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ವಸುಧೇಂದ್ರರ ಎರಡು ನೀಳ್ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಜೊತೆಗೆ, ಹಲವು ಸ್ವಾರಸ್ಯಕರ ಸುಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳು. ಕಥೆಗಾರ, ಬರಹಗಾರರಾದ ವಸುಧೇಂದ್ರ ಅವರ ಸುಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಸಂಕಲನ ’ ವರ್ಣಮಯ’. ಈ ಪ್ರಬಂಧ ಸಂಕಲನದಲ್ಲಿ ಬರುವ ನಂಜುಂಡಿ ಮತ್ತು ಗೌರಮ್ಮ ಎಂಬ ಬರಹಗಳಲ್ಲಿ ಲೇಖಕರು ತಮ್ಮ ಸುತ್ತಲಿನ ಸಮಾಜದ ಎಷ್ಟೋ ಮಜಲುಗಳನ್ನು ಕೆಳ, ಮಧ್ಯಮ ಹಾಗೂ ಮೇಲಿನ ವರ್ಗದ ಜನರುಗಳ ನಡುವೆ ಮುಖಾಮುಖಿಯಾಗಿಸುತ್ತಾ ಅವರ ನಡವಳಿಕೆಗಳನ್ನು ಹಾಸ್ಯ ಪ್ರಜ್ಷೆಯೊಂದರಲ್ಲಿಓದುಗರಿಗೆ ಪರಿಚಯಿಸಿದ್ದಾರೆ. ತಾಯಿ ದೇವರಲ್ಲ, ಅಮ್ಮ ಎನ್ನುವ ಸಂಭ್ರಮ, ಹಗ್ಗದ ಹಾವು, ಬರಹಗಳು ಲೇಖಕರ ಮನೆಯ ಅನುಭವ ಚಿತ್ರಣವನ್ನು ನೀಡುವಂತದ್ದಾಗಿದೆ.
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ವಸುಧೇಂದ್ರರ ಎರಡು ನೀಳ್ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಜೊತೆಗೆ, ಹಲವು ಸ್ವಾರಸ್ಯಕರ ಸುಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳು.
ಕಥೆಗಾರ, ಬರಹಗಾರರಾದ ವಸುಧೇಂದ್ರ ಅವರ ಸುಲಲಿತ ಪ್ರಬಂಧಗಳ ಸಂಕಲನ ’ ವರ್ಣಮಯ’. ಈ ಪ್ರಬಂಧ ಸಂಕಲನದಲ್ಲಿ ಬರುವ ನಂಜುಂಡಿ ಮತ್ತು ಗೌರಮ್ಮ ಎಂಬ ಬರಹಗಳಲ್ಲಿ ಲೇಖಕರು ತಮ್ಮ ಸುತ್ತಲಿನ ಸಮಾಜದ ಎಷ್ಟೋ ಮಜಲುಗಳನ್ನು ಕೆಳ, ಮಧ್ಯಮ ಹಾಗೂ ಮೇಲಿನ ವರ್ಗದ ಜನರುಗಳ ನಡುವೆ ಮುಖಾಮುಖಿಯಾಗಿಸುತ್ತಾ ಅವರ ನಡವಳಿಕೆಗಳನ್ನು ಹಾಸ್ಯ ಪ್ರಜ್ಷೆಯೊಂದರಲ್ಲಿಓದುಗರಿಗೆ ಪರಿಚಯಿಸಿದ್ದಾರೆ.
ತಾಯಿ ದೇವರಲ್ಲ, ಅಮ್ಮ ಎನ್ನುವ ಸಂಭ್ರಮ, ಹಗ್ಗದ ಹಾವು, ಬರಹಗಳು ಲೇಖಕರ ಮನೆಯ ಅನುಭವ ಚಿತ್ರಣವನ್ನು ನೀಡುವಂತದ್ದಾಗಿದೆ.
Book Details
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ISBN978819E12
-
Pages179
-
Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: s 'ज्ञानगढ़ की लड़ाई' ग्यारह कहानियों का संग्रह है। 20-25 वर्षों का लेखन—ग्यारह कहानियाँ। लिखने के सम्मोहन और कहानीकार कहलाने की कामना से कोसों दूर। लेकिन जब लिखा तो उस मेहतर की तरह लिखा जो साफ-सुथरेपन को कर्तव्य की तरह पूरा करता हो, दिनचर्या की तरह निभाता-भर नहीं हो। बलराज पांडेय आदर्शवादी, साफ-सुथरी कहानियों वाली लेखन-परंपरा के कहानीकार नहीं हैं। प्रतीकवादी कहन भी इन कहानियों की विशेषता नहीं। ये कहानियाँ प्रगतिशील परंपरा में, यथार्थवादी धारा की कहानियाँ हैं। यथार्थवादी धारा में भी, विरूपण (डिस्टार्शन) की कला के सहारे विद्रूपता का चित्रण इन कहानियों का शिल्प है। विद्रूपता के इस चित्रण में उपहास नहीं, बल्कि विडम्बना को उजागर करने वाली वह ट्रैजिक स्थितियाँ हैं, जिनमें पाखंड, भ्रष्टाचार, निकृष्टताएँ, दुरभिसंधियाँ, छल-प्रपंच, रीढ़हीनता, चाटुकारिता, पीठ-पीछे वार करने वाली निरीहता को जीने और पोषित करने वाले लोग हैं। धिक्कार, ज़ाहिर हो जा, है तू जैसा, प्रोन्नति का फेर, इंटरव्यू, तस्मै श्री गुरवे नम:, अध्यक्ष जी का वसंतोत्सव, ज्ञानगढ़ की लड़ाई आदि कहानियों को इन किरदारों के साथ पढ़ा जा सकता है। ये सभी किरदार जाने-पहचाने वास्तविक किरदार हैं। यह संग्रह शिक्षण-संस्थानों, उनके विभागों, उन विभागों में पदासीन आचार्यों की कार्य-संस्कृति, उनके बीच की अंदरूनी ख्वाहिशात, चालबाजि़यों और धूर्तताओं का रंगीन हलफनामा है। नैतिकता और मूल्यों के क्षरण-मरण का कथात्मक मर्सिया। इन कहानियों के बहाने आप देश के सभी विश्वविद्यालयों के हिन्दी-विभागों के खद्दो-खाल को पढ़ सकते हैं, देख सकते हैं।
Dekhan Mein Chhote Lage
- Author Name:
Champa Shrivastava
- Book Type:

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Description:
प्रस्तुत पुस्तक ‘देखन में छोटे लगें' 101 लघुकथाओं का संकलन है। लघुकथा हिन्दी कथा साहित्य की एक नई उपलब्धि है। यों इस विधा को नीतिकथा, प्रबोधकथा, बालकथा आदि से जोड़ा गया है, परन्तु यह हिन्दी की एक स्वायत्त विधा है। इसमें लेखिका ने अपने आँखों देखे सत्य को और भोगे हुए यथार्थ को अभिव्यक्ति दी है।
इस कृति का फलक बड़ा व्यापक है। वर्तमान समाज के प्राय: प्रत्येक पक्ष पर इसमें विचार किया गया है। लेखिका ने आज की अमानुषिकता पर अपनी मनोव्यथा व्यक्त की है, राजनीतिक विसंगतियों के प्रति आक्रोश व्यक्त किया है तो दीनों—दुर्बलों के प्रति करुणा को स्वर दिया है। प्रस्तुत कथा-संकलन पाठकों के लिए पठनीय एवं संग्रहणीय है।
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