी जानकारी में श्रीवृद्धि कर सकता है।"
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"सवाल करना और उनके जवाब पाने की उत्सुकता व्यक्ति में सहज ही खोजी जा सकती है। पृथ्वी कैसे बनी? महासागर कहाँ से आए? महाद्वीप कैसे बने? मनुष्य का क्रमविकास कैसे हुआ? पृथ्वी पर जंतु ज्यादा हैं या मनुष्य? मनुष्य को दहलानेवाले जलजले, सुनामी, ज्वालामुखी कैसे बनते हैं? इस प्रकार के प्रश्नों के प्रति व्यक्ति आरंभ से ही जिज्ञासु रहा है। प्रश्न करने और उनका समुचित समाधान पाने से व्यक्ति की मेधा और तर्क शक्ति को बल मिलता है। इसी ज्ञानार्जन से व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करता है। आज के युग में हर क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्द्धा है और प्रतियोगी को हर परीक्षा में नएनए प्रकार के प्रश्नों का सामना करना पड़ता है।
प्रस्तुत पुस्तक भी प्रश्नोत्तरी द्वारा ज्ञानवर्द्धन की कड़ी में एक महती प्रयास है। इसके अध्ययन से पाठक लाभान्वित होकर सफलता के नए सोपान चढ़ेंगे। इसका एकएक प्रश्न उत्तर के साथ जुड़कर आपकी जानकारी में श्रीवृद्धि कर सकता है।"
Book Details
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ISBN9789351865353
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Pages200
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Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: एक तरफ एक विशाल भारतीय जन-समुदाय अयोध्या, काशी और मथुरा के मंदिरों को लेकर भावुक है, दूसरी तरफ सत्ताधारी वोट बटोरने के चक्कर में इन मंदिरों पर हुए बर्बर आक्रमण और ऐतिहासिक सत्य को सत्य कहने में भी हिचकिचा रहे हैं तथा अल्पसंख्यक हितों की रक्षा के नाम पर एक चोट को सहला-सहला कर कैंसर में बदल देना चाहते हैं। पड़ोसी देशों में पुनरुद्धार या विकास के नाम पर धड़ाधड़ राम, कृष्ण एवं शिव मंदिरों को ढहाया जा रहा है। शीतला माता मंदिर या ढाकेश्वरी माता के मंदिरों का स्थानांतरण किया गया है। ऐसा नहीं कि ये हमले आज ही हो रहें हैं। दरअसल इन हमलों का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। ईश्वर, अल्लाह और गॉड को एक ही परम सत्ता के भिन्न-भिन्न नाम माननेवाला हिंदू अपनी उदारता और विश्वास की व्यापकता के कारण बहुदेववादी भी है, मूर्तिपूजक भी है और साथ ही परम सत्ता की मनोरम अभिव्यक्ति प्रकृति को भी उसी का एक रूप मान पूजता है। यह हिंदू आचार-विचार की व्यापकता है। कण-कण में व्याप्त एक अव्यक्त सत्ता।... मंत्रों और ऋचाओं की ऊर्जा से संपूरित मंदिर और मंदिर क्षेत्र ध्वस्तीकरण अथवा आक्रमण की बारंबारता के बिंदु बने।’’ —इसी संग्रह से ललित निबंधों के माध्यम से जन-जन के हृदय में बसे राम को देखने, जानने और अनुभव करने का एक सर्वथा अनूठा प्रयोग है यह पुस्तक, जो हर आयु वर्ग के पाठकों को समान रूप से रुचिकर लगेगी।
Charles Darwin
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यह पुस्तक भारतीय राजनीति और समाज को पिछले दो दशकों से मथनेवाली साम्प्रदायिकता की परिघटना को समझने और उसके मुक़ाबले की प्रेरणा और सम्यक् समझ विकसित करने के उद्देश्य से लिखी गई है। चार खंडों—वाजपेयी (अटल बिहारी), संघ सम्प्रदाय, जॉर्ज फर्नांडीज, गुराज—में विभक्त इस पुस्तक में साम्प्रदायिकता के चलते पैदा होनेवाली कट्टरता, संकीर्णता और फासीवादी प्रवृत्तियों और उन्हें अंजाम देने में भूमिका निभानेवाले नेताओं, संगठनों, शक्तियों आदि का घटनात्मक ब्यौरों सहित विवेचन किया गया है। इसमें मुख्यतः साम्प्रदायिकता के राष्ट्रीय जीवन के सामाजिक-सांस्कृतिक-शैक्षिक-अकादमिक आयामों पर पड़नेवाले दुष्प्रभावों/दुष्परिणामों की भी शिनाख़्त और आकलन किया गया है। साम्प्रदायिकता की विचारधारा भूमंडलीकरण की विचारधारा के साथ मिलकर देश की आर्थिक और राजनैतिक सम्प्रभुता पर गहरी चोट कर रही है। पुस्तक में दोनों के गठजोड़ का उद्घाटन करते हुए, उसके चलते दरपेश नवसाम्राज्यवादी ख़तरे के प्रति आगाह किया गया है।
पुस्तक की विषयवस्तु साम्प्रदायिकता और उससे होनेवाले बिगाड़ को चिन्हित करने तक सीमित नहीं है। इसमें धर्मनिरपेक्षता, उदारता, लोकतंत्र और समाजवाद की विचारधारा के पक्ष में लगातार जिरह की गई है। इस रूप में यह सरोकारधर्मी और हस्तक्षेपकारी लेखन का सशक्त उदाहरण है।
भाषा की स्पष्टता और शैली की रोचकता पुस्तक को सामान्य पाठकों के लिए पठनीय बनाती है।
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